क्या है नवजोत सिंह सिद्धू की चांद-सितारे वाली पगड़ी का सच, जानिए…

क्रिकेट का मैदान हो या फिर हो सियासी गलियारा, नवजोत सिंह सिद्धू अपने तीखे बयानों और हरकतों की वजह से सुर्खियों में बने रहते हैं. फिर चाहे उनका इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए पाकिस्तान जाना हो या फिर बीजेपी के खिलाफ बयानबाजी. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह से मतभेद में भी वह जमकर चर्चा में रहे. अब सिद्धू अपनी हरे रंग की चांद सितारों वाली पगड़ी के चलते सुर्खियों में चल रहे हैं. उनकी यह फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है.

सिद्धू की हरे रंग की पगड़ी पर एक चांद और एक तारा प्रिंट है जो पाकिस्तान के झंडे पर लगा हुआ है. कुल मिलाकर कहा जाए तो फोटो में कांग्रेस नेता पाकिस्तान के झंडे वाली पगड़ी के साथ दिख रहे हैं. इस फोटो को पाकिस्तान के एक समर्थक के तौर पर ही वायरल किया जा रहा है. एक यूजर ने इस फोटो को फेसबुक पर साझा किया है और अन्य लोगों से भी इसे शेयर करने को कहा है.

जब पॉलिटॉक्स ने बारीकी से इस फोटो की पड़ताल की तो पता चला कि ये एक फोटोशॉप्ड तस्वीर है और वैसे भी सिख समुदाय के लोग सादी पगड़ी पहनते हैं. ऐसे में इस तरह की पगड़ी पहनने का कोई तुक नहीं निकलता. वैसे भी अगर गूगल पर ‘नवजोत सिंह सिद्धू’ को सर्च किया जाए तो उनकी ओरिजनल फोटो सामने आती है जो इससे बिलकुल अलग है.

दरअसल, इस फोटो को फेसबुक पर साझा किया है गोपाल सिंह चावला ने. चावला पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव हैं. गोपाल सिंह चावला ने तस्वीर साझा करते हुए अन्य लोगों से भी इसे शेयर करने को कहा है. हालांकि उसने ऐसा क्यों किया या ये करके वे क्या दिखाना चाह रहे हैं, ये साफ नहीं हो पाया है. लेकिन लगता है कि ऐसा करके चावला खबरों में बने रहना चाहते हैं. हालांकि बाद में उन्होंने अपने अकाउंट से इस फोटो को डिलीट कर दिया.

खैर, सच जो भी. हमारी पड़ताल में सिद्धू की यह फोटो पूरी तरह से फेक साबित हुई है. यहीं नहीं, सोशल मीडिया के यूजर्स ने भी गोपाल सिंह चावला को जमकर ट्रोल किया है. कुछ सिखों ने चावला की जमकर क्लास भी ली है. सोशल मीडिया पर ट्रोल करते हुए यूजर्स ने यह मैसेज दिया है कि ये पूरी तरह से अस्वीकार्य है.

क्या 2024 में प्रधानमंत्री बनने की तैयारी कर रहे हैं अमित शाह?

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देश के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बीजेपी के दिग्गज़ नेता और मार्गदर्शक लाल कृष्ण आडवाणी की परम्परागत सीट गांधीनगर से लोकसभा चुनाव लड़ा था. यहां उन्होंने कांग्रेस के सी.जे. चावड़ा को बड़े अंतर से मात देकर न केवल अपना राजनीतिक कद दिखाया. बल्कि पिछली सरकार में गृहमंत्री रहे राजनाथ सिंह से उनकी गद्दी ​छीन अपने आपको पार्टी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद नंबर दो पर लाकर खड़ा कर दिया.

पिछली सरकार में यह स्थान राजनाथ सिंह के पास था. इस बार जिस तरह राजनाथ सिंह को 8 कैबिनेट समितियों में से केवल दो में शामिल किया गया, उससे साफ है कि अब पार्टी राजनाथ सिंह को नंबर दो पर रखने के ​बिलकुल मूड में नहीं है. हालांकि बाद में संघ के दखल के बाद उन्हें 6 कमेटियों में जगह मिल गई थी.

इससे पहले चुनाव प्रचार के दौरान जब पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने संसदीय क्षेत्र गांधीनगर में अपनी ताकत का शक्ति प्रदर्शन किया था, तभी पार्टी से जुड़े सभी नेताओं को उनके नंबर दो होने का अहसास हो गया था. यहां तक की उनके नामांकन में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रामविलास पासवान, अरुण जेटली और महाराष्ट्र में अपना चुनाव प्रचार छोड़कर नितिन गडकरी भी वहां पहुंचे थे. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी उनकी तारीफ करते देखे गए.

गृहमंत्री बनने के बाद कार्यभार को देखते हुए अमित शाह पार्टी अध्यक्ष पद से छुटकारा पाना चाह रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी इस बात में मौन स्वीकृति है. तय माना जा रहा है कि जनवरी में नए पार्टी चीफ का चयन किया जाएगा. जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष बना इसकी शुरूआत भी हो चुकी है. जैसी की उम्मीद है, नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री के तौर पर यह अंतिम कार्यकाल होगा. ऐसे में माना यही जा रहा है कि बीजेपी लोकसभा चुनाव-2024 में अमित शाह को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने की रणनीति पर अभी से काम कर रही है.

वैसे भी देखा जाए तो नरेंद्र मोदी के बाद बीजेपी में अमित शाह दूसरे सबसे लोकप्रिय नेता हैं. 2024 में मोदी की आयु 75 साल के करीब हो जाएगी और मोदी-शाह फॉर्मूले के हिसाब से यह उनके संन्यास का वक्त होगा. ऐसे में बीजेपी नए नेतृत्व का निर्माण करेगी जिसके लिए मौजूदा समय में शाह पहली पसंद हैं. यह वजह है कि उन्हें अभी से तैयार किया जा रहा है.

हालांकि इस रणनीति में संघ की स्वीकृति अभी शेष है. सूत्रों की माने तो संघ की चाहत है कि अगला बीजेपी नेतृत्वकर्ता या तो उत्तरप्रदेश से हो या फिर मध्यप्रदेश से. इसके लिए विकल्प के तौर पर दो नेताओं को ढूंढ भी लिया है. पहला नाम है मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, जिन्हें संघ की तरफ से भोपाल प्रेम त्यागने के लिए कहा जा चुका है. उसके बाद से शिवराज सिंह ने दिल्ली में अपनी सक्रियता बढ़ाई भी है. शिवराज सिंह बीजेपी के सर्वशक्तिशाली संसदीय बोर्ड के सदस्य भी हैं. ऐसे में उनकी पीएम पद के लिए उम्मीदवारी कमतर नहीं मानी जा सकती.

दूसरे नंबर पर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम आता है जिन्हें कट्टर हिंदू समर्थक नेता माना जाता है. हिंदी भाषी राज्यों में उनकी लोकप्रियता मोदी और शाह से कमतर नहीं है. लेकिन योगी मोदी-शाह के पक्के भक्त हैं और किसी भी सूरत में अमित शाह के नेतृत्व को नकार नहीं पाएंगे. वहीं शिवराज सिंह का ओहदा अभी पार्टी में उतना ऊंचा नहीं हुआ है जो अमित शाह को टक्कर दे सकें. ऐसे में माना यही जा रहा है कि 2024 का लोकसभा चुनाव अमित शाह के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा और उनके कद के आगे राजनाथ सिंह भी अपनी आवाज तेज नहीं कर पाएंगे.

बदले की भावना या फिर सच में नियमों का पालन कर रहे जगन रेड्डी

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आंध्रप्रदेश में वाईआरएस कांग्रेस के मुखिया जगन मोहन रेड्डी ने जब से नए मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता प्रदेश की सत्ता संभाली है, पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू के लिए कुछ भी सही नहीं जा रहा है. पहले तो जगन रेड्डी ने प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कुल 175 सीटों में से 151 पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर एन.चंद्रबाबू को सत्ता से बेदखल कर दिया. फिर लोकसभा की 25 में से 22 पर कब्जा कर अपनी एक तरफा बढ़ती ताकत का नजारा भी पेश कर दिया. अब इसी का नजराना चंद्रबाबू नायडू को दिया जा रहा है. सत्ता में विदाई के साथ ही सबसे पहले तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष … Read more

केवल सात साल में राष्ट्रीय स्तर की पार्टी कैसे बन गई NPP?

हाल ही में एक चौंकाने वाली खबर सुनने में आयी कि नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला है. अब एनपीपी 8वीं ऐसी पार्टी बन गई है जिसे राष्ट्रीय स्तर की पार्टी होने का दर्जा मिला है. इससे पहले कांग्रेस, बीजेपी, बसपा, एनसीपी, सीपीआई, सीपीएम और तृणमूल कांग्रेस को ही राष्ट्रीय पार्टी होने का दर्जा प्राप्त है. गौर करने वाली बात यह नहीं है कि एनपीपी को नेशनल पार्टी होने का दर्जा मिला बल्कि यह बात है कि केवल 7 सालों में पार्टी ने यह सीढ़ी पार की है जो वाकयी में चौंकाने जैसा है. बीते सात जून को एनपीपी प्रमुख कोनरॉड संगमा ने इसकी जानकारी ट्विटर पर साझा की है.

लोकसभा में इस बार आई बीजेपी की आंधी के बीच एनपीपी का उभरकर आना अपने आप में ही चर्चा का विषय है. देखा जाए तो उत्तर-पूर्व के राज्यों को छोड़ दें तो देश के बाकी हिस्से के लोग शायद ही इस नाम से परिचित होंगे. पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में भी एनपीपी को केवल क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त है. इसके बावजूद इस पार्टी ने अब राष्ट्रीय दलों की सूची में अपनी जगह बना ली है.

नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) की स्थापना लोकसभा अध्यक्ष रहे पीए संगमा ने जुलाई, 2012 में की थी. इससे पहले संगमा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में शामिल थे. फिलहाल बीजेपी के सहयोग से एनपीपी मेघालय की सत्ता पर काबिज है. 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने राज्य की दो में से एक सीट पर कब्जा किया है.

पूर्वोत्तर के आधे से अधिक राज्यों में जब यह खबर मिली तो सियासी गलियारी में यह खबर चौंकाने वाली थी. हालांकि चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश-1968 के प्रावधानों की मानें तो एनपीपी इसकी पूरी हकदार है. इस आदेश के तहत राजनीतिक पार्टियों को सूचीबद्ध किया जाता है. इसके अलावा कौन सी पार्टी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय होने की योग्यता रखती है, इसके लिए भी यह शर्तें तय करता है. इसके तहत राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए तीन शर्तें तय की गई हैं. कोई पार्टी यदि इनमें से किसी भी एक को पूरा करती है तो वह इसकी हकदार हो जाती है.

चुनाव चिह्न आदेश में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए तीन शर्तें निर्धारित की गई हैं. इनमें पहली शर्त है कि चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में छह फीसदी वोट शेयर के अलावा लोकसभा चुनाव में चार सीटें हासिल करना. दूसरी शर्त है कि पार्टी के उम्मीदवारों को कम से कम तीन अलग-अलग राज्यों में लोकसभा चुनाव में कुल सीटों की दो फीसदी सीटों पर जीत हासिल होनी चाहिए. तीसरी शर्त के अनुसार, पार्टी को कम से कम चार राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा हासिल हो.

एनपीपी उक्त तीनों में से केवल तीसरी शर्त को पूरा करती है. पार्टी को मेघालय, मणिपुर और नगालैंड में पहले से क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा हासिल था. अब अरुणाचल प्रदेश में भी पार्टी ने क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा हासिल कर लिया है. देश के सबसे पूर्वी छोर पर स्थित इस राज्य में विधानसभा का चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ ही हुआ था. इसमें एनपीपी ने 60 में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की है. पार्टी का वोट शेयर 14.56 फीसदी रहा था.

इससे पहले एनपीपी ने इसी शर्त को 2018 में मेघालय और नगालैंड में पूरा किया था. मेघालय चुनाव में पार्टी ने 59 में से 19 और नगालैंड की 60 में से पांच सीटें हासिल की थीं. दोनों राज्यों में ही एनपीपी का वोट शेयर 6 फीसदी से अधिक रहा. वहीं एनपीपी ने मणिपुर में 2017 के विधानभा चुनावों में 60 में से चार सीटों पर कब्जा करते हुए क्षेत्रीय पार्टी होने का दर्जा हासिल ​कर लिया था.

चुनाव चिह्न आदेशानुसार, यदि कोई पार्टी संबंधित राज्य के विधानसभा चुनाव में कुल सीटों का तीन फीसदी हिस्सा या तीन सीटें या इनमें जो भी अधिक हो, हासिल करती है तो उक्त पार्टी सूबे में क्षेत्रीय पार्टी का तमगा हासिल करने के योग्य है.

अब राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते कुछ सुविधाओं का एनपीपी को मिलना भी लाज़मी है. एक नेशनल पार्टी बनने के बाद एनपीपी पूरे देश में एक चुनाव चिह्न पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है. इससे पहले उसे यह सुविधा केवल उन्हीं राज्यों में हासिल थी, जहां वह क्षेत्रीय पार्टी है. वहीं, पार्टी को लोकसभा चुनावों में राष्ट्रीय पार्टियों को आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रसारण की सुविधा भी मिलेगी. इसके अलावा सभी नेशनल पार्टियों को आम चुनाव के दौरान अपने स्‍टार प्रचारक नामित करने की सुविधा भी प्राप्‍त होती है.

एक मान्‍यता प्राप्‍त राष्‍ट्रीय पार्टी अपने लिए अधिकतम 40 स्‍टार प्रचारक रख सकती है. एक गैर-मान्‍यता प्राप्‍त पंजीकृत दल के लिए यह आंकड़ा 20 है. स्‍टार प्रचारकों का यात्रा खर्च उस उम्‍मीदवार के खर्च में नहीं जोड़ा जाता, जिसके पक्ष में ये प्रचार करते हैं. ऐसे में एनपीपी को इन सभी सुविधाओं का लाभ आम चुनावों में मिलेगा.

पश्चिम बंगाल में जारी राजनीतिक हिंसा का तांडव कहां जाकर थमेगा?

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पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनावों से पहले ही मौत का तांडव शुरू हो गया था जो अब तक यानी चुनाव ​परिणामों के बाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा है. हाल ही में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ताओं की बीच हुई झड़प में 4 भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत हो गई. बाद में यही कार्यकर्ता पुलिस से भी भिड़ गए. सोमवार को बीजेपी ने बंगाल बंद का ऐलान किया. उस समय लगा कि अब शायद मामला शांत हो जाएगा लेकिन यह शायद तूफान से पहले की शांति थी. पिछले 12 घंटों में फिर तीन हत्या हो गई और कई कार्यकर्ताओं के लापता होने की भी … Read more

एग्ज़िट पोल के बाद कांग्रेस का हाल ‘अपना टाईम आएगा’

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देश में लोकसभा चुनाव के सभी सातों मतदान के चरण पूरे हो चुके हैं. अब इंतजार केवल 23 मई की शाम का है जब चुनावी नतीजे घोषित किए जाएंगे. रविवार शाम जैसे ही वोटिंग खत्म हुई, एग्ज़िट पोल का ‘भूत’ सामने आ गया. एग्ज़िट पोल में बीजेपी को एक तरफा जीत दिलाई जा रही है. वहीं एनडीए अपनी सरकार बना रहा है. इन खबरों के बाद एक तरफ बीजेपी बल्ले-बल्ले कर रही है. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए मिम बन रहे हैं जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं. इस मिम्स में रणवीर सिंह की फिल्म गली बॉय, गैंग आॅफ वासेपुर और ​थ्री इडियट फिल्मों के मिम्स … Read more

‘जिनके पास दो टाइम का खाना नहीं होता है, वे सेना में जाते हैं’

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लोकसभा चुनाव शुरू हो चुके हैं लेकिन राजनेताओं की तीखी नोक-झोंक और कड़वी बयानबाजी कम नहीं हो रही है. हर दिन कोई न कोई मुद्दा ऐसा होता है जिस पर नेता सुर्खियां बटौरने के लिए कमेंट पास करते हैं. फिर दूसरे नेता इसका जवाब भी उसी अंदाज में देते हैं. बयानों से सुर्खियों में आज सबसे उपर कर्नाटक के सीएम कुमार स्वामी का बयान है जिन्होंने देश की सेना के बारे में बयान दिया है. इसी बयान का उत्तर देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें डूब मरने की सलाह ​दी है. मेनका गांधी का मुस्लिमों पर बयान भी चर्चा में बना रहा. वहीं हेमा मालिनी ने द्वारका वासियों की … Read more

‘अगर विपक्ष को ‘अली’ पर विश्वास है तो हमें भी ‘बजरंग बली’ पर विश्वास है’

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देश में लोकसभा चुनाव का रण सज चुका है. बस इंतजार है तो युद्ध की शुरूआत यानि मतदान की. पहले चरण के लिए वोट 11 अप्रैल को पड़ेंगे. पहले चरण के मतदान के लिए आज शाम को चुनाव प्रभार का शोर भी थम चुका है. ऐसे में आज राजनेताओं के कुछ खास बयान आए जो दिनभर चर्चा में बने रहे. यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने फिर बार ‘हनुमानजी’ को लेकर बयान दिया. राजस्थान विधानसभा चुनाव में भी वह इस तरह का विवादित बयान दे चुके हैं. वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर ‘नोट के बदले वोट’ का आरोप लगाया. ‘अगर कांग्रेस सहित सपा-बसपा को ‘अली’ पर विश्वास है तो … Read more

तस्वीरों के साथ मंच से भी गायब हुए वरिष्ठ भाजपायी, अटल-आडवाणी-जोशी नदारद

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बीजेपी पर अकसर आरोप लगता है कि पार्टी वन मैन आर्मी है और इसके कमाण्डर हैं नरेंद्र मोदी. अगर देखा जाए तो यह बात गलत भी नहीं है. कुछ ऐसा ही देखने को मिला आज बीजेपी के दिल्ली मुख्यालय में, जहां पीएम नरेंद्र मोदी सहित पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह और अरूण जेटली ने भाजपा का चुनावी घोषणा पत्र जारी किया. यहां एक बात तो गौर करने लायक रही, वह थी कि संकल्प पत्र से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की फोटो नदारद थी. फ्रंट पेज पर नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगी थी. यहां तक की बीजेपी के भामाशाह लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी न तो मंच पर … Read more

‘बाहर से लाएंगे, बसाएंगे और हम सोते रहेंगे’

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बीजेपी ने आज दिल्ली मुख्यालय में अपना चुनावी संकल्प पत्र जारी कर दिया. 30 सूची घोषणा पत्र में जम्मू-कश्मीर में धारा 370 समाप्त किए जाने का भी जि​क्र किया गया है. इसके बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूख अब्दुल्ला ने जो साम्प्रदायिक बयान दिया, वह दिनभर चर्चा का विषय बना रहा. घोषणा पत्र पर ही अहमद पटेल ने निशाना साधते हुए कांग्रेस-भाजपा के घोषणा में अंतर बताया. वहीं यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ का राहुल-प्रियंका पर दिया बयान छाया रहा. ‘बाहर से लाएंगे, बसाएंगे और हम सोते रहेंगे’ – फारूख अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूख अब्दुल्ला फिर से अपनी तीखे बोल से चर्चा में हैं. बीजेपी के संकल्प पत्र में … Read more