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25 सितंबर की वो रात जब गहलोत गुट के विधायकों ने पायलट को रोका था CM बनने से!

25 सितंबर 2026
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25 सितंबर की वो रात जब गहलोत गुट के विधायकों ने पायलट को रोका था CM बनने से!

25 सितंबर 2022: राजस्थान कांग्रेस में मचा था सियासी भूचाल, 82 विधायकों ने दिया इस्तीफा

राजस्थान की राजनीति में 25 सितंबर 2022 को एक ऐसी घटना घटित हुई जिसे आज भी याद किया जाता है. यह एक ऐसा दिन या यूं कहे ऐसा 'ब्लैक संडे' ​था जब जयपुर में कांग्रेस आलाकमान के दूतों के सामने पार्टी के 82 विधायकों ने बगावत कर अपने इस्तीफे तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को सौंप दिए थे. इसलिए राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में 25 सितंबर 2022 की घटना आज चार साल बाद भी 'हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामे' के लिए याद की जाती है. इस सियासी घटना ने ना सिर्फ मरुधरा की राजनीति को हिलाकर रख दिया था, बल्कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस आलाकमान को भी बैकफुट पर ला दिया था. आपको बताते हैं 25 सितंबर 2022 की उस ऐतिहासिक और सियासी उठापटक से भरी रात की 'स्पेशल फ्लैशबैक न्यूज रिपोर्ट'.


सितंबर 2022 के आखिरी हफ्ते में यह लगभग तय माना जा रहा था कि राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लड़ेंगे. गांधी परिवार के 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत के तहत गहलोत को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी थी. दिल्ली में बैठे आलाकमान ने मन बना लिया था कि राजस्थान की कमान अब सचिन पायलट को सौंपी जाएगी. इसी औपचारिकता को पूरा करने और एक लाइन का प्रस्ताव पास कराने के लिए जयपुर के मुख्यमंत्री आवास पर 25 सितंबर 2022 की शाम 7 बजे कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई. पार्टी आलाकमान का एक लाइन का प्रस्ताव लेकर दिल्ली से पर्यवेक्षक बनकर मल्लिकार्जुन खड़गे और तत्कालीन प्रदेश प्रभारी अजय माकन जयपुर पहुंच चुके थे. 


कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी के दूत या पार्टी यूं कहें पार्टी पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खडगे और अजय माकन सीएमआर में विधायकों का इंतजार कर रहे थे, लेकिन गहलोत गुट के विधायकों के मन में कुछ और ही चल रहा था. सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की भनक लगते ही गहलोत समर्थक मंत्री और विधायक 25 सितंबर 2022 की शाम सीएम आवास जाने के बजाय संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के सरकारी बंगले पर जुटने लगे. देखते ही देखते वहां 80 से ज्यादा विधायकों का जमावड़ा लग गया. अंदर बंद कमरों में रणनीति तैयार हुई कि पायलट के नाम पर किसी भी कीमत पर मुहर नहीं लगने दी जाएगी.


25 सितंबर 2022 की रात के करीब 9 बजे जयपुर की सड़कों पर अचानक गाड़ियां दौड़ने लगीं. तत्कालीन मंत्री धारीवाल के बंगले से बस और गाड़ियों में भरकर गहलोत गुट के 82 से अधिक विधायक सीधे तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी के आवास पर पहुंच गए. वहां विधायकों ने आलाकमान के फैसले के खिलाफ खुली बगावत का बिगुल फूंकते हुए अपने सामूहिक इस्तीफे स्पीकर को सौंप दिए. उनकी मांग थी कि मुख्यमंत्री 102 वफादार विधायकों (जिन्होंने 2020 की मानेसर बगावत में सरकार बचाई थी) में से ही कोई बने, न कि पायलट खेमे से.


25 सितंबर 2022 की आधी रात तक जयपुर में यह सियासी ड्रामा चलता रहा. पर्यवेक्षक खड़गे और माकन विधायकों का इंतजार करते रह गए, लेकिन एक भी बागी विधायक उनसे बात करने नहीं आया. आखिरकार, कांग्रेस इतिहास की इस सबसे बड़ी आंतरिक बगावत से हैरान और परेशान दोनों पर्यवेक्षक अगले दिन बिना किसी बैठक या प्रस्ताव के खाली हाथ दिल्ली लौट गए. इस एक रात के सियासी ड्रामे ने राजस्थान की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया. अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष की रेस से बाहर हो गए और मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. इस घटना की बदौलत गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री बने रहने में कामयाब रहे. सचिन पायलट का मुख्यमंत्री बनने का सपना उस दिन भी अधूरा रह गया. उस दिन के बाद से आज भी 25 सितंबर 2022 की घटना को याद किया जाता है.


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