महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, बीजेपी में बढ़ रही नाराजगी या शरद पवार करा रहे सेंधमारी

Maharashtra Politics

Politalks.News/Maharashtra. महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ भी ऑल इज वैल नहीं चल रहा. बीजेपी में खासी उठा पलट देखने को मिल रही है. महाराष्ट्र बीजेपी को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं. वरिष्ठ नेता एकनाथ खड़से के बाद अब पूर्व सांसद जयसिंहराव गायकवाड़ ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया. गायकवाड़ ने पार्टी की कार्यसमिति और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. गायकवाड़ बीड से तीन बार सांसद रह चुके हैं. माना जा रहा है कि वे खड़से की तरह शरद पवार की एनसीपी को ज्वॉइन करेंगे. खडसे के बाद गायकवाड़ के पार्टी छोड़ने से उत्तर महाराष्ट्र में बीजेपी को सियासी तौर पर गहरा झटका लगा है. पूर्व … Read more

25 हजार करोड़ के बैंक घोटाले में डिप्टी सीएम अजित पवार सहित 69 आरोपियों को मिली क्लीन चिट

Ajit Pawar Free In Maharashtra State Cooperative Bank Scam

Politalks.News/Maharashtra. महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक घोटाला मामले में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार समेत 69 आरोपियों को क्लीन चिट मिल गई है. इस मामले में मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने एफआईआर दर्ज किए जाने के एक साल बाद सत्र अदालत में मामले की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है. अजित पवार सहित सभी 69 आरोपियों के खिलाफ सबूत न होने के चलते क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है. इस कथित घोटाले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने EOW को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे. इसी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी दर्ज किया गया था. मामला 25 हजार करोड़ का है. राज्य की गठबंधन सरकार में … Read more

विधायकों के बीजेपी के संपर्क में होने की खबरें अफवाह, बीजेपी के विधायक हमारे संपर्क में: एनसीपी

देवेंद्र फडणवीस और नवाब मलिक (एनसीपी)

PoliTalks.news/Maharashtra. मध्यप्रदेश में सरकार के तख्ता पलट के बाद राजस्थान में भी कथित तौर पर बीजेपी द्वारा हॉर्स ट्रेडिंग और सरकार पलटने की कोशिश की जा रही है. राजस्थान के बाद अगला निशाना महाराष्ट्र पर होगा जहां शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की तीन पहियों वाली महाविकास अघाड़ी सरकार चल रही है. उद्धव ठाकरे इस गठबंधन सरकार के मुखिया यानि मुख्यमंत्री हैं. महाराष्ट्र में सियासी गलियारों में लगातार खबर आ रही है कि एनसीपी के 12 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं. यह खबर इसलिए भी लोगों के गले उतर रही है क्योंकि बीजेपी ने शिवसेना के साथ सरकार बनाने को पहले ही हामी भर दी है और कांग्रेस के बयानों को हवा … Read more

राजनीति के असली चाणक्य साबित हुए ‘शरद पवार’ मना रहे 79वां जन्मदिन, प्रधानमंत्री बनने के थे दावेदार

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. वैसे तो वर्तमान राजनीति का चाणक्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को कहा जाता है लेकिन देश की राजनीति का असली चाणक्य अगर माना जाए तो केवल एक है और वो हैं शरद पवार. (Sharad Pawar Birthday Special) केवल 38 साल की आयु में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने शरद पवार की राजनीति सोच और दांवपेच का अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक उन्हें अपना राजनीतिज्ञ गुरु बताते हैं. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party) के संस्थापक और मुखिया शरद पवार केवल महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में एक बड़ा नाम है. हाल … Read more

महाराष्ट्र में सत्ता के लालच ने बिगाड़ी देवेन्द्र फडणवीस की छवि !

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में सुसंस्कृत, शक्तिमान और यशस्वी मुख्यमंत्री की छवि रखने वाले देवेन्द्र फडणवीस सत्ता में रहते हुए के सत्ता-सुख के लिए अपनों का ही काटते रहे पत्ता. जानकारों की मानें तो सत्ता के नशे और दुबारा सत्ता में आने के अतिआत्मविश्वास में देवेन्द्र फडणवीस ने विनोद तावड़े, चंद्रशेखर बावनकुले, सुभाष देशमुख, पंकजा मुंडे, एकनाथ खड़से और चंद्रकांत पाटिल जैसे दिग्गजों से ले लिया सीधा पंगा. अब महाराष्ट्र भाजपा में फडणवीस के विराधी बने ये सभी नेता एकजुट हो रहे हैं. हाल ही में कभी फडणवीस के करीबी रहे एकनाथ खड़से पहुंचे ने दिल्ली जाकर शरद पवार से मुलाकात की. वहीं इधर पंकजा मुंडे और चंद्रकांत पाटिल भी अपनी … Read more

महाराष्ट्र में क्या है एकनाथ खडसे की एनसीपी और शिवसेना से नजदीकी का राज? फडणवीस सरकार के घोटालों की आगे बढ़ेगी जांच!

Eknath Khadse

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. क्या महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस की भाजपा सरकार के समय हुए घोटालों की जांच का फिर से बढ़ेगी आगे ? सिंचाई, किसानों से अरहर दाल खरीदने और जमीन घोटालों में फंसी है पूर्ववर्ती भाजपा सरकार. जानकारों की मानें तो फडणवीस सरकार के समय हुई अरहर खरीद और सिंचाई घोटाले की जांच बहुत जल्द फिर से संभव है. हालांकि सिंचाई घोटाले में एनसपी के नेता अजित पवार का भी सम्बंध बताया जा रहा है, लेकिन एसीबी पहले ही अपनी जांच में अजित पवार को क्लीन चिट दे चुकी है. (Eknath Khadse) अब फडणवीस सरकार में राज्यमंत्री रहे अर्जुन खोतकर और उनके परिजनों की हो सकती जांच. उनके द्वारा 377 … Read more

राकंपा और कांग्रेस के साथ सरकार बनाना शिवसेना को पड़ा भारी, बीजेपी में शामिल हुए 400 शिवसैनिक

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी (MVA) की सरकार तो जैसे तैसे बन गई लेकिन लगता है शिवसैनिकों (Maharashtra ShivSena) को एनसीपी और खास तौर पर मुस्लिम तुष्टिकरण की विचारधारा वाली पार्टी कांग्रेस से गठबंधन करना रास नहीं आ रहा. यही वजह रही कि मुंबई के धारावी में करीब 400 शिवसेना कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली. ये सभी कार्यकर्ता शिवसेना के कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने से खासे नाराज बताए जा रहे हैं. कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिवसेना ने भ्रष्ट और विरोधी विचारधारा वाले दलों से हाथ मिलाया है. धारावी के एक कार्यक्रम में इन सभी ने भाजपा की … Read more

शरद पवार के इस खुलासे ने बढ़ाई केंद्र की राजनीति में हलचल

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष शरद पवार ने बड़ा खुलासा (Sharad Pawar) करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने उन्हें ‘साथ मिलकर’ काम करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया. वहीं शरद पवार ने उन खबरों को खारिज कर दिया कि मोदी सरकार ने उन्हें देश का राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव दिया था. पवार ने बताया, “हां लेकिन, मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में सुप्रिया (Supriya Sule) को मंत्री बनाने का एक प्रस्ताव जरूर मिला था.”

महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम में ‘मैन ऑफ द मैच’ बने संजय राउत के तीखे तेवरों ने बनाई शिवसेना की सरकार

(Sanjay Raut)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में ठाकरे राज कायम हो गया और उद्वव ठाकरे मुख्यमंत्री बन गए. महाविकास अघाड़ी गठबंधन वाली इस सरकार के शिल्पकार शरद पवार रहे जिन्होंने अपने कुटिल चाणक्य दिमाग से बीजेपी के धुरंधर अमित शाह तक को मात दे दी, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में एक महीने चले इस सियासी मैच में ‘मैन ऑफ द मैच’ बने बाला साहब की सेना के सच्चे सिपाही संजय राउत (Sanjay Raut) की उनके सपने को पूरा करने की निष्ठा और तटस्थता को किसी तरह से कम नहीं आकां जा सकता. विधानसभा चुनाव के बाद से ही संजय राउत एक ही बात पर अडिग रहे कि चाहे कुछ भी हो मुख्यमंत्री शिवसेना का ही बनेगा. संजय राउत ने कहा कि पूरे महाराष्ट्र की जनता की भावना है और लाखों शिवसैनिकों की भी भावना है कि मुख्यमंत्री शिवसेना का ही हो, ताकत के बल पर कोई महाराष्ट्र की कुंडली नहीं बदल सकता, ये बालासाहेब की सेना है और शतरंज खेलने में माहिर संजय राउत ने महाराष्ट्र की सियासत में इस तरह मोहरे फिट किए कि वे हारी हुई बाजी जीतने वाले ‘बाजीगर’ बन गए.

संजय राउत शिवसेना की ओर से राज्यसभा सांसद के साथ पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव संपादक भी हैं. एक लेखक, एक रिपोर्टर के तौर पर जाने जाने वाले संजय अपने तीखे बोल की वजह से खासतौर पर पहचाने जाते हैं. महाराष्ट्र के चुनावी नतीजे आने के बाद बीजेपी के साथ सत्ता के बंटवारे के तहत सरकार में बराबर की भागीदारी की मांग सबसे पहले संजय राउत (Sanjay Raut) ने ही उठाई. गौर करने वाली बात ये रही कि पार्टी प्रमुख उद्दव ठाकरे तक ने इस बारे में कोई टीका टिप्पणी नहीं की और एक तरह से राउत को ही फ्री हैंड दे दिया.

वे संजय राउत ही थे जो चुनावी नतीजों से पहले और बाद में भी लगातार शरद पवार सहित अन्य कांग्रेस नेताओं से संपर्क साध रहे थे. उन्हीं के कहने पर उद्दव ठाकरे ने एनसीपी की शर्त के अनुसार, मोदी सरकार में एक मात्र शिवसेना मंत्री अरविंद सावंत को मंत्री पद से इस्तीफा दिलवाया.

वे संजय राउत ही थे जिन्होंने एक तरफ तीनों पार्टियों का आपस में सम्पर्क बनाए रखा और दूसरी तरफ सामना के माध्यम से देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते रहे. उन्होंने किसानों सहित ऐसे मुद्दे प्रमुखता से उठाये जो फडणवीस और बीजेपी सरकार की कमजोर कड़ी थे. इसके अलावा, उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल को भी देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधने का प्रमुख अस्त्र बनाया और वहां से तीखे प्रहार जारी रखे. संजय राउत (Sanjay Raut) शिवसेना के ऐसे नेता रहे जो न केवल इन चुनावों में प्रमुखता से हाईलाइट हुए, बल्कि अपनी बात पर अडिग रहते हुए ऐसा कारनामा कर दिखाया जिसकी आस बीजेपी तो क्या, खुद शिवसेना और उद्दव ठाकरे तक को नहीं थी.

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संजय राउत ने उद्दव ठाकरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए राजी किया जो इस रेस में कभी थे ही नहीं. भाजपा से बातचीत में भी हमेशा उद्दव के बड़े बेटे आदित्य ठाकरे को ही सीएम पद का दावेदार बताया गया. लेकिन गठबंधन की दोनों पार्टियों के वीटो के बाद किसी अनुभवी को ही मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठी, यहां एक बार तो खुद संजय राउत (Sanjay Raut) का नाम भी शरद पवार ने मुख्यमंत्री के लिए उठाया और संकेत एकनाथ शिंदे के भी आने लगे. लेकिन राउत के प्रयासों के बाद आखिर में महाविकास अघाड़ी गठबंधन के नेता बनकर उद्दव बाला साहेब ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की. गौर करने वाली बात ये भी रही कि न तो उद्दव ने चुनाव लड़ा और न ही सक्रिय तौर पर राजनीति की. हां, पर्दे के पीछे रहकर सत्ता को नियंत्रित जरूर किया.

महाविकास अघाड़ी सरकार के शिल्पकार रहे शरद पवार ने सबसे बड़ा जो काम किया वो यह कि कट्टर हिंदूवादी शिवसेना और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली कांग्रेस यानि दो विपरीत विचारधारा वाली कट्टर विरोधी पार्टियों को एक लाइन में लाकर खड़ा कर दिया. इस खासे मुश्किल काम में उनकी सहायता की संजय राउत ने जिनके बिना शायद ये सम्भव नहीं हो पाता. शरद पवार भी संजय राउत (Sanjay Raut) की भूमिका से अनभिज्ञ नहीं हैं. यही वजह रही कि तीनों पार्टियों की जब एक साथ परेड कराई गई तब उद्दव ठाकरे और शरद पवार ने संयुक्त तौर पर उन्हें महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीति का ‘मैन ऑफ द मैच‘ कहकर पुकारा.

महाराष्ट्र की राजनीति के पल पल बदलते घटनाक्रम में एक दौर वो भी आया जब वे बीमारी के चलते लीलावती अस्पताल में भर्ती हुए. इस दौरान राज्यपाल ने एनसीपी को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया था लेकिन शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस में आपसी संपर्क कमजोर पड़ने से सियासी गतिविधियां अचानक से बदल गई और राष्ट्रपति शासन लागू हो गया. लेकिन संजय राउत ने जल्दी ही अस्पताल की चार दिवारी से निकलते हुए फिर से मोर्चा संभाला और तीनों पार्टियों के बीच टूटी कड़ियों को फिर से जोड़ते हुए बतौर एक सूत्रधार काम किया.

संजय राउत की मेहनत रंग लाई. इसके साथ ही कथित तौर पर शरद पवार की बेहद उच्च कोटि की सियासी रणनीति में पूरा महाराष्ट्र ऐसा उलझा कि बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह तक उलझ कर रह गये. शरद पवार ने ऐसी तिहरी चाल खेली कि एक ही झटके में राष्ट्रपति शासन भी हट गया, प्रदेश की सत्ता की कुर्सी पर गठबंधन का मुख्यमंत्री भी विराजमान हो गया और बीजेपी की छवि भी धूमिल कर दी.

खैर…जो भी हुआ, अंत भला तो सब भला. जो भी हुआ हो और जिसने भी किया हो, संजय राउत (Sanjay Raut) की ईमानदारी और पार्टी के प्रति निष्ठाभाव कम न हुआ. हालांकि इस पूरे सियासी नाटक से पर्दा गिरने से उठने तक संजय राउत को किसी बड़े पद के तौर पर कोई ईनाम भले ही न मिला हो लेकिन शिवसेना को एक वरिष्ठ नेता, प्रखर वाचक और एक रणनीतिकार जरूर मिल गया है जिसकी जरूरत उन्हें फिर से भविष्य में पड़ने वाली है.

‘पवार जी सिर्फ मेरे पिता नहीं हैं वह मेरे बॉस भी हैं and Boss is always right’- सुप्रिया सुले

Supriya Sule with Sharad Pawar

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. सोमवार को राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता शरद पवार ने एबीपी के मराठी न्यूज़ चैनल एबीपी माझा के एक साक्षात्कार में दावा किया था कि पीएम मोदी ने साथ काम करने का प्रस्ताव दिया था. मंगलवार को पवार के इस बयान पर नेशनल न्यूज़ चैनल एनडीटीवी इंडिया से खास बातचीत करते हुए शरद पवार की सांसद बेटी सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने कहा कि, “यह पीएम मोदी की ‘उदारता’ थी लेकिन मेरे पिता ने ‘विनम्रतापूर्वक’ मना कर दिया था.” सुप्रिया (Supriya Sule) ने कहा, “मैं इस मीटिंग में नहीं थी, यह दो वरिष्ठों के बीच थी. यह पीएम मोदी की उदारता था कि उन्होंने ऐसा प्रस्ताव दिया. महाराष्ट्र … Read more