मजदूरों को सेनेटाइजर से नहलाने के मामले पर मचा सियासी बवाल, जिलाधिकारी ने मानी गलती, कार्रवाई के दिए निर्देश

दिल्ली से लौटे कामगारों को एक लाइन में बिठाकर उन पर सेनेटाइजर का छिड़काव किया गया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई, छोटे बच्चे रोने लगे और लोगों की आंखें लाल हो गई.

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पॉलिटॉक्स न्यूज़/उत्तरप्रदेश. देशभर में कोरोना के कहर चलते जारी लॉक डाउन के बाद सबसे ज्यादा मुसीबतों का पहाड़ अगर किसी पर टूटा है तो वो है विभिन्न राज्यों में दूसरे राज्यों से काम कर रहे दिहाड़ी मजदूर और कामगारों पर. लॉक डाउन की घोषणा के बाद घबराए ये मजदूर अपने अपने घरों के लिए पैदल ही रवाना हो गए. लेकिन इनकी मुसीबत अपने गृह राज्य में पहुंचने के बाद भी खत्म नहीं हो रही बल्कि अब उन्हें अन्य कई यातनाओं का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बरेली में पलायन करके आए मजदूरों के साथ देखने को मिला. यहां दिल्ली से लौटे कामगारों को एक लाइन में बिठाकर उन पर सेनेटाइजर का छिड़काव कर दिया गया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई. छोटे बच्चे रोने लगे और लोगों की आंखें लाल हो गई. बरेली में हुई इस अमानवीय घटना के बाद यूपी की राजनीति गरमा गई और सैनिटाइजर से नहलाने के इस मामले पर सियासी बवाल मच गया. मायावती, अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी ने प्रशासन की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की.

दरअसल, बरेली के सेटेलाइट अड्डे पर दिल्ली से लौट रहे मजदूर बस का इंतजार कर रहे थे, तभी यूपी पुलिस वहां पहुंच गई और सभी मजदूरों को एक लाइन में बैठाया और इसके बाद उन्हें सोडियम हाईपोक्लोराइड युक्त पानी से नहला दिया. मतलब कि उन पर सैनिटाइजर से छिड़काव किया गया जिससे वहां एक बारकी तो अफरा-तफरी का माहौल बन गया. मजदूरों के छोटे बच्चे जोर-जोर से रोने लगे वहीं कुछ मजदूरों की आंखें लाल हो गई. ऐसे में लोग जान छुड़ाकर भागे.

मजूदरों को सैनिटाइजर से नहलाने का वीडियो वायरल होने के बाद विपक्ष ने योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा. बसपा अध्यक्ष मायावती ने कहा, ‘देश में जारी जबर्दस्त लॉडाउन के दौरान जनउपेक्षा व जुल्म-ज्यादती की अनेकों तस्वीरें मीडिया में आम हैं परन्तु प्रवासी मजदूरों पर यूपी के बरेली में कीटनााशक दवा का छिड़काव करके उन्हें दण्डित करना क्रूरता व अमानीवयता है जिसकी जितनी भी निन्दा की जाए कम है. सरकार तुरन्त ध्यान दे.’

वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल पूछते हुए कहा, ‘यात्रियों पर सेनिटाइज़ेशन के लिए किए गए केमिकल छिड़काव से उठे कुछ सवाल, क्या इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देश हैं? केमिकल से हो रही जलन का क्या इलाज है? भीगे लोगों के कपड़े बदलने की क्या व्यवस्था है? साथ में भीगे खाने के सामान की क्या वैकल्पिक व्यवस्था है.’

वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘यूपी सरकार से गुजारिश है कि हम सब मिलकर इस आपदा के खिलाफ लड़ रहे हैं लेकिन कृपा करके ऐसे अमानवीय काम मत करिए. मजदूरों ने पहले से ही बहुत दुख झेल लिए हैं. उनको केमिकल डाल कर इस तरह नहलाइए मत. इससे उनका बचाव नहीं होगा बल्कि उनकी सेहत के लिए और खतरे पैदा हो जाएंगे.’

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इसके बाद इस मामले में जिला प्रशासन ने अपनी गलती मान ली. बरेली जिलाधिकारी ने कहा कि अतिसक्रियता की वजह से यह कार्रवाई की गई है. हम जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे. इस मामले को विपक्षी दलों ने उठाया और योगी सरकार-यूपी पुलिस की निंदा की थी.

बरेली के जिलाधिकारी ने कहा, ‘इस वीडियो की पड़ताल की गई, प्रभावित लोगों का सीएमओ के निर्देशन में उपचार किया जा रहा है. बरेली नगर निगम एवं फायर ब्रिगेड की टीम को बसों को सैनेटाइज़ करने के निर्देश थे, पर अति सक्रियता के चलते उन्होंने ऐसा कर दिया. सम्बंधित के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.’

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