विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी विवाद अब धीरे-धीरे राजनीतिक टकराव का रूप लेता नजर आ रहा है. विपक्षी दल जहां चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा और चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों पर अलग-अलग स्तर पर अपना पक्ष रखा है. इसी बीच INDIA ब्लॉक के घटक दलों की 30 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित बैठक ने एक बार फिर विपक्षी एकजुटता की संभावनाओं को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
बैठक में SIR, चुनाव आयोग से जुड़े विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई जैसे मुद्दों पर विपक्ष की साझा रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है. रिपोर्टों के मुताबिक विपक्षी दल इस मुद्दे पर एक-दूसरे के संपर्क में हैं और संसद में आगे की रणनीति को लेकर समन्वय बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.
SIR ने फिर बढ़ाई विपक्षी एकजुटता की संभावना
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद INDIA ब्लॉक के भीतर कई मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक रुख सामने आते रहे हैं. पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच चुनावी तालमेल को लेकर मतभेद रहे हैं. महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव हुए हैं. शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में विभाजन के बाद राज्य की राजनीति का समीकरण बदला, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के बीच भी कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख देखने को मिला है. दक्षिण भारत में भी विपक्षी दलों के बीच समन्वय हमेशा एक जैसा नहीं रहा. कुछ दल राष्ट्रीय स्तर पर INDIA ब्लॉक के साथ रहे हैं, तो कई मौकों पर राज्य आधारित राजनीतिक हितों के कारण उनकी रणनीति अलग दिखाई दी है.
ऐसे में SIR का मुद्दा विपक्षी दलों के लिए एक साझा राजनीतिक मंच उपलब्ध कराता दिखाई दे रहा है. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वाम दलों और अन्य विपक्षी दलों ने अलग-अलग मंचों से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं.
ममता बनर्जी और वाम दल भी एक मुद्दे पर साथ
SIR विवाद की एक दिलचस्प राजनीतिक तस्वीर पश्चिम बंगाल से सामने आती है. राज्य की राजनीति में लंबे समय से आमने-सामने रहने वाली तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को लेकर चिंता जताई है. रिपोर्टों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच भी इस मुद्दे पर बातचीत हुई है. 30 सितंबर की प्रस्तावित बैठक में ममता बनर्जी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना बताई गई है.
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता की राह में क्षेत्रीय दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अक्सर बड़ी चुनौती रही है. SIR जैसे मुद्दे पर अगर ये दल न्यूनतम साझा रणनीति तैयार करते हैं, तो यह INDIA ब्लॉक के भीतर समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है. हालांकि इससे यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि विपक्ष के सभी राजनीतिक मतभेद खत्म हो गए हैं.
कांग्रेस के नेतृत्व में फिर बनेगी रणनीति?
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण दिखाई दे रही है. CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर कांग्रेस की ओर से पहल किए जाने की खबरें सामने आई हैं और विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है. कांग्रेस कार्यसमिति की 29 सितंबर को होने वाली बैठक में भी SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है. इसके अगले दिन INDIA ब्लॉक की बैठक होने की खबरों ने इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है.
हालांकि, इसे सीधे तौर पर INDIA ब्लॉक के औपचारिक पुनर्गठन या नेतृत्व को लेकर अंतिम सहमति के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी. फिलहाल उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी समन्वय की ओर संकेत करती है.
सवाल सिर्फ SIR का नहीं, विपक्षी एकता का भी
SIR विवाद ने विपक्षी दलों को एक ऐसा मुद्दा दिया है जिस पर वे अलग-अलग राज्यों की अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं से ऊपर उठकर एक साझा रुख बनाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन असली परीक्षा 30 सितंबर की बैठक के बाद होगी. क्या विपक्ष इस मुद्दे पर केवल संसद और सड़कों तक संयुक्त विरोध दर्ज कराएगा, या फिर इसके आधार पर व्यापक राजनीतिक समन्वय की नई शुरुआत होगी? क्या ममता बनर्जी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वाम दल और अन्य क्षेत्रीय दल एक साझा रणनीति पर लंबे समय तक साथ चल पाएंगे? और सबसे बड़ा सवाल: क्या SIR का मुद्दा INDIA ब्लॉक के भीतर मौजूद पुराने मतभेदों को अस्थायी रूप से पीछे धकेल पाएगा?
फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है. इतना जरूर है कि SIR विवाद ने लंबे समय बाद विपक्षी दलों को एक साझा मुद्दे पर बातचीत की मेज पर ला दिया है. अब 30 सितंबर की बैठक से निकलने वाला संदेश बताएगा कि यह सिर्फ मुद्दा आधारित तालमेल है या विपक्षी राजनीति में किसी नए समन्वय की शुरुआत.











