Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर सियासी टकराव थमने का नाम नहीं ले रही है. TMC के तीन धड़ों में बंटने के बाद अब पार्टी में 'असली' होने की जंग शुरू हो गई है. विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने चुनाव आयोग (ECI) के सामने खुद को 'असली तृणमूल' बताते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा पेश किया है. वहीं ममता गुट ने इसे सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की साजिश करार देते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं. अब सवाल यह उठता है कि चुनाव आयोग का फैसला किस खेमे की तरफ झुकता है?
इससे पहले भी यह सवाल महाराष्ट्र में उठा था, जब एकनाथ शिंदे शिवसेना और अजित पवार एनसीपी में अपने विधायकों को लेकर मुख्य पार्टी से अलग हुए थे. उन्होंने भी बिलकुल इसी तरह से स्वयं को 'असल पार्टी' बताते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा पेश किया था. चूंकि उनके पास विधायकों की संख्या अधिक थी, ऐसे में चुनाव आयोग ने दावा स्वीकर करते हुए उनके दोनों दावों पर सहमति की मुहर लगा दी. इससे नई पार्टी सदस्यों के जोर पर बन गयी असली पार्टी और मुख्य पार्टी बन गई कमजोर स्थानीय नई पार्टी, जिनके पास नेतृत्व कर्ता, अनुभव सभी कुछ था लेकिन पुराना नाम नहीं था.
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार दोनों को ही नई पार्टी और नया चुनाव चिन्ह लेकर चुनावी मैदान में उतरना पड़ा. एक कड़वा सच यह भी था कि पार्टी टूटने के बाद नए एवं पुराने दोनों गुटों को ही अन्य पार्टियों के सहारे की बैसाखियां पकड़नी पड़ी. अब ऐसा ही कुछ ममता बनर्जी के साथ भी घटने वाला है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद दावा किया कि उनके गुट के साथ पार्टी के दो-तिहाई से अधिक जनप्रतिनिधि हैं. ऋतब्रत बनर्जी के मुताबिक, 'अधिकांश विधायक, पार्षद और जिला परिषद सदस्य उनके साथ हैं, इसलिए वही वास्तविक टीएमसी का प्रतिनिधित्व करते हैं.'
आशंका को भांपते हुए तृणमूल ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर अभी से सवाल उठाना शुरू कर दिया है. टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग अपने ही नियमों का पालन नहीं कर रहा है. पार्टी से निष्कासित नेताओं के एक समूह को आयोग के फुल बेंच से मिलने की अनुमति देना नियमों के विपरीत है.
सागरिका ने दावा किया कि यह पूरी प्रक्रिया बीजेपी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की साजिश का हिस्सा है और चुनाव आयोग बीजेपी एवं अमित शाह के इशारों पर काम कर रहा है.
हालांकि पुराने फैसलों को देखते हुए तो यही माना जा रहा है कि कालचक्र एक बार फिर से वैसा ही घूमेगा, जैसा पहले घूमा था. फिर से ये देखना होगा कि TMC में छिड़ी ‘असली’ होने की लड़ाई के बीच क्या एक बार फिर अवसरवादिता का फायदा बागी गुट को मिलता है या फिर नहीं?











