गहलोत सरकार की शिकायत पहुंची हाईकमान तक, सोनिया ने दिये निर्देश

राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) में गुटबाजी अपने चरम पर है. सरकार और संगठन में चल रही खिंचतान अब जगजाहिर है. राजस्थान कांग्रेस में आपसी खींचतान की खबर हाईकमान को भी लग गई है. हाल ही में पार्टी के कई पदाधिकारियों व नेताओं ने संगठन महासचिव वेणुगोपाल के जरिये कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से सरकार के मंत्रियों की शिकायत की है. सोनिया गांधी ने अविनाश पांडे (Avinash Pandey) को वास्तविक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए है. राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बने 8 माह से अधिक का समय हो चुका है. सरकार के मुखिया अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) हैं और संगठन के मुखिया हैं सचिन पायलट (Sachin Pilot).

गौरतलब है कि राजस्थान में चुनाव के पहले से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चली तनातनी अभी तक मतलब सरकार बनने के बाद तक भी बदस्तूर जारी है. इसके अनेकों उदाहरण हैं जो कि कई मौकों पर साफ देखे गए हैं. फिर चाहे वो टिकट विरतण के समय की खींचतान हो या चुनाव जीतने के बाद कि मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए चली लम्बी तनातनी. या फिर पिछले 8 माह में सरकार या संगठन का कोई कार्यक्रम हो. ऐसा कोई अवसर नहीं गया होगा जहां पार्टी की अंदरूनी खींचतान को सबने महसूस नहीं किया हो.

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सूत्रों ने बताया राजस्थान (Rajasthan) में कांग्रेस का शासन आने के बाद से ही कांग्रेस का आम कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि पार्टी के पदाधिकारी भी सार्वजनिक तौर पर मंत्रियों के नहीं मिलने और काम नहीं करने को लेकर नाराज चल रहे थे. स्थानीय स्तर पर कई बार शिकायत किये जाने के बावजूद मंत्रियों का रवैया नहीं बदला तो पार्टी के कुछ नाराज पदाधिकारियों ने सरकार और मंत्रियों की आलाकमान से जुड़े नेताओं और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिलकर शिकायत की. वेणुगोपाल ने इसकी जानकारी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को दी.

बता दें, राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने के बाद कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि मंत्रियों के दरवाजे कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा खुले रहेंगे. जबकि प्रदेश में सरकार बनने के 8 माह बाद भी बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं की सरकार से नाराजगी अब कांग्रेस के आलाकमान को भी बहुत खल रही है. सोनिया गांधी ने इस संबंध में पार्टी के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे से वास्तविक रिपोर्ट मांगी है.

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पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के मुलाकात कर उन्हें भी यह रिपोर्ट दी थी कि सरकार के मंत्री न तो जिलों में जाते है और यदि जाते भी हैं तो सरकारी या निजी कार्यक्रम के बाद वापस आ जाते हैं. ये मंत्री कांग्रेस कार्यालय जाना तो दूर वहां के नेताओं से भी नहीं मिलते हैं. यही वजह थी कि हाल ही में राजीव गांधी के 75वें जन्मोत्सव के दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से कार्यकर्ता को तवज्जो देने और मंत्रियों को जिले में जाने, कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलने के साथ ही उनकी समस्याएं दूर करने की बात कही थी.

सचिन पायलट ने कहा था कि राजीव गांधी संगठन को महत्वपूर्ण मानते थे और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति उनके मन में बहुत सम्मान था. मुख्यमंत्रीजी आप कार्यकर्ताओं और विधायकों की सुनिए. जब कार्यकर्ता और विधायक आपके पास काम लेकर जाएं तो आप डीपीआर बनाने की बात नहीं कहकर तुरंत उसकी घोषणा कर दिया कीजिए. राजीव गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था कि राजीव गांधी कहा करते थे कि हमेशा सरकार से ज्यादा संगठन को तवज्जो देनी चाहिए. अब यह बात भी आलाकमान के पास पहुंची है कि सरकार न तो प्रदेश कांग्रेस को तवज्जो दे रही है और ना ही कार्यकर्ताओं को.

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प्रदेश में सरकार ने अभी अपने एक वर्ष का कार्यकाल भी पूरा नहीं किया है और सरकार के प्रति इतनी जल्दी कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराजगी से अब पार्टी हाईकमान भी चिंता में है. हाईकमान कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की शिकायतों को इसलिए भी सही मान रहा है कि यदि सरकार का कामकाज अच्छा होता और कार्यकर्ता तथा जनता खुश होती तो लोकसभा चुनावों में राजस्थान की सभी 25 सीटों पर करारी हार का मुंह नहीं देखना पड़ता. इसीलिए अब सोनिया गांधी ने प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे से स्थिति की वास्तविक रिपोर्ट तैयार करने को कहा है. जिससे कार्यकर्ताओं और आम जनता से दूरी बनाने वाले मंत्रियों के बारे में तथ्यात्मक रिपोर्ट सामने आ सके और उसी के अनुसार उन ओर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सके.

जयपुर में देर रात फिर से अशांति, तनाव के बीच घायलों के हालचाल जानने पहुंचे परनामी

जयपुर (Jaipur) के मोती डूंगरी रोड स्थित लोधों के मोहल्ले में बीती रात करीब 11 बजे दो पक्षों में हुई भाटा जंग के चलते तनाव की स्थिति पैदा हो गयी. विवाद का कारण गली में बाइक खड़ी करने को लेकर बताया जा रहा है. विवाद के बाद सोमवार सुबह बीजेपी नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी (Ashok Parnami) घटनास्थल पर पहुंचे और मौका मुआयना किया. यहां उन्होंने लोगों से घटना की जानकारी ली और घायलों की कुशलक्षेम पूछी. इस मौके पर परनामी ने कहा कि जयपुर एक शांतिप्रिय शहर है लेकिन कुछ दिनों से राजनैतिक संरक्षण प्राप्त उपद्रवियों को ने बेखौफ राजधानी का चैन और अमन खराब कर रखा … Read more

क्या राजस्थान में गहलोत दिखाएंगे पान मसाला बैन करने का पराक्रम?

पिछले कई वर्षों से पान मसाला और गुटखा (Gutkha) पर पाबंदी के प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे हैं. विभिन्न राज्यों में समय-समय पर पान मसाला, गुटखा की बिक्री पर रोक लगाने के आदेश जारी होते रहे हैं, लेकिन राजस्थान (Rajasthan) में इस तरह की कोई सुगबुगाहट नहीं है. इस सिलसिले में ताजा आदेश बिहार की नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) की सरकार ने जारी किया है, जिसके तहत राज्य में एक साल तक पान मसाला और गुटखा पर पाबंदी रहेगी. बिहार में पहले भी इस तरह के आदेश जारी किए जा चुके हैं. मौजूदा आदेश में खैनी (तंबाकू) को इस पाबंदी से अलग रखा गया है. यह आदेश बिहार सरकार के खाद्य संरक्षा आयुक्त की ओर से जारी किया गया है, जिसके तहत बिहार में बिकने वाले विभिन्न ब्रांड के पान मसाला की बिक्री पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है.

जानकार बताते हैं कि राजस्थान में पिछले 2 से 3 वर्षों में जयपुर (Jaipur), उदयपुर (Udaipur), अजमेर (Ajmer) सहित सभी संभागों पर स्थित जनस्वास्थ्य प्रयोगशाला (Public Health Laboratory) में कई नामी कम्पनियों यथा तानसेन (Tansen), पान पराग (Paan Parag), विमल (Vimal), दिलबाग (Dilbag), नजर (Nazar), पान बहार (Paan Bahar), बहार सलेक्ट (Bahar Select), सिग्नेचर (Signature) आदि के पान मसाला ब्रांड्स के सैम्पल्स नमूना जांच के लिए आए. उनमें से करीब-करीब सभी ब्रांड्स में जहरीले तत्व मैग्नीशियम कार्बोनेट की उपस्थित पाई गई है (पॉलिटॉक्स के पास दस्तावेज मौजूद हैं). इनमें से कई मामलों में तो सम्बंधित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने तथाकथित जहरीले ब्रांड वाले उत्पाद की बिक्री तुरन्त प्रभाव से रोकने और मार्केट से उक्त उत्पाद को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं. लेकिन आज तक राजस्थान में किसी भी नामी कम्पनी के पान मसाला ब्रांड्स पर कोई कार्रवाई कभी नहीं कि गई है.

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गौरतलब है कि बिहार के खाद्य संरक्षा विभाग ने इस साल जून और अगस्त के बीच पान मसाला, गुटखा के नमूनों की जांच की थी, जिसमें इनमें मैग्नीशियम कार्बोनेट की मौजूदगी मिली है, जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. इससे हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों की आशंका पैदा होती है. इनमें रजनीगंधा (Rajnigandha), राज निवास (Raj Niwas), पान पराग, पान पराग पान मसाला, बहार, बाहुबली, राजश्री, रौनक, सिग्नेचर, कमला पसंद, मधु ब्रांड का पान मसाला शामिल है. सरकारी आदेश के अनुसार बिहार के लोगों के स्वास्थ्य और भलाई के उद्देश्य से अब पान मसाला के उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.

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गुटखा, पान मसाला पर पाबंदी का मामला सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में अप्रैल 2013 में उठा था, जब गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशंस (Center for Public Interest Litigation) ने इस संबंध में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें गुटखा, पान मसाला की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की थी. जस्टिस जीएस संघवी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों को इस संबंध में हलफनामा पेश करने का आदेश दिया था. उस समय केंद्र सरकार के वकील ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों में कानून और नियमों की अनदेखी करते हुए गुटखा उत्पादन और बिक्री जारी रहने की बात कही थी. स्वास्थ्य सचिवों की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुटखा, पान मसाला की बिक्री रोकने के आदेश दिए थे. इसके बावजूद गुटखा, पान मसाला की बिक्री नहीं रुक पाई थी.

देश में गुटखा और पान मसाला का सेवन करने वालों की कमी नहीं है. अब तो महिलाओं में भी इसका चलन बढ़ रहा है. जब से पान, सुपारी के स्थान पर तैयार पान मसाला और गुटखा का चलन शुरू हुआ है, तब से इनकी खपत लगातार बढ़ रही है और अब गांवों, कस्बों तक इसका इस्तेमाल करने वालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है. इस पर किए गए विभिन्न शोधों का निष्कर्ष यह है पान मसाला में मिलाए जाने वाले विभिन्न पदार्थों से देश में मुंह और गले के कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ी है. गुटखा चाहे महंगा हो या सस्ता, सभी ब्रांड के गुटखों, पान मसालों से सेहत को नुकसान ही होता है.

पान, पान मसाले, गुटखा, तंबाकू या सुपारी ज्यादा चबाने और देर तक मुंह में रखने से समबम्यबकस फाइब्रोसिस की बीमारी होती है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेती है. इससे मुंह के भीतर की त्वचा के तंतु सख्त हो जाते हैं, जिससे मुंह, गला और नाक पर विपरीत असर पड़ता है. इससे ऐसी स्थिति भी आ सकती है कि मुंह का खुलना बंद हो जाता है. इससे धड़कनें अनियिमत हो जाती है, जिससे दिल की बीमारी बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है. एक रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल औसतन आठ लाख लोग तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों से मर जाते हैं.

आश्चर्यजनक है कि राजस्थान में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पान मसाला, गुटखा की बिक्री धड़ल्ले से जारी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तंबाकू मिश्रित पान मसाला की बिक्री तो रुक गई, लेकिन उसकी जगह पान मसाला और तंबाकू के पाउच अलग-अलग बिकने लगे. राजस्थान सरकार ने हर महीने की आखिरी तारीख को तंबाकू निषेध दिवस घोषित किया था. शुरू में इस नियम का पालन हुआ, लेकिन अब वह भी शिथिल हो चुका है. अब दुकानदार इस नियम को भूल चुके हैं.

इससे तो यही समझा जायेगा कि राजस्थान की गहलोत सरकार गुटखा और पान मसाला की बिक्री रोकने के लिए ठोस प्रयास नहीं कर रही है और विभिन्न ब्रांड तानसेन, पान पराग, विमल, दिलबाग, नजर, पान बहार, बहार सलेक्ट, सिग्नेचर, रजनीगन्धा, राज निवास जैसे महंगी कम्पनियों के ये जहर युक्त ब्रांड्स स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से राजस्थान की हर गली मोहल्ले में धडल्ले से बेचे जा रहे हैं. राजस्थान सरकार को बिहार से प्रेरणा लेने की जरूरत है.

तंबाकू का सेवन करने वालों को ध्यान रखना चाहिए कि इसमें सिर्फ निकोटिन ही नहीं, बल्कित 33 तरह के जहरीले पदार्थ पाए गए हैं. निकोटिन से दिल की धड़कन और रक्तचाप बढ़ता है, शिराएं सिकुड़ जाती हैं, भूख कम होती है, आमाशय और आंत में विपरीत असर होता है, जिससे शरीर को बहुत नुकसान होता है. मुंह में तंबाकू रखने से सूजन, गांठ, उभार, लाल, बादामी, काले धब्बे, सफेद चकते, घाव, जलन, दर्द, खून आने जैसी समस्याएं उभरती है और दांतों को बहुत नुकसान पहुंचता है. कई लोगों के दांत तंबाकू, गुटखा के कारण ही समय से पहले गिर जाते हैं.

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इससे पहले सितंबर 2012 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप्र सरकार को गुटखा, पान मसाला पर पाबंदी लगाने के लिए 14 दिन का समय दिया था. गुजरात में अगस्त 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुटखा, पान मसाला पर पाबंदी लगाने की घोषणा की थी. इससे पहले जुलाई 2012 में हरियाणा सरकार ने गुटखा, पान मसाला, जर्दा, तंबाकू और निकोटीन से बने चबाने वाले अन्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, वितरण या बिक्री पर 15 अगस्त से रोक लगाने की घोषणा की थी. इसी दौरान हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी गुटखा, पान मसाला, मशेहरी, खैनी के भंडारण, विक्रय और वितरण को प्रदेश में अवैध घोषित किया था.

उत्तर प्रदेश सरकार ने जुलाई 2017 में उप्र की एक जेल में सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर रोक लगाई थी, जिसके खिलाफ कैदियों ने भूख हड़ताल कर दी थी और एक कैदी की मौत हो गई थी. इससे पहले अप्रैल 2016 में दिल्ली सरकार ने राजधानी में तंबाकू, गुटखा, पान मसाला या कोई भी चबाने वाला तंबाकू उत्पाद बेचने, रखने या बनाने पर एक साल के लिए पाबंदी लगा दी थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के कारण यह फैसला लागू नहीं हो सका था.

महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2012 में गुटखा और पान मसाला के उत्पादन, बिक्री, भंडारण और वितरण पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे. इसके बाद मार्च 2015 में घोषणा की थी गुटखे की बिक्री में शामिल लोगों पर गैर जमानती अपराध के तहत मामला दर्ज किया जाएगा. उस समय सरकार की तरफ से कहा गया था कि राज्य में गुटखे के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध है, लेकिन इसे प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया है, जिसकी वजह से अन्य राज्यों से महाराष्ट्र में गुटखे की तस्करी हो रही है. महाराष्ट्र सरकार ने पाबंदी को सख्ती से लागू करने के लिए चेतावनी थी.

मायावती एक बार फिर बनीं बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर लगी मुहर

बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की बुधवार को आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) चुन लिया गया है. लखनऊ स्थित बसपा (BSP) कार्यालय में राष्ट्रीय स्तर की बैठक के दौरान देश भर से आये बसपा प्रतिनिधियों ने मायावती को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना. बसपा सुप्रीमो मायावती अब नए सिरे से राष्ट्रीय कार्यकारिणी बाद में घोषित करेंगी. बैठक में यह तय किया गया कि बसपा विधानसभा उपचुनाव में सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करेगी.

बसपा की केन्दीय कार्यकारिणी समिति ने बैठक में यह भी तय किया कि बसपा उत्तर प्रदेश की सभी 13 सीटों पर विधानसभा उप चुनाव लड़ेगी. इसी के तहत बैठक उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर मुहर भी लगी. इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि पार्टी दिल्‍ली, हरियाणा, महाराष्‍ट्र और झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारेगी.

बैठक में उत्तरप्रदेश (UttarPradesh) में 13 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव के प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगाते हुए घोषणा की – हमीरपुर-नौशाद अली, जैदपुर (बाराबंकी)-अखिलेश अम्बेडकर, मानिकपुर (चित्रकूट)- राज नारायण निराला, प्रतापगढ़-रणजीत सिंह पटेल, घोषी-कयूम अंसारी, बलहा (बहराइच)- रमेश गौतम, टुंडला-सुनील चित्तौर, रामपुर सदर-जुबेर अहमद, एगलस-अभय कुमार, लखनऊ कैंट -अरुण द्विवेदी, गोविंद नगर (कानपुर)- देवी प्रसाद तिवारी को चुनाव लड़ाया जाएगा वहीं जलालपुर और गंगोह के लिए प्रत्याशियों की घोषणा बाद में होगी.

गौरतलब है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने 28 अगस्त को जोनल व मंडल प्रभारियों की बैठक बुलाई थी. इसमें संगठन विस्तार और भाईचारा कमेटियों के गठन के बारे में चर्चा होनी थी. इसके साथ ही विधानसभा उप चुनाव की तैयारियों के बारे में भी समीक्षा होनी थी. बसपा सुप्रीमो ने उप चुनाव वाले क्षेत्रों में सबसे पहले विधानसभा, सेक्टर गठन के साथ ही भाईचारा कमेटी बनाने का निर्देश दिया है.

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मोदी सरकार को मिला मायावती का साथ, सोशल मीडिया पर विपक्ष को बनाया निशाना

बसपा सुप्रीमो मायावती इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और करीब-करीब प्रत्येक घटनाक्रम पर अपने विचार प्रकट करती हैं. अपने ताजा बयानों में बहुजन समाज पार्टी की मुखिया ने मोदी सरकार के जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का समर्थन करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा. साथ ही पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य पार्टी के नेताओं का बिना अनुमति कश्मीर दौर पर जाने को पूरी तरह अनुचित बताया. अपने अन्य ट्वीट में मायावती ने यूपी की बीएसपी को छोड़ सभी अन्य सरकारों पर कानून व्यवस्था को लेकर दुरूपयोग का आरोप लगाया. सोमवार सुबह एक के बाद एक ट्वीट करते हुए मायावती ने कहा कि जम्मू कश्मीर … Read more

राजस्थान में फिर सांप्रदायिक तनाव

फिर सांप्रदायिक तनाव क्या राजस्थान में सांप्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयास हो रहे हैं? यह शंका एक बार फिर उभरकर आई है, जब रविवार को सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी में दंगा होते-होते बचा. इस दिन विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के स्थापना दिवस पर गंगापुर सिटी में मिर्जापुर स्थित मनकेश्वर महादेव मंदिर से निकाली गई रैली के दौरान एक धार्मिक स्थल पर जुटे कुछ असामाजिक तत्वों ने पथराव कर दिया, जिससे करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए.

सवाई माधोपुर के एसपी सुधीर चौधरी ने कहा कि मनकेश्वर महादेव मंदिर से शुरू हुई रैली में करीब पांच सौ लोग थे. रास्ते में रैली के अंतिम चरण में दो युवकों के बीच झगड़ा होने के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोगों ने रैली पर पथराव कर दिया. पुलिस ने इस सिलसिले में करीब 25 लोगों को हिरासत में लिया है. उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है. एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रविवार दोपहर करीब 1.30 बजे मनकेश्वर महादेव मंदिर से रैली शुरू हुई थी, जो ईदगाह मोड़, ट्रक यूनियन, कैलाश टाकीज होते हुए करीब तीन बजे जामा मस्जिद पहुंची थी. रैली के साथ कई थानों की पुलिस चल रही थी. जामा मस्जिद के पास नारेबाजी के दौरान उपद्रव शुरू हुआ. दोनों पक्ष एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे. इस बीच रैली पर कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया, जिससे स्थिति बेकाबू होने लगी. आधा दर्जन से ज्यादा वाहन जला दिए गए. पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की. इसके साथ ही पूरे शहर में तनाव फैल गया.

पथराव में करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए. एक समाचार चैनल के संवाददाता का मोबाइल टूट गया. बामनवास डीएसपी के वाहन पर किसी ने मटका फेंक दिया, जिससे एक कांच टूट गया. पुलिस की एक अन्य गाड़ी के कांच भी पथराव में टूट गए. पथराव के बाद पुलिस फायरिंग की अफवाह फैलने से गंगापुर सिटी के बाजार बंद हो गए. पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर और समाजसेवी मदन मोहन आर्य के नेतृत्व में विहिप और भाजपा के कार्यकर्ता उपद्रवियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर फव्वारा चौक पर धरना देकर बैठ गए.

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माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर से एसटीएफ सहित अतिरिक्त पुलिस बल बुलवाया गया. कलेक्टर एसपी सिंह और एसपी सुधीर चौधरी करीब चार बजे गंगापुर सिटी पहुंचे और धरना दे रहे लोगों से बातचीत की. मानसिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि समुदाय विशेष के लोगों ने योजनाबद्ध तरीके से पथराव कर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया है. कुछ लोगों ने पुलिस पर भी देर से मौके पर पहुंचने और लापहवाही बरतने के आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि रैली के दौरान मस्जिद के बाहर करीब 200-300 लोग पहले से इकट्ठा थे. अगर उन्हें पहले ही वहां से हटा दिया जाता तो यह घटना नहीं होती.

तनाव फैलने पर पुलिस प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी और क्षेत्र में मोबाइल पर इंटरनेट बंद कर दिया. सूचना मिलने पर आईजी लक्ष्मण गौड़ भी गंगापुर सिटी पहुंच गए थे. तनाव के बीच देर रात तक उपद्रवियों की धरपकड़ जारी रही. इसके लिए घरों में भी दबिश दी गई. भारी पुलिस बल तैनात होने से पूरा शहर छावनी में बदल गया था. आईजी गौड़ ने बताया कि फिलहाल स्थिति काबू में है. आगामी आदेश तक गंगापुर सर्किल में इंटरनेट बंद रहेगा और धारा 144 लागू रहेगी. उन्होंने जनता से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को देने की अपील की है.

शहर में तनाव फैलने के बाद विधायक रामकेश मीणा एक समुदाय के लोगों के साथ पुलिस थाने पहुंचे. इस बीच धरना दे रहे पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर, समाजसेवी मदन मोहन आर्य, भाजपा नेता गिरधारी सोनी, मिथलेश व्यास, विनोद अटल आदि के साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने मिनी सचिवालय में बैठक की. धरना दे रहे लोगों ने आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग की. प्रशासन की तरफ से आश्वासन मिलने के बाद धरना समाप्त कर दिया गया.

गौरतलब है कि यह राजस्थान में अगस्त के दौरान सांप्रदायिक तनाव फैलने की दूसरी घटना है. इससे पहले 12 अगस्त को जयपुर में आधी रात को पथराव और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद सांप्रदायिक तनाव फैला था, जिसमें पुलिस अधिकारियों सहित करीब एक दर्जन लोग पथराव में घायल हुए थे. इसमें कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया था. तब गुलाबी शहर चार दिन तक सांप्रदायिक तनाव की गिरफ्त में था. इस दौरान 149 लोग गिरफ्तार किए गए थे.
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आखिर राजस्थान में क्यों नहीं हो पा रही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की नियुक्ति?

राजस्थान में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नियुक्त करने की प्रक्रिया बगैर किसी शोर शराबे के चुपचाप चल रही है. मदन लाल सैनी के निधन के बाद करीब दो महीने से राजस्थान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का पद खाली है. इसके बाद से ही कई नाम चल रहे थे. भाजपा हाईकमान अपने स्तर पर राज्य में सर्वे करवा रहा था. सूत्रों ने बताया कि नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश के तहत पांच नामों की सूची बन चुकी है, जिनमें से किसी एक के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने की संभावना है. ये हैं नारायण पंचारिया, सतीश पूनिया, राजेन्द्र सिंह राठौड़, वासुदेव देवनानी और मदन दिलावर.

नारायण पंचारिया फिलहाल राज्यसभा सदस्य हैं और मारवाड़ के संघ पृष्ठभूमि के हैं. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भूपेन्द्र यादव के नजदीक हैं. बताया जाता है कि पंचारिया को राज्यसभा में भेजने में भूपेन्द्र यादव की प्रमुख भूमिका रही है. सतीश पूनिया राजस्थान में पहली बार विधायक बने हैं, लेकिन संगठन में काम करने का उनका लंबा अनुभव है. फिलहाल वह भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता भी हैं. पार्टी के संगठन महामंत्री चंद्रशेखर पूनिया का समर्थन कर रहे हैं.

राजेन्द्र सिंह राठौड़ लगातार सात बार विधायक बने हैं जिसमे से छह बार उन्होंने बीजेपी के बैनर पर जीत दर्ज की है. राठौड़ तीन बार भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके है और वर्तमान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हैं. बीजेपी हाईकमान राजस्थान में राजपूत समाज को साधने के लिए राठौड़ को प्रदेश अध्यक्ष बना सकता है. हालांकि लोकसभा सांसद राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ भी प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में थे लेकिन सूत्रों की मानें तो अनुभव के आधार पर उनका नाम इस लिस्ट से बाहर हो चुका है.

वासुदेव देवनानी लगातार चौथी बार अजमेर से विधायक बने हैं और दो बार भाजपा की सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके हैं. हमेशा संघ की पृष्ठभूमि के आधार पर काम करते हैं. मदन दिलावर पार्टी के दलित नेता हैं. भाजपा लंबे समय से दलितों को अपने साथ जोड़ने के लिए प्रयासरत है. प्रदेश अध्यक्ष के लिए संघ भी उनका नाम आगे कर चुका है.

बड़ी खबर: भाजपा का प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन, कांग्रेस ने बताया ‘फ्लॉप-शो’

यह साफ है कि भाजपा राजस्थान में आसानी से प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त नहीं कर पा रही है. इसमें कई पेच मालूम पड़ते हैं. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदनलाल सैनी का निधन 24 जून को एम्स, दिल्ली में हुआ था. उसके बाद से प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए संघ और भाजपा में नेताओं की लंबी कतार लगी है. पार्टी हाईकमान के लिए सर्वसम्मति से कोई नाम तय करना मुश्किल लग रहा है. पहले भाजपा ने तय किया था कि जुलाई के दूसरे हफ्ते में प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति हो जाएगी, लेकिन अब अगस्त का तीसरा हफ्ता शुरू हो रहा है.

भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर तो जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर नियमित कामकाज शुरू कर दिया है, लेकिन राजस्थान में न तो कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति हुई है, न ही स्थायी अध्यक्ष की. पार्टी के संगठन चुनाव की घोषणा हो चुकी है, लेकिन अब तक अंतरिम अध्यक्ष भी तय नहीं हो पाया है. दो माह बाद नवंबर में प्रदेश में स्थानीय निकाय के चुनाव होंगे. अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने से पार्टी तय नहीं कर पा रही है किसके नाम पर चुनाव लड़े. प्रदेश अध्यक्ष होना जरूरी है.

पहले यह विचार चल रहा था कि जातिवाद को बढ़ावा न देते हुए किसी योग्य कार्यकर्ता को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप देनी चाहिए. लेकिन इस विचार पर अमल नहीं हुआ. अब बताया जाता है कि पार्टी जातिगत गणित में उलझ गई है. इससे प्रदेश अध्यक्ष तय करने में दिक्कत हो रही है. अब भाजपा के लिए जातीय समीकरण भी बड़ी समस्या बन गया है.

बड़ी खबर: गहलोत सरकार पर भाजपा नेताओं का हल्ला बोल

भाजपा के लिए राजस्थान ही संभवत: एकमात्र राज्य है जहां प्रदेशाध्यक्ष का पद खाली है. पार्टी सूत्रों के अनुसार अब तक यही माना जा रहा था कि संसद का बजट सत्र खत्म होने के बाद पार्टी संगठनात्मक बदलाव पर ध्यान देगी और खाली पदों पर नियुक्तियां करेगी. लेकिन संसद सत्र समाप्त हुए भी लगभग दो सप्ताह का समय हो चुका है लेकिन राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष पर आलाकमान किसी एक नाम पर सहमित नहीं बना पाया है. हालांकि पार्टी के स्थानीय नेता किसी भी तरह का कयास लगाने से बच रहे हैं. उनके अनुसार शीर्ष नेतृत्व यहां भी कुछ ‘सरप्राइज’ दे सकता है.

दिल्ली में मोदी सरकार पर जमकर बरसे सीएम गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडिया से मुखातिब होकर कहा कि नीति आयोग उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने अर्थव्यवस्था को लेकर जिस तरह के संकेत दिए हैं, वो देश के लिए चिंताजनक है. कोई भी सैक्टर हो, सभी की हालत ख़राब है. लाखों लोगों की नौकरियां जा रही हैं. मंदी का दौर है. आम जनता पूछना चाहती है कि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की तरफ सरकार कब ध्यान देगी.

दरअसल राजीव कुमार ने गुरुवार को एक कार्यक्रम में कहा था कि देश में 70 साल में अब तक नकदी का ऐसा संकट नहीं देखा गया. सरकार के लिए यह अप्रत्याशित समस्या है. कोई भी किसी पर यकीन नहीं कर रहा है. मार्केट में कैश खत्म हो गया है. ये सब नोटबंदी और जीएसटी के बाद हुआ है.

भाजपा का प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन, कांग्रेस ने बताया ‘फ्लॉप-शो’

राजस्थान में सरकार की नाकामी के चलते बिगड़ती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों के विरोध में शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया. जिसमें भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष, विभिन्न मोर्चे एवं प्रमुख नेता व कार्यकर्ता उपस्थित रहे. इससे पहले गुरुवार बीजेपी से राज्यसभा सांसद डॉ किरोडी लाल मीना ने भी पिछले दिनों राजधानी में कावड़ियों पर हुए हमले के खिलाफ अपने समर्थकों के साथ जयपुर पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव से मुलाकात कर आरोपियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की मांग की. शुक्रवार को राजधानी जयपुर में कलेक्टरेट सर्किल पर भाजपा नेताओं द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया जिसमें … Read more

गहलोत सरकार पर भाजपा नेताओं का हल्ला बोल

राजस्थान की गहलोत सरकार में बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर प्रदेश के भाजपा नेताओं का हल्ला बोल शुरू हो गया है. बीजेपी से राज्यसभा सांसद और मीना समाज के कद्दावर नेता डॉ किरोडी लाल मीना ने पिछले दिनों राजधानी में कावड़ियों पर हुए हमले के खिलाफ गुरुवार को अपने समर्थकों के साथ पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव से मुलाकात कर आरोपियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की मांग की तो वहीं प्रदेश में बिगडी कानून व्यवस्था को लेकर प्रदेश भर में शुक्रवार को भाजपा नेताओं द्वारा जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन किया जायेगा. अपराधियों के खिलाफ किरोडी लाल मीणा का ज्ञापन राजधानी जयपुर में कांवड़ियों पर हुए पथराव की घटना के कुछ … Read more