प्रधानमंत्री मोदी की ‘पाठशाला’ के बाद कितनी बदलेगी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की ‘विचारधारा’?

इस कार्यक्रम को पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संबोधित करने वाले थे लेकिन बाद में राष्ट्रपति का कार्यक्रम बदलकर पीएम मोदी ने संबोधित करने का फैसला किया, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का सरकारों से हमेशा से ही 36 का आंकड़ा माना जाता है, खासकर भाजपा सरकार और इस विश्वविद्यालय के संबंध कभी अच्छे नहीं रहे

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एएमयू में प्रधानमंत्री मोदी की 'पाठशाला'
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Politalks.News/Bharat. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए दिन कुछ नया ‘कमाल’ दिखाते रहते हैं. मोदी के इन नवप्रयोगों को देखकर राजनीति के अलावा सोशल मीडिया पर भी ‘चर्चाओं का बाजार गर्म हो जाता है‘. अभी दो दिन पहले रविवार को पीएम मोदी दिल्ली स्थित रकाबगंज गुरुद्वारा में अचानक पहुंच कर लोगों को ‘चौंका‘ दिया था. मोदी के दौरे को लेकर भी सोशल मीडिया पर हजारों यूजर प्रतिक्रियाएं देने में लगे हुए हैं. उसके बाद मंगलवार को प्रधानमंत्री ने एक बार फिर से देशवासियों को ‘आश्चर्यचकित‘ कर दिया.

बात को आगे बढ़ाएं उससे पहले आपको उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ लिए चलते हैं. ये शहर देश-विदेश में मुस्लिम विश्वविद्यालय की वजह से जाना जाता है. आपको बता देंं कि इन दिनों अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) 100वां स्थापना दिवस धूमधाम के साथ मना रहा है. इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एएमयू के शताब्दी वर्ष समारोह को राजधानी दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया. ‘इस कार्यक्रम को पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संबोधित करने वाले थे लेकिन बाद में राष्ट्रपति का कार्यक्रम बदलकर पीएम मोदी ने संबोधित करने का फैसला किया‘.

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पीएम मोदी द्वारा AMU को सम्बोधित करने की जानकारी देशवासियों और सोशल मीडिया पर हुई तो प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया. इससे पहले किसी ने सोचा भी नहीं था कि पीएम मोदी की अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ‘पाठशाला लगेगी‘, क्योंकि इस विश्वविद्यालय को 56 वर्ष बाद किसी प्रधानमंत्री ने संबोधित किया है. इससे पहले दिवंगत लाल बहादुर शास्त्री ने प्रधानमंत्री रहते हुए इस विश्वविद्यालय को संबोधित किया था. इस मौके पर पीएम मोदी ने पूरे देश को कई बड़े संदेश दिए.

पीएम मोदी ने कहा कि देश के विकास में एएमयू का अहम योगदान है, सभी मतभेदों से पहले देश होना चाहिए. ‘बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का सरकारों से हमेशा से ही 36 का आंकड़ा माना जाता है, खासकर भाजपा सरकार और इस विश्वविद्यालय के संबंध कभी अच्छे नहीं रहे’. लेकिन मंगलवार को ‘प्रधानमंत्री ने एएमयू की विचारधारा में कुछ मरहम लगाने का काम किया है’. अब देखना होगा प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद इस विश्वविद्यालय का भाजपा के प्रति क्या रवैया रहता है ?

पीएम ने एएमयू की कोरोना संकटकाल में किए गए सामाजिक कार्यों की खुलकर प्रशंसा की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की खुलकर प्रशंसा की. मोदी ने कहा कि आज एएमयू से तालीम लेकर निकले लोग भारत के सर्वश्रेष्ठ स्थानों के साथ ही दुनिया के सैकड़ों देशों में छाए हैं. एएमयू के पढ़े लोग दुनिया में कहीं भी हों, भारत की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं. ‘पीएम ने कहा कि कोरोना संकट के दौरान एएमयू ने जिस तरह समाज की मदद की वो बहुत ही सराहनीय है. प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों का मुफ्त टेस्ट कराना, आइसोलेशन वार्ड बनाना, प्लाज्मा बैंक बनाना और पीएम केयर फंड में एक बड़ी राशि का योगदान देना समाज के प्रति आपके दायित्यों को पूरा करने की गंभीरता को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने भली-भांति कर दिखाया’.

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प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि एएमयू समुदाय विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री का आभारी है. आपको बता दें कि सर सैयद अहमद खान ने साल 1877 में मोहम्मडन एंग्लो ऑरिएंटल स्कूल की स्थापना की थी. उसके बाद 1920 में उसी स्कूल ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का रूप लिया. आज इस विश्वविद्यालय में देश विदेशों से हजारों छात्र तालीम लेने आते हैं. यही नहीं इस विश्वविद्यालय से कई दिग्गज नेता, अभिनेताओं ने अपनी शिक्षा प्राप्त की है.

प्रधानमंत्री के धर्मनिरपेक्ष पर विश्वविद्यालय के छात्रों, प्रोफेसरों ने गर्मजोशी से किया स्वागत-

पीएम मोदी ने विश्वविद्यालय को संबोधित करते हुए ‘सेक्युलरिज्मम’ (धर्मनिरपेक्ष वाद) पर भी विचार रखे. प्रधानमंत्री ने कहा कि हम किस मजहब में पले-बढ़े हैं, इससे बड़ी बात ये है कि कैसे हम देश की आकांक्षाओं से जुड़ें. इस दौरान पीएम मोदी नेे कहा मतभेदों के नाम पर काफी वक्त जाया हो चुका है, हम कहां और किस परिवार से पैदा हुए, किस मजहब में पले, इससे बड़ा है कि उसकी आकांक्षाएं देश से कैसे जुड़ें. उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेद होते हैं, लेकिन जब बात देश की लक्ष्य प्राप्ति की हो तो सब किनारे रख देना चाहिए. अब मिलकर नया आत्मनिर्भर भारत बनाना है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि बहुत से लोग बोलते हैं कि एएमयू कैंपस अपने आप में एक शहर की तरह है. अनेक विभाग, दर्जनों हॉस्टल, हजारों टीचर-छात्रों के बीच एक ‘मिनी इंडिया’ नजर आता है. ‘यहां एक तरफ उर्दू पढ़ाई जाती है, तो हिंदी भी, अरबी पढ़ाई जाती है तो संस्कृत की शिक्षा भी दी जाती है. यहां लाइब्रेरी में कुरान है तो रामायण भी उतनी ही सहेजकर रखी गई है’. हमें इस शक्ति को न भूलना है न कमजोर पड़ने देना है. प्रधानमंत्री ने कहा कि एएमयू के कैंपस में एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना मजबूत हो, हमें इसके लिए काम करना है. इस दौरान विश्वविद्यालय के छात्रों और प्रोफेसरों ने पीएम मोदी के संबोधन का गर्मजोशी से स्वागत किया.

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