भजनलाल सरकार के खिलाफ गहलोत का ‘तथ्यों वाला महायुद्ध’, रिफाइनरी कांड से लेकर आदर्श घोटाले तक सरकार को जमकर घेरा
Rajasthan Politics: कांग्रेस नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को प्रेस वार्ता के जरिए भजनलाल सरकार के खिलाफ ‘तथ्यों का महा-युद्ध’ छेड़ दिया. अशोक गहलोत ने रिफाइनरी आग कांड को लोकार्पण की जल्दबाजी का नतीजा बताते हुए सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए, तो आदर्श घोटाले में सरकार और आरोपियों के बीच ‘सीधी सांठगांठ’ का सनसनीखेज आरोप जड़ दिया. वही ‘इंतज़ार शास्त्र’ के जरिए सरकार को घेरते हुए उन्होंने किसान कर्जमाफी, PHED के 4500 करोड़ के बकाया भुगतान और निकाय चुनावों में देरी को संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया. पूर्व सीएम गहलोत ने साफ कर दिया कि सरकार जनहित की योजनाओं को विफल कर केवल ‘बयानबाजी’ में मशगूल है, जबकि जनता और किसान आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.
रिफाइनरी आग कांड: ‘यह तकनीकी चूक नहीं, मनोवैज्ञानिक दबाव है’
पचपदरा रिफाइनरी में हाल ही में हुई आगजनी की घटना को अशोक गहलोत ने एक गंभीर मुद्दा बनाया. उन्होंने खुलासा किया कि इस विषय पर उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के एक जाने-माने केमिकल इंजीनियर से चर्चा की है. गहलोत ने आगे कहा कि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई रिफाइनरी में इस तरह आग लगना असामान्य है. या तो काम में बड़ी चूक हुई है या फिर सरकार द्वारा इसे जल्दबाजी में शुरू करने का मनोवैज्ञानिक दबाव डाला गया. यह जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है.
‘इंतज़ार शास्त्र’ से बैकफुट पर पूरी सरकार
वही अपनी चर्चित सोशल मीडिया सीरीज ‘इंतज़ार शास्त्र’ पर बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि इस सीरीज ने सरकार की नींद उड़ा दी है. गहलोत ने आगे चुटकी लेते हुए कहा कि भाजपा के मंत्री केवल ऊलजलूल बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि आखिर कांग्रेस के समय की जनकल्याणकारी योजनाएं और प्रोजेक्ट्स धरातल पर क्यों रुके हुए हैं. गहलोत ने साफ़ कहा कि सरकार अब पूरी तरह डिफेंस मोड में आ गई है.
PHED और RGHS: ‘जनता को प्यासा और बीमार रखने की साजिश’
इतना ही नहीं अशोक गहलोत ने प्रदेश के जल संकट और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए. प्रेस वार्ता में उन्होंने एक और बड़ा महत्वपूर्ण विषय उठाते हुए कहा कि PHED में पिछले 33 महीनों से लगभग 4500 करोड़ रुपये का भुगतान अटका होने को लेकर प्रदेशभर के ठेकेदार अब आर पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं. अशोक गहलोत ने आगे ठेकेदारों और औद्योगिक संगठनों ने सरकार को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए ‘भुगतान नहीं तो काम नहीं’ और ‘पानी रोको आंदोलन’ शुरू करने की चेतावनी दी है.
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जिस उद्देश्य से RGHS योजना शुरू की थी, उसे विफल किया जा रहा है :
अशोक गहलोत ने कांग्रेस सरकार की योजनाओं को प्रभावी तरह से लागू न होने पर दुःख जताते हुए कहा कि RGHS को लेकर पूरा पेंशनर समाज दुखी है. जिस उद्देश्य से हमने RGHS योजना शुरू की थी, उसे विफल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यदि कुछ लोगों ने बेईमानी की है तो इसका अर्थ यह नहीं कि पूरी योजना को ही बर्बाद कर दिया जाए. मेडिकल स्टोर्स के हजारों करोड़ रुपये बकाया हैं.
वहीं एफआईआर दर्ज करने को अनिवार्य बनाए जाने संबंधी उनकी घोषणा को याद करते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य किया गया था, जिसका PHQ ने विरोध भी किया. एक बार इस योजना को रोक दिया गया था और मुझे समझाया गया, लेकिन बाद में मैंने पुनः इसकी घोषणा की. अन्नपूर्णा किट योजना बहुत लोकप्रिय थी.
किसानों की ‘बेइज्जती’ और कर्जमाफी की मांग
किसानों के मुद्दे पर पूर्व सीएम गहलोत ने सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का यह कहना कि किसान साल में केवल 20-25 दिन काम करता है, अन्नदाता का घोर अपमान है. गहलोत ने मांग की कि किसानों के बढ़ते दबाव को देखते हुए उसी पैटर्न पर ‘किसान कर्जमाफी’ की जाए, जिस पर कांग्रेस सरकार ने की थी.
आदर्श घोटाला और ‘हितों का टकराव’
प्रेस वार्ता में अशोक गहलोत का सबसे बड़ा हमला ‘आदर्श क्रेडिट घोटाले’ को लेकर था. गहलोत ने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के हवाले से बड़ा आरोप लगाया कि जो वकील (शिवमंगल शर्मा और उनकी फर्म) सरकार की ओर से पैरवी कर रहे हैं, उनके संबंध घोटाले के आरोपियों से हैं. उन्होंने कहा कि यह हितों के टकराव का स्पष्ट मामला है. सरकार और आरोपियों के बीच ‘सांठगांठ’ जगजाहिर है, इसलिए गरीबों को न्याय नहीं मिल रहा.
महिला आरक्षण और संवैधानिक देरी
महिला आरक्षण विधेयक को भाजपा द्वारा भ्रामक तरीके से पेश करने पर अशोक गहलोत ने स्पष्ट किया कि यह कानून 2023 में ही बन गया था, लेकिन सरकार की नीयत में खोट है. साथ ही, उन्होंने पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में हो रही देरी को ‘लोकतांत्रिक मर्यादाओं की हत्या’ और संविधान के अनुच्छेद 243 का उल्लंघन बताया.










