इस बार जयपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर एक नया विवाद सामने आया है और इसको लेकर भाजपा समर्थकों ने कांग्रेस की गहलोत सरकार पर को निशाने पर लिया है. यह कहा जा रहा है कि कांग्रेस की गहलोत सरकार हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है. यह अत्यंत हास्यास्पद आरोप है. गहलोत सरकार ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की छुट्टी 23 अगस्त को घोषित की. वैष्णव संप्रदाय के लोग 24 अगस्त को श्रीजन्माष्टमी मना रहे हैं. जबकि दोनों ही दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने के सही कारण हैं.

राज्य सरकार से गलती सिर्फ यह हुई कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पूर्व निर्धारित अवकाश शनिवार 24 अगस्त को था, जिसे सरकार ने बदल दिया और पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 23 अगस्त को मानते हुए शुक्रवार 23 अगस्त को छुट्टी की घोषणा कर दी.

23 अगस्त को सूर्योदय कालीन तिथि सप्तमी थी और सुबह आठ बजे बाद से अष्टमी तिथि शुरू हो गई थी, जो 24 अगस्त को करीब सुबह साढ़े आठ बजे तक रही. समय की गति धार्मिक नियमों से बंधी नहीं होती है. श्रीकृष्ण का जन्म भादो कृष्ण पक्ष की अष्टमी की आधी रात (आजकल की घड़ी के अनुसार रात 12 बजे) हुआ था. उस दिन रोहिणी नक्षत्र था. इस बार भादो कृष्ण अष्टमी 23 अगस्त की रात को है. 24 अगस्त की रात को नवमी होने से 23 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाना तर्कसंगत है. मथुरा, वृंदावन, हरियाणा, झारखंड सहित कई स्थानों पर 23 अगस्त को ही जन्माष्टमी मनाई गई. राजस्थान हाईकोर्ट में भी 23 अगस्त को ही जन्माष्टमी का अवकाश रहा.

जयपुर में जो लोग 24 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मना रहे हैं, वे सूर्योदय कालीन तिथि अष्टमी 24 को होने से मना रहे हैं, भले ही 24 की रात को नवमी हो. उनका कहना है कि रोहिणी नक्षत्र होने पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है और रोहिणी नक्षत्र नवमी को होने से वे इस दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मना रहे हैं. उनकी बात भी सही है, लेकिन यह तर्क भी अपनी जगह मजबूत है कि रोहिणी नक्षत्र तो हर महीने आता है, भादौ कृष्ण अष्टमी तिथि साल में एक बार ही आती है. एक विद्वान ने फेसबुक पर लिखा कि वैष्णवों की उपेक्षा हो रही है, शैव लोगों को जबरन बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार हिंदुओं में फूट डालने का काम कर रही है.

सरकार ने 22 अगस्त की रात को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की छुट्टी 23 अगस्त को होने का आदेश जारी किया था, फिर क्या था कुछ लोगों को इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का मौका मिल गया. कुछ कर्मचारी संगठन तत्काल इसके विरोध में उतर आए. कुछ कर्मचारी नेताओं ने जन्माष्टमी के अवकाश में बदलाव करने की मांग की. इस तरह राजस्थान में बड़ी संख्या में लोग श्रीकृष्ण को तो भूल गए और उनके जन्मोत्सव की तिथि लेकर राजनीतिक विवाद में उलझ गए. कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि हफ्ते में पांच दिन काम करने वाले कर्मचारियों को लगातार तीन दिन छुट्टी देने के लिए शुक्रवार के दिन छुट्टी घोषित की है.

जयपुर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का त्योहार शनिवार 24 अगस्त को मनाया जा रहा है. कर्मचारी नेता गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने यहां तक कहा कि जन्माष्टमी के अवकाश में बदलाव करने से कर्मचारियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. शिक्षक नेता सियाराम शर्मा ने कहा कि पांच दिन के सप्ताह वाले कर्मचारियों को ध्यान में रखकर शुक्रवार को अवकाश घोषित किया गया है, इससे लाखों शिक्षकों, बच्चों को परेशानी हुई है. इससे जो लोग शनिवार को जन्माष्टमी मना रहे हैं उनके बच्चों को और शिक्षकों को शनिवार को भी स्कूल जाना पड़ रहा है. इसलिए उनकी मांग रही कि सरकार को शनिवार को भी छुट्टी घोषित करनी चाहिए.

यह एक अनावश्यक और जबर्दस्ती का विवाद है. एक दैनिक अखबार ने इस विवाद पर बड़ी खबर छापी है और विशेष संपादकीय टिप्पणी लिखते हुए सरकार को घेरा है कि हफ्ते में पांच दिन काम करने वाले बाबुओं को अतिरिक्त अवकाश देने के लिए शुक्रवार को छुट्टी घोषित कर दी गई थी. इसी अखबार में हर दिन एक्यूरेट पंचांग छपता है. संपादक महोदय टिप्पणी लिखने से पहले पंचांग का अध्ययन कर सकते थे. लेकिन उन्होंने सीधे लिखा कि सरकार अधिकारियों ओर कर्मचारियों के आगे नतमस्तक हो गई. तिथि के आधार पर अवकाश में संशोधन पहले भी होते रहे हैं. ईद और जन्माष्टमी जैसे त्योहारों पर कई बार सरकार को संशोधन करना पड़ता है.

24 अगस्त को जन्माष्टमी मनाने की जोरदार वकालत करने वालों के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि मथुरा, गोकुल, वृंदावन में, जहां श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, बाल्यकाल व्यतीत हुआ, वहां श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह 23 अगस्त को क्यों मनाया गया? भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने तीखे शब्दों में सरकार की निंदा करते हुए कहा है, प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है, जब जन्माष्टमी पर प्रदेश की जनता में असमंजस पैदा कर निंदनीय कृत्य किया गया है. इसके लिए मुख्यमंत्री को स्पष्टीकरण देते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए.

दरअसल यह धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ मामला है और श्रीकृष्ण का जन्म भादो कृष्ण अष्टमी को हुआ था तो उसी रात को मनाया जाता है. यह दिन का नहीं, रात का त्योहार है. कई लोग सूर्योदय कालीन तिथि से कार्यक्रम तय करते हैं. कई लोग तिथि की वास्तविकता के आधार पर कार्यक्रम बनाते हैं. दोनों तरह के लोगों की अपनी-अपनी आस्था है. इसमें विवाद कैसा? जहां तक सरकार की बात है, वह तथ्यों के आधार पर ही फैसले करती है. अगर सरकार ने शुक्रवार 23 अगस्त को जन्माष्टमी की छुट्टी घोषित की है तो यह राजनीतिक फैसला नहीं है और न ही अफसरों, कर्मचारियों को खुश करने के लिए लिया गया फैसला है. यह 23 अगस्त की रात को अष्टमी होने से लिया गया फैसला है. इस पर राजनीतिक विवाद खड़ा करना हास्यास्पद है.

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