140 सीटों की जंग में बदला प्रचार का चेहरा, स्टार पावर बनी सबसे बड़ा हथियार, नेताओं से ज्यादा असरदार बने सितारे, केरल चुनाव में नया ट्रेंड
Kerala Assembly Elections 2026: केरल राज्य में चुनावी लड़ाई अंतिम चरण में पहुंच गयी है. राज्य की 140 सीटों पर विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा. ऐसे में चुनावी प्रचार युद्धस्तर पर कर दिया गया है. वाम मोर्चा के साथ एनडीए सहित अन्य पार्टियों ने भी प्रचार प्रसार तेज कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मध्य एवं दक्षिण केरल में चुनाव प्रचार को गति देने का काम करेंगे.
केरल की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता के चलते यहां पारंपरिक प्रचार हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन इस बार चर्चा का केंद्र बना है प्रचार का बदलता तरीका. डिजिटल और सेलिब्रिटी-ड्रिवन कैंपेन एक नया ट्रेंड बनकर उभरा है. यह चुनाव इस बात का संकेत भी दे रहा है कि भविष्य की राजनीति में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंस और पॉप कल्चर कितनी बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं.
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इस बार केरल की सियासी जंग में स्टार प्रचारकों से पहले अभिनेता, सिंगर, इन्फ्लुएंसर और मशहूर हस्तियों को तव्ज्जो दी जा रही है. वजह स्पष्ट है – राजनीतिक नेताओं की तुलना में ये चेहरे जनता, खासकर युवाओं, पर अधिक प्रभाव डालते हैं. लोगों की जिंदगी, पसंद और सोच पर इनका सीधा असर होता है, जिसे राजनीतिक दल भुनाने की कोशिश कर रहे हैं. इसी छाप को भुनाने के लिए विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने दर्जरभर से अधिक ऐसी मशहूर हस्तियों को चुनावी मैदान में उतारा है.
खासतौर पर सत्ताधारी एलडीएफ और यूडीएफ ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, अभिनेताओं, गायकों और मशहूर हस्तियों की मदद लेकर भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी बांटी है स्वरलय, जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] से संबद्ध एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, सत्तारूढ़ दल के चुनाव प्रचार में स्टारडम की चकाचौंध लाने के लिए वामपंथी विचारधारा के समर्थकों को जुटाने के प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है. इस संगठन ने रैपर वेदन, सिनेमा में महिला सामूहिक कार्यकर्ता रीमा कलिंगल और अन्य वामपंथी हस्तियों को अपने साथ जोड़ा है, ताकि चुनाव प्रचार में और अधिक ऊर्जा मिल सके.
वहीं स्टार अभिनेता कमल हासन ने एलडीएफ का समर्थन किया है और वे संभवतः कन्नूर में सत्तारूढ़ मोर्चे के लिए प्रचार करेंगे.
इधर, चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण हिंदू सामाजिक समूहों को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी शाम को तिरुवनंतपुरम में एक जोरदार रोड शो के साथ केरल में अपने चुनावी दौरे का समापन करने वाले हैं. अपनी यात्रा के दौरान मोदी ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ)-संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की ‘बदलती राजनीति’ की कड़ी आलोचना करते हुए इसे केरल का ‘अभिशाप’ और राज्य के विकास में एक अद्वितीय बाधा बताया था.
वहीं यूडीएफ ने अपने चुनाव प्रचार को धार देने के लिए कांग्रेस के बड़े चेहरों को मैदान में उतारने की रणनीति अपनाई है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अलावा, प्रियंका गांधी वाड्रा, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और राजस्थान से सचिन पायलट सहित कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं के चुनावी समर में जल्द उतरने की उम्मीद है.
केरल विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला 4 मई को होगा लेकिन इस बार की चुनावी जंग ने राजनीति का नया चेहरा जरूर दिखा दिया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और फिल्मी सितारों की फौज क्या पारंपरिक सियासी दिग्गजों पर भारी पड़ती है, या फिर जनता का फैसला पुराने समीकरणों को ही बरकरार रखता है.










