बिहार में बाढ़ की स्थिति एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है. गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी और तटबंधों को नुकसान पहुंचने के बाद सारण समेत कई जिलों में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं. हाल के दिनों में सारण के कई इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचने की खबरें सामने आई हैं.
इसी बीच पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने छपरा में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत एवं बचाव व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. पप्पू यादव ने दावा किया कि वे पिछले तीन दिनों से छपरा के तटबंधों पर मौजूद हैं और कई जगहों पर बुनियादी राहत सुविधाओं की कमी दिखाई दे रही है. उनके अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में जनरेटर, पॉलीथीन शीट, सामुदायिक रसोई, दवाइयों और पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है.
पप्पू यादव ने बाढ़ की स्थिति को 2017 और 2020 की आपदाओं से भी अधिक गंभीर बताते हुए इसे ‘जल प्रलय’ करार दिया. उन्होंने दावा किया कि छपरा के कई इलाकों में लोग कई दिनों से भोजन और जरूरी सुविधाओं के संकट का सामना कर रहे हैं. उन्होंने राहत कार्यों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों से जवाबदेही तय करने की मांग की है.
अपने बयान में पप्पू यादव ने छपरा और आसपास के इलाके के राजनीतिक एवं ऐतिहासिक महत्व का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र ने देश को डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसा राष्ट्रपति और बिहार को कई मुख्यमंत्री दिए, वहां आज बाढ़ पीड़ितों को तटबंधों पर कठिन परिस्थितियों में रहना पड़ रहा है. इसी संदर्भ में उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए.
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान जातीय समीकरणों और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रहने वाले नेता बाढ़ जैसी आपदा के समय प्रभावित लोगों के बीच नजर नहीं आ रहे हैं. यादव ने कहा कि सोनपुर, मकेर, परसा, दरियापुर, अमनौर और तरैया सहित कई इलाकों में लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित सरकार या स्थानीय जनप्रतिनिधियों का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है.
पप्पू यादव ने यह भी दावा किया कि राहत के लिए उन्हें अपने स्तर पर हैंडपंप, टेंट, शौचालय और जनरेटर की व्यवस्था करनी पड़ी. उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 50 से अधिक जनरेटर लगाए जाने की बात कही. साथ ही, उन्होंने केंद्र से बिहार के लिए 5,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की मांग भी उठाई है.
वहीं, बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए सरकार की ओर से भी राहत एवं बचाव गतिविधियां जारी हैं. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सितंबर के अंत में सारण सहित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया था और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए थे.
सारण में बाढ़ की स्थिति के बीच राहत कार्यों को लेकर सामने आ रहे राजनीतिक आरोपों ने सरकार के सामने राहत व्यवस्था की प्रभावशीलता और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में प्रशासन प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता को किस तरह और मजबूत करता है.












