पायलट ने साधा मोदी सरकार पर निशाना

राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने आरबीआई फंड को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा. मीडिया से बात करते हुए पायलट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से आरबीआई से निकाले गए पैसो का हिसाब मांगा. पायलट ने कहा कि जनता जानना चाहती है कि इतने पैसो का सरकार क्या करने वाली है.

अयोध्या मामला-14वां दिन: ‘औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर बनवाई मस्जिद’

राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवादित भूमि/अयोध्या विवाद मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट मं 14वें दिन की सुनवाई हुई. इस दौरान राम जन्मभूमि पुनरूद्वार समिति ने अपनी दलीलें सीजेआई के समक्ष पेश की. समिति की ओर से वकील पीएन मिश्रा ने कोर्ट में कहा कि अयोध्या में मंदिर बाबर ने नहीं बल्कि औरंगजेब ने तुड़वाया था. उसके बाद यहां मस्जिद बनवाई. मिश्रा ने अपने दावे को साबित करने के लिए समिति की ओर से कुछ प्राचीन मुस्लिम किताबें सबूत के तौर पर पेश की गयी. हालांकि एक किताब पर मुस्लिम पक्षकार ने आपत्ति जताई. राम जन्मभूमि पुनरूद्वार समिति के वकील ने कोर्ट को बताया कि पहली बार किसी ने … Read more

गुर्जर समाज ने दी गहलोत को चेतावनी

लगातार विपक्ष के निशाने पर चल रही राजस्थान की गहलोत सरकार एक बार फिर मुसीबतों में फंसती नजर आ रही है. दरअसल, गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने सोमवार को गहलोत सरकार को चेतावनी दी है कि गुर्जरों के लिए मोर बैकवर्ड क्लास के तहत पांच फीसदी आरक्षण की व्यवस्था में अगर कोई फेरबदल हुआ तो गुर्जर समाज फिर सड़कों पर उतरेगा और आंदोलन करेगा. बैठक की अध्यक्षता किरोड़ी सिंह बैंसला ने की, जो गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक हैं.

जयपुर में नए कांग्रेस के नेता के रूप में उभर रहे महेश जोशी के पुत्र रोहित

जयपुर में एक नए और कांग्रेस नेता का उदय हो रहा है. ये हैं महेश जोशी के पुत्र रोहित जोशी. महेश जोशी लोकसभा सांसद रह चुके हैं और फिलहाल विधानसभा में मुख्य सचेतक हैं. रोहित जोशी काफी पहले से कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं और युवा कांग्रेस के महासचिव हैं. हाल ही उन्होंने अपने जन्मदिन पर कांग्रेस में धमाकेदार पारी खेलने के संकेत दे दिए हैं.

सोमवार 26 अगस्त को रोहित जोशी के जन्मदिन पर जयपुर में करीब दो दर्जन अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां रोहित जोशी का स्वागत किया गया. मंदिर और मस्जिद भी इनमें शामिल थे. इन सभी कार्यक्रमों की पूर्व सूचना पहले से जारी कर दी गई थी. इस तरह इन स्वागत कार्यक्रमों के जरिए जयपुर में युवा नेता की लोकप्रियता प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया. समझा जाता है कि रोहित जोशी जयपुर के महापौर पद का चुनाव लड़ना चाहते हैं और इन एक दर्जन कार्यक्रमों को उसी सिलसिले में शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है.

बड़ी खबर: गहलोत सरकार के सामने आने वाली है एक नई समस्या

रोहित जोशी को युवा कांग्रेस महासचिव नियुक्त करने के बाद संगठन चुनाव अधिकारी बनाकर गोवा भेजा गया था. इसके बाद रोहित ने संसदीय चुनाव में जयपुर से उम्मीदवारी का दावा पेश किया था और पूरे शहर में होर्डिंग और पोस्टर लगवा दिए थे. हालांकि उन्हें टिकट नहीं मिला था. तब महेश जोशी ने कहा था कि वह कभी भी अपने पुत्र की राजनीतिक रूप से मदद नहीं करेंगे. रोहित में योग्यता होगी तो वह खुद राजनीति में अपनी जगह बना लेंगे.

इससे पहले जयपुर में पंडित नवल किशोर शर्मा ने अपने पुत्र बृजकिशोर शर्मा को राजनीति में स्थापित किया था. बृजकिशोर शर्मा 2008 में जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे और तत्कालीन गहलोत सरकार में शिक्षा मंत्री थे. उसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस का सूपड़ा साफ हुआ था, तब बृजकिशोर शर्मा भी हार गए थे. अगले 2018 के विधानसभा चुनाव में उनकी जगह हवामहल से महेश जोशी को टिकट दे दिया गया था.
बृजकिशोर शर्मा ने फिर से टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर की थी और हवामहल विधानसभा क्षेत्र में पार्टी का प्रचार करने से इनकार कर दिया था. अब उनकी जगह जयपुर में रोहित जोशी नए कांग्रेस नेता के रूप में उभर रहे हैं.

गहलोत सरकार के सामने आने वाली है एक नई समस्या

गहलोत सरकार के सामने  गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने सोमवार को गहलोत सरकार को चेतावनी दी है कि गुर्जरों के लिए मोर बैकवर्ड क्लास (एमबीसी) के तहत पांच फीसदी आरक्षण की व्यवस्था में कोई फेरबदल किया गया तो गुर्जर समाज फिर सड़कों पर उतरेगा और आंदोलन करेगा. बैठक की अध्यक्षता किरोड़ी सिंह बैंसला ने की, जो गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक हैं. बैठक में सरकार से मांग की गई है कि गुर्जर समाज की मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए. इनमें पिछले आंदोलनों के दौरान जिन लोगों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किए गए थे, उन्हें समाप्त करने की मांग भी शामिल है.

समिति के महासचिव वकील शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि हमें न्यायपालिका और सरकार में पूरा भरोसा है. हमें उम्मीद है कि गुर्जर समाज के लिए आरक्षण की जो व्यवस्था की गई है, वह समाप्त नहीं की जाएगी. अगर गुर्जरों को न्याय नहीं मिला और पांच फीसदी आरक्षण के साथ कोई छेड़छाड़ हुई तो हमें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा.

राजस्थान में पहले भी गुर्जरों के आंदोलन होते रहे हैं, जिसके तहत रेल की पटरियां रोकने का पुराना इतिहास है. पिछले फरवरी में भी गुर्जर समाज ने रेल पटरियों पर धरना दिया था. तब कांग्रेस सरकार ने गुर्जर सहित पांच जातियों के लोगों को शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में पांच फीसदी आरक्षण देने का विधेयक पारित किया था. ओबीसी कोटे के 21 फीसदी आरक्षण में भी गुर्जर आरक्षण के पात्र हैं.

बड़ी खबर: जयपुर में नए कांग्रेस के नेता के रूप में उभर रहे महेश जोशी के पुत्र रोहित

एमबीसी कोटे के तहत पांच फीसदी आरक्षण का विधेयक पारित होने के बाद राजस्थान में आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा हो गया, जो कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय सीमा से ज्यादा है. इस मुद्दे पर राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण को चुनौती दी गई है. इस याचिका पर सुनवाई चल रही है. सरकार ने अदालत से अनुरोध किया है कि सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद याचिका पर फैसला किया जाए.

शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि फरवरी में आरक्षण आंदोलन खत्म करने पर राज्य सरकार ने आश्वासन दिया था कि आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस ने जो मुकदमे दर्ज कर लिए हैं, वे वापस ले लिए जाएंगे, लेकिन सराकर ने अभी तक वह वादा पूरा नहीं किया है. हाईकोर्ट में आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई चल रही है. इस परिस्थिति में सरकार को एमबीसी कोटे में पांच फीसदी आरक्षण देने का वादा भूलना नहीं चाहिए. उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में गुर्जरों ने कांग्रेस का समर्थन किया था, लेकिन दुख की बात है समाज के वोटों से चुनाव जीतने वाले गुर्जर विधायक विधानसभा में गुर्जरों की मांगों को नहीं उठा रहे हैं. इस स्थिति में आंदोलन की परिस्थितियां बन रही हैं.

 

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राजस्थान में फिर सांप्रदायिक तनाव

फिर सांप्रदायिक तनाव क्या राजस्थान में सांप्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयास हो रहे हैं? यह शंका एक बार फिर उभरकर आई है, जब रविवार को सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी में दंगा होते-होते बचा. इस दिन विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के स्थापना दिवस पर गंगापुर सिटी में मिर्जापुर स्थित मनकेश्वर महादेव मंदिर से निकाली गई रैली के दौरान एक धार्मिक स्थल पर जुटे कुछ असामाजिक तत्वों ने पथराव कर दिया, जिससे करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए.

सवाई माधोपुर के एसपी सुधीर चौधरी ने कहा कि मनकेश्वर महादेव मंदिर से शुरू हुई रैली में करीब पांच सौ लोग थे. रास्ते में रैली के अंतिम चरण में दो युवकों के बीच झगड़ा होने के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोगों ने रैली पर पथराव कर दिया. पुलिस ने इस सिलसिले में करीब 25 लोगों को हिरासत में लिया है. उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है. एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रविवार दोपहर करीब 1.30 बजे मनकेश्वर महादेव मंदिर से रैली शुरू हुई थी, जो ईदगाह मोड़, ट्रक यूनियन, कैलाश टाकीज होते हुए करीब तीन बजे जामा मस्जिद पहुंची थी. रैली के साथ कई थानों की पुलिस चल रही थी. जामा मस्जिद के पास नारेबाजी के दौरान उपद्रव शुरू हुआ. दोनों पक्ष एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे. इस बीच रैली पर कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया, जिससे स्थिति बेकाबू होने लगी. आधा दर्जन से ज्यादा वाहन जला दिए गए. पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की. इसके साथ ही पूरे शहर में तनाव फैल गया.

पथराव में करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए. एक समाचार चैनल के संवाददाता का मोबाइल टूट गया. बामनवास डीएसपी के वाहन पर किसी ने मटका फेंक दिया, जिससे एक कांच टूट गया. पुलिस की एक अन्य गाड़ी के कांच भी पथराव में टूट गए. पथराव के बाद पुलिस फायरिंग की अफवाह फैलने से गंगापुर सिटी के बाजार बंद हो गए. पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर और समाजसेवी मदन मोहन आर्य के नेतृत्व में विहिप और भाजपा के कार्यकर्ता उपद्रवियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर फव्वारा चौक पर धरना देकर बैठ गए.

बड़ी खबर: जयपुर में देर रात फिर से अशांति, तनाव के बीच घायलों के हालचाल जानने पहुंचे परनामी

माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर से एसटीएफ सहित अतिरिक्त पुलिस बल बुलवाया गया. कलेक्टर एसपी सिंह और एसपी सुधीर चौधरी करीब चार बजे गंगापुर सिटी पहुंचे और धरना दे रहे लोगों से बातचीत की. मानसिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि समुदाय विशेष के लोगों ने योजनाबद्ध तरीके से पथराव कर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया है. कुछ लोगों ने पुलिस पर भी देर से मौके पर पहुंचने और लापहवाही बरतने के आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि रैली के दौरान मस्जिद के बाहर करीब 200-300 लोग पहले से इकट्ठा थे. अगर उन्हें पहले ही वहां से हटा दिया जाता तो यह घटना नहीं होती.

तनाव फैलने पर पुलिस प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी और क्षेत्र में मोबाइल पर इंटरनेट बंद कर दिया. सूचना मिलने पर आईजी लक्ष्मण गौड़ भी गंगापुर सिटी पहुंच गए थे. तनाव के बीच देर रात तक उपद्रवियों की धरपकड़ जारी रही. इसके लिए घरों में भी दबिश दी गई. भारी पुलिस बल तैनात होने से पूरा शहर छावनी में बदल गया था. आईजी गौड़ ने बताया कि फिलहाल स्थिति काबू में है. आगामी आदेश तक गंगापुर सर्किल में इंटरनेट बंद रहेगा और धारा 144 लागू रहेगी. उन्होंने जनता से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को देने की अपील की है.

शहर में तनाव फैलने के बाद विधायक रामकेश मीणा एक समुदाय के लोगों के साथ पुलिस थाने पहुंचे. इस बीच धरना दे रहे पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर, समाजसेवी मदन मोहन आर्य, भाजपा नेता गिरधारी सोनी, मिथलेश व्यास, विनोद अटल आदि के साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने मिनी सचिवालय में बैठक की. धरना दे रहे लोगों ने आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग की. प्रशासन की तरफ से आश्वासन मिलने के बाद धरना समाप्त कर दिया गया.

गौरतलब है कि यह राजस्थान में अगस्त के दौरान सांप्रदायिक तनाव फैलने की दूसरी घटना है. इससे पहले 12 अगस्त को जयपुर में आधी रात को पथराव और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद सांप्रदायिक तनाव फैला था, जिसमें पुलिस अधिकारियों सहित करीब एक दर्जन लोग पथराव में घायल हुए थे. इसमें कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया था. तब गुलाबी शहर चार दिन तक सांप्रदायिक तनाव की गिरफ्त में था. इस दौरान 149 लोग गिरफ्तार किए गए थे.
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जयपुर में जन्माष्टमी की छुट्टी पर गैरजरूरी राजनीतिक विवाद

इस बार जयपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर एक नया विवाद सामने आया है और इसको लेकर भाजपा समर्थकों ने कांग्रेस की गहलोत सरकार पर को निशाने पर लिया है. यह कहा जा रहा है कि कांग्रेस की गहलोत सरकार हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है. यह अत्यंत हास्यास्पद आरोप है. गहलोत सरकार ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की छुट्टी 23 अगस्त को घोषित की. वैष्णव संप्रदाय के लोग 24 अगस्त को श्रीजन्माष्टमी मना रहे हैं. जबकि दोनों ही दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने के सही कारण हैं. राज्य सरकार से गलती सिर्फ यह हुई कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पूर्व निर्धारित अवकाश शनिवार 24 अगस्त को था, जिसे सरकार ने … Read more

आखिर राजस्थान में क्यों नहीं हो पा रही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की नियुक्ति?

राजस्थान में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नियुक्त करने की प्रक्रिया बगैर किसी शोर शराबे के चुपचाप चल रही है. मदन लाल सैनी के निधन के बाद करीब दो महीने से राजस्थान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का पद खाली है. इसके बाद से ही कई नाम चल रहे थे. भाजपा हाईकमान अपने स्तर पर राज्य में सर्वे करवा रहा था. सूत्रों ने बताया कि नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश के तहत पांच नामों की सूची बन चुकी है, जिनमें से किसी एक के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने की संभावना है. ये हैं नारायण पंचारिया, सतीश पूनिया, राजेन्द्र सिंह राठौड़, वासुदेव देवनानी और मदन दिलावर.

नारायण पंचारिया फिलहाल राज्यसभा सदस्य हैं और मारवाड़ के संघ पृष्ठभूमि के हैं. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भूपेन्द्र यादव के नजदीक हैं. बताया जाता है कि पंचारिया को राज्यसभा में भेजने में भूपेन्द्र यादव की प्रमुख भूमिका रही है. सतीश पूनिया राजस्थान में पहली बार विधायक बने हैं, लेकिन संगठन में काम करने का उनका लंबा अनुभव है. फिलहाल वह भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता भी हैं. पार्टी के संगठन महामंत्री चंद्रशेखर पूनिया का समर्थन कर रहे हैं.

राजेन्द्र सिंह राठौड़ लगातार सात बार विधायक बने हैं जिसमे से छह बार उन्होंने बीजेपी के बैनर पर जीत दर्ज की है. राठौड़ तीन बार भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके है और वर्तमान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हैं. बीजेपी हाईकमान राजस्थान में राजपूत समाज को साधने के लिए राठौड़ को प्रदेश अध्यक्ष बना सकता है. हालांकि लोकसभा सांसद राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ भी प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में थे लेकिन सूत्रों की मानें तो अनुभव के आधार पर उनका नाम इस लिस्ट से बाहर हो चुका है.

वासुदेव देवनानी लगातार चौथी बार अजमेर से विधायक बने हैं और दो बार भाजपा की सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके हैं. हमेशा संघ की पृष्ठभूमि के आधार पर काम करते हैं. मदन दिलावर पार्टी के दलित नेता हैं. भाजपा लंबे समय से दलितों को अपने साथ जोड़ने के लिए प्रयासरत है. प्रदेश अध्यक्ष के लिए संघ भी उनका नाम आगे कर चुका है.

बड़ी खबर: भाजपा का प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन, कांग्रेस ने बताया ‘फ्लॉप-शो’

यह साफ है कि भाजपा राजस्थान में आसानी से प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त नहीं कर पा रही है. इसमें कई पेच मालूम पड़ते हैं. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदनलाल सैनी का निधन 24 जून को एम्स, दिल्ली में हुआ था. उसके बाद से प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए संघ और भाजपा में नेताओं की लंबी कतार लगी है. पार्टी हाईकमान के लिए सर्वसम्मति से कोई नाम तय करना मुश्किल लग रहा है. पहले भाजपा ने तय किया था कि जुलाई के दूसरे हफ्ते में प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति हो जाएगी, लेकिन अब अगस्त का तीसरा हफ्ता शुरू हो रहा है.

भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर तो जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर नियमित कामकाज शुरू कर दिया है, लेकिन राजस्थान में न तो कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति हुई है, न ही स्थायी अध्यक्ष की. पार्टी के संगठन चुनाव की घोषणा हो चुकी है, लेकिन अब तक अंतरिम अध्यक्ष भी तय नहीं हो पाया है. दो माह बाद नवंबर में प्रदेश में स्थानीय निकाय के चुनाव होंगे. अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने से पार्टी तय नहीं कर पा रही है किसके नाम पर चुनाव लड़े. प्रदेश अध्यक्ष होना जरूरी है.

पहले यह विचार चल रहा था कि जातिवाद को बढ़ावा न देते हुए किसी योग्य कार्यकर्ता को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप देनी चाहिए. लेकिन इस विचार पर अमल नहीं हुआ. अब बताया जाता है कि पार्टी जातिगत गणित में उलझ गई है. इससे प्रदेश अध्यक्ष तय करने में दिक्कत हो रही है. अब भाजपा के लिए जातीय समीकरण भी बड़ी समस्या बन गया है.

बड़ी खबर: गहलोत सरकार पर भाजपा नेताओं का हल्ला बोल

भाजपा के लिए राजस्थान ही संभवत: एकमात्र राज्य है जहां प्रदेशाध्यक्ष का पद खाली है. पार्टी सूत्रों के अनुसार अब तक यही माना जा रहा था कि संसद का बजट सत्र खत्म होने के बाद पार्टी संगठनात्मक बदलाव पर ध्यान देगी और खाली पदों पर नियुक्तियां करेगी. लेकिन संसद सत्र समाप्त हुए भी लगभग दो सप्ताह का समय हो चुका है लेकिन राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष पर आलाकमान किसी एक नाम पर सहमित नहीं बना पाया है. हालांकि पार्टी के स्थानीय नेता किसी भी तरह का कयास लगाने से बच रहे हैं. उनके अनुसार शीर्ष नेतृत्व यहां भी कुछ ‘सरप्राइज’ दे सकता है.

पायलट की बढ़ती सक्रियता

राजस्थान में कांग्रेस की राजनीति नया मोड़ लेगी. सचिन पायलट की सक्रियता से इसके आसार दिखने लगे हैं. अगर गहलोत गांधी परिवार के निकट हैं तो पायलट भी गांधी परिवार से दूर नहीं है. राजीव गांधी जयंती पर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुए कार्यक्रम में संगठन के महत्व पर जोरदार तरीके से प्रकाश डालते हुए उन्होंने संकेत दे दिया था वह अब चुपचाप उप-मुख्यमंत्री बने नहीं रह सकते. शायद वह सोच रहे होंगे, गहलोत अकेले सरकार नहीं चलाएंगे, मैं भी कुछ न कुछ करूंगा.

राजस्थान में कांग्रेस की राजनीति में फिर नया मोड़

राजस्थान में कांग्रेस की राजनीति नया मोड़ लेगी. सचिन पायलट की सक्रियता से इसके आसार दिखने लगे हैं. अगर गहलोत गांधी परिवार के निकट हैं तो पायलट भी गांधी परिवार से दूर नहीं है. राजीव गांधी जयंती पर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुए कार्यक्रम में संगठन के महत्व पर जोरदार तरीके से प्रकाश डालते हुए उन्होंने संकेत दे दिया था वह अब चुपचाप उप-मुख्यमंत्री बने नहीं रह सकते. शायद वह सोच रहे होंगे, गहलोत अकेले सरकार नहीं चलाएंगे, मैं भी कुछ न कुछ करूंगा.

सचिन पायलट बुधवार को अलवर जिले के झिवाणा पहुंच गए और हरीश जाटव, रतिराम जाटव के परिवार से मिले. हरीश जाटव की एक हादसे में मौत हो गई थी. उसके पिता रतिराम ने आरोप लगाया था कि हरीश की मौत भीड़ की पिटाई से हुई है. लेकिन पुलिस ने इस मामले को मॉब लिंचिंग नहीं माना ना ही आरोपियों के खिलाफ आज तक कुछ कर पाई है. पुलिस के इस रवैये से दुखी होकर रतिराम ने स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को जहर खाकर आत्महत्या कर ली. इसके बाद यह मामला मीडिया की चर्चा में आया था. सचिन पायलट ने जाटव परिवार से मिलने के बाद घोषणा की कि यह घटना मॉब लिंचिंग है या नहीं, इसकी नए सिरे से जांच भिवाड़ी के नए एसपी डॉ. अमनदीप सिंह करेंगे.

इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने पहलू खां की मौत के मामले में गहलोत सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पहलू खां मामले में यदि आठ माह पहले सरकार बनते ही एसआईटी का गठन कर जांच करवाई जाती तो अदालत का फैसला कुछ और होता. हालांकि अदालत के फैसले के बाद सरकार ने एसआईटी गठित कर दी है. अब कोई दोषी बच नहीं पाएगा. पायलट ने अलवर में बढ़ रही आपराधिक घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सभी के लिए आत्मचिंतन का विषय है. कानून हर जाति, समुदाय के लिए बराबर है.

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रतिराम जाटव की मौत के बाद दलित समाज के लोगों और भाजपा नेताओं ने टपूकड़ा सीएचसी के सामने तीन दिन तक धरना दिया था. इसके बाद यह मामला मीडिया में उछला और भाजपा ने कांग्रेस पर तीखे हमले शुरू कर दिए थे. भाजपा का आरोप था कि कांग्रेस के नेता हरीश जाटव के परिवार से मिलने तक नहीं गए. सरकार सिर्फ पहलू खां मामले में ही जुटी है. इसके बाद सचिन पायलट कांग्रेस की तरफ से सबसे पहले झिवाणा पहुंचे और पीड़ित परिवार को ढाढ़स बंधाया.

पायलट के पहुंचते ही हरीश जाटव की पत्नी रेखा उनके पैरों से लिपट गई और न्याय की गुहार करने लगी. पायलट ने रेखा की चारों बेटियों के लालन-पालन, पढ़ाई और अन्य आर्थिक मदद के लिए सरकार से हर संभव सहायता दिलवाने की बात कही. हरीश के परिजनों ने पायलट से एफआईआर के आधार पर जांच कराने और दोषी पुलिस कर्मियों को हटाने की मांग की. पायलट ने आश्वासन दिया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. पायलट के साथ राज्य के श्रम मंत्री टीकाराम जूली, जिला कलेक्टर इंद्रजीत सिंह, अलवर एसपी परिघ देशमुख सहित कई अधिकारी और स्थानीय नेता मौजूद थे.

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इस बीच पुलिस ने रतिराम जाटव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी कर दी है, लेकिन उसमें मौत का कारण का खुलासा नहीं है. डॉक्टरों का कहना है कि फोरेंसिक जांच होने के बाद मौत के कारणों का खुलासा होगा. रतिराम की मौत 15 अगस्त की शाम को जहरीला पदार्थ खाने से हुई थी. इसके बाद दलित समाज के लोगों ने टपूकड़ा में धरना देते हुए शव लेने से इनकार कर दिया था. धरने को भाजपा का भी समर्थन था. तीन दिन बाद धरना खत्म होने के बाद रतिराम का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया था. अब एफएसएल से विसरा की रिपोर्ट का इंतजार है.