योगी के मंत्री ने महाराष्ट्र सरकार पर लगाया जानबूझकर बिना जांच करे मजदूरों को यूपी भेजने का आरोप

बिना जांच एवं चोरी-छिपे आ रहे मजदूरों पर भड़के मंत्री, ऐसे मजदूरों को बताया मौत का सौदागर, यूपी सरकार ने मांगी राज्यों से अपने यहां फंसे श्रमिकों की जिलेवार सूची

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पॉलिटॉक्स न्यूज/यूपी. कोरोना संकट के बीच देश के अलग अलग राज्यों से पलायन का दौर बदस्तूर जारी है. अब केंद्र सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद मजदूरों को ट्रेनों से अपने गंतव्य तक पहुंचाया जा रहा है. इसके बाद भी मजदूरों का चोरी छिपे बिना जांच के अलग अलग राज्यों में पहुंचना खत्म नहीं हो रहा. इस तरह से मजदूरों के आने पर यूपी के श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य खासे नाराज हैं. मौर्य ने न केवल इस तरह से आने वाले मजदूरों को मौत का सौदागर बताया, साथ ही महाराष्ट्र सरकार पर जान बूझकर मजदूरों को बिना जांच के ट्रकों में ठूंसकर यूपी भेजने का गंभीर आरोप भी लगाया है. हालांकि महाराष्ट्र सरकार की ओर से इस पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं आई है. वहीं सीएम योगी ने अन्य राज्यों से अपने यहां फंसे प्रवासी श्रमिकों की जिलेवार सूची मांगी है.

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मंत्री मौर्य ने बिना जांच और ट्रकों में छिपकर या किसी अन्य माध्यम से चोरी छिपे राज्य में आने वाले मजदूरों को मौत का सौदागर बताया. मौर्य ने कहा, ‘यह लोग अपने परिवारों को मौत बाटेंगे. इनको धैर्य रखना चाहिए, हम इन्हें निकालेंगे. अगर खाने पीने कि कहीं कोई दिक्कत है तो अपने संबंधित जिले के विधायक या सांसद को इसकी सूचना दें. नोडल अफसरों के नंबर जारी किए गए हैं, उनको फोन करें. हम प्रवासी मजदूरों को निकालने का काम लगातार कर रहे हैं.’

श्रम मंत्री ने उद्धव सरकार पर गंभीर आरोप जड़ते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार जान बूझकर प्रवासी मजदूरों को बिना जांच पड़ताल के ट्रकों में ठूंस ठूंसकर उत्तर प्रदेश भेज रही है. मंत्री ने ये भी कहा कि प्रवासी मजदूरों को बसों और ट्रेनों के जरिए उनको उनके गृह जनपद तक पहुंचाया जा रहा है लेकिन इस तरह से आना बहुत गलत है. उन्होंने कहा कि इससे कोरोना का संक्रमण निश्चित रूप से पूरे उत्तर प्रदेश में फैलेगा.

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इधर, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दूसरे राज्यों से अपने यहां फंसे श्रमिकों की जिलेवार सूची मांगी है. मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि प्रदेश सरकार अपने राज्य के सभी कामगारों और श्रमिकों को वापस लाना चाहती है. इसके लिए संबंधित राज्य सरकारों से अपने यहां फंसे उत्तर प्रदेश के कामगारों की जनपदवार सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है. जो राज्य सरकारें सूची उपलब्ध करा रही हैं, उन्हें लाने की व्यवस्था सरकार द्वारा तत्काल की जा रही है.

योगी ने कहा कि अभी तक दूसरे प्रदेशों से करीब 30 हजार कामगारों को लेकर 37 रेलगाड़ियां उत्तर प्रदेश आ चुकी हैं. पिछले सप्ताह हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश से बसों से 30 हज़ार से अधिक श्रमिक लाए गए हैं. इससे पहले मार्च में भी साढ़े छह लाख प्रवासी श्रमिकों को उत्तर प्रदेश लाया गया था.

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मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि श्रमिकों को लेकर आज 20 ट्रेनें आ रही हैं. शुक्रवार को भी 25 से 30 ट्रेनें प्रवासी कामगारों को लेकर प्रदेश में आएगी. उन्हें उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए परिवहन निगम की 10 हजार से ज्यादा बसें लगाई गई हैं. यहां आने वाले हर कामगार को जांच के लिए क्वॉरंटीन सेंटर में रखने और उन्हें सुरक्षित घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है.

बता दें, पिछले लगातार 44 दिनों से चल रहे लॉकडाउन के चलते मजदूरों का रोजगार चला गया. अब न उनके पास काम है, न सिर छिपाने के लिए छत और न ही खाने की कोई व्यवस्था. ऐसे में ये लोग जल्द से जल्द अपने घर पहुंचना चाहते हैं. घर पहुंचने के लिए कोई पैदल ही निकल गया तो कोई ट्रकों में भरकर घर पहुंचने की लड़ाई लड़ रहे हैं. हालांकि राज्यों की सरकारें प्रवासी मजदूरों को लाने के साथ उनके खाने पीने की व्यवस्था भी कर रही है लेकिन इसके बाद भी प्रवासियों को चोरी छुपे एक राज्य से अपने गृह राज्यों में जाना बदस्तूर जारी है. अब सरकार ऐसे मामलों में सख्ती बरत रही है.

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