बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र का राजनैतिक कारवां

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तीन बार बिहार में मुख्यमंत्री पद संभाल चुके जगन्नाथ मिश्र का सोमवार को दिल्ली में 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वह ब्लड कैंसर से पीड़ित थे और दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ. बिहार के सुपौल जिले में स्थित उनके गांव बलुआ बाजार में बुधवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. बिहार सरकार ने जगन्नाथ मिश्र के सम्मान में तीन दिन के शोक की घोषणा की है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी उनके निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है.  जगन्नाथ मिश्र ललित नारायण मिश्र के छोटे भाई थे. ललित नारायण मिश्र 1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में रेल मंत्री थे. उनके निधन के बाद जगन्नाथ मिश्र को बिहार में मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला.

जगन्नाथ मिश्र दिसंबर, 1989 से मार्च, 1990 तक बिहार के आखिरी कांग्रेस मुख्यमंत्री थे. मंडल आयोग की सिफारिशें लागू होने से पहले तक वह बिहार के सबसे बड़े नेता माने जाते थे. मंडल आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद बिहार की राजनीति में कांग्रेस सिमटने लगी थी. वह पीवी नरसिंहराव की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे थे.

राजनीति में प्रवेश करने से पहले जगन्नाथ मिश्र बिहार विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के शिक्षक थे. अपने बड़ा भाई ललित नारायण मिश्र के नक्शे कदम पर चलते हुए वे राजनीति में आए थे. ललित नारायण मिश्र की समस्तीपुर में एक बम धमाके में मौत हो गई थी. उसके कुछ समय बाद 1975 में जगन्नाथ मिश्र पहली बार मुख्यमंत्री बने थे. उनका पहला कार्यकाल सिर्फ दो साल रहा. जयप्रकाश नारायण का आंदोलन शुरू होने के बाद बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था.

कांग्रेस के सत्ता में लौटने के बाद 1980 में जगन्नाथ मिश्र फिर मुख्यमंत्री बने. उस समय वह प्रेस पर पाबंदी लगाने वाला विधायक लाने के कारण मीडिया के निशाने पर थे. विरोध ज्यादा बढ़ने पर एक साल बाद जगन्नाथ मिश्र ने वह विधेयक राष्ट्रपति के दस्तखत होने से पहले ही वापस ले लिया था. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी के पास कांग्रेस बागडोर आने पर कांग्रेस हाईकमान के साथ जगन्नाथ मिश्रा की दूरी बढ़ती गई. उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने पड़ा और चंद्रशेखर सिंह बिहार के मुख्यमंत्री बने थे. उसके बाद कुछ समय वह प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे.

जब जगन्नाथ मिश्र के पुराने प्रतिद्वंद्वी सीताराम केसरी ने कांग्रेस की कमान संभाली, तब उन्होंने कांग्रेस छोड़कर 1999 में भारतीय जन कांग्रेस नाम से नई पार्टी बना ली थी, जिसे कोई चुनावी सफलता नहीं नहीं मिल सकी. 2001 में उन्होंने अपनी पार्टी का शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में विलय कर दिया था. इसके बाद मिश्र का झुकाव एनडीए की तरफ बढ़ने लगा, जो कि बिहार में 2005 के बाद से सत्ता में है. जगन्नाथ मिश्र के छोटे पुत्र नितिन मिश्र नीतीश कुमार की एनडीए सरकार में मंत्री रह चुके हैं.

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