देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी तमाम विवादों के बीच चुनाव आयोग ने आज दिल्ली में बड़ी बैठक की है. इस अहम बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी मौजूद रहे. इस बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए. बैठक के बाद चुनाव आयोग ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि इस बैठक में तय किया गया कि फॉर्म 6 को लेकर जो विवाद है, असल में वह कोई मुख्य मुद्दा है हीं नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने भी फॉर्म-6 के डिक्लेरेशन को सही माना है. आयोग की तरफ से यह भी बताया गया कि कैबिनेट सेक्रेटरी को जो चिट्ठी लिखी गई थी, उसका चुनाव आयोग के पॉलिसी डिसीजन से कोई लेना-देना नहीं था.
बैठक के बाद चुनाव आयोग की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों ने आम सहमति के साथ कई फैसले किए हैं. इसमें कहा गया—
— SIR में नोटिस पाए लोगों के घर BLO दस्तावेज लेने जाएंगे, सुनवाई आम तौर पर जरूरी नहीं होगी.
— DEO जरूरत के अनुसार रैन बसेरों, मजदूरों, गरीबों और बेघरों के लिए हेल्प डेस्क लगाएंगे.
— SIR में फॉर्म-6 के साथ घोषणा-पत्र की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट से बरकरार रही.
— ECINET की समीक्षा वरिष्ठ DEC और स्वतंत्र IIT/IIM विशेषज्ञ की समिति करेगी.
— दिल्ली में दावे-आपत्तियों की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर हुई.
— आयोग की सभी बैठकों में एजेंडा पहले भेजा जाएगा और बैठक की कार्यवाही जारी होगी.
— सभी अधिकारियों की APAR रिपोर्ट हर साल निर्धारित समय 31 दिसंबर तक पूरी होगी.
— अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए अब चुनाव आयोग की मंजूरी आवश्यक होगी.
— आयुक्तों की तरफ से अधिकारियों को जारी सभी निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा.
इसके साथ ही SIR की प्रक्रिया बिहार और पश्चिम बंगाल सहित देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहले ही पूरा हो चुका है. अगर एसआईआर के दौरान या उसके बाद वोटर लिस्ट में जिन लोगों का नाम छूट गया है, इसके साथ युवा या पहली बार वोट देने वाले लोग भी अपने नाम को वोटर लिस्ट में शामिल कराने के लिए निरंतर अपडेटेशन के तहत संबंधित ERO के पास आवेदन दे सकते हैं. आयोग ने कहा मुख्य चुनाव अधिकारियों को इस प्रक्रिया के लिए सुविधा देने के निर्देश दिए गए हैं. एसआईआर पूरा होने के बाद CEOs, DEOs और EROs छूटे हुए और नए वोटरों के नाम जुड़वाने के लिए तुरंत विशेष अभियान शुरू करेंगे.
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि कैबिनेट सचिव को पत्र IT नीति नहीं, प्रतिनियुक्त अधिकारी के कामकाज से संबंधित था. देशव्यापी SIR से संबंधित आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे. गोवा में BLO घर-घर जाकर छूटे मतदाताओं से फॉर्म-6 भरवा रहे हैं. चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक बयान के आखिर में कहा कि यह प्रेस विज्ञप्ति 26 सितंबर की आयोग की बैठक के लिए गए फैसलों और आयोग की पूर्ण मंजूरी से जारी किया गया है.
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