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राज्यसभा नहीं भेजना कांग्रेस की थी मजबूरी! लेकिन पार्टी में न02 की पोजिशन को क्यों ठुकराया आजाद ने?

03 जून 2022
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राज्यसभा नहीं भेजना कांग्रेस की थी मजबूरी! लेकिन पार्टी में न02 की पोजिशन को क्यों ठुकराया आजाद ने?

Politalks.News/Congress/GulamNabiAzad. देश की सबसे पुरानी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस वर्तमान में अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. हाल ही में उदयपुर में पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से हुए कांग्रेस के नव संकल्प शिविर के बाद तो बल्कि पार्टी को कपिल सिब्बल और हार्दिक पटेल के रूप में दो बड़े झटके और लगे हैं. जानकारों की मानें तो अब पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद इन दिनों नाराज चल रहे हैं. यही कारण है कि गुलाम नबी के सोनिया गांधी की पार्टी में दूसरे नम्बर की पोजिशन पर काम करने की ऑफर को भी यह कहकर ठुकरा दिया है कि पार्टी में अब युवा नेतृत्व और … Read more

Politalks.News/Congress/GulamNabiAzad. देश की सबसे पुरानी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस वर्तमान में अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. हाल ही में उदयपुर में पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से हुए कांग्रेस के नव संकल्प शिविर के बाद तो बल्कि पार्टी को कपिल सिब्बल और हार्दिक पटेल के रूप में दो बड़े झटके और लगे हैं. जानकारों की मानें तो अब पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद इन दिनों नाराज चल रहे हैं. यही कारण है कि गुलाम नबी के सोनिया गांधी की पार्टी में दूसरे नम्बर की पोजिशन पर काम करने की ऑफर को भी यह कहकर ठुकरा दिया है कि पार्टी में अब युवा नेतृत्व और दिग्गजों के बीच सोच का बड़ा फर्क आ गया है. ऐसे में अब सभी की निगाहें गुलाम नबी आजाद के अगले कदम पर टिकी हुईं हैं.

आपको बता दें, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को आगामी राज्यसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया गया है. हालांकि, राज्यसभा के लिए उम्मीदवार घोषित करने से पहले सोनिया गांधी ने आजाद से मुलाकात की थी और उनसे काफी देर बात भी की थी. बताया गया था कि सोनिया ने गुलाम नबी के लिए कांग्रेस की योजना को व्यक्त किया था. सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी से बातचीत में उन्होंने राज्यसभा चुनाव के बारे में बात नहीं की, लेकिन आजाद से पूछा कि क्या वह संगठन में नंबर दो के पद पर काम करने में सहज महसूस करेंगे. इस पर गुलाम नबी आजाद ने साफ इनकार कर दिया.

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जानकारों की मानें तो संगठन में नंबर दो पर काम करने से इनकार करने को लेकर किए गए सवाल पर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि, ”आज पार्टी चलाने वाले युवाओं और हमारे बीच एक पीढ़ी का अंतर आ गया है. हमारी सोच और उनकी सोच में फर्क है. इसलिए युवा पार्टी के दिग्गजों के साथ काम करने को तैयार नहीं हैं.” बता दें, आजाद पिछले कुछ दिनों से बीमार हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती भी कराया गया था. पार्टी ने गुलाम नबी की जगह युवा नेता इमरान प्रतापगढ़ी को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया है.

राहुल ने लिया प्रतापगढ़ी को राज्यसभा भेजने का फैसला
दरअसल, पार्टी ने युवा नेतृत्व के उत्थान की दिशा में काम करते हुए पार्टी की अल्पसंख्यक शाखा के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया गया है. सूत्रों ने कहा कि यह फैसला राहुल गांधी ने लिया था, जिस पर सोनिया गांधी सहमत थीं. अब चूंकि कांग्रेस आजाद को टिकट नहीं दे सकी, इसलिए सोनिया गांधी ने आजाद को संगठन में शामिल करने के लिए ऑफर किया था.

आजाद के राज्यसभा जाने से बिगड़ता समीकरण?
यहां गुलाम नबी आजाद को राज्यसभा में नहीं भेज पाने के पीछे कांग्रेस की मजबूरी भी थी. दरअसल, आजाद के राज्यसभा जाने से कांग्रेस नेतृत्व को समीकरण बिगड़ने की आशंका थी. वर्तमान में, मल्लिकार्जुन खड़गे विपक्ष के नेता हैं, बता दें यह पद पहले गुलाम नबी आजाद के पास था. आजाद के रिटायर होने के बाद खड़गे को विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया था. ऐसे में गुलाम नबी को अब राज्यसभा भेज5जाता तो खड़के से पद वापस लिया कैसे जाता? बता दें, आजाद वर्तमान में पार्टी की कार्यकारी समिति के सदस्य हैं और हाल ही में सोनिया गांधी द्वारा गठित राजनीतिक मामलों के समूह के सदस्य हैं. सूत्रों ने बताया कि आजाद पिछले कुछ दिनों से पार्टी के कामों में ज्यादा दिलचस्पी भी नहीं ले रहे हैं. उदयपुर में आयोजित चिंतन शिविर में आजाद ने समिति की बैठकों में बहुत कम बात की.

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क्या कमजोर पड़ गया जी-23?
जानकारों की मानें तो राहुल गांधी के साथ भूपेंद्र हुड्डा के समझौते के बाद हरियाणा में फेरबदल हो गया और उसके चलते हुड्डा जी-23 में सक्रिय नहीं थे. वहीं कपिल सिब्बल ने भी पार्टी छोड़ दी. तो दूसरी तरफ मुकुल वासनिक और विवेक तन्खा को राज्यसभा की सीट मिल गई, जिसके कारण G-23 समूह के नेता के रूप में आजाद का महत्व का अब बहुत कम हो गया है. यही सही मौका देखकर पार्टी ने गुलाम नबी को राज्यसभा न भेजकर और संगठन में काम करने की पेशकश भी की थी. हालांकि सोनिया गांधी ने आजाद को उनकी खास भूमिका नहीं बताई कि उन्हें नंबर दो का दर्जा कैसे मिलेगा. क्या उन्हें उपाध्यक्ष या कार्यकारी अध्यक्ष या संगठन का महासचिव बनाया जाएगा? शायद यह भी एक कारण था कि आजाद ने सोनिया गांधी के प्रस्ताव में दिलचस्पी नहीं दिखाई.

अब क्या करेंगे आजाद?
अब सभी की निगाहें वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के अगले कदम पर टिकी हैं. हालांकि कई दशकों तक कांग्रेस के लिए काम कर चुके आजाद को बिहार के एक क्षेत्रीय दल ने राज्यसभा भेजने की पेशकश की थी. उन्होंने यह कहते हुए इसे ठुकरा दिया कि ‘उनका आखिरी समय कांग्रेस के झंडे तले गुजरेगा.

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