राजस्थान विधानसभा के गठन के 75 साल पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर आज जयपुर में अमृत महोत्सव समारोह आयोजित किया गया. इस गौरवमयी आयोजन के 'विधायी गौरव यात्रा - पूर्व एवं वर्तमान सदस्य समागम' के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने विधानसभा के सदस्यों को एक भावुक और यादगार भाषण दिया. राजे ने पुराने समय के दिग्गज राजनेताओं के आपसी रिश्तों और राजनीतिक मर्यादाओं का जिक्र करते हुए नए और वर्तमान नेताओं को सीख दी कि राजनीति में मतभेदों के बीच भी आपसी सम्मान होना कितना जरूरी है. राजे ने कहा कि नेताओं को आपस में दुश्मनी जरूर करनी चाहिए, लेकिन रिश्तों में थोड़ी गुंजाइश छोड़ देनी चाहिए ताकि जब कभी हम एक-दूसरे के सामने आएं तो नजरें मिला सकें और शर्मिंदा न होना पड़े.
वसुंधरा राजे ने कहा कि राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष गौरवपूर्ण रहे हैं और इस दौरान सभी सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर राजस्थान के विकास को नई दिशा दी है, लेकिन सदन में भाषा का स्तर गिरना चिंता का विषय है. हमें सदन की गरिमा बचानी होगी. अमर्यादित भाषा लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है. दुश्मनी करो, लेकिन संवाद की एक खिड़की हमेशा खुली रखो. राजे ने कहा कि राजनीति से बड़ी इंसानियत होनी चाहिए. नए सदस्यों को सदन में बैठक कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को सीखना चाहिए, जिसके अभी बहुत अभाव देखने को मिल रहा है. सभी विधानसभा अध्यक्षों ने सदन की गरिमा बढ़ाने का कार्य किया और उन्हें स्वयं दो बार मुख्यमंत्री के रूप में सदन में बैठने का सौभाग्य मिला. वर्तमान संसदीय कार्यशैली पर चिंता जताते हुए राजे ने कहा कि सदन में अब अमर्यादित शब्दों के छींटे पड़ने लगे हैं और भाषा का स्तर भी गिर रहा है.
वसुंधरा राजे ने कहा कि पहले विधायक पूरी तैयारी और अध्ययन के साथ सदन में आते थे, इसलिए सदन खचाखच भरा रहता था और नए सदस्य वरिष्ठ नेताओं के भाषण सुनकर सीखते थे. आज स्थिति बदल गई है. नए सदस्य न तो पर्याप्त अध्ययन करके आते हैं और न ही सदन में नियमित उपस्थिति दिखाई देती है. विधानसभा कोई साधारण सदन नहीं है, यहां लिए गए निर्णय पूरे प्रदेश की दिशा तय करते हैं. पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि वर्ष 1985 में धौलपुर से पहली बार विधायक बनने के बाद देखते ही देखते 41 वर्ष बीत गए. राजे ने पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत को याद करते हुए कहा कि वे सदन में अच्छा बोलने वाले विधायक को लड्डू खिलाकर प्रोत्साहित करते थे. वर्ष 2003 में उनकी सरकार ने भी सर्वश्रेष्ठ वक्ता विधायक सम्मान की शुरुआत की थी.
वसुंधरा राजे ने पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत और सबसे लंबे समय तक सीएम रहे मोहनलाल सुखाड़िया का एक बेहद दिलचस्प और अनोखा किस्सा याद किया करते हुए कहा कि एक दौर था जब भैरों सिंह जी और मोहनलाल सुखाड़िया जी के बीच सदन में तीखी बहस होती थी, दोनों एक-दूसरे पर राजनीतिक हमले करते थे, लेकिन जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही खत्म होती थी, दोनों नेता एक ही पान की दुकान पर साथ खड़े होकर पान खाते हुए आपस में बातें करते थे. उनके बीच विचारधारा की लड़ाई थी, पर आपसी दुश्मनी या मनभेद नहीं था. राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उसे मनभेद में नहीं बदलना चाहिए. आज के दौर में जिस तरह से राजनीतिक विमर्श और भाषा का स्तर बदल रहा है, उसमें पुराने नेताओं के ये किस्से नए लोगों के लिए सबसे बड़ी सीख हैं.
राजे ने पक्ष और विपक्ष के रिश्तों में संवाद बनाए रखने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि दुश्मनी जमकर करो, लेकिन एक खिड़की इतनी खुली छोड़ दो कि आमने-सामने आने पर नजरें न झुकें. विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए. राजनीति की लक्ष्मण रेखा से बड़ी इंसानियत होती है और अच्छे-बुरे समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने से रिश्ते मजबूत होते हैं. वसुंधरा राजे ने कहा कि अंत्योदय योजना, महिला आरक्षण, भामाशाह योजना और भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने देशभर में पहचान बनाई. साथ ही 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' की पहल के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का स्वागत किया. वसुंधरा राजे ने एक बार फिर अपने संबोधन का समापन एक शायरी के साथ करते हुए कहा- "आपके हाथों से गुलाब की महक आएगी जरूर, किसी की राहों से कांटे हटाकर तो देखो." राजे ने कहा कि यही भावना लोकतंत्र और जनसेवा की सबसे बड़ी पहचान है.
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