बेनिवाल ने राजे और युनुस खान पर लगाए गम्भीर आरोप, निकाय-पंचायत चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ होने की कही बात

(RLP)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में खींवसर विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आने के बाद राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे और राजे सरकार में सड़क एवं परिवहन मंत्री रहे युनुस खान पर उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की मदद करने के गम्भीर आरोप लगाते हुए भाजपा हाईकमान से कार्रवाई की मांग की है. बता दें, राजस्थान में 2 सीटों पर हुए उपचुनाव में मंडावा में कांग्रेस प्रत्याशी रीटा चौधरी ने भारी मतों से जीत दर्ज की है तो वहीं खींवसर में RLP के नारायण बेनिवाल ने कांटे की टक्कर में कांग्रेस प्रत्याशी हरेन्द्र मिर्धा को 4630 मतों से हराया है. आदरणीय @AmitShah जी @JPNadda जी @SatishPooniaBJP … Read more

महाराष्ट्र में हारकर भी सिकंदर बनी NCP, हरियाणा में कांग्रेस ने जिंदा रखी आस

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. आमिर खान की एक फिल्म में एक डायलॉग था ”जो जीता वही सिकंदर”. बात भी सही है लेकिन महाराष्ट्र में NCP ने इस घारणा को गलत साबित कर दिया. भले ही प्रदेश में भाजपा और शिवसेना की स्पष्ट तौर पर एक तरफा सरकार बन रही है लेकिन यहां एनसीपी के शरद पवार हारकर भी सिकंदर बन गए. वहां जीतने के बाद भी भाजपा और शिवसेना के चर्चे नहीं है लेकिन सियासी गलियारों के साथ-साथ मीडिया संस्थानों में भी इस समय केवल और केवल शरद पवार छाए हुए हैं. वहीं हरियाणा में अस्तित्व खोती कांग्रेस ने अपने आपको जिंदा रहने में सफलता हासिल की. महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से … Read more

स्वीकार है हार, खींवसर में RLP ने अपने दम पर की जीत दर्ज, मंडावा में हुआ विश्वासघात: पूनिया

Satish Poonia

राजस्थान की मंडावा और खींवसर सीट पर हुए विधानसभा उपचुनाव के गुरुवार को नतीजे आ गए. मंडावा में कांग्रेस की रीटा चौधरी ने पिछले विधानसभा चुनाव में पहली बार खिले ‘कमल’ को हटाते हुए जबरदस्त जीत हासिल की. वहीं खींवसर में भाजपा समर्थित राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नारायण बेनीवाल ने अपने पहले ही चुनाव में हरेंद्र मिर्धा के सियासी वर्चस्व को परास्त कर जीत दर्ज की. उपचुनाव के परिणाम आने के बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) ने कहा कि 2 सीटों पर उपचुनाव में से भाजपा ने एक सीट गठबंधन के तहत RLP को दी थी. खींवसर में RLP पार्टी का अपना एक आधार था और भाजपा के … Read more

दुष्यंत ने कांग्रेस के साथ जाने के दिए संकेत, कर्नाटक की तर्ज पर बन सकते हरियाणा के मुख्यमंत्री

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. देश में हुए महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों की तस्वीर अब साफ हो गई है. महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन बहुमत के साथ सत्ता में वापसी के लिए तैयार है तो वहीं हरियाणा में भाजपा को बड़ा झटका लगा है. हरियाणा में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बहुमत के आंकड़े से दूर हैं. कांग्रेस अब JJP के साथ मिलकर सरकार बनाने में जुट गई है. वहीं चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद दुष्यंत चौटाला ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सत्ता की ‘चाबी’ मेरे पास है. इसी के साथ चौटाला ने आगे कहा कि जनता ने बीजेपी के खिलाफ वोट दिया है. चौटाला के इस बयान के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) कांग्रेस के साथ जा सकते हैं.

हरियाणा में आये चौकानें वाले परिणामों के बाद अब सत्ता के गलियारे में इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि हरियाणा में भी कर्नाटक की तरह JJP को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपकर कांग्रेस सरकार बना सकती है. यदि ऐसा होता है तो जेजेपी अपने उदय के पहले विधानसभा चुनाव में ही सीएम की कुर्सी तक पहुंच जाएगी जो कि अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. एक साल से भी कम समय में जेजेपी ने हरियाणा की राजनीति में अच्छी खासी पकड़ बना ली है और वह अपने पहले ही चुनाव में 10 सीटें जीतकर निर्णायक भूमिका में आ गई है. सूत्रों के अनुसार कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी से मिले फ्री हैंड के बाद हरियाणा में कांग्रेस के तारणहार भूपेंद्र सिंह हुड्डा अब जेजेपी के दुष्यंत चौटाला और अन्य जीते हुए निर्दलीय विधायकों के संपर्क में हैं.

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बता दें, जननायक जनता पार्टी (JJP) लंबे समय तक हरियाणा की राजनीति में राज करने वाली इंडियन नेशनल लोकदल से ही निकली है. जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला का संबंध पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के परिवार से है. जननायक जनता पार्टी पिछले साल उस वक्त अस्तित्व में आई जब पूर्व सांसद दुष्यंत चौटाला और उनके भाई दिग्विजय चौटाला को इनेलो से बाहर कर दिया गया. दुष्यंत चौटाला को इनेलो से बाहर निकाले जाने की बड़ी वजह चाचा अभय चौटाला से साथ उनके बिगड़े संबंध थे.

JJP प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने उस वक्त राजनीति में कदम रखा जब इंडियन नेशनल लोकदल (INLO) अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही थी. हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल को 2005 और 2009 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. इतना ही नहीं 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी का एक भी कैंडिडेंट जीत दर्ज नहीं कर पाया. 2013 की शुरुआत में इंडियन नेशनल दल के मुखिया ओम प्रकाश चौटाला और उनके बड़े अजय चौटाला जेबीटी घोटाले में जेल जाना पड़ा.

दुष्यंत के पिता अजय चौटाला हमेशा हिसार से चुनाव लड़ा करते थे. इसलिए 2014 के लोकसभा चुनाव में अजय चौटाला के बड़े बेटे दुष्यंत चौटाला को हिसार से लोकसभा चुनाव में टिकट दिया गया. 25 साल की उम्र में दुष्यंत चौटाला ने जीत दर्ज की, बल्कि 16वीं लोकसभा के सबसे युवा सांसद भी चुने गए. सांसद बनने के बाद दुष्यंत की पार्टी पर पकड़ मजबूत होने लगी. 2014 के विधानसभा चुनाव में दुष्यंत चौटाला ने उचाना से विधानसभा चुनाव भी लड़ा. हालांकि इस चुनाव में दुष्यंत चौटाला को पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेम लता के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.

एग्जिट पोल के नतीजे चौंकाने वाले…क्या सच में BJP को ले डूबे राष्ट्रीय मुद्दे?

हरियाणा और महाराष्ट्र में सोमवार को हुए विधानसभा चुनाव के संभावित नतीजे कुछ चौंकाने वाले आ रहे हैं. मतदान के दिन तक जहां दोनों राज्यों में भाजपा की एक तरफा जीत के कयास लगाए जा रहे थे, वहीं मतदान के आंकड़ों के बाद ये पूरी तरह साफ हो गया कि टक्कर कांटे की है. विभिन्न मीडिया सूत्रों के अनुसार हरियाणा में एग्जिट पोल भाजपा की 34 से 44 सीटें जबकि कांग्रेस की 32 से 42 सीटें बता रहे हैं. एग्जिट पोल के मुताबिक एक साल पुरानी जेजेपी पार्टी को 6 से 10 सीटें मिलने के कयास हैं. दोनों पार्टियों 40 सीटों के अंदर सिमटती है तो जेजेपी के चीफ दुष्यंत … Read more

हरियाणा में त्रिशंकु विधानसभा! किंग मेकर की भूमिका में दुष्यंत चौटाला

Dushyant Chautala

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा काफी उत्साह में थी कि मोदी लहर में मनोहर लाल खट्टर और सरकार को सत्ता वापसी में कहीं कोई कठिनाई नहीं आएगी. शायद कांग्रेस और दिल्ली में बैठे पार्टी आलाकमान को भी यही उम्मीद थी. सोमवार को मतदान हुआ और फिर कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद कांग्रेस तो क्या भाजपा की धूरी पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने भी नहीं की होगी. प्रदेश में कांग्रेस सत्ताधारी पार्टी को बराबर की टक्कर दे रही है. एग्जिट पोल के नतीजों के अनुसार, जहां कांग्रेस को 32 तो भाजपा को 34 सीटें मिल रही हैं. अगर एग्जिट पोल सटीक या थोड़े इधर … Read more

इंडिया टुडे-एक्सिस पोल के मतदान बाद सर्वेक्षण में हरियाणा में खंडित जनादेश

Exit Poll Maharashtra and Haryana

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election 2019) के सिलसिले में मतदान के तुरंत बाद तमाम चैनलों ने एक्जिट पोल में भाजपा का जो आंधी-तूफान बताया था, उस पर इंडिया टुडे-एक्सिस पोल की मंगलवार को जारी मतदान बाद सर्वेक्षण की रिपोर्ट ने करीब-करीब पानी फेर दिया है. इस सर्वेक्षण के मुताबिक हरियाणा में इस बार त्रिशंकु विधानसभा का गठन होने के आसार ज्यादा हैं और जननायक जनता पार्टी (JJP) के प्रमुख दुष्यंत चौटाला किंग मेकर के रूप में उभर सकते हैं. इंडिया टुडे-एक्सिस पोल के एक्जिट पोल (Exit Poll) देखकर भाजपा और कांग्रेस, दोनों पार्टियां हैरान हैं. इन नतीजों के मुताबिक हरियाणा में कांग्रेस को 32 फीसदी वोटों के … Read more

राजस्थान: खींवसर-मंडावा सीटों पर उपचुनाव संपन्न, खींवसर में बेनीवाल तो मंडावा में रिटा चौधरी की जीत तय!

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान (Rajasthan) की मंडावा व खींवसर विधानसभा सीट पर उपचुनाव संपन्न हो चुके हैं. चुनावी परिणाम 24 अक्टूबर को आएंगे. सोमवार को हुए मतदान के दौरान मंडावा में 69.62 प्रतिशत और खींवसर में 62.61 प्रतिशत वोटिंग हुई. मंडावा में कांग्रेस की रीटा चौधरी (Rita Choudhary) और भाजपा की सुशीला सीगड़ा (Sushila Sirga) में कांटे की टक्कर है. खींवसर में हनुमान बेनीवाल के गढ़ में कांग्रेस के हरेंद्र मिर्धा (Harendra Mirdha) RLP के नारायण बेनीवाल (Narayan Beniwal) को चुनौती दे रहे हैं. हनुमान बेनीवाल के नागौर से और नरेंद्र खींचड़ के झुंझूनूं से सांसद बनने की वजह से क्रमश: खींवसर और मंडावा विधानसभा सीटें खाली हुई हैं. चारों प्रत्याशी अपनी अपनी जीत का दावा ठोक रहे हैं.

मंडावा विधानसभा सीट

मंडावा (Mandawa) में आजादी के बाद से अब तक हुए चुनावों में भाजपा सिर्फ एक बार 2018 में ही विधानसभा चुनाव जीती है. कांग्रेस की ओर से इस सीट पर विकास सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है, लेकिन भाजपा द्वारा सत्ता का दुरूपयोग एवं कर्मचारियों के तबादलों जैसे मुददे पर सरकार को चुनाव प्रचार के दौरान घेरा गया. मंडावा में कुल 2 लाख 27 हजार 414 मतदाता है जिनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1 लाख 17 हजार 742 है तो वहीं महिला मतदात 1 लाख 9 हजार 672 है. मंडावा इस उपचुनाव के लिए 259 मतदान केंद्रो पर मतदान किया गया.

मंडावा से भाजपा प्रत्याशी सुशीला सिंगडा तीन बार से प्रधान है, क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड है वहीं पार्टी नेताओं व स्थानीय कार्यकर्ताओं में उनके लिए आक्रामक प्रचार किया है. वहीं सुशीला सिंगडा के सामने भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा भितरघात का खतरा भी है. पार्टी कार्यकर्ताओं में सिंगडा की इमेज पैराशूटर की भी है क्योंकि सिंगडा पहले कांग्रेस में थी और टिकट मिलने से महज डेड घंटे पहले ही वो भाजपा में शामिल हुई थी.

वहीं मंडावा से कांग्रेस प्रत्याशी रीटा चौधरी को प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने का फायदा मिल सकता है. साथ ही टिकट मिलते ही रीटा ने घर घर जाकर मतदाताओं से संपर्क बनाने में भी कामयाब रहीं है. रीटा ने पिछले तीन विधानसभा चुनाव मंडावा से लडे है इनमें 2008 का चुनाव रीटा ने जीता था तो वो वहीं 2013 के चुनाव में निर्दलीय के रूप में तो 2018 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर रीटा को हार का सामना करना पडा था. मंडावा विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की सहानुभूति भी इस चुनाव में रीटा के साथ दिखाई दी तो वहीं भितरघात का संकट रीटा के साथ भी है. विधायक बृजेंद्र ओला व राजकुमार से उनकी अदावत किसी से छिपी नहीं है.

खींवसर विधानसभा सीट

खींवसर (Khivnsar) चुनाव में इस बार बेनीवाल व मिर्धा परिवार एक बार फिर से आमने सामने है. इससे पहले मूंडवा विधानसभा क्षेत्र से 1980 में बेनीवाल के पिता रामदेव को हरेंद्र मिर्धा ने हराया था. लेकिन 1985 में हुए अगले ​ही चुनाव में बेनीवाल के पिता रामदेव ने हरेंद्र मिर्धा को हराकर अपनी हार का ​बदला पूरा कर लिया था. 2008 में हुए परीसीमन में मूंडवा व नागौर से ही खींवसर सीट बनी ​थी. जिस पर 2008, 2013 व 2018 के चुनाव में हनुमान बेनीवाल ने जीत दर्ज की.

भाजपा समर्थित रालोपा के टिकट पर खींवसर से चुनाव लड रहे नारायण बेनीवाल प्रत्याशी के रूप में पहली बार चुनावी मैदान में थे. लेकिन चुनाव मैनेजमेंट का उनके पास अच्छा खासा अनुभव है. अपने बडे भाई व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के सभी चुनावों में मैनेजमेंट का सारा काम नारायण ने ही संभाला है इसलिए क्षेत्र के लोगों में उनकी अच्छी खासी पकड है. वहीं उनकी इमेज अपने बडे भाई के उलट एक साधारण व्यक्तित्व की है. वहीं परिवारवाद के ठप्पे का नुकसान नारायण को यहां झेलना पड सकता है तो भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं की नाराजगी का नुकसान भी यहां नारायण को भारी पड सकता है.

वहीं कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र मिर्धा को प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने का फायदा मिल सकता है तो उम्र का तगाजा होने के कारण व उनका आखिरी चुनाव होने के कारण उन्हे क्षेत्र के लोगों की सहानुभूति भी मिलती दिखाई दी तो चुनाव प्रचार के दौरान ज्यादा भागदौड नहीं करने का नुकसान भी यहां हरेंद्र मिर्धा को उठाना पड सकता है.

किसके पक्ष में परिणाम

बहरहाल मंडावा व खींवसर दोनों ही विधानसभा सीटों पर सभी उम्मीदवारों की किस्मत इवीएम में कैद हो गयी है. आने वाली 24 तारीख को ही पता चलेगा की ​मंडावा में कांग्रेस की परंपरागत उम्मीदवार रीटा चौधरी को या कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुई सुशीला सिंगडा में से किसको मंडावा की जनता ताज पहनाती है तो वहीं खींवसर में 34 साल पुरानी बेनीवाल के पिता रामदेव से मिली हार का बदला लेने में हरेंद्र मिर्धा कामयाब हों पायेंगे की नहीं जानना दिलचस्प होगा.

विधानसभा चुनाव-2019: महाराष्ट्र में सबसे अधिक और सबसे कम हुआ मतदान, उपचुनाव में अरूणाचल रहा अव्वल

Maharastra Election 2019

महाराष्ट्र (Maharastra) और हरियाणा में विधानसभा चुनाव और साथ में 17 राज्यों की 63 सीटों पर उपचुनाव सोमवार को संपन्न हो गए. नतीजों में केवल दो दिन का इंतजार है. भारतीय निर्वा​चन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में सबसे अधिक वोटिंग प्रतिशत हुआ है और सबसे कम भी यहीं है. महाराष्ट्र (Maharastra) की करवीर विधानसभा सीट पर सबसे अधिक 79.19 फीसदी मतदान हुआ है. भौकर 78.11 फीसदी वोटिंग के साथ दूसरे और नेवासा 78 फीसदी मतदान के साथ तीसरे नंबर पर रहा. वहीं महाराष्ट्र (Maharashtra) के ही उल्लास नगर विधानसभा में सबसे कम वोटिंग हुई. यहां केवल 31.72 लोगों ने मतदान किया. सबसे कम मतदान वाले इलाकों में कल्याण … Read more

हरियाणा-महाराष्ट्र के विधानसभा सहित उपचुनाव के 63 प्रत्याशियों की तकदीर ईवीएम में हुई कैद

Haryana Election 2019

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. हरियाणा (Haryana Election 2019) की 90 और महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई है. इस बार महाराष्ट्र में 55.33 फीसदी और हरियाणा में 61.62 फीसदी मतदान हुआ जो कि पिछले चुनाव के मुकाबले काफी कम है. 2014 के विधानसभा चुनाव में हरियाणा (Haryana) में 76 फीसदी तो महाराष्ट्र में 63.28 फीसदी वोटिंग हुई थी. वर्तमान में दोनों ही राज्यों में भाजपा सरकार काबिज है. 17 अन्य राज्यों की 64 सीटों पर उपचुनाव के लिए भी आज वोट पड़े. सभी प्रत्याशियों का भविष्य अब ईवीएम में कैद हो गया है जो कि 24 को घोषित किया जाएगा. हरियाणा विधानसभा (Haryana Election 2019) … Read more