‘नैतिकता है तो इस्तीफा दें पीएम मोदी’- महिला आरक्षण के मुद्दे पर टीकाराम जूली ने केंद्र को घेरा

महिला आरक्षण के नाम पर संविधान से खिलवाड़ कर रही मोदी सरकार, दलित, ओबीसी , कमजोर वर्गों के के साथ अन्याय नहीं होने देगी कांग्रेस, पीएम दे इस्तीफा- टीकाराम जूली का भाजपा पर बड़ा हमला

Rajasthan Politics: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के बयान पर पलटवार करते हुए तीखा हमला बोला है. जूली ने भाजपा के ‘महिला हितैषी’ होने के दावों को महज एक चुनावी मुखौटा करार देते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार की नीयत महिलाओं को अधिकार देने की नहीं, बल्कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सिर्फ राजनीति करने की है. इसके साथ ही कांग्रेस नेता जूली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफा मांगा है.

परिसीमन की आड़ में ‘छिपे हुए एजेंडे’ का आरोप
कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल की आड़ में मोदी सरकार ‘परिसीमन’ के जरिए एक गहरी साजिश रच रही है. सरकार बिना जातिगत जनगणना के आंकड़ों के परिसीमन करना चाहती है, ताकि चुनावी क्षेत्रों में अपनी मनमानी और हेरफेर कर सके. विपक्ष ने इसी कुत्सित नीयत को पहचान कर विरोध किया है. उन्होंने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में जनता ने इनकी इस मंशा को भांप लिया था, जिसका नतीजा भाजपा की करारी हार के रूप में सामने आया.

‘नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें पीएम मोदी’
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा और मोदी सरकार का ‘सर्वसम्मति’ में रत्ती भर भी विश्वास नहीं है; यह सरकार केवल ‘इवेंट मैनेजमेंट’ और ‘पीआर’ के दम पर देश को गुमराह करने में विश्वास रखती है. महिला आरक्षण जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर भी सरकार विपक्ष को साथ लेकर चलने में पूरी तरह विफल रही है. जूली ने आगे कहा कि चूंकि मोदी सरकार इस महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को उसकी मूल भावना के साथ लागू करने और तार्किक परिणति तक पहुँचाने में नाकाम रही है, इसलिए नैतिकता के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. जो सरकार देश की आधी आबादी को उनके हक के नाम पर केवल छलावा देती हो, उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.

भाजपा को दिखाया ‘महिला सम्मान’ का आईना
कांग्रेस के योगदान को याद दिलाते हुए टीकाराम जूली ने कहा कि देश को पहली महिला राष्ट्रपति और स्थानीय निकायों में आरक्षण कांग्रेस की ही देन है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो पार्टी आज तक अपने संगठन में किसी महिला को ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष’ नहीं बना सकी, वह महिला सशक्तिकरण की बात न ही करे तो बेहतर है. उन्होंने संकल्प दोहराया कि कांग्रेस पार्टी दलितों, पिछड़ों और महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी.