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मप्र: दतिया में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर भारी पड़ने वाले कौन हैं आशुतोष तिवारी?

14 जुलाई 2026
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मप्र: दतिया में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर भारी पड़ने वाले कौन हैं आशुतोष तिवारी?

नामोकन पत्र तक खरीद चुके मिश्रा की उम्मीदों पर हुआ गहरा प्रहार, संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले आशुतोष तिवारी युवा चेहरा, फिर चौंका सकती है विपक्ष की उम्मीदवारी

MadhyaPradesh Politics: मध्यप्रदेश में दतिया विधानसभा पर होने वाले उप चुनाव में भारतीय जनता पार्टी आलाकमान ने इस बार सभी को चौंकाते हुए इस सीट से प्रबल दावेदार माने जा रहे राज्य के पूर्व गृह मंत्री की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए आशुतोष तिवारी को पार्टी उम्मीदवार बनाया. अब तक बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा आए दिन चुनाव लड़ने का दावा कर रहे थे. यहां तक कि उनके नामांकन पत्र खरीदने की खबरें भी आ रही थी लेकिन हाईकमान की ओर से जारी प्रत्याशी की सूची ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया. साल 2003 के विस चुनाव में नरोत्तम मिश्रा ही दतिया से चुनाव लड़े थे लेकिन कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने मिश्रा को हार का स्वाद चखा दिया. अबकी बार बीजेपी ने मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी पर दांव खेला. अब सियासी गलियारों में सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन हैं आशुतोष तिवारी, जो नरोत्तम मिश्रा जैसे दिग्गज नेता पर भारी पड़ रहे हैं.

दतिया जिले के ही रहने वाले आशुतोष तिवारी शांत, संघर्षशील और जमीनी पकड़ वाले नेता माने जाते हैं. वे छात्र जीवन से ही संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे. संघ की शाखाओं से निकलकर वे बीजेपी में पहुंचे और कई पदों पर काम करते हुए आगे बढ़े. आशुतोष तिवारी वर्तमान में पार्टी के प्रदेश प्रकोष्ठ प्रभारी हैं अैर शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं, जहां उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था. 

आशुतोष तिवारी ने पार्टी के लिए जमीनी पर उतरकर काफी काम किया है. हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष रहते हुए आशुतोष ने गरीबों के लिए आवास योजना को गति दी और प्रदेशभर में आवासीय योजनाओं को जमीन पर उतारा. माना जा रहा है क‍ि दतिया में आशुतोष की जमीनी पकड़, साफ छव‍ि और आरएसएस की पसंद के चलते ही उन्हें चुनावी मैदान में उतारा गया है. 

2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में भी आशुतोष तिवारी ने दतिया से अपनी दावेदारी पेश की थी, लेकिन तब उन्हें टिकट नहीं मिल सका था. इस बार पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए उपचुनाव के मैदान में उतारा है. पार्टी के इस फैसले से नरोत्तम मिश्रा को बड़ा झटका लगा है.

बता दें कि दतिया विधानसभा सीट पर इस राजनीतिक हलचल के बीच कानूनी मोर्चे पर भी एक बड़ी तस्वीर साफ हुई है. कांग्रेस के विधायक राजेंद्र भारती को 1998 के दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक के एफडी फ्रॉड (घोटाला) मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाई थी, जिसके चलते उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी. इसी के चलते इस क्षेत्र में उप चुनाव हो रहा है.

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले और बीजेपी द्वारा आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अब दतिया का चुनावी दंगल पूरी तरह सज चुका है. बीजेपी ने जहां संगठन से जुड़े युवा चेहरे को उतारकर अपनी रणनीति साफ कर दी है, वहीं कांग्रेस ने अभी तक दतिया सीट पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं. माना जा रहा है कि बीजेपी के इस चौंकाने वाले फैसले के बाद अब कांग्रेस भी अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव कर सकती है और जल्द ही अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान करेगी.

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