कांग्रेस में शामिल होने वाले बसपा विधायकों का पार्टी बदलने का इतिहास

राजस्थान (Rajasthan) में BSP के जो छह विधायक कांग्रेस (Congress) में शामिल हुए हैं, उनमें से पांच करोड़पति हैं पहले भी पार्टी बदलते रहे हैं. ये अपने क्षेत्र के ऐसे दबंग नेता हैं, जिन्हें जो पार्टी महत्व देती है, उसका दामन थाम लेते हैं. पार्टियां भी क्षेत्र के मतदाताओं में इनकी पकड़ को देखते हुए इन्हें अपने साथ जोड़ने का जैसे इंतजार ही करती रहती हैं. इन दबंग नेताओं ने बड़ी मेहनत करके राजनीति में अपना मुकाम बनाया है. ये सभी अत्यंत संपन्न नेता हैं. हालांकि विधायक वाजिब अली (Wajib Ali) ने पहली बार पार्टी बदली है.

नदबई विधानसभा क्षेत्र से बसपा विधायक चुने गए जोगेन्द्र सिंह अवाना उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और वहीं कांग्रेस में शामिल हुए थे. 2017 के विधानसभा चुनाव में नोएडा से टिकट चाहते थे, नहीं मिला. वह कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हो गए और राजस्थान के नदबई विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हो गए. 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बसपा ने टिकट दे दिया. उप्र में असफल होने के बाद वह राजस्थान में चुनाव जीत गए और उनका विधानसभा में जाने का सपना पूरा हुआ. वह स्वभाव से कांग्रेसी रहे हैं और कांग्रेस में ही उनकी जड़ें हैं. बसपा का टिकट मिलने के चुनाव जीतते ही वह कांग्रेस में प्रवेश कर गए. जोगेन्द्र सिंह अवाना करीब 22 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं.

उदयपुरवाटी क्षेत्र के विधायक राजेन्द्र सिंह गुढ़ा पहली बार 2008 में बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे. उसके बाद वह बसपा छोड़कर मामूली अल्पमत वाली गहलोत सरकार को समर्थन देने के लिए कांग्रेस में चले गए थे और मंत्री बन गए थे. 2018 में वह फिर बसपा के टिकट पर चुनाव लड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. उनकी संपत्ति करीब 95 लाख रुपए बताई जाती है.

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किशनगढ़ बास क्षेत्र के विधायक दीपचंद भी मूलतः कांग्रेसी हैं. 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस का टिकट मिला था और वह चुनाव हार गए थे. 2018 के चुनाव में उन्होंने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और हार गए. 2018 में वह बसपा में शामिल हो गए. उन्हें किशगढ़ बास क्षेत्र से टिकट मिला. वह बसपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद अब फिर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. उनकी संपत्ति करीब तीन करोड़ रुपए है.

तिजारा क्षेत्र के विधायक संदीप कुमार ने भाजपा में शामिल होने के बाद राजनीति शुरू की. 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो वह बसपा में शामिल हो गए. वह बसपा का टिकट मिलने के बाद चुनाव जीत गए हैं. करीब 3.50 करोड़ के मालिक संदीप कुमार अब कांग्रेस में रहकर अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाने का प्रयास करेंगे.

करौली क्षेत्र के विधायक लाखन सिंह 2013 में किरोड़ी लाल मीणा की पार्टी राजपा के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन हार गए. किरोड़ी लाल मीणा के भाजपा में चले गए तो राजपा का भी भाजपा में विलय हो गया. तब लाखन सिंह ने बसपा का दामन थामा. 2018 में बसपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. उनकी संपत्ति करीब सात करोड़ रुपए है.

भरतपुर संभाग में नगर क्षेत्र के विधायक वाजिब अली आस्ट्रेलिया में शिक्षा प्राप्त करने के बाद भारत लौटे और बसपा के सदस्य बने. बसपा के टिकट पर 2013 में चुनाव लड़ा, जीत हासिल नहीं हुई, लेकिन वह क्षेत्र में सक्रिय रहे. 2018 में उन्हें बसपा ने फिर से टिकट दिए. इस बार उन्होंने विधानसभा चुनाव जीत लिया. अब वह कांग्रेस में शामिल हो गए हैं.

बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब गहलोत और पायलट में बढ़ेगी रार

राजस्थान (Rajasthan) में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद उप मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने कहा है कि वे बगैर किसी शर्त, प्रलोभन या लोभ-लालच के कांग्रेस में शामिल हुए हैं तो उनका स्वागत है. इससे किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए. मीडिया से बातचीत में पायलट ने अपनी इस बात को 3 से 4 बार दोहराया. बसपा विधायकों के पार्ट बदलने के बाद से ही जो मंत्रिमंडल विस्तार-फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों अटकलें शुरू हो गई है, उसके बीच पायलट का यह बयान अतिमहत्वपूर्ण है. राजनीतिक नियुक्तियों के संदर्भ में पायलट ने साफ तौर पर कहा है … Read more

राजस्थान में राजनीतिक नियुक्तियों को था बसपा विधायकों का इंतजार!

राजस्थान (Rajasthan) में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के छह विधायक बगैर किसी दबाव या प्रलोभन के कांग्रेस में शामिल हो गए हैं, ऐसा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) का कहना है. बहरहाल राज्य के सभी BSP विधायकों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली और अब मंत्रिमंडल के विस्तार और फेरबदल की अटकलें जोर पकड़ रही हैं. समझा जाता है कि पार्टी बदलने वाले विधायकों को इसमें पुरस्कृत किया जाएगा. मंत्रिमंडल विस्तार में सात-आठ नए मंत्री बन सकते हैं. इनमें बसपा विधायकों और निर्दलीयों को जगह मिल सकती है. लगता है पिछले 8-9 महीनों से प्रदेश में इन राजनीतिक नियुक्तियों को भी बसपा के उक्त विधायकों का ही इंतजार था. उक्त सभी पूर्व बसपा विधायकों ने सत्ताधारी सरकार को समर्थन दे रखा था. फेरबदल के तहत दो-तीन मंत्री हटाए जा सकते हैं और कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं.

लगता है दस साल पहले का घटनाक्रम दोहराया जा रहा है. उस समय भी गहलोत सरकार का बहुमत सुनिश्चित करने के लिए बसपा के छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे. उनमें से तीन को मंत्री और तीन को संसदीय सचिव बनाया गया था. इस बार जो विधायक कांग्रेस में शामिल हुए हैं, उनको विभिन्न निगमों, बोर्डों का अध्यक्ष भी बनाया जा सकता है. फिलहाल 12 निर्दलीय विधायक भी गहलोत सरकार को समर्थन दे रहे हैं. इनमें से दो विधायकों को मंत्री बनाए जाने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.

मौजूदा सरकार में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सहित 15 कैबिनेट और 10 राज्यमंत्री हैं. सरकार में मंत्री और संसदीय सचिवों की अधिकतम संख्या 30 हो सकती हैं. इसका मतलब यह कि पांच पद खाली हैं. उनको भरा जाएगा. इसके साथ ही दो-तीन मंत्रियों से इस्तीफा लेकर उनकी जगह अन्य विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा. इस तरह सात-आठ नए मंत्री बनने की संभावना है. मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के साथ ही विभिन्न निगम, आयोग और बोर्डों में भी नियुक्तियां शुरू हो जाएंगी. समझा जाता है कि ये नियुक्तियां बसपा विधायकों के कांग्रेस में प्रवेश के इंतजार में रुकी हुई थी.

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मंत्रिमंडल विस्तार-फेरबदल की संभावना के बीच कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की धड़कनें बढ़ गई हैं. वे मंत्री बनने की संभावनाएं देखने लगे हैं. ऐसे नेताओं ने गहलोत और पायलट के पास चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं. कुछ कांग्रेस नेता यह मानते हैं कि बसपा से आए विधायकों को ज्यादा तवज्जो मिलेगी. समर्पित कांग्रेस विधायकों की उपेक्षा करते हुए उन्हें ही मंत्री बनाया जाएगा. जिन दो-तीन मंत्रियों से इस्तीफे लिए जाएंगे, उनमें जयपुर और भरतपुर संभाग के विधायक शामिल हो सकते हैं.

जो बसपा विधायक कांग्रेस में शामिल हुए हैं, वे अपने विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के उम्मीदवारों को हराकर चुनाव जीते हैं. वे हारे हुए उम्मीदवार क्षेत्र में कांग्रेस की कमान संभाले हुए हैं. ऐसे कांग्रेस नेताओं को मौजूदा घटनाक्रम से निराशा हो रही है. माना जा रहा है कि इन क्षेत्रों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह कम हो जाएगा.

गौरतलब है कि बसपा प्रमुख मायावती (Mayawati) ने अपनी पार्टी के विधायकों के दलबदल के बाद लगातार तीन ट्वीट किए. एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी राजस्थान में कांग्रेस सरकार को पहले ही बिना शर्त दे रही थी. इसके बावजूद कांग्रेस ने बसपा विधायकों को तोड. इस तरह कांग्रेस ने एक बार फिर धोखेबाज पार्टी होने का प्रमाण दिया है. यह बसपा मूवमेंट के साथ विश्वासघात है. दूसरे ट्वीट में मायावती ने लिखा है कि कांग्रेस अपनी कटु विरोधी पार्टी/संगठनों से लड़ने के बजाय हर जगह उन पार्टियों को ही सदा आघात पहुंचाने काम करती है जो उन्हें सहयोग/समर्थन देते हैं. कांग्रेस इस प्रकार एससी, एसटी, ओबीसी विरोधी पार्टी है. तीसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा है, कांग्रेस हमेशा ही अंबेडकर विरोधी रही. इसी कारण अंबेडकर को देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. कांग्रेस ने उन्हें न तो कभी लोकसभा में चुनकर जाने दिया और न ही भारत रत्न से सम्मानित किया. जो अति दुखद एवं शर्मनाक है.

इस पर मायावती के ट्वीट के जवाब में गहलोत ने छह ट्वीट किए. पहले-दूसरे ट्वीट में लिखा, बसपा विधायकों ने स्टेबल गवर्नमेंट की सोच से फैसला किया. मैं स्वागत करता हूं. तीसरा ट्वीट था, मायावतीजी का ऐसा रिएक्शन स्वाभाविक है… परंतु उनको यह भी समझना पड़ेगा कि यह सरकार में बैठे हुए लोगों ने मैनेज नहीं किया है. कोई प्रलोभन नहीं दिया है. गहलोत ने चौथे ट्वीट में लिखा, पहले भी हम लोग सरकार में थे, तब भी बीएसपी 6 लोग साथ आए थे. आज तक हमने कभी किसी को प्रलोभऩ नहीं दिया है. पांचवां ट्वीट था, हमने उन पर दबाव नहीं बनाया, उसके बाद फैसला होना स्वाभाविक फैसला है. छठा ट्वीट था, देश में जब कभी एलायंस हुआ है तो हम उन लोगों में हैं जो सोनिया गांधी, राहुलजी की भावना को समझते हुए हमेशा मायावतीजी के साथ में खड़े मिले हैं….इस बात वे स्वयं मेरे बारे में जानती हैं.

मायावती के ‘धोखेबाज पार्टी’ वाले ट्वीट पर गहलोत का पलटवार

BSP विधायकों के कांग्रेस में विलय पर मायावती (Mayawati) को जवाब देते हुए राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने कहा कि हमने कभी हॉर्स ट्रेडिंग नहीं की. उक्त सभी विधायकों ने राज्य में एक स्थिर सरकार की चाहत रखते हुए राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) में शामिल होने का फैसला किया है. उन्हें कोई प्रलोभन नहीं दिया गया है.

सीएम गहलोत ने कहा कि मैं मायावती जी का रिएक्शन समझ सकता हूं जो स्वाभाविक भी है. लेकिन उनको भी यह समझना पड़ेगा कि यह सरकार में बैठे हुए लोगों ने मैनेज नहीं किया है, कोई प्रलोभन नहीं दिया है. यह हमारे प्रदेश की खूबी है कि हमने कभी हॉर्स ट्रेडिंग नहीं की.

गहलोत ने कहा कि पिछली सरकार में 6 बीएसपी विधायकों ने कांग्रेस ज्वॉइन की थी. आज तक इतिहास में हमने कभी किसी को प्रलोभन नहीं दिया है यह कोई कम बात है क्या? उन्होंने कहा कि अगर ऐसी स्थिति किसी अन्य राज्यों में होती तो बड़े रूप में हॉर्स ट्रेडिंग होती.

उन्होंने कहा कि विधायकों ने राजस्थान की स्थिति और भावनाएं देखते हुए सोच समझकर ये फैसला लिया है. हमने उन पर कोई दबाव नहीं बनाया.

वहीं बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर ट्वीट करते हुए कांग्रेस को गैर भरोसेमंद और धोखेबाज पार्टी बताया. मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने दूसरी बार उनके साथ विश्वासघात किया है वो भी उस समय जब बीएसपी कांग्रेस सरकार को बाहर से बिना शर्त समर्थन दे रही थी.

उन्होंने इस मुद्दे को जातिगत मोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस दलित विरोधी पार्टी है तथा इन वर्गों के आरक्षण के हक के प्रति कभी गंभीर व ईमानदार नहीं रही है. मायावती ने कांग्रेस पर संविधान निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर की विचारधारा विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें न तो कभी लोकसभा में चुनकर जाने दिया और न ही भारतरत्न से सम्मानित किया. ये अति-दुःखद व शर्मनाक है.

गौरतलब है कि राजस्थान में बसपा के 6 विधायकों ने सोमवार देर रात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलकर कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा व्यक्त करते हुए विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को विलय पत्र पेश किया. इसके बाद राजेन्द्र गुढा (विधायक, उदयपुरवाटी), जोगेंद्र सिंह अवाना (विधायक, नदबई), वाजिब अली (विधायक, नगर), लाखन सिंह मीणा (विधायक, करोली), संदीप यादव (विधायक, तिजारा) और बसपा विधायक दीपचंद खेरिया ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की. इसके बाद कांग्रेस के पास विधानसभा में स्वयं का पूर्ण बहुमत हो गया है. इससे पहले उनके पास 100 सीटें थीं जो बढ़कर 106 हो गई हैं.

कांग्रेस की पिछली सत्ता में भी कमोबेश यही स्थिति थी जब 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 96 सीटें ही मिलीं थी. बाहरी विधायकों के समर्थन से अशोक गहलोत ने सरकार तो बना ली लेकिन अल्प बहुमत के चलते सरकार पर हमेशा सत्ता परिवर्तन की तलवार लटकी रहती थी. उस समय भी तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अप्रैल, 2009 में बसपा के सभी छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया और कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 102 हो गई.

वीडियो खबर: बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने पर क्या बोले पायलट

राजस्थान (Rajasthan) के डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने BSP के 6 विधायकों के प्रदेश कांग्रेस में शामिल होने पर कहा कि मैं तहे दिल से उनका स्वागत करता हूं. इससे कांग्रेस सरकार (Rajasthan Congress) और मजबूत होगी. उन्होंने कहा कि सभी बसपा विधायक बिना लोभ और लालच के कांग्रेस में शामिल हुए हैं.

वीडियो खबर: अब नहीं होगा राजस्थान में बीजेपी का ऑपरेशन लोट्स

कर्नाटक और गोवा के बाद कयास यही लग रहे थे कि BJP का ‘ऑपरेशन लोट्स’ (Operation lots) का अगला शिकार राजस्थान की कांग्रेस सरकार हो सकती है. लेकिन यहां ‘जादूगर गहलोत’ ने इस संदेह को पूरी तरह से खत्म कर दिया. यहां प्रदेश के बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सभी छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गये जिससे न केवल बीजेपी बल्कि बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) को बड़ा झटका लगा है.

राजस्थान में बढ़ा गहलोत सरकार का बहुमत, बसपा के सभी छह विधायक हुए कांग्रेस में शामिल

राजस्थान (Rajasthan) में हुए एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार का बहुमत ओर अधिक मजबूत हो गया है. प्रदेश के बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सभी छह विधायक कांग्रेस (Congress) में शामिल हो गये हैं. बसपा (BSP) विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने से बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) को बड़ा झटका लगा है. राजस्थान विधानसभा (Rajasthan Assembly) में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या जहां पहले 100 सदस्यों की थी अब वो 106 हो गई है.

राजस्थान में सोमवार देर रात बहुजन समाज पार्टी के सभी छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए. सभी बसपा विधायकों ने कांग्रेस की सदस्यता लेने के बाद रात 10:30 बजे विधानसभा पहुंच कर अध्यक्ष सीपी जोशी को विलय पत्र सौंपा. इनमें राजेन्द्र गुढा (विधायक, उदयपुरवाटी), जोगेंद्र सिंह अवाना (विधायक, नदबई), वाजिब अली (विधायक, नगर), लाखन सिंह मीणा (विधायक, करोली), संदीप यादव (विधायक, तिजारा) और बसपा विधायक दीपचंद खेरिया हैं जिन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ली.

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अभी तक ये सभी बसपा विधायक कांग्रेस को बाहर से समर्थन दे रहे थे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य हित में हमने फैसला किया है कि बहुजन समाज पार्टी के सभी 6 विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर लिया जाए. इस विलय के बाद अब कांग्रेस की सरकार बहुमत से छह विधायक ज्यादा हो गई है. जहां पहले कांग्रेस के पास 100 सीटें थीं अब वो बढ़कर 106 हो गई हैं.

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला था. वह 200 विधानसभा सीटों में से 99 पर आकर रुक गई थी, मगर उपचुनाव में 100 का आंकड़ा छुआ था. अब तक सरकार पर तलवार लटकती रहती थी, मगर अब बहुजन समाज पार्टी के सभी 6 विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर अशोक गहलोत ने राजस्थान में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है.

गौरतलब है कि 2008 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को 96 सीटें ही मिलीं थी जिससे सरकार पर सत्ता परिवर्तन की तलवार लटकी रहती थी. ऐसे में उस समय भी तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अप्रैल 2009 में बसपा के सभी छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया था और कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 102 हो गई थी.

‘संसद में सोने वाले माननीय मंत्रीजी युवाओं को अयोग्य बता रहे हैं’

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‘मायावती बिजली की नंगी तार – जो छुए वो मर जाये, कांशीराम की मौत की सीबीआई जांच की मांग’

देश में भाजपा (BJP) नेताओं के बिगड़े बोल बोलने का सिलसिला थमता नजर नही आ रहा है. भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा (Sadhvi Pragya Thakur), उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज (Sakshi Maharaj), केंद्रीय मंत्री रावसाहब दानवे पाटिल (Ravsahab Danve Patil) के बाद अब यूपी सरकार में हाल ही में मंत्री बनाए गए गिरिराज सिंह धर्मेश (Giriraj Singh Dharmesh) ने अमर्यादित बयान देते हुए अपने आप को इस लिस्ट में शामिल करवा लिया है. उत्तरप्रदेश (Uttarpradesh) की योगी सरकार (Yogi Government) के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में समाज कल्याण व अनुसूचित जाति/जनजाति मंत्री बने गिर्राज सिंह धर्मेश ने विवादित बयान देते हुए बसपा (BSP) सुप्रीमो मायावती (Mayawati) की तुलना बिजली के नंगी … Read more

मायावती एक बार फिर बनीं बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर लगी मुहर

बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की बुधवार को आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) चुन लिया गया है. लखनऊ स्थित बसपा (BSP) कार्यालय में राष्ट्रीय स्तर की बैठक के दौरान देश भर से आये बसपा प्रतिनिधियों ने मायावती को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना. बसपा सुप्रीमो मायावती अब नए सिरे से राष्ट्रीय कार्यकारिणी बाद में घोषित करेंगी. बैठक में यह तय किया गया कि बसपा विधानसभा उपचुनाव में सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करेगी.

बसपा की केन्दीय कार्यकारिणी समिति ने बैठक में यह भी तय किया कि बसपा उत्तर प्रदेश की सभी 13 सीटों पर विधानसभा उप चुनाव लड़ेगी. इसी के तहत बैठक उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर मुहर भी लगी. इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि पार्टी दिल्‍ली, हरियाणा, महाराष्‍ट्र और झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारेगी.

बैठक में उत्तरप्रदेश (UttarPradesh) में 13 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगाते हुए घोषणा की – हमीरपुर-नौशाद अली, जैदपुर (बाराबंकी)-अखिलेश अम्बेडकर, मानिकपुर (चित्रकूट)- राज नारायण निराला, प्रतापगढ़-रणजीत सिंह पटेल, घोषी-कयूम अंसारी, बलहा (बहराइच)- रमेश गौतम, टुंडला-सुनील चित्तौर, रामपुर सदर-जुबेर अहमद, एगलस-अभय कुमार, लखनऊ कैंट -अरुण द्विवेदी, गोविंद नगर (कानपुर)- देवी प्रसाद तिवारी को चुनाव लड़ाया जाएगा वहीं जलालपुर और गंगोह के लिए प्रत्याशियों की घोषणा बाद में होगी.

गौरतलब है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने 28 अगस्त को जोनल व मंडल प्रभारियों की बैठक बुलाई थी. इसमें संगठन विस्तार और भाईचारा कमेटियों के गठन के बारे में चर्चा होनी थी. इसके साथ ही विधानसभा उप चुनाव की तैयारियों के बारे में भी समीक्षा होनी थी. बसपा सुप्रीमो ने उप चुनाव वाले क्षेत्रों में सबसे पहले विधानसभा, सेक्टर गठन के साथ ही भाईचारा कमेटी बनाने का निर्देश दिया है.

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