एक्शन में आए राहुल गांधी, पंजाब में दलित के बाद क्या राजस्थान में खेला जाएगा ब्राह्मण कार्ड?

राजस्थान की राजनीति को लेकर कयासों का दौर, पंजाब के बाद कांग्रेस का राजस्थान पर फोकस, दिल्दी से जयपुर तक चला मुलाकातों का दौर, लेकिन किसी को नहीं पता क्या हुई बात! पुराने फॉर्मूले पर लौट रही है कांग्रेस, दलित-ब्राह्मण रहे हैं वोटबैंक, राजस्थान में ब्राह्मण को कमान देकर गुर्जर को कांग्रेस का बनाया जा सकता अध्यक्ष

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पंजाब के बाद राजस्थान में चौंकाएंगे राहुल!
पंजाब के बाद राजस्थान में चौंकाएंगे राहुल!
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Politalks.News/Rajasthan. पंजाब के बाद दिल्ली कांग्रेस हैडक्वार्टर और 10 जनपथ पर सबसे ज्यादा राजस्थान की चर्चा हो रही है. जब से कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब में दलित चरण जीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया है तब से राजस्थान की राजनीति में हलचल है. साथ ही पिछले एक हफ्ते में दिल्ली से राजस्थान तक कुछ ऐसा घटनाक्रम हुआ है जो आने वाले भविष्य के संकेत देता है. राहुल गांधी ने गांधी परिवार के सबसे करीबी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर को हटाकर बड़ा संदेश दिया है. अब इसके बाद इस बात को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या पंजाब के बाद राजस्थान में भी राहुल गांधी चौंकाने वाले हैं.

राहुल के दिमाग में क्या चल रहा है किसी को नहीं पता!
ये बात इसलिए कही जा रही है क्योंकि पंजाब मुख्यमंत्री को हटाए जाने के साथ ही दिल्ली और राजस्थान में ऐसा घटनाक्रम हुआ है जो बदलाव के संकेत दे रहा है. अब आपको बता देते हैं कि क्या-क्या हुआ है इन दिनों में. सबसे पहले बात करते हैं राहुल गांधी के पंजाब ऑपरेशन की तो किसी को 7 दिन पहले तक नहीं पता था की चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है. अगर कोई कहे कि ये मुझे पता था तो वो झूठ बोल रहा है. केवल राहुल गांधी को इस बात की जानकारी थी. इसके बाद से कयास लगाए जा रहे हैं जैसे पंजाब में राहुल गांधी ने किसी को कानों-कान खबर नहीं लगने दी की कौन मुख्यमंत्री बन रहा है ऐसा वो राजस्थान में भी करने वाले हैं.

दिल्ली से जयपुर तक बात और मुलाकात का दौर

दरअसल, ऐसे कयास इसलिए लगाए जा रहे हैं कि पिछले हफ्ते सोनिया गांधी और सीएम गहलोत के बीच फोन पर लंबी बात हुई है. इन दोनों के बीच क्या बात हुई किसी को नहीं पता. वहीं 17 सितंबर को राहुल गांधी और सचिन पायलट की उनके निवास पर लंबी बैठक हुई. इस दौरान इन दोनों नेताओं के अलावा कोई भी मौजूद नहीं था. राहुल और सचिन की बीच क्या क्या बात हुई ये केवल इन दोनों को ही पता है. इसके बाद 19 सितंबर को विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की मुलाकात संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से होती है. अब इन दोनों के बीच क्या चर्चा हुई इसके बारे में भी किसी को नहीं पता. सीपी जोशी वही व्यक्ति है तो 2008 विधानसभा चुनाव में एक वोट से अपना चुनाव हार गए थे और मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए थे. किसी जमाने में जोशी भी राहुल गांधी के काफी करीबी माने जाते थे.

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जोशी के घर पहुंचे पायलट…. दिए कई संकेत

दिल्ली में हुई इन दोनों मुलाकातों के बाद अब जयपुर में 23 सितंबर को सचिन पायलट सीपी जोशी के घर जाते हैं और लंबी बातचीत होती है. इसकी जानकारी भी खुद सचिन पायलट ने ही ट्वीट कर दी है. साथ ही पायलट ने लिखा है कि प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. अब ये महत्वपूर्ण मुद्दे क्या थे. और ये सब इतने खुफिया तरीके से क्यों हो रहा है, इसको लेकर सियासी गलियारों में काफी गहमागहमी है.

कैप्टन को हटा राहुल दे चुके हैं बड़े संकेत

अब राहुल और सचिन की मुलाकात, जोशी और वेणुगोपाल की मुलाकात के बाद पायलट और जोशी का मिलना इन सबको जोड़कर ये कयास लगाए जा रहे हैं कि पंजाब जैसा ही ऑपरेशन जयपुर यानि राजस्थान में भी हो सकता है. इसके पीछे का कारण ये बताया जा रहा है कि इन निर्णयों से राहुल गांधी की लीडरशिप को स्टैंड किया जा रहा है. इसकी शुरुआत पंजाब से मानी जा रही है. पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह सबसे मजबूत माने जा रहे थे और कांग्रेस में उनको हटाकर ये जताया गया है की आलाकमान सबसे ऊपर है. पंजाब की सबसे बड़ी बात यह रही कि वहां एक भी विधायक कैप्टन के साथ नहीं दिखा. इससे कयास लगाया जा रहा है कि राजस्थान में भी राहुल गांधी सबको चौंका सकते हैं.

यूपी चुनाव से पहले होंगे ये बड़े बदलाव

दिल्ली में इस बात की चर्चा है कि यूपी चुनाव से पहले दलित को जिस तरह से पंजाब का सीएम बनाया गया है, वैसे ही राजस्थान में किसी ब्राह्मण नेता को सत्ता की कमान सौंपी जा सकती है. अगर ऐसा होता है तो सचिन पायलट को एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस की कमान मिल सकती है वहीं अशोक गहलोत को केंद्रीय नेतृत्व में अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है. आपको बता दें, कांग्रेस अपने दलित और ब्राह्मण वोट बैंक को फिर से अपने साथ लाना चाहती है. कहा जाता रहा है कि दलित ब्राह्मण ही कांग्रेस को वोट करते रहे हैं. दलित को पंजाब की कमान सौंपकर कांग्रेस संदेश दे चुकी है. हालांकि ये सब दिल्ली में चल रहीं चर्चाएं हैं.

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आपको बता दें, सचिन पायलट कैंप लगातार यह मांग कर रहा है कि कांग्रेस सरकार के बचे दो साल में पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाए और अगला चुनाव पायलट के चेहरे पर लड़ा जाए. इसलिए पायलट राजस्थान छोड़कर बाहर नहीं जाना चाहते हैं. वहीं सीएम अशोक गहलोत भी कई बार कह चुके हैं कि राजस्थान उनके करीब है. अब तो भविष्य के गर्भ में छिपा है कि आखिर राजस्थान में होने क्या वाला है.

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