राजधानी दिल्ली में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने मीडिया से वार्ता करते हुए कश्मीर में विदेशी डेलिगेस्ट के दौरे को संविधान और जनतंत्र की हत्या बताया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र व हरियाणा विधानसभा चुनाव में जनता ने भाजपा को सबक सिखाया है.
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वीडियो खबर: पूनिया ने कांग्रेस पर लगाए सरकारी तंत्र का दुरूपयोग करने के आरोप
निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर आयोजित हुई इस बैठक के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) ने कांग्रेस पर सरकारी तंत्र का दुरूपयोग करने के आरोप लगाये. पूनिया ने कहा कि कांग्रेस इन निकाय चुनावों (Municipal Elections) में तिगडम बैठाने में लगी हुई है. चुनाव परिणाम आने के 7 दिन बाद अध्यक्ष पद का चुनाव होगा इससे जाहिर है कि सरकार इस दौरान अपने सरकारी तंत्र का दुरूपयोग करके तिगडम बैठाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी.
राजस्थान सीएम अशोक गहलोत की नजर में गाड़ी रखने वाला हर आदमी मालामाल
पॉलिटॉक्स ब्यूरो. देश में चारों ओर आर्थिक मंदी का माहौल है. उद्योग खत्म हो रहे हैं और देशभर के नौजवान अपनी नौकरियों से हाथ धोकर घर बैठने को मजबूर हैं. एक सर्वे के अनुसार, साल 2020 तक देश के करीब 10 लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे. राजस्थान जैसे राज्य की हालात तो और ज्यादा खराब है. इस दम घोटती महंगाई वाले माहौल में प्रदेश की गहलोत सरकार द्वारा स्टेट हाईवे पर निजी वाहनों पर टोल (State highway Toll) फिर से लागू कर दिया गया है. हद तो तब हो गयी जब राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे जन विरोधी नहीं बल्कि जनहित का फैसला बताते हुए सरकार के इस निर्णय को स्वागत योग्य बताया.
अपने दिल्ली प्रवास के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि जो लोग कार रखते हैं वो पूरी तरह से टोल चुकाने में सक्षम हैं. ऐसे में इसे मुद्दा न बनाएं. राजधानी दिल्ली में बयान देते हुए सीएम गहलोत ने कहा, ‘सड़कें 20-25 साल के ठेके पर हैं. इसमें निजी कारों का टोल शामिल है. सरकार पर तीन साल बाद एक हजार करोड़ तक का भार आएगा, इसे कैसे चुकाएंगे. कार चलाने वाले लोग टोल चुकाने में सक्षम हैं. उन्हें इसका मुद्दा न बनाकर जनहित के फैसला का स्वागत करना चाहिए’.
अब 1 नवम्बर रात 12 बजे बाद से हर नाके पर सभी प्राइवेट वाहनों को भी 30 से 55 रुपये तक टोल देना होगा. कहने को तो 30 से 55 रुपए एक छोटी रकम लगती है, अगर ये रकम एक साल या एक महीने में एक बार देनी हो तो बात अलग है लेकिन अगर यह छोटी रकम एक दिन में 200 से 300 किलोमीटर के सफर में 3 से 4 बार देनी पड़े और साथ में नेशनल हाइवे के भारी भरकम टोल को भी झेलना पड़े तब इस छोटी रकम की कीमत अगर कोई समझ सकता है तो वह है एक छोटी गाड़ी और सामान्य नौकरी पेशे वाला आम आदमी.
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इस बेरोजगारी और मंदी वाली परिस्थितियों के बीच गहलोत जी को आमजन की जेबें हलकी करने वाला ये तुगलकी फरमान भी जनहित का फैसला लग रहा है. वहीं लोकसभा चुनाव में केवल सत्ता के समीकरण साधने के लिए पेश हुए सरकार के पहले बजट में गहलोत ने कहा था, ‘पिछली सरकार में राजस्थान की जनता पर बेदर्दी के साथ टैक्स की मार पड़ी थी. विधानसभा चुनाव का भार भी जनता के माथे पड़ा है. ऐसे में जनता के साथ हमदर्दी रखते हुए कांग्रेस सरकार कोई नया टैक्स न लगाते हुए जनता के साथ न्याय कर रही है’. लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई, अब टोल टैक्स का भार भी जनता के सिर डाला गया है.
सीएम गहलोत की नजरों में जिन घरों में कार या निजी वाहन हैं, वे सभी पैसों में खेल रहे हैं और उन्हें 50 रुपये देने में कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन अगर कोई छोटी कार व सामान्य नौकरी पेशे वाला आदमी दिन में दो या चार बार टोल पार करता है तब भी शायद गहलोत ये ही कहेंगे. अगर सच में सरकार को ईएमआई पर कार और घर खरीदने वाले प्रदेश के सामान्य नौकरी पेशा आदमी का 50 या 100 रुपये के हिसाब से महीने का तीन हजार रुपये का खर्च कोई भार नहीं लगता तो हाल में गहलोत सरकार ने डीए के नाम पर विधायकों के वेतन में 15 फीसदी की बढ़ोतरी क्यों की, जबकि सभी जानते हैं कि विधायकों को घर, कार, पेट्रोल, फोन सहित अन्य प्रकार के सभी खर्चे सरकार द्वारा ही वहन किए जाते हैं. ऐसे में उनके वेतन बढ़ाने की जरूरत क्यों हुई. वो भी तब जब जनता मंदी और कर्ज के भार के नीचे दबी जा रही है. ये भी याद दिला दें कि 18 महीने पहले ही पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार ने सभी विधायकों के वेतन में 12 फीसदी की बढ़ोतरी पहले ही कर दी थी.
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इसके दूसरी ओर, राजस्थान एक ऐसा राज्य है जहां दिल्ली, बिहार, बंगाल, नेपाल, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के लोग भी यहां नौकरी और मजदूरी की तलाश में आते हैं. ये लोग कम दरों पर भी काम करने को तैयार हैं जिससे श्रम की न्यूनतम आय भी दिनोंदिन घटती जा रही है. सरकारी आंकड़ों पर नजर डाले तो राजस्थान का न्यूनतम वेतन केवल 5850 रुपये है. इनके एक दिन की सैलेरी 225 रुपये मात्र है. यह नोटिफिकेशन दिनांक 6 मार्च, 2019 को सी.बी.एस. राठौड़, अति श्रमआयुक्त एवं संयुक्त शासन सचिव, राजस्थान जयपुर ने जारी किया है जो 1 मई, 2019 से लागू है.
हालांकि इस बात में कोई संशय नहीं है कि अशोक गहलोत ने पिछले साल प्राइवेट वाहनों को स्टेट हाईवे टोल मुक्त कराने का फैसले को वसुंधरा सरकार का चुनावी हडकंडा बताया था, जो एकदम सच है. विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कुछ महीनों पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने स्टेट हाईवे टोल (State highway Toll) हटाया था. सरकार के इस फैसले से प्रदेश की जनता को थोड़ी ही सही लेकिन राहत मिली थी जिसे गहलोत सरकार अब छीन रही है. खुद सरकार में कैबिनेट मंत्री उदयलाल आंजना ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि एक बार छूट देने के बाद अगर टोल वापस लगेगा तो विरोध होगा. आंजना ने इस संबंध में मुख्यमंत्री गहलोत से बात करने को भी कहा है.
उधर विपक्ष इस बात को जोर शोर से हवा दे रहा है, ऐसे में विपक्ष के विरोध में आमजन के साथ सत्तापक्ष के कुछ नेताओं का साथ अगर मिल जाता है तो सरकार को अपने इस तुगलकी फरमान से पीछे हटना पड़ सकता है. सरकार को अपने इस हितकारी फैसले (State highway Toll) से सालाना 300 करोड़ रुपये की आय की चिंता है लेकिन दम तोड़ती महंगाई में इस तरह का फैसला कहां तक सही है. इस फैसले से निश्चित तौर पर प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक कलह को हवा मिलेगी, ये भी तय है. दरअसल, स्टेट हाईवे मंत्रालय उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के अधीन आता है लेकिन टोल वसूली का फैसला वित्त मंत्रालय से जुड़ा है जो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अधीन है. ऐसे में वित्त मंत्रालय के प्रस्ताव के जरिए यह काम हो रहा है.
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पॉलिटॉक्स के नजरिये से गहलोत सरकार का यह कदम (State highway Toll) न केवल आत्मघाती सिद्ध होगा, साथ ही निकाय चुनावों में सत्ता पक्ष का पलड़ा उलटने वाला साबित हो सकता है. इस मामले में मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा कि हर निर्णय को चुनाव के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए, जनभावना का ध्यान रखा जाना चाहिए. पायलट खुद पार्टी अध्यक्ष हैं और उन्हें टोल लगाने का फैसला उचित ही लगेगा. ऐसा कहकर जोशी ने वित्त मंत्रालय के प्रस्ताव से वसूले जाने वाले टोल का मामला पायलट के पाले में डाल दिया है. लेकिन अगर इस फैसले का असर निकाय चुनावों पर पड़ता है तो निश्चित तौर पर प्रदेश सरकार का ये फैसला आमजन के लिए नहीं वरन् गहलोत सरकार के लिए आत्मघाती होगा.
स्टेट हाइवे पर निजी वाहनों पर टोल शुरू, सरकार के फैसले के बाद गर्माई प्रदेश की सियासत, शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी
पॉलिटॉक्स ब्यूरो. देशभर में इन दिनों आर्थिक मंदी का आलम है और राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है. ऐसे में राजस्थान सरकार ने निजी वाहन मालिकों को पिछले 18 महिनों से स्टेट हाइवे पर मिल रही राहत को खत्म करते हुए आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है. सरकार ने एक बडा निर्णय लेते हुए 1 नवंबर की रात से निजी वाहनों पर भी स्टेट हाईवे पर टोल (Toll Tax on State Highway) देना फिर से अनिवार्य कर दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पिछले साल 1 अप्रेल 2018 से प्रदेश में निजी वाहनों के लिए स्टेट हाइवे पर टोल फ्री किया था. सरकार के इस निर्णय के बाद प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है. भाजपा इस मुददे पर सरकार को घेरने के लिए शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन कर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेगी.
गहलोत सरकार के इस निर्णय के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया. गुरुवार सुबह भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने गहलोत सरकार के इस फैसले (Toll Tax on State Highway) को सरकार की तरफ से प्रदेश की जनता को दिवाली का तोहफा बताया तो इस पर दिल्ली में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक प्रेस वार्ता में जवाब देते हुए कहा की भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया अभी नये-नये मुल्ला है और नया-नया मुल्ला जोर से बांग देता है. सीएम गहलोत के इस बयान पर पूनिया ने पलटवार करते हुए कहा कि मैं मुल्ला नहीं हूं बल्कि मुझे लगता है कि यह गहलोत और कांग्रेस की प्रदेश में आखिरी पारी है.
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गहलोत सरकार द्वारा लिए गए टोल वापसी (Toll Tax on State Highway) के निर्णय के बाद भाजपा ने सरकार पर हल्ला बोल शुरू कर दिया है. प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर गुरूवार शाम आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि प्रदेश के छोटे निजी वाहन मालिकों पर वित्तिय भार पडता था इसलिए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 1 अप्रेल 2018 को टोल माफी की थी. भाजपा सरकार के समय में भी प्रदेश में ऐतिहासिक सड़कें बनी थीं. प्रदेश की गहलोत सरकार यह तय नहीं कर पा रही है यह निर्णय किसके कहने पर हुआ. मुख्य सचेतक महेश जोशी कहते हैं कि इस मामले पर सचिन पायलट बयान दे सकते हैं. सरकार के भीतर इस मामले पर दो राय दिख रही है. गहलोत सरकार का यह दूसरा जनविरोधी निर्णय है. साथ ही पूनिया ने बताया कि टोल वापसी के विरोध में शुक्रवार को प्रदेश भर के जिला मुख्यालयों पर भाजपा धरना प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर को ज्ञापन देगी.
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इससे पहले गुरुवार को प्रदेश सरकार के टोल वापसी के निर्णय पर जब उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से पूछा गया तो वो इस सवाल को बार-बार टालते नजर आए. वहीं मुख्यमंत्री गहलोत ने दिल्ली में इस निर्णय पर कहा वसुंधरा राजे का टोल हटाने का फैसला एक चुनावी हथकंडा था, ये मैरिट के आधार पर लिया गया फैसला नहीं था. प्राइवेट कार चालकों का टोल माफ करने का क्या कारण था, सतीश पूनिया को यह समझने में वक्त लगेगा. टोल माफी मामले को वे समझ नहीं पा रहे हैं. पूनिया जी को मोदी जी और अमित शाह ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के खिलाफ टारगेट देकर भेजा गया है.
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि जनता की मांग पर भाजपा सरकार ने स्टेट हाईवे पर निजी वाहनों को टोल फ्री किया था. अब कांग्रेस सरकार उस फैसले को बदलकर वापस टोल वसूली शुरू करने जा रही है. ये ही अंतर है कांग्रेस व भाजपा में, हम जनता को राहत देने का काम करते हैं, वो आहत करने का काम करते हैं.
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राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के मुखिया हनुमान बेनीवाल ने इस मामले पर सोशल मीडिया पर लिखा कि गहलोत सरकार का राजस्थान में राज्य राजमार्गो पर निजी वाहनों को पुनः टोल टैक्स (Toll Tax on State Highway) के दायरे में लाने का निर्णय जन विरोधी है. राजस्थान सरकार इस प्रकार के निर्णय से जनता की भावनाओं के साथ खेल रही है, जिसे बर्दाश्त नही किया जाएगा. किसान हुंकार रैलियों में राज्य को सम्पूर्ण टोल मुक्त करना हमारा प्रमुख एजेंडा था जिसमें तत्कालीन भाजपा सरकार ने स्टेट हाइवे पर प्राइवेट वाहनों को टोल मुक्त करके कुछ राहत दी थी. बेनीवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार अगर इस जन विरोधी निर्णय को वापिस नही लेती है तो इस मामले में बड़ा आंदोलन किया जाएगा. साथ ही बेनीवाल ने यह भी कहा कि वाहन चालक जब वाहन टैक्स देते है तो फिर टोल टैक्स क्यो ?
प्रदेश की गहलोत सरकार में सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि एक बार छूट देने के बाद वापस लगाने पर विरोध तो होता ही है, मैंने भी फैसले पर साइन किए हैं, सीएम गहलोत से इस मामले पर बात करेंगे आज सीएम गहलोत बाहर है. वहीं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि भाजपा ने चुनावी स्टंट के रूप में किया था टोल माफ, अगर माफ करना होता तो शुरुआत में ही करते, 2018 में चुनाव से ठीक पहले क्यों किया टोल माफ?
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परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि प्रदेश में सड़कों के हालात सुधारने के लिए ज़रूरी है टोल, इस फैसले से प्रदेश के राजकोष को भी मिलेगी मज़बूती. वहीं भाजपा को चुनौती देते हुए खाचरियावास ने कहा कि ‘टोल वसूली का विरोध कर रही बीजेपी केंद्र में सत्ता में है, नेशनल हाईवे पर केंद्र टोल खत्म करें फिर हमसे पूछे सवाल, हम तो टोल लेकर प्रदेश के जर्जर सड़क तंत्र को करेंगे ठीक’
वहीं सरकार के टोल वापसी के इस निर्णय पर मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा कि ‘डिप्टी सीएम पायलट पीडब्ल्यूडी महकमे के मंत्री है. कई कार्यकर्ताओं ने पायलट के पास अपनी बात पहुंचा दी है, वे जनभावना का ध्यान रखते हुए उचित फैसला करेंगे. केन्द्रीय राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि राज्य सरकार का यह फैसला एक जन विरोधी कदम है.
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स्टेट हाइवे पर फिर से टोल वसूली के सम्बन्ध में गुरूवार को सचिवालय में मुख्य सचिव डीबी गुप्ता की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित हुई. इस बैठक में एसीएस वीनू गुप्ता, पीडब्ल्यूडी अतिरिक्त सचिव और सीई अनूप कुलश्रेष्ठ, अतिरिक्त सीई बीओटी टीसी गुप्ता सहित अन्य मौजूद रहे. बैठक के बाद मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने इस पूरे मामले पर कहा मुख्य तौर पर प्रदेश में सडकों के पीपीपी प्रोजेक्ट चल रहे है. ऐसे में सरकार को इंटरेस्ट राशि चुकाने में दिक्कत आ रही थी. स्टेट हाइवे पर टोल नहीं होने से राशि नहीं जुट पा रही थी. टोल लागू (Toll Tax on State Highway) करना जरूरी हो गया था. सडकों की मरम्मत व रखरखाव के लिए टोल लागू करना जरूरी हो गया था. गुप्ता ने यह भी कहा कि नेशनल हाईवे पर भी लगता है टोल इसलिए लगाना पड रहा है. टोल से मिलने वाली राशि सडकों के रखरखाव में खर्च होगी.
सतीश पूनिया को सीएम गहलोत ने कहा नया-नया मुल्ला हैं इसीलिए वे जोर-जोर से बांग दे रहे
पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया पर जोरदार तंज कसते हुए उनको नया-नया मुल्ला कहा है. गुरुवार को मुख्यमंत्री गहलोत ने दिल्ली में एक प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि, “पूनियां जी को बातें समझने में वक्त लगेगा, वे नए-नए मुल्ला हैं, जो नया मुल्ला होता है वो जोर-जोर से बांग देता है, उनकी अभी वही स्थिती बनी हुई है.“
सीएम गहलोत (CM Ashok Gehlot) यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा, “सतीश पूनिया को मोदी और अमित शाह ने राजस्थान के मुख्यमंत्री को टारगेट करने को कहा है. पूनिया को अमित शाह और नरेन्द्र मोदी की तरफ से इशारा है कि हमारे आरएसएस पर, भाजपा पर, अमित शाह पर और खुद मोदी जी पर राजस्थान के मुख्यमंत्री द्वारा लगातार अटैक किया जा रहा है. इसलिए राजस्थान के मुख्यमंत्री को टारगेट बना कर ही आपको राजनीति करनी है, ये विषेश रूप से उन्हे काम सौंपा गया है.”
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बता दें, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बुधवार से दिल्ली प्रवास पर है. गहलोत ने गुरुवार को जोधपुर हाऊस में पत्रकारों को सम्बोधित किया. इस दौरान प्रदेश में स्टेट हाइवे पर निजी वाहनों पर दुबारा से लागू किये गए टोल टैक्स पर बीजेपी द्वारा विरोध किये जाने की बात पर मुख्यमंत्री गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पूनिया पर ये जोरदार तंज कसे. इसके साथ गहलोत ने निजी वाहनों पर टोल टैक्स लगाने के अपने फैसले को सही बताते हुए पिछली वसुंधरा राजे सरकार द्वारा लिए गए फैसले पर कहा कि जो प्राइवेट कार है उनका टोल टैक्स माफ करने का तुक क्या था?
स्टेट हाइवे को निजी वाहनों के लिए पूर्ववर्त्ती राजे सरकार द्वारा अप्रैल, 2018 में टोल फ्री किये जाने के फैसले पर मुख्यमंत्री गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने वसुंधरा राजे पर आरोप लगाते हुए कहा कि, “राजे सरकार का ये फैसला सिर्फ चुनाव जीतने के हथकंडे के रूप में था. अगर सिर्फ सरकारी खजाने का सवाल होता तो भी मैं उसे लगे रहने देता,परंतु सभी सड़कों को टोल टैक्स ठेके पर दी गई हैं, 15 से 25 साल के लिए. ऐसे में सरकार पर बहुत भार आएगा, हमें जो लीगल राय मिली है उसके आधार पर हमने जनहित में ये फैसला लिया है.
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वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अलवर के बहुचर्चित पहलू खां मॉब लिंचिंग मामले पर आए हाईकोर्ट के फैसले पर कहा कि पहलू खां केस में हमने एसआईटी बनाई, जिसके बाद हम लोगों ने एसआईटी की रिपोर्ट पर हाइकोर्ट में दस दिन पहले अपील की. मुझे (CM Ashok Gehlot) उम्मीद है कि पहलू खां को न्याय मिलेगा. पहलू खां मॉब लिंचिंग को लेकर पूरे देश में प्रतीक बन गया है. जब-जब भी देश में मॉब लिंचिंग होगी तब-तब पहलू खां का जिक्र जरूर आएगा. न्यायपालिका, ब्यूरोक्रेसी, पुलिस और आम लोगों में भी पहलू खां प्रतीक बन गया है. राजस्थान सरकार की ड्यूटी है कि पहलू खां के परिवार को न्याय मिले और मुल्जिमों को सजा मिले, ये हम सुनिश्चित करना चाहेंगे.
जल्द शुरू होगी पत्रकार पेंशन सम्मान योजना, मेरा गांव-मेरा गौरव दिवस के रूप में मनेगी नेहरू जयंती
पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को जनसम्पर्क विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान पत्रकार पेंशन सम्मान योजना को जल्द शुरू करने के निर्देश देते हुए कहा कि हमारी सरकार ने पिछले कार्यकाल में वरिष्ठ अधिस्वीकृत पत्रकार पेंशन योजना शुरू की थी, जिसे बाद में बंद कर दिया गया था. सीएम गहलोत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बजट घोषणा के अनुरूप इस योजना को नए रूप में शीघ्र शुरू किया जाए. बैठक में सूचना एवं जनसम्पर्क मंत्री डॉ. रघु शर्मा भी मौजूद रहे. बैठक में सीएम गहलोत ने अधिस्वीकृत पत्रकारों को आर्थिक सहायता, मेडिक्लेम पॉलिसी, मेडिकल डायरी, राजस्थान रोडवेज की बसों में निःशुल्क यात्रा जैसी सुविधाओं … Read more
राजस्थान: स्टेट हाइवे पर निजी वाहनों को फिर से देना होगा टोल, राजे सरकार ने किया था फ्री
पॉलिटॉक्स ब्यूरो. प्रदेश में होने वाले निकाय चुनाव से ठीक पहले गहलोत सरकार ने निजी चौपहिया वाहन मालिकों को बड़ा झटका देते हुए स्टेट हाईवे (State Highway) पर फिर से टोल देना अनिवार्य कर दिया है. पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार ने अपने अंतिम बजट के बाद वित्त विधेयक पेश करते समय अप्रैल 2018 से स्टेट हाईवे को निजी वाहनों के लिए टोल फ्री कर दिया था, लेकिन काॅमर्शियल वाहनों पर टोल जारी था. गहलाेत सरकार ने वसुंधरा सरकार का यह जनहितकारी फैसला पलटते हुए प्रदेश के 15,543 किमी स्टेट हाईवे पर निजी वाहनों पर फिर से टोल लगाने का फैसला किया है. इस फैसले के बाद सरकार के खजाने में सालाना 300 करोड़ रुपये का राजस्व आयेगा.
गहलोत सरकार ने बुधवार को सार्वजनिक निर्माण विभाग के प्रस्ताव पर 18 महीने पहले राजे सरकार में मिली इस छूट को कैबिनेट सर्कुलेशन के जरिए समाप्त कर दिया, गुरुवार को इसका नोटिफिकेशन जारी किया जायेगा और 1 नवंबर से प्रदेश में यह लागू हो जाएगा. इस फैसले (State Highway) से करीब ढाई लाख निजी वाहनों को सम्भावित हर 50 किलोमीटर के बाद स्टेट टोल नाके पर 40 से 60 रुपए तक देने पड़ सकते हैं.
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गहलोत सरकार ने स्टेट हाइवे के टोल फ्री होने से राजस्व का घाटा हाेने का हवाला देते हुए यह फैसला लिया है. सरकार का कहना है कि इस बार हुई भारी बरसात में प्रदेश की 30-35% सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं, इनकी रिपेयरिंग के लिए भी सरकार के पास पर्याप्त पैसा नहीं है. ऐसे में सरकार स्टेट हाईवे पर टोल लगाकर यह रकम वसूल करना चाहती है. प्रदेश में संचालित 143 स्टेट हाइवे (State Highway) पर टोल वसूली का यह प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी व RSRDC विभाग द्वारा दिया गया है.
पिछली वसुंधरा राजे सरकार के समय हुए जनांदोलन के बाद वसुंधरा राजे ने जनता को यह सौगात दी थी. ऐसे में अब दुबारा से स्टेट हाईवे (State Highway) को टाेल फ्री करने के लिए प्रदेश में बड़ा जन-अांदाेलन का खड़ा हो सकता है. साथ ही प्रदेश में होने वाले निकाय चुनावों में भी गहलोत सरकार को इससे नुकसान उठाना पड़ सकता है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गहलोत सरकार के इस फैसले को जनविरोधी बताते हुए कहा है कि, “हमारी सरकार ने जनता के हित में यह फैसला किया था, स्थानीय लोगों को जगह-जगह टोल की वजह से आने-जाने में दिक्कत होती थी. सरकार का यह फैसला जनविरोधी है, सरकार इसे तुरंत वापस ले“.
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गहलोत सरकार ने अपने इस फैसले के पीछे तर्क यह है कि हुए इससे सरकार को 300 करोड़ का राजस्व मिलेगा. साथ ही सरकार व ठेकेदार के बीच चल रहा विवाद खत्म हाेगा, क्याेंकि एमअाेयू निजी वाहनाें से टाेल वसूली के हुए थे. इसके अलावा इस टोल वसूली के बाद राेड डवलपमेंट काे रफ्तार मिलेगी.
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अब कमर-तोड़ महंगाई के इस दौर में गहलोत सरकार के इस फैसले (State Highway) को जनता कितना स्वीकार करती है ये तो आने वाला समय या होने वाले निकाय चुनावों के परिणामों से ही चल पायेगा.
प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों की कवायद हुई तेज, 19 नवम्बर को हाइकोर्ट में रिपोर्ट पेश करेगी सरकार
पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में बहुप्रतीक्षित राजनीतिक नियुक्तियों (Political Appointments) की कवायद तेज हो गई है. सूत्रों की मानें तो गहलोत सरकार नवम्बर के पहले या दूसरे सप्ताह में करीब डेढ़ दर्जन आयोगों में चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति कर सकती है. वहीं निगम और बोर्डों में होने वाली राजनीतिक नियुक्तियां निकाय चुनावों के बाद दिसम्बर या अगले साल जनवरी में होने की सम्भावना है. जानकारों की मानें तो प्रदेश सरकार को 19 नवम्बर को हाईकोर्ट में आयोगों में रिक्त पड़े संवैधानिक पदों नियुक्तियों की रिपोर्ट पेश करनी है.
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प्रदेश में नवम्बर माह में राजनीतिक नियुक्तियों की बड़ी वजह यह है कि सरकार को राजस्थान हाइकोर्ट में आयोगों में खाली पड़े संवैधानिक पदों लेकर 19 नवंबर को रिपोर्ट पेश करनी है, जिसमें सरकार को ये स्पष्ट करना है कि किन-किन रिक्त पदों को भर दिया है. आयोगों में रिक्त संवैधानिक पदों को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से रिपोर्ट मांग रखी है और हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दे रखें हैं कि आयोगों में रिक्त पड़े इन पदों को जल्द से जल्द भरा जाए. सूत्रों के अनुसार इसी कारण गहलोत सरकार राजनीतिक नियुक्तियों (Political Appointments) के लिए सम्भावित नामों पर होमवर्क पूरा करने में जुटी है.
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बुधवार को दिल्ली दौरे पर जाने की एक वजह यह भी मानी जा रही है कि सीएम गहलोत कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर राजनीतिकनियुक्तियों के माध्यम से आयोगों में एडजस्ट किए जाने वाले नामों पर चर्चा कर उन्हें अंतिम रूप देंगे. जानकारों की मानें तो प्रदेश में होने वाली इन राजनीतिक नियुक्तियों (Political Appointments) में नामों को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे और सह प्रभारी विवेक बंसल से चर्चा भी हो चुकी है.
संवैधानिक पदों वाले करीब डेढ़ दर्जन जिन आयोगों में चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति (Political Appointments) के लिए सम्भावित नामों पर चर्चा चल रही है, उनमें राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्य महिला आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, राज्य सूचना आयोग, प्रशासनिक सुधार आयोग, निशक्तजन आयोग, एससी-एसटी आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग, राज्य वित्त आयोग और राजस्थान अधीनस्थ सेवा बोर्ड प्रमुख हैं. इसके अतिरिक्त उपभोक्ता न्यायालयों में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियां भी की जानी है.
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राजस्थान में गहलोत सरकार बनने के बाद से ही संवैधानिक पदों पर राजनीतिक नियुक्तियों (Political Appointments) को लेकर अटकलों का दौर चला आ रहा है, जिन पर नवम्बर माह में विराम लग जाएगा. करीब डेढ़ दर्जन आयोगों में सरकार अपने करीबी विश्वस्त लोगों को एडजस्ट करने जा रही है. हालांकि निगम और बोर्डों में होने वाल वाली नियुक्तियां दिसम्बर या जनवरी माह में होंगी.