वीडियो-खबर: वैभव गहलोत का आरसीए अध्यक्ष बनना तय

वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (Rajasthan Cricket Association) का अध्यक्ष बनने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है. वैभव को राजसमन्द जिला क्रिकेट एसोसिएशन (Rajsamand District Cricket Association) से प्रवेश कराया गया है. वैभव को राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष चुना गया है. इसके बाद RCA में जोशी का इस महीने कार्यकाल समाप्त होने पर वैभव को RCA का अध्यक्ष बनाया जाएगा. वैभव के RCA अध्यक्ष बनने की राह में एकमात्र रोड़ा बने रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi) को खींवसर से होने वाले विधानसभा उपचुनाव से सदन में पहुंचाने के कमिटमेंट के बाद अब वैभव के RCA अध्यक्ष बनने में कोई मुश्किल नहीं बची है.

वैभव गहलोत अब राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के बहाने बनेंगे RCA अध्यक्ष

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अब राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के बहाने RCA अध्यक्ष बनेंगे  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (AshokGehlot) के पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) के राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) यानि आरसीए का अध्यक्ष बनने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है. वैभव राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) यानि आरसीए का अध्यक्ष बनने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है. वैभव राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के रास्ते होकर आरसीए का रास्ता तय करेंगे. Vaibhav Gehlot को राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष चुना गया है. Vaibhav Gehlot को राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष चुना गया है. ये पद करीब डेढ़ माह से खाली चल रहा था. यह पद 22 जुलाई को तत्कालीन कोषाध्यक्ष प्रदीप पालीवाल के निधन से खाली हो गया था.

गौरतलब है कि जोधपुर से लोकसभा चुनाव हारने के बाद से Vaibhav Gehlot Vaibhav-Gehlotक्रिकेट की राजनीति में आने का मौका तलाश रहे थे. वैभव को क्रिकेट की राजनीति में लाने के लिए सीपी जोशी ने पूरी मदद की. इससे पहले वैभव को जोधपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के थ्रू RCA में लाने के प्रयास किये गए. शायद इसीलिए सीपी जोशी के सुझाव पर ही जोधपुर जिला क्रिकेट संघ को भंग कर अंतरिम समिति बना दी गई. राज्य सरकार के सहकारिता विभाग ने इस बारे में आदेश भी जारी कर दिया था.

अंतरिम समिति के संयोजक भी राजस्थान रॉयल्स के उपाध्यक्ष राजीव खन्ना को बनाया गया था, जो जोधपुर के ही हैं और गहलोत परिवार के काफी निकट माने जाते हैं. Vaibhav Gehlot को पहले जोधपुर जिला क्रिकेट संघ में पदाधिकारी बनाया जाता, लेकिन हाइकोर्ट की रोक होने से अब वैभव गहलोत को राजसमन्द जिला क्रिकेट एसोसिएशन से प्रवेश कराया गया है. इसके बाद आरसीए में जोशी का इस महीने कार्यकाल समाप्त होने पर Vaibhav Gehlot को RCA का अध्यक्ष बनाया जाएगा.

Vaibhav Gehlot के RCA अध्यक्ष बनने की राह में अगर कोई रोड़ा बन सकता है तो वो हैं नागौर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi). डूडी को RCA में सीपी जोशी के कट्टर दुश्मन नान्दु और उनकी टीम का पूरा सपोर्ट है जो कि चाहते हैं कि डूडी RCA अध्यक्ष के लिये चुनाव लड़ें. लेकिन जानकारों की मानें तो डूडी को खींवसर से होने वाले विधानसभा उपचुनाव से सदन में पहुंचाने के कमिटमेंट के बाद अब वैभव के RCA अध्यक्ष बनने में कोई रोड़ा नहीं बचा है.

जैसा कि लग रहा है, अगर Vaibhav Gehlot आरसीए अध्यक्ष बनते हैं तो फिर से RCA का नया अध्यक्ष फिर राजसमंद से ही होगा. फिलहाल ये पद प्रदेश विधानसभा स्पीकर और राजसमंद जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सीपी जोशी के पास है. हाल में बीबीसीआई ने RCA से बैन हटाया है. इसके बाद जोशी ने आरसीए अध्यक्ष पद छोड़ने की घोषणा कर दी है.

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चूंकि कि सी.पी. जोशी अब विधानसभा अध्यक्ष बन चुके हैं, ऐसे में उन्हें ये पद छोड़ना पड़ेगा. RCA को 12 सितम्बर तक चुनाव की घोषणा करनी है. 28 सितम्बर तक चुनाव करा लिए जाएंगे.

वहीं सोमवार देर शाम जेके स्टेडियम में हुई राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन की बैठक में वैभव गहलोत को निर्विरोध कोषाध्यक्ष चुना गया. RCA के पर्यवेक्षक उदयपुर के महेंद्र शर्मा, जिला खेल अधिकारी चांद खां पठान और सहकारिता विभाग के उप पंजीयक की मौजूदगी में निर्वाचन प्रक्रिया हुई जिसमें 19 में से 16 सदस्यों के समर्थन से वैभव को कोषाध्यक्ष चुना गया. RCA के संयुक्त सचिव महेंद्र नाहर ने वैभव गहलोत को राजसमंद का कोषाध्यक्ष बनाए जाने की पुष्टि की.

आखिर किसने रची रामेश्वर डूडी के खिलाफ हत्या की साजिश?

बीकानेर (Bikaner) के पूर्व सांसद और कांग्रेस के कद्दावर नेता रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi ) के खिलाफ हत्या की साजिश रचने का मामला सामने आया है. हरियाणा की सिरसा पुलिस (Sirsa Police) ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर इस साजिश का खुलासा किया. इनमें से एक आरोपी बीकानेर (राजस्थान) का रहने वाला है. उसने कबूल किया है कि रंजिश के चलते उसने डूडी की हत्या की योजना बनाई.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी ने मीडिया से बातचीत में इसे पॉलिटिकल रंजिश का रंग देते हुए हत्या की साजिश रचने की बात कही. इस संबंध में रामेश्वर डूडी मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) के आवास पर पहुंच कर खुद की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की. उन्होंने सरकार से प्रोडक्शन वारंट के जरिए दोनों आरोपियों को राजस्थान लाकर पूछताछ करने की मांग भी की है ताकि साजिश के पीछे किसका हाथ है, इसका खुलासा हो सके. वर्तमान में रामेश्वर डूडी की सुरक्षा में दो पीएसओ तैनात हैं.

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इससे पहले गत रात मामला सामने आने पर सीएम गहलोत ने डूडी से फोन पर बातचीत की और घटना की जानकारी ली. वहीं बीकानेर रेंज के डीआईजी जोसमोहन ने बताया कि आरोपियों को लाने के लिए एक टीम सिरसा भेजी जा चुकी है.

दोनों स्टेट गैंग के सदस्य, एक बीकानेर निवासी
इस मामले में सिरसा डीएसपी राजेश चेची ने जानकारी देते हुए बताया कि रविवार इससे पहले हरियाणा की सिरसा सीआईए पुलिस ने रविवार को ऐलनाबाद क्षेत्र के मिठीसुरेरां गांव में गश्त के दौरान स्टेट गैंग के 2 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. इनमें से एक बीकानेर के सांवतसर निवासी श्याम सुंदर बिश्नोई (Shyam Sundar Bisnoi) और दूसरा हरियाणा के अटेला का रहने वाला देवेंद्र सिंह उर्फ बेड़ा उर्फ देव है. दोनों के पास से दो अवैध पिस्तौल, आठ कारतूस और एक बाइक बरामद हुई है. दोनों आरोपी हार्डकोर क्रिमिनल्स है. इन अपराधियों पर हत्या और लूटपाट सहित कई मामले दर्ज हैं.

रंजिश के चलते रची हत्या की योजना
पुलिस की पूछताछ में श्याम सुंदर ने बताया कि पिछले साल उसके खिलाफ बीकानेर में एक लड़की के अपहरण व दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था जिसमें डूडी ने लड़की पक्ष की पैरवी की थी. इस मामले में बिश्नोई को सजा भी हुई. इसी के चलते उसने डूडी की हत्या की साजिश रची. श्याम सुंदर ने बताया कि उसने डूडी के घर, उनके घूमने आने-जाने का समय, सुरक्षा गार्ड सहित अन्य जानकारियां जुटा ली थी. वह कथित तौर पर पटना जेल में बंद किसी बदमाश से 6 पिस्तौल और साढ़े पांच सौ कारतूस लेने जाने वाला था. इसके लिए उसने 3.60 लाख रुपये का भुगतान किया है. इस काम में देवेंद्र उसकी मदद कर रहा था.

बीकानेर जेल से जुड़े हैं साजिश के तार
जैसा श्याम सुंदर ने बताया, डूडी की हत्या की साजिश बीकानेर जेल में ही रची गयी. बीकानेर के चर्चित रामकिशन सियाग हत्याकांड में जेल में बंद शंकरलाल जाट और अजीत बडबर की श्याम सुंदर से वहीं मुलाकात हुई थी. इस तीनों ने मिलकर डूडी की साजिश रचने को अंजाम दिया. शंकर और अजीत ने ही श्याम सुंदर को हथियार और कारतूस दिलाने का जिम्मा लिया था.

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आदतन अपराधी हैं श्याम सुंदर और देवेंद्र
श्याम सुंदर और देवेंद्र दोनों आदतन अपराधी हैं. श्याम सुंदर के खिलाफ राजस्थान (Rajasthan) और हरियाणा (Haryana) में छह केस दर्ज हैं. हाल में 2 जून को उसने झुंझुनूं के खेतड़ी में साथियों के साथ मिलकर वासी बनवास संदीप सैनी की घर में घुसकर हत्या कर दी थी. पुलिस को उनकी तलाश है. इसके अलावा, बीकानेर के जेएनवीसी, नापासर, नोखा और कोटगेट पुलिस थानों में रेप, चोरी, आम्र्स एक्ट के मुकदमे दर्ज हैं. देवेंद्र आपराधिक प्रवृति का है. उसके खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज हैं.

क्या राजस्थान में गहलोत दिखाएंगे पान मसाला बैन करने का पराक्रम?

पिछले कई वर्षों से पान मसाला और गुटखा (Gutkha) पर पाबंदी के प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे हैं. विभिन्न राज्यों में समय-समय पर पान मसाला, गुटखा की बिक्री पर रोक लगाने के आदेश जारी होते रहे हैं, लेकिन राजस्थान (Rajasthan) में इस तरह की कोई सुगबुगाहट नहीं है. इस सिलसिले में ताजा आदेश बिहार की नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) की सरकार ने जारी किया है, जिसके तहत राज्य में एक साल तक पान मसाला और गुटखा पर पाबंदी रहेगी. बिहार में पहले भी इस तरह के आदेश जारी किए जा चुके हैं. मौजूदा आदेश में खैनी (तंबाकू) को इस पाबंदी से अलग रखा गया है. यह आदेश बिहार सरकार के खाद्य संरक्षा आयुक्त की ओर से जारी किया गया है, जिसके तहत बिहार में बिकने वाले विभिन्न ब्रांड के पान मसाला की बिक्री पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है.

जानकार बताते हैं कि राजस्थान में पिछले 2 से 3 वर्षों में जयपुर (Jaipur), उदयपुर (Udaipur), अजमेर (Ajmer) सहित सभी संभागों पर स्थित जनस्वास्थ्य प्रयोगशाला (Public Health Laboratory) में कई नामी कम्पनियों यथा तानसेन (Tansen), पान पराग (Paan Parag), विमल (Vimal), दिलबाग (Dilbag), नजर (Nazar), पान बहार (Paan Bahar), बहार सलेक्ट (Bahar Select), सिग्नेचर (Signature) आदि के पान मसाला ब्रांड्स के सैम्पल्स नमूना जांच के लिए आए. उनमें से करीब-करीब सभी ब्रांड्स में जहरीले तत्व मैग्नीशियम कार्बोनेट की उपस्थित पाई गई है (पॉलिटॉक्स के पास दस्तावेज मौजूद हैं). इनमें से कई मामलों में तो सम्बंधित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने तथाकथित जहरीले ब्रांड वाले उत्पाद की बिक्री तुरन्त प्रभाव से रोकने और मार्केट से उक्त उत्पाद को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं. लेकिन आज तक राजस्थान में किसी भी नामी कम्पनी के पान मसाला ब्रांड्स पर कोई कार्रवाई कभी नहीं कि गई है.

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गौरतलब है कि बिहार के खाद्य संरक्षा विभाग ने इस साल जून और अगस्त के बीच पान मसाला, गुटखा के नमूनों की जांच की थी, जिसमें इनमें मैग्नीशियम कार्बोनेट की मौजूदगी मिली है, जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. इससे हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों की आशंका पैदा होती है. इनमें रजनीगंधा (Rajnigandha), राज निवास (Raj Niwas), पान पराग, पान पराग पान मसाला, बहार, बाहुबली, राजश्री, रौनक, सिग्नेचर, कमला पसंद, मधु ब्रांड का पान मसाला शामिल है. सरकारी आदेश के अनुसार बिहार के लोगों के स्वास्थ्य और भलाई के उद्देश्य से अब पान मसाला के उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.

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गुटखा, पान मसाला पर पाबंदी का मामला सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में अप्रैल 2013 में उठा था, जब गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशंस (Center for Public Interest Litigation) ने इस संबंध में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें गुटखा, पान मसाला की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की थी. जस्टिस जीएस संघवी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों को इस संबंध में हलफनामा पेश करने का आदेश दिया था. उस समय केंद्र सरकार के वकील ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों में कानून और नियमों की अनदेखी करते हुए गुटखा उत्पादन और बिक्री जारी रहने की बात कही थी. स्वास्थ्य सचिवों की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुटखा, पान मसाला की बिक्री रोकने के आदेश दिए थे. इसके बावजूद गुटखा, पान मसाला की बिक्री नहीं रुक पाई थी.

देश में गुटखा और पान मसाला का सेवन करने वालों की कमी नहीं है. अब तो महिलाओं में भी इसका चलन बढ़ रहा है. जब से पान, सुपारी के स्थान पर तैयार पान मसाला और गुटखा का चलन शुरू हुआ है, तब से इनकी खपत लगातार बढ़ रही है और अब गांवों, कस्बों तक इसका इस्तेमाल करने वालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है. इस पर किए गए विभिन्न शोधों का निष्कर्ष यह है पान मसाला में मिलाए जाने वाले विभिन्न पदार्थों से देश में मुंह और गले के कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ी है. गुटखा चाहे महंगा हो या सस्ता, सभी ब्रांड के गुटखों, पान मसालों से सेहत को नुकसान ही होता है.

पान, पान मसाले, गुटखा, तंबाकू या सुपारी ज्यादा चबाने और देर तक मुंह में रखने से समबम्यबकस फाइब्रोसिस की बीमारी होती है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेती है. इससे मुंह के भीतर की त्वचा के तंतु सख्त हो जाते हैं, जिससे मुंह, गला और नाक पर विपरीत असर पड़ता है. इससे ऐसी स्थिति भी आ सकती है कि मुंह का खुलना बंद हो जाता है. इससे धड़कनें अनियिमत हो जाती है, जिससे दिल की बीमारी बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है. एक रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल औसतन आठ लाख लोग तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों से मर जाते हैं.

आश्चर्यजनक है कि राजस्थान में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पान मसाला, गुटखा की बिक्री धड़ल्ले से जारी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तंबाकू मिश्रित पान मसाला की बिक्री तो रुक गई, लेकिन उसकी जगह पान मसाला और तंबाकू के पाउच अलग-अलग बिकने लगे. राजस्थान सरकार ने हर महीने की आखिरी तारीख को तंबाकू निषेध दिवस घोषित किया था. शुरू में इस नियम का पालन हुआ, लेकिन अब वह भी शिथिल हो चुका है. अब दुकानदार इस नियम को भूल चुके हैं.

इससे तो यही समझा जायेगा कि राजस्थान की गहलोत सरकार गुटखा और पान मसाला की बिक्री रोकने के लिए ठोस प्रयास नहीं कर रही है और विभिन्न ब्रांड तानसेन, पान पराग, विमल, दिलबाग, नजर, पान बहार, बहार सलेक्ट, सिग्नेचर, रजनीगन्धा, राज निवास जैसे महंगी कम्पनियों के ये जहर युक्त ब्रांड्स स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से राजस्थान की हर गली मोहल्ले में धडल्ले से बेचे जा रहे हैं. राजस्थान सरकार को बिहार से प्रेरणा लेने की जरूरत है.

तंबाकू का सेवन करने वालों को ध्यान रखना चाहिए कि इसमें सिर्फ निकोटिन ही नहीं, बल्कित 33 तरह के जहरीले पदार्थ पाए गए हैं. निकोटिन से दिल की धड़कन और रक्तचाप बढ़ता है, शिराएं सिकुड़ जाती हैं, भूख कम होती है, आमाशय और आंत में विपरीत असर होता है, जिससे शरीर को बहुत नुकसान होता है. मुंह में तंबाकू रखने से सूजन, गांठ, उभार, लाल, बादामी, काले धब्बे, सफेद चकते, घाव, जलन, दर्द, खून आने जैसी समस्याएं उभरती है और दांतों को बहुत नुकसान पहुंचता है. कई लोगों के दांत तंबाकू, गुटखा के कारण ही समय से पहले गिर जाते हैं.

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इससे पहले सितंबर 2012 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप्र सरकार को गुटखा, पान मसाला पर पाबंदी लगाने के लिए 14 दिन का समय दिया था. गुजरात में अगस्त 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुटखा, पान मसाला पर पाबंदी लगाने की घोषणा की थी. इससे पहले जुलाई 2012 में हरियाणा सरकार ने गुटखा, पान मसाला, जर्दा, तंबाकू और निकोटीन से बने चबाने वाले अन्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, वितरण या बिक्री पर 15 अगस्त से रोक लगाने की घोषणा की थी. इसी दौरान हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी गुटखा, पान मसाला, मशेहरी, खैनी के भंडारण, विक्रय और वितरण को प्रदेश में अवैध घोषित किया था.

उत्तर प्रदेश सरकार ने जुलाई 2017 में उप्र की एक जेल में सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर रोक लगाई थी, जिसके खिलाफ कैदियों ने भूख हड़ताल कर दी थी और एक कैदी की मौत हो गई थी. इससे पहले अप्रैल 2016 में दिल्ली सरकार ने राजधानी में तंबाकू, गुटखा, पान मसाला या कोई भी चबाने वाला तंबाकू उत्पाद बेचने, रखने या बनाने पर एक साल के लिए पाबंदी लगा दी थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के कारण यह फैसला लागू नहीं हो सका था.

महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2012 में गुटखा और पान मसाला के उत्पादन, बिक्री, भंडारण और वितरण पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे. इसके बाद मार्च 2015 में घोषणा की थी गुटखे की बिक्री में शामिल लोगों पर गैर जमानती अपराध के तहत मामला दर्ज किया जाएगा. उस समय सरकार की तरफ से कहा गया था कि राज्य में गुटखे के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध है, लेकिन इसे प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया है, जिसकी वजह से अन्य राज्यों से महाराष्ट्र में गुटखे की तस्करी हो रही है. महाराष्ट्र सरकार ने पाबंदी को सख्ती से लागू करने के लिए चेतावनी थी.

RCA तो सिर्फ बहाना, कहीं ओर ही है निशाना

राजस्थान क्रिकेट संघ RCA सीपी जोशी CP Joshi रामेश्वर डूडी Rameshwar Dudi वैभव गहलोत Vaibhav Gehlot कांग्रेस की अंदरूनी का एक नया मोर्चा खुल गया है. कहने को तो यह क्रिकेट संबंधी विवाद है, लेकिन इसकी गहराई में देखें तो यह कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति मालूम पड़ती है.

राजस्थान क्रिकेट संघ RCA सीपी जोशी CP Joshi रामेश्वर डूडी Rameshwar Dudi वैभव गहलोत Vaibhav Gehlot राजस्थान में कांग्रेस की अंदरूनी का एक नया मोर्चा खुल गया है. कहने को तो यह क्रिकेट संबंधी विवाद है, लेकिन इसकी गहराई में देखें तो यह कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति मालूम पड़ती है. राजनीति एक तरफ सीपी जोशी (CP Joshi) हैं, दूसरी तरफ रामेश्वर डूडी (Rameshwar Dudi). सीपी जोशी राजस्थान क्रिकेट संघ (RCA) के अध्यक्ष हैं. रामेश्वर डूडी नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बन गए हैं. उधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत भी राजनीति में जमीन तलाश रहे हैं और क्रिकेट संघ की तरफ उनकी निगाहें हैं. इस तरह क्रिकेट की राजनीति में कांग्रेस नेता आपस में भिड़े हुए हैं. इस बीच आरसीए के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी के समर्थकों का दखल भी बना हुआ है, जिससे मामला और भी ज्यादा उलझ गया है. कांग्रेस के नेता कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना की तर्ज पर राजनीति कर रहे हैं.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने आरसीए को निलंबित कर रखा है. सीपी जोशी आरसीए के अध्यक्ष हैं और इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष भी हैं. देर-सवेर उन्हें एक पद छोड़ना होगा. इसको देखते हुए डूडी ने नागौर जिला क्रिकेट संघ का अध्यक्ष बनते हुए क्रिकेट की राजनीति में अपने कदम रख दिए हैं. डूडी के नागौर जिला क्रिकेट संघ (Nagaur District Cricket Association) अध्यक्ष चुने जाने के पीछे आरसीए के सचिव राजेन्द्र सिंह नांदू की भूमिका रही है, जो ललित मोदी के समर्थक हैं. ललित मोदी के आरसीए अध्यक्ष बनने के बाद नांदू सचिव बने हुए हैं. नांदू की पहल पर नागौर जिला क्रिकेट संघ भंग कर 8 अगस्त को डूडी को अध्यक्ष चुना गया. लेकिन सीपी जोशी इस चुनाव को मान्यता नहीं देते हैं. वहीं डूडी के समर्थक कहते हैं कि जोशी विधानसभा अध्यक्ष बन गए हैं, इसलिए उन्हें आरसीए अध्यक्ष पद छोड़ देना चाहिए.

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जोशी का कहना है कि नांदू ने जिस तरह से नागौर जिला क्रिकेट संघ के चुनाव कराए वह अवैध है. इसके बाद से ही डूडी जोशी विरोधी कांग्रेसी नेताओं से संपर्क साधने में जुटे हैं. वह खुद खुलकर सीपी जोशी के खिलाफ बयानबाजी नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनके समर्थक जोशी पर आरसीए से हटने का दबाव बनाए हुए हैं. डूडी को नांदू के साथ ही भाजपा नेता और आरसीए के कोषाध्यक्ष पिंकेश पोरवाल का समर्थन भी हासिल है. जोशी के बयान को डूडी ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है. जोशी का कहना है कि नांदू नाम का कोई व्यक्ति आरसीए में सचिव नहीं है. वह नागौर जिला क्रिकेट संघ से निर्वाचित हुए थे. आरसीए ने नागौर जिला क्रिकेट संघ और नांदू दोनों को निलंबित कर दिया है. वहीं, नांदू का कहना है कि जस्टिस लोढ़ा कमेटी की सिफारिश के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद जोशी आरसीए अध्यक्ष नहीं रह सकते हैं. उन्होंने कहा, मैं चुनाव में सचिव निर्वाचित हुआ हूं, जोशी को मुझे हटाने का अधिकार नहीं है.

जोशी 2017 में आरसीए के अध्यक्ष बने थे और कार्यकारिणी की पहली ही बैठक में उन्होंने नांदू को निलंबित कर दिया था. इसके बाद से नांदू और जोशी गुट के बीच विवाद अब तक जारी है. जोशी गुट ने आरसीए को फिर से मान्यता दिलाने के नाम पर ललित मोदी की अध्यक्षता वाले नागौर जिला संघ को भी निलंबित कर दिया था. नागौर में दोनों ही गुटों ने अलग-अलग जिला संघों का गठन किया है. नांदू का कहना है कि नागौर जिला संघ के चुनाव के लिए आरसीए की ओर से पाली जिला संघ के धर्मवीर को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था. नागौर जिला संघ के अध्यक्ष शिवशंकर व्यास ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से इस्तीफा दे दिया था. उनके स्थान पर डूडी को अध्यक्ष बनाया गया है. डूडी स्टार क्लब के अध्यक्ष है और उनका चुनाव पूरी तरह वैध है.

वहीं आरसीए के संयुक्त सचिव और जोशी समर्थक महेन्द्र नाहर का कहना है कि हमें नागौर जिला संघ के चुनाव की जानकारी मीडिया से ही मिली. इस संबंध में नागौर जिला संघ ने हमसे कोई पत्राचार नहीं किया. नांदू जिस जिला संघ का सचिव होने का दावा कर रहे, उसे पहले ही निलंबित किया जा चुका है. चुनाव में आरसीए ने किसी को भी पर्यवेक्षक के रुप में नहीं भेजा. इस तरह नांदू ने डूडी को भी गुमराह किया है. महेन्द्र नाहर सी.पी.जोशी के समर्थक हैं.

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इसी प्रकर खुद रामेश्वर डूडी का कहना है कि, ‘मैं नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष के रूप में जिले में क्रिकेट खेल को अधिक लोकप्रिय बनाने और जिले में क्रिकेट खेल एवं खिलाड़ियों की उन्नति के लिए कार्य करूंगा. मेरे नागौर जिला क्रिकेट संघ का अध्यक्ष निर्वाचित होने पर बधाई देने वाले सभी शुभचिंतकों का मैं धन्यवाद व्यक्त करता हूं. मैं हमेशा से क्रिकेट प्रेमी रहा हूं और अब क्रिकेट खेल की मुख्य धारा में आकर ग्रामीण क्षेत्रों में क्रिकेट खेल को बढ़ावा देने के लिए कार्य करूंगा. मैं आरसीए अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी जो कि अत्यंत अनुभवी एवं प्रेरक राजनेता, खेल प्रशासक और मार्गदर्शक हैं . उनके नेतृत्व एवं सानिध्य में क्रिकेट खेल एवं खिलाड़ियों के हित को नई दिशा देने में पूरी तरह सक्रिय एवं समर्पित रहूंगा.’

निशाना-1

इस विवाद के बीच जोधपुर से लोकसभा चुनाव हार चुके वैभव गहलोत भी अब क्रिकेट की राजनीति में आने का मौका तलाश रहे हैं. जोशी उनकी मदद करेंगे. शायद इसी लिए सीपी जोशी के सुझाव पर ही जोधपुर जिला क्रिकेट संघ को भंग कर अंतरिम समिति बना दी गई है. राज्य सरकार के सहकारिता विभाग ने इस बारे में आदेश जारी कर दिया है. अंतरिम समिति के संयोजक राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) के उपाध्यक्ष राजीव खन्ना बनाए गए हैं, जो जोधपुर के हैं और गहलोत परिवार के काफी निकट माने जाते हैं. राजीव खन्ना को समिति का संयोजक बनाने के पीछे यह गणित मालूम पड़ता है कि वैभव को पहले जोधपुर जिला क्रिकेट संघ में पदाधिकारी बनाया जाएगा. उसके बाद आरसीए में जोशी का कार्यकाल समाप्त होने पर वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) आरसीए के अध्यक्ष बन सकते हैं. लगता है यह गणित डूडी की समझ में आ चुका है, इसलिए उन्होंने भी अपनी रणनीति बदल दी है.

डूडी की अपनी राजनीतिक मजबूरी है. वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के बावजूद नोखा विधानसभा सीट से पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे. उसके बाद से ही वह हार के कारणों की तलाश कर रहे हैं. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिला, सरकार बनी, फिर भी वह चुनाव क्यों हार गए. राजनीति में बने रहने के लिए वह नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बने. जोशी ने उनके निर्वाचन को ही अवैध ठहरा दिया, जिससे जोशी के साथ उनकी नाराजगी भी बढ़ी है. नागौर जिला क्रिकेट संघ उस वक्त सुर्खियों में आया था, जब ललित मोदी यहां से क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बने थे. बाद में वह आरसीए के अध्यक्ष बने और बीसीसीआई में पदाधिकारी और आईपीएल के कमिश्नर बने थे.

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जोशी ने आरसीए अध्यक्ष बनने के बाद 24 जून 2017 को नवनिर्वाचित कार्यकारिणी की पहली बैठक में नागौर जिला क्रिकेट संघ को निलंबित कर दिया था. मोदी के खास माने जाने वाले राजेन्द्र नांदू को भी आरसीए के सचिव पद से हटा दिया था. यह कदम आरसीए का निलंबन खत्म करने के लिए उठाया गया था. गौरतलब है कि आरसीए ने निलंबन खत्म करने के लिए बीसीसीआई को पत्र लिखा था. बीसीसीआई ने 20 जून 2017 को जवाब दिया था कि ललित मोदी को पद से हटाने के बाद ही इसे स्वीकार किया जा सकता है.

राजस्थान क्रिकेट राजनीति में नया मोड़ उस समय आया जब नांदू गुट ने 22 सितंबर को आरसीए चुनाव कराने की बाद कही. इसके बाद सीपी जोशी ने मंगलवार 26 अगस्त को आरसीए कार्यकारिणी की बैठक बुलाई. इस बैठक से पहले डूडी अपने समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन करने पहुंच गए. तनाव की आशंका के मद्देनजर आरसीए अकादमी में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया. डूडी ने बैठक में भाग नहीं लिया और कहा कि वह ट्रायल देखने आए हैं. जोशी ने कहा, उनका पहला काम आरसीए से प्रतिबंध हटवाना है. प्रतिबंध हटते ही वह आरसीए अध्यक्ष पद छोड़ देंगे. उसके बाद नए चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी. फिलहाल चुनाव कराने की स्थिति नहीं है.

क्रिकेट की राजनीति में वैभव गहलोत के आने की संभावनाओं पर डूडी का कहना है कि आरसीए के विवाद को मिलकर सुलझाया जाएगा. चुनाव की प्रक्रिया जारी रहेगी. अगर वैभव गहलोत आरसीए में आते हैं तो निर्विरोध कार्यकारिणी चुनी जाएगी. उन्होंने कहा कि ललित मोदी का राजस्थान में कोई पट्टा नहीं है. जोशीजी सीनियर लीडर हैं. आरसीए उनके नेतृत्व में काम करेगा. वहीं नांदू का कहना है कि जोशी का कार्यकारिणी की बैठक बुलाना गलत है. लोगों को भ्रमित किया जा रहा है. जोशी अध्यक्ष पद पर नहीं रह सकते. इस तरह सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है. वहीं जोशी का कहना है कि कुछ लोग जो खुद को क्रिकेट प्रेमी बताते हैं, वे नहीं चाहते कि आरसीए से प्रतिबंध हटे. अभी भी ललित मोदी का क्रिकेट से जुड़ाव है. मेरी किसी से व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है. जो लोग नियम विरुद्ध काम करेंगे, उनके खिलाफ हम कानूनी कार्रवाई करेंगे.

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निशाना-2

गौरतलब है कि नोखा से चुनाव हारने के बाद डूडी नागौर में राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं. सूत्रों के अनुसार वह दिसंबर में खींवसर और मंडावा विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनावों में खींवसर से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. इसके लिए उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा भी चल रही है. डूडी को अगर खींवसर से टिकट मिलता है तो इस बात की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता कि डूडी क्रिकेट की पिच से विधानसभा का चौका मारने में सफल हो जाएं, यहां विधानसभा का चौका से मतलब उपचुनाव के बाद सरकार के बचे हुए चार साल से है.

अब देखना ये है कि रामेश्वर डूडी क्रिकेट की अपनी इस पारी में कितना सफल हो पाते हैं. रामेश्वर डूडी जिला प्रमुख, बीकानेर से सांसद और नोखा से कांग्रेस विधायक रह चुके हैं. 2013 के विधानसभा चुनाव में सत्ता से बेदखल होने के बाद उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था. नांदू का दावा है कि डूडी का निर्वाचन पूरी तरह वैध है. जबकि जोशी पहले ही कह चुके के नांदू नाम के व्यक्ति का आरसीए से कोई लेना-देना नहीं है. जोशी की अध्यक्षता वाले आरसीए के अनुसार डूडी प्रदेश के किसी भी जिला क्रिकेट संघ के पदाधिकारी नहीं हैं. बहरहाल बीसीसीआई में आरसीए की मान्यता समाप्त होने के बाद राजस्थान में लंबे समय से घरेलू प्रतियोगिताएं भी ठप पड़ी है और कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति क्रिकेट के बहाने सतह पर आ रही है.

गुर्जर समाज ने दी गहलोत को चेतावनी

लगातार विपक्ष के निशाने पर चल रही राजस्थान की गहलोत सरकार एक बार फिर मुसीबतों में फंसती नजर आ रही है. दरअसल, गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने सोमवार को गहलोत सरकार को चेतावनी दी है कि गुर्जरों के लिए मोर बैकवर्ड क्लास के तहत पांच फीसदी आरक्षण की व्यवस्था में अगर कोई फेरबदल हुआ तो गुर्जर समाज फिर सड़कों पर उतरेगा और आंदोलन करेगा. बैठक की अध्यक्षता किरोड़ी सिंह बैंसला ने की, जो गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक हैं.

जयपुर में नए कांग्रेस के नेता के रूप में उभर रहे महेश जोशी के पुत्र रोहित

जयपुर में एक नए और कांग्रेस नेता का उदय हो रहा है. ये हैं महेश जोशी के पुत्र रोहित जोशी. महेश जोशी लोकसभा सांसद रह चुके हैं और फिलहाल विधानसभा में मुख्य सचेतक हैं. रोहित जोशी काफी पहले से कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं और युवा कांग्रेस के महासचिव हैं. हाल ही उन्होंने अपने जन्मदिन पर कांग्रेस में धमाकेदार पारी खेलने के संकेत दे दिए हैं.

सोमवार 26 अगस्त को रोहित जोशी के जन्मदिन पर जयपुर में करीब दो दर्जन अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां रोहित जोशी का स्वागत किया गया. मंदिर और मस्जिद भी इनमें शामिल थे. इन सभी कार्यक्रमों की पूर्व सूचना पहले से जारी कर दी गई थी. इस तरह इन स्वागत कार्यक्रमों के जरिए जयपुर में युवा नेता की लोकप्रियता प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया. समझा जाता है कि रोहित जोशी जयपुर के महापौर पद का चुनाव लड़ना चाहते हैं और इन एक दर्जन कार्यक्रमों को उसी सिलसिले में शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है.

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रोहित जोशी को युवा कांग्रेस महासचिव नियुक्त करने के बाद संगठन चुनाव अधिकारी बनाकर गोवा भेजा गया था. इसके बाद रोहित ने संसदीय चुनाव में जयपुर से उम्मीदवारी का दावा पेश किया था और पूरे शहर में होर्डिंग और पोस्टर लगवा दिए थे. हालांकि उन्हें टिकट नहीं मिला था. तब महेश जोशी ने कहा था कि वह कभी भी अपने पुत्र की राजनीतिक रूप से मदद नहीं करेंगे. रोहित में योग्यता होगी तो वह खुद राजनीति में अपनी जगह बना लेंगे.

इससे पहले जयपुर में पंडित नवल किशोर शर्मा ने अपने पुत्र बृजकिशोर शर्मा को राजनीति में स्थापित किया था. बृजकिशोर शर्मा 2008 में जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे और तत्कालीन गहलोत सरकार में शिक्षा मंत्री थे. उसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस का सूपड़ा साफ हुआ था, तब बृजकिशोर शर्मा भी हार गए थे. अगले 2018 के विधानसभा चुनाव में उनकी जगह हवामहल से महेश जोशी को टिकट दे दिया गया था.
बृजकिशोर शर्मा ने फिर से टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर की थी और हवामहल विधानसभा क्षेत्र में पार्टी का प्रचार करने से इनकार कर दिया था. अब उनकी जगह जयपुर में रोहित जोशी नए कांग्रेस नेता के रूप में उभर रहे हैं.

गहलोत सरकार के सामने आने वाली है एक नई समस्या

गहलोत सरकार के सामने  गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने सोमवार को गहलोत सरकार को चेतावनी दी है कि गुर्जरों के लिए मोर बैकवर्ड क्लास (एमबीसी) के तहत पांच फीसदी आरक्षण की व्यवस्था में कोई फेरबदल किया गया तो गुर्जर समाज फिर सड़कों पर उतरेगा और आंदोलन करेगा. बैठक की अध्यक्षता किरोड़ी सिंह बैंसला ने की, जो गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक हैं. बैठक में सरकार से मांग की गई है कि गुर्जर समाज की मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए. इनमें पिछले आंदोलनों के दौरान जिन लोगों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किए गए थे, उन्हें समाप्त करने की मांग भी शामिल है.

समिति के महासचिव वकील शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि हमें न्यायपालिका और सरकार में पूरा भरोसा है. हमें उम्मीद है कि गुर्जर समाज के लिए आरक्षण की जो व्यवस्था की गई है, वह समाप्त नहीं की जाएगी. अगर गुर्जरों को न्याय नहीं मिला और पांच फीसदी आरक्षण के साथ कोई छेड़छाड़ हुई तो हमें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा.

राजस्थान में पहले भी गुर्जरों के आंदोलन होते रहे हैं, जिसके तहत रेल की पटरियां रोकने का पुराना इतिहास है. पिछले फरवरी में भी गुर्जर समाज ने रेल पटरियों पर धरना दिया था. तब कांग्रेस सरकार ने गुर्जर सहित पांच जातियों के लोगों को शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में पांच फीसदी आरक्षण देने का विधेयक पारित किया था. ओबीसी कोटे के 21 फीसदी आरक्षण में भी गुर्जर आरक्षण के पात्र हैं.

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एमबीसी कोटे के तहत पांच फीसदी आरक्षण का विधेयक पारित होने के बाद राजस्थान में आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा हो गया, जो कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय सीमा से ज्यादा है. इस मुद्दे पर राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण को चुनौती दी गई है. इस याचिका पर सुनवाई चल रही है. सरकार ने अदालत से अनुरोध किया है कि सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद याचिका पर फैसला किया जाए.

शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि फरवरी में आरक्षण आंदोलन खत्म करने पर राज्य सरकार ने आश्वासन दिया था कि आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस ने जो मुकदमे दर्ज कर लिए हैं, वे वापस ले लिए जाएंगे, लेकिन सराकर ने अभी तक वह वादा पूरा नहीं किया है. हाईकोर्ट में आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई चल रही है. इस परिस्थिति में सरकार को एमबीसी कोटे में पांच फीसदी आरक्षण देने का वादा भूलना नहीं चाहिए. उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में गुर्जरों ने कांग्रेस का समर्थन किया था, लेकिन दुख की बात है समाज के वोटों से चुनाव जीतने वाले गुर्जर विधायक विधानसभा में गुर्जरों की मांगों को नहीं उठा रहे हैं. इस स्थिति में आंदोलन की परिस्थितियां बन रही हैं.

 

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राजस्थान में फिर सांप्रदायिक तनाव

फिर सांप्रदायिक तनाव क्या राजस्थान में सांप्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयास हो रहे हैं? यह शंका एक बार फिर उभरकर आई है, जब रविवार को सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी में दंगा होते-होते बचा. इस दिन विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के स्थापना दिवस पर गंगापुर सिटी में मिर्जापुर स्थित मनकेश्वर महादेव मंदिर से निकाली गई रैली के दौरान एक धार्मिक स्थल पर जुटे कुछ असामाजिक तत्वों ने पथराव कर दिया, जिससे करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए.

सवाई माधोपुर के एसपी सुधीर चौधरी ने कहा कि मनकेश्वर महादेव मंदिर से शुरू हुई रैली में करीब पांच सौ लोग थे. रास्ते में रैली के अंतिम चरण में दो युवकों के बीच झगड़ा होने के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोगों ने रैली पर पथराव कर दिया. पुलिस ने इस सिलसिले में करीब 25 लोगों को हिरासत में लिया है. उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है. एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रविवार दोपहर करीब 1.30 बजे मनकेश्वर महादेव मंदिर से रैली शुरू हुई थी, जो ईदगाह मोड़, ट्रक यूनियन, कैलाश टाकीज होते हुए करीब तीन बजे जामा मस्जिद पहुंची थी. रैली के साथ कई थानों की पुलिस चल रही थी. जामा मस्जिद के पास नारेबाजी के दौरान उपद्रव शुरू हुआ. दोनों पक्ष एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे. इस बीच रैली पर कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया, जिससे स्थिति बेकाबू होने लगी. आधा दर्जन से ज्यादा वाहन जला दिए गए. पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की. इसके साथ ही पूरे शहर में तनाव फैल गया.

पथराव में करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए. एक समाचार चैनल के संवाददाता का मोबाइल टूट गया. बामनवास डीएसपी के वाहन पर किसी ने मटका फेंक दिया, जिससे एक कांच टूट गया. पुलिस की एक अन्य गाड़ी के कांच भी पथराव में टूट गए. पथराव के बाद पुलिस फायरिंग की अफवाह फैलने से गंगापुर सिटी के बाजार बंद हो गए. पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर और समाजसेवी मदन मोहन आर्य के नेतृत्व में विहिप और भाजपा के कार्यकर्ता उपद्रवियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर फव्वारा चौक पर धरना देकर बैठ गए.

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माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर से एसटीएफ सहित अतिरिक्त पुलिस बल बुलवाया गया. कलेक्टर एसपी सिंह और एसपी सुधीर चौधरी करीब चार बजे गंगापुर सिटी पहुंचे और धरना दे रहे लोगों से बातचीत की. मानसिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि समुदाय विशेष के लोगों ने योजनाबद्ध तरीके से पथराव कर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया है. कुछ लोगों ने पुलिस पर भी देर से मौके पर पहुंचने और लापहवाही बरतने के आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि रैली के दौरान मस्जिद के बाहर करीब 200-300 लोग पहले से इकट्ठा थे. अगर उन्हें पहले ही वहां से हटा दिया जाता तो यह घटना नहीं होती.

तनाव फैलने पर पुलिस प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी और क्षेत्र में मोबाइल पर इंटरनेट बंद कर दिया. सूचना मिलने पर आईजी लक्ष्मण गौड़ भी गंगापुर सिटी पहुंच गए थे. तनाव के बीच देर रात तक उपद्रवियों की धरपकड़ जारी रही. इसके लिए घरों में भी दबिश दी गई. भारी पुलिस बल तैनात होने से पूरा शहर छावनी में बदल गया था. आईजी गौड़ ने बताया कि फिलहाल स्थिति काबू में है. आगामी आदेश तक गंगापुर सर्किल में इंटरनेट बंद रहेगा और धारा 144 लागू रहेगी. उन्होंने जनता से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को देने की अपील की है.

शहर में तनाव फैलने के बाद विधायक रामकेश मीणा एक समुदाय के लोगों के साथ पुलिस थाने पहुंचे. इस बीच धरना दे रहे पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर, समाजसेवी मदन मोहन आर्य, भाजपा नेता गिरधारी सोनी, मिथलेश व्यास, विनोद अटल आदि के साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने मिनी सचिवालय में बैठक की. धरना दे रहे लोगों ने आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग की. प्रशासन की तरफ से आश्वासन मिलने के बाद धरना समाप्त कर दिया गया.

गौरतलब है कि यह राजस्थान में अगस्त के दौरान सांप्रदायिक तनाव फैलने की दूसरी घटना है. इससे पहले 12 अगस्त को जयपुर में आधी रात को पथराव और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद सांप्रदायिक तनाव फैला था, जिसमें पुलिस अधिकारियों सहित करीब एक दर्जन लोग पथराव में घायल हुए थे. इसमें कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया था. तब गुलाबी शहर चार दिन तक सांप्रदायिक तनाव की गिरफ्त में था. इस दौरान 149 लोग गिरफ्तार किए गए थे.
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आखिर राजस्थान में क्यों नहीं हो पा रही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की नियुक्ति?

राजस्थान में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नियुक्त करने की प्रक्रिया बगैर किसी शोर शराबे के चुपचाप चल रही है. मदन लाल सैनी के निधन के बाद करीब दो महीने से राजस्थान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का पद खाली है. इसके बाद से ही कई नाम चल रहे थे. भाजपा हाईकमान अपने स्तर पर राज्य में सर्वे करवा रहा था. सूत्रों ने बताया कि नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश के तहत पांच नामों की सूची बन चुकी है, जिनमें से किसी एक के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने की संभावना है. ये हैं नारायण पंचारिया, सतीश पूनिया, राजेन्द्र सिंह राठौड़, वासुदेव देवनानी और मदन दिलावर.

नारायण पंचारिया फिलहाल राज्यसभा सदस्य हैं और मारवाड़ के संघ पृष्ठभूमि के हैं. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भूपेन्द्र यादव के नजदीक हैं. बताया जाता है कि पंचारिया को राज्यसभा में भेजने में भूपेन्द्र यादव की प्रमुख भूमिका रही है. सतीश पूनिया राजस्थान में पहली बार विधायक बने हैं, लेकिन संगठन में काम करने का उनका लंबा अनुभव है. फिलहाल वह भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता भी हैं. पार्टी के संगठन महामंत्री चंद्रशेखर पूनिया का समर्थन कर रहे हैं.

राजेन्द्र सिंह राठौड़ लगातार सात बार विधायक बने हैं जिसमे से छह बार उन्होंने बीजेपी के बैनर पर जीत दर्ज की है. राठौड़ तीन बार भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके है और वर्तमान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हैं. बीजेपी हाईकमान राजस्थान में राजपूत समाज को साधने के लिए राठौड़ को प्रदेश अध्यक्ष बना सकता है. हालांकि लोकसभा सांसद राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ भी प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में थे लेकिन सूत्रों की मानें तो अनुभव के आधार पर उनका नाम इस लिस्ट से बाहर हो चुका है.

वासुदेव देवनानी लगातार चौथी बार अजमेर से विधायक बने हैं और दो बार भाजपा की सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके हैं. हमेशा संघ की पृष्ठभूमि के आधार पर काम करते हैं. मदन दिलावर पार्टी के दलित नेता हैं. भाजपा लंबे समय से दलितों को अपने साथ जोड़ने के लिए प्रयासरत है. प्रदेश अध्यक्ष के लिए संघ भी उनका नाम आगे कर चुका है.

बड़ी खबर: भाजपा का प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन, कांग्रेस ने बताया ‘फ्लॉप-शो’

यह साफ है कि भाजपा राजस्थान में आसानी से प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त नहीं कर पा रही है. इसमें कई पेच मालूम पड़ते हैं. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदनलाल सैनी का निधन 24 जून को एम्स, दिल्ली में हुआ था. उसके बाद से प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए संघ और भाजपा में नेताओं की लंबी कतार लगी है. पार्टी हाईकमान के लिए सर्वसम्मति से कोई नाम तय करना मुश्किल लग रहा है. पहले भाजपा ने तय किया था कि जुलाई के दूसरे हफ्ते में प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति हो जाएगी, लेकिन अब अगस्त का तीसरा हफ्ता शुरू हो रहा है.

भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर तो जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर नियमित कामकाज शुरू कर दिया है, लेकिन राजस्थान में न तो कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति हुई है, न ही स्थायी अध्यक्ष की. पार्टी के संगठन चुनाव की घोषणा हो चुकी है, लेकिन अब तक अंतरिम अध्यक्ष भी तय नहीं हो पाया है. दो माह बाद नवंबर में प्रदेश में स्थानीय निकाय के चुनाव होंगे. अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने से पार्टी तय नहीं कर पा रही है किसके नाम पर चुनाव लड़े. प्रदेश अध्यक्ष होना जरूरी है.

पहले यह विचार चल रहा था कि जातिवाद को बढ़ावा न देते हुए किसी योग्य कार्यकर्ता को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप देनी चाहिए. लेकिन इस विचार पर अमल नहीं हुआ. अब बताया जाता है कि पार्टी जातिगत गणित में उलझ गई है. इससे प्रदेश अध्यक्ष तय करने में दिक्कत हो रही है. अब भाजपा के लिए जातीय समीकरण भी बड़ी समस्या बन गया है.

बड़ी खबर: गहलोत सरकार पर भाजपा नेताओं का हल्ला बोल

भाजपा के लिए राजस्थान ही संभवत: एकमात्र राज्य है जहां प्रदेशाध्यक्ष का पद खाली है. पार्टी सूत्रों के अनुसार अब तक यही माना जा रहा था कि संसद का बजट सत्र खत्म होने के बाद पार्टी संगठनात्मक बदलाव पर ध्यान देगी और खाली पदों पर नियुक्तियां करेगी. लेकिन संसद सत्र समाप्त हुए भी लगभग दो सप्ताह का समय हो चुका है लेकिन राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष पर आलाकमान किसी एक नाम पर सहमित नहीं बना पाया है. हालांकि पार्टी के स्थानीय नेता किसी भी तरह का कयास लगाने से बच रहे हैं. उनके अनुसार शीर्ष नेतृत्व यहां भी कुछ ‘सरप्राइज’ दे सकता है.