भाजपा के शीर्ष नेताओं के निधन के लिए कांग्रेस ने किया ‘मारक शक्ति’ का इस्तेमाल- प्रज्ञा

भाजपा के शीर्ष नेताओं के निधन के लिए मध्यप्रदेश की भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के दिवंगत नेताओं को दी जा रही श्रद्धांजलि कार्यक्रम में एक विवादित बयान देकर एक बार फिर से पार्टी के लिए मुश्किलें पैदा करने का काम किया है.

अपने विवादित बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में छाई रहने वाली भोपाल से भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने एक और बेतुका बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है. साध्वी प्रज्ञा ने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबुलाल गौर को दी गई श्रद्धांजलि सभा मे टोने-टोटके जैसी बेतुकी बात की और इशारा करते हुए बीजेपी के शीर्षनेताओं के निधन की वजह विपक्ष द्वारा भाजपा के नेताओं पर ‘मारक शक्ति’ के इस्तेमाल का होना बताया है. प्रज्ञा ने कहा कि कांग्रेस, भाजपा नेताओं के खिलाफ मारक शक्ति का प्रयोग करवा रही है.

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21वीं सदी की सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि “जब मैं चुनाव लड़ रही थी तो एक महाराज मेरे पास आए और उन्होंने कहा कि बहुत बुरा समय चल रहा है. विपक्ष एक मारक शक्ति का प्रयोग आपकी पार्टी और उसके नेताओं के लिए कर रहा है. ऐसे में आप सावधान रहें. यह भाजपा को नुकसान पहुंचने के लिए किया जा रहा है. ठाकुर ने साथ ही बताया कि बाबा ने कहा था कि यह भाजपा के कर्मठ, योग्य और ऐसे लोग जो पार्टी को संभालते हैं, उन पर असर करेगा. उनको यह हानि पहुंचा सकता है. आप निशाना हैं, इसलिए ध्यान रखिएगा. उन महाराज की बात को मैंने काफी भीड़ में चलते-चलते सुना और भूल गई. लेकिन आज यह देखती हूं कि वास्तव में हमारा शीर्ष नेतृत्व सुषमा जी, गौर जी, जेटली जी पीड़ा सहते हुए जा रहे हैं. यह देखकर मन में आया कि कहीं ये सच तो नहीं है. सच यह है कि हमारे बीच से हमारा नेतृत्व लगातार जा रहा है. भले आप विश्वास करे या ना करें, पर सच यही है और ये ही हो रहा है”

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हालांकि हमेशा की तरह भाजपा नेताओं ने साध्वी प्रज्ञा के इस बयान से भी किनारा कर लिया है. मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और राष्ट्रीय महासचिव ने साध्वी के इस बयान पर कुछ भी कहने से मना कर दिया है. वहीं कांग्रेस ने सांसद के इस बयान पर नाराजगी जताई है.

सांसद प्रज्ञा ठाकुर इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहीं हैं. अभी हाल ही में नाली साफ करने सम्बन्धी बयान पर पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने प्रज्ञा को झाड़ा था. उसके पहले उनके नाथू राम गोडसे पर दिए विवादित बयान पर काफी हंगामा हुआ था, जिसके बाद स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाराजगी जताई थी.

सीएम की रैली में युवक का आत्मदाह का प्रयास, ‘जन उत्पीड़न बनी, जन आशीर्वाद यात्रा’- सुरजेवाला

सीएम खट्टर की रैली में युवक ने किया आत्मदाह का प्रयास, 'जन उत्पीड़न बनी, जन आशीर्वाद यात्रा'- सुरजेवाला

जन उत्पीड़न बनी हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ में एक युवक ने पेट्रोल छिड़क कर आत्मदाह का प्रयास किया. उस युवक को बचाने के प्रयास में चार लोग और झुलस गए. सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया. वहीं, आग लगाने वाले व्यक्ति की हालत गंभीर है, उसे रोहतक के पीजीआई रैफर किया गया है. गौरतलब है कि हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी- अपनी तैयारियों में जुट गईं हैं. अमित शाह के आहवान के बाद प्रदेश भाजपा भी अबकी बार 75 पार के साथ विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है. राज्य के सीएम … Read more

श्रीनगर से लौटते वक्त राहुल गांधी के सामने कश्मीरी महिला ने बयां किया दर्द, प्रियंका ने साधा निशाना

श्रीनगर से लौटते वक्त राहुल गांधीकांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने केन्द्र की मोदी सरकार पर जम्मू-कश्मीर मामले का ‘राजनीतीकरण’ करने का आरोप लगाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि कश्मीर में लोकतांत्रिक अधिकारों को समाप्त करने से अधिक ‘राजनीतिक’ और ‘राष्ट्र-विरोधी’ कुछ नहीं है. प्रियंका ने यह भी कहा कि कांग्रेस इसके खिलाफ अपनी आवाज उठाना बंद नहीं करेगी.

गौरतलब है कि शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में 8 विपक्षी दलों के 11 नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल धारा 370 हटाये जाने के बाद कश्मीर घाटी में हालातों का जायजा लेने कश्मीर गया था. हालांकि उन्हें श्रीनगर हवाई अड्डे से बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी गई और वापस दिल्ली भेज दिया गया था.

इसके बाद रविवार को कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर कश्मीर में लगे प्रतिबंधों को लेकर निशाना साधा और घाटी के लोगों को चुप कराकर देश विरोधी कदम उठाने का आरोप लगाया है. उन्होंने इस संबंध में दो ट्वीट किए. पहले प्रियंका गांधी ने ट्विटर पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें एक महिला श्रीनगर से उड़ान भरने वाले विमान में राहुल गांधी को अपने परिवार और प्रियजनों को होने वाली परेशानियां बताती दिखाई दे रही है. वह महिला बताती है कि कैसे वे लोग अपने बच्चों को लेकर असुरक्षा महसूस कर रहे हैं.

प्रियंका ने अपने ट्वीट में लिखा , ‘आखिर यह कब तक जारी रहेगा? यह (वीडियो में दिखाई गई महिला) उन लाखों लोगों में से एक है, जिन्हें राष्ट्रवाद के नाम पर चुप कराया जाता है और कुचल दिया जाता है. यह उन लोगों के लिए है जो विपक्ष पर कश्मीर मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हैं।’

प्रियंका गांधी ने अपने दूसरे ट्वीट में कहा, ‘कश्मीर में हो रहे सभी लोकतांत्रिक अधिकारों को खत्म करने से ज्यादा कुछ राजनीतिक और राष्ट्र विरोधी नहीं हो सकता है. यह हम सभी का कर्तव्य है कि हम इसके खिलाफ आवाज उठाएं. हमें ऐसा करना बंद नहीं करना चाहिए.’ वीडियो में महिला घाटी की परिस्थिति को लेकर बात करती है.

यह महिला राहुल से उसी विमान में मिली जिसमें वह विपक्षी दलों के नेताओं के साथ दिल्ली वापस जा रहे थे क्योंकि प्रशासन मे उन्हें श्रीनगर हवाई अड्डे से बाहर नहीं जाने दिया. दिल्ली वापस आकर राहुल ने कहा कि “जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य नहीं हैं, हम जानना चाहते हैं कि वहां लोग किन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं और हम उनकी मदद कैसे कर सकते हैं. लेकिन दुर्भाग्य से हमें हवाई अड्डे से बाहर नहीं जाने दिया गया और हमारे साथ मौजूद प्रेस के लोगों के साथ बदसलूकी भी की गई.

बता दें, केंद्र की मोदी 2.0 सरकार ने पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केन्द्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला किया था. जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक बयान जारी कर विपक्ष के नेताओं से कहा था कि वह घाटी का दौरा नहीं करें क्योंकि इससे क्षेत्र में वापस लौट रही शांति और सामान्य जन जीवन में बाधा आएगी. विपक्षी नेताओं के कश्मीर दौरे को लेकर भाजपा ने आरोप लगाया था कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे का ‘राजनीतीकरण’ कर रहा है.

ज्योतिरादित्य बनेंगे मुख्यमंत्री! पिता की भूल सुधारेंगे सिंधिया?

ज्योतिरादित्य बनेंगे मुख्यमंत्री चाहे सफर राजाशाही से राजपथ तक का हो या फिर शाही सिंघासन से सियासत तक का, इस राह पर चलना आसान नहीं है. आजादी से लेकर अब तक कई राजवंशो ने राजनीति में आने की कोशिस की लेकिन कुछ को सफलता मिली और कुछ सियासत के दावपेंच में उलझकर रह गए और वापस अपने-अपने महलों की और लौट गए. लेकिन उनमें से एक राजवंश ऐसा भी है जिसकी कई पीढ़ियां आज भी राजनीति में अपना अलग मुकाम रखती हैं. जिनकी रग-रग में राजनीती बसती है. जिनके भाषण से जनता ख़ुशी से झूम उठती है और जिसकी तीन पीडियों ने अपने अपने तरीके से राजनीती को कुछ न कुछ दिया है.

पॉलिटॉक्स न्यूज़ के इस पहलु में हम आज बात कर रहे है सिंधिया परिवार की, ग्वालियर का ऐसा शाही परिवार जिसने आज़ादी के बाद अपने महलों में सिर्फ राजनीति को पनपने दिया. इसकी शुरुआत राजमाता विजयाराजे सिंधिया से हुई. ग्वालियर से लगातार आठ बार सांसद रही विजयाराजे सिंधिया का विवाह ग्वालियर के महाराजा जीवाजी राव सिंधिया से 21 फरवरी 1941 को हुआ था. पति के निधन के बाद वे राजनीति में सक्रिय हुई थी और 1957 से 1991 तक आठ बार ग्वालियर और गुना से सांसद रहीं. 25 जनवरी 2001 में उन्होंने अंतिम सांस लीं. विजयाराजे सिंधिया पहले कांग्रेस में थी लेकिन आपातकाल के बाद जब देशी रियासतों को समाप्त कर उनकी सम्पतियो को सरकारी घोषित कर दिया तब विजयाराजे सिंधिया कांग्रेस छोड़ जनसंघ में शामिल हो गईं.

जीवाजीराव और विजयाराजे सिंधिया की 4 बेटियां और एक पुत्र था. विजयाराजे सिंधिया की दो बड़ी बेटियों का राजनीती से कोई खासा लगाव नहीं था. तीसरे नम्बर के उनके बेटे माधवराव सिंधिया भी राजनीती से जुड़े हुए थे और वे लगातार9 बार सांसद रहे. उनकी चौथी बेटी वसुंधरा राजे भी राजनीती से जुडी हुई हैं और दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, फिलहाल बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और झालावाड़ से विधायक हैं. उनकी 5वीं बेटी यशोधरा राजे भी राजनीती से जुडी हुई हैं, वे मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और फिलहाल शिवपुरी से भाजपा विधायक हैं.

इस तरह राजमाता विजयाराजे के बाद उनके बेटे माधवराव सिंधिया ने भी सियासत में एंट्री की. माधवराव ने 1971 में जनसंघ के टिकट पर गुना से लोकसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस के प्रत्याशी को डेढ़ लाख वोटों के अंतर से पटखनी दी. इसके बाद उन्होंने 1977 के आम चुनाव में ग्वालियर लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और ऐतिहासिक जीत दर्ज की. 1979 में मोरारजी देसाई की सरकार गिर गई, जनवरी 1980 में देश में आम चुनाव का एलान हुआ. जनता पार्टी ने इंदिरा गांधी के खिलाफ राजमाता विजयाराजे को रायबरेली से चुनाव लड़वाने का एलान किया.

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दूसरी तरफ उस वक्त युवा सोच के माधवराव सिंधिया के कांग्रेस नेता संजय गांधी के साथ रिश्ते बेहतर हो रहे थे, तो उन्होंने अपनी मां विजयाराजे सिंधिया से इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने का अपना फैसला बदलने के लिए कहा. लेकिन विजयाराजे नहीं मानी और यहीं से मां बेटे के रिश्ते में दरार आ गई. ये रार इतनी बढ़ी की उसी 1980 के चुनाव में माधवराव ने पूरी तरह से कांग्रेस का दामन थाम लिया और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की. लेकिन दूसरी और विजयाराजे सिंधिया रायबरेली में इंदिरा गांधी से चुनाव हार गईं.

ठीक इसी वक्त देश की राजनीति में एक और नया मोड़ आया. 1980 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का गठन हुआ. विजयाराजे सिंधिया जनसंघ के खंडहर पर खड़ी की गई इस नई-नवेली पार्टी की उपाध्यक्ष बनाई गईं. यहां से मां बेटे के रिश्ते में जो कड़वाहट पैदा हुई वो आजीवन बनी रही. यहां तक कि विजयाराजे सिंधिया अपने इकलौते बेटे माधवराव सिंधिया से इतनी खफा थीं कि उन्होंने 1985 में अपने हाथ से लिखी वसीयत में कह दिया था कि मेरा बेटा माधवराव सिंधिया मेरे अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं होगा. हालांकि 2001 में जब राजमाता का निधन हुआ तो मुखाग्नि माधवराव सिंधिया ने ही दी थी.

आपको बता दें, राजमाता विजयाराजे सिंधिया भी पहले कांग्रेस में ही थीं, लेकिन इंदिरा गांधी ने जब राजघरानों को ही खत्म कर दिया और संपत्तियों को सरकारी घोषित कर दिया तो उनकी इंदिरा गांधी से ठन गई थी. इसके बाद वे जनसंघ में शामिल हो गई थी. जब उनके बेटे माधवराव सिंधिया ने जनसंघ छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा तो विजयाराजे अपने बेटे से काफी नाराज हो गई थीं. उस समय विजयाराजे ने कहा था कि इमरजेंसी के दौरान उनके बेटे के सामने पुलिस ने उन्हें लाठियों से पीटा था. उन्होंने अपने बेटे तक पर गिरफ्तार करवाने का आरोप लगाया था. दोनों में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता बढ़ने लगी थी और पारिवारिक रिश्ते खत्म होने लग गए. इसी के चलते विजयाराजे ने ग्वालियर के जयविलास पैलेस में रहने के लिए लिए अपने ही बेटे माधवराव से किराया भी मांगा था. हालांकि एक रुपए प्रति का यह किराया प्रतिकात्मक रूप से लगाया गया था.

माधवराव सिंधिया लगातार 9 बार संसद रहे और कभी नहीं हारे. उन्होंने अपना पहला चुनाव जनसंघ की तरफ से गुना से लड़ा और जीत दर्ज की. आपातकाल हटने के बाद 1977 में हुए चुनाव में वे निर्दलीय खड़े हुए और जनता पार्टी की लहर होने के बावजूद उन्होंने जीत दर्ज की. 1980 में वे कांग्रेस में शामिल हुए और तीसरी बार जीत दर्ज की. 1984 में माधवराव सिंधिया ने गुना के बजाए ग्वालियर से चुनाव लड़ा. ग्वालियर से उनके सामने बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चुनाव में खड़े थे. लेकिन यहाँ भी माधवराव सिंधिया ने भारी मतों से जीत जीत दर्ज की.

1 जनवरी 1971 को माधवराव सिंधिया के घर एक राजकुमार ने जन्म लिया. जिसका नाम ज्योतिरादित्य सिंधिया रखा गया. उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा दून स्कूल देहरादून से की और बाकि की पढाई के लिए वे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी चले गए. ज्योतिरादित्य के राजनितिक करियर की शुरुआत 2001 में हुई. 30 सितम्बर 2001 को उनके पिता माधवराव सिंधिया की एक हवाई हादसे में मौत हो गयी. उनकी मौत के बाद गुना लोकसभा सीट खाली हो गई. 18 दिसंबर 2001 को ज्योतिरादित्य सिंधिया औपचारिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और अपने पिता के धर्मनिरपेक्ष, उदार और सामाजिक न्याय मूल्यों को बनाए रखने का संकल्प लिया.

19 जनवरी 2002 को 30 साल की उम्र में ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस की तरफ से गुना सीट से अपना नामांकन भरा और पहली जीत हासिल की. मई 2004 में उन्हें फिर से चुना गया और उन्होंने गुना से जीत दर्ज की. 2007 में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल शानदार रहा. 2009 में लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से ज्योतिरादित्य को चुना गया और चुनाव जीतकर वे केन्द्र सरकार में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री बने. बाद में वह बिजली राज्य मंत्री भी रहे. 2014 से एक बार फिर ज्योतिरादित्य गुना से लोकसभा पहुंचे लेकिन इस बार केन्द्र में मोदी सरकार थी.

2019 के लोकसभा चुनाव में इतिहास बदल गया और पहली बार सिंधिया परिवार से ज्योतिरादित्य सिंधिया को हार का मुंह देखना पड़ा. इसके बाद सिंधिया के समर्थकों ने उन पर कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की मांग करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. उनके समर्थक चाहते हैं कि या तो वो मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनाये जाएं या कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष. अब चूंकि सोनिया गांधी को एक बार फिर से CWC की बैठक में सर्वसम्मति से कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया गया है तो एक बार फिर से उनके समर्थकों ने उनके एमपी का मुख्यमंत्री बनाने का प्रेशर शुरू कर दिया है.

बड़ी खबर: – गहलोत और पायलट के बीच की खींचतान एक बार फिर उजागर

गौरतलब है कि कर्नाटक और गोवा के बाद भाजपा सुप्रीमो अमित शाह की नजर अब मध्य प्रदेश पर है. उधर शिवराज सिंह चौहान निर्दलीय विधायकों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं. कमलनाथ सरकार को बमुश्किल बहुमत मिला हुआ है. ज्योतिरादित्य खेमा उपेक्षा से दुखी है और हाईकमान से लगातार शिकायत कर रहा है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक लगातार बैठकें कर रहे हैं. हाल ही में ज्योतिरादित्य ने दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात भी की थी. इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि ज्योतिरादित्य को मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री बनाने के लिए अमित शाह सहयोग कर सकते हैं. वहीं सिंधिया की दूरभाष पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से हुई लम्बी वार्ता भी इस बात को हवा दे रही है.

खैर, 2002 से 2019 तक लगातार गुना सीट की नुमाइंदगी लोकसभा में ज्योतिरादित्य सिंधिया करते आए हैं. 2019 में यह पहला मौका है जब ज्योतिरादित्य सिंधिया की हार ने यह तय कर दिया की 1957 के बाद से पहली बार मध्यप्रदेश सिंधिया परिवार से कोई व्यक्ति संसद में नहीं पहुंचा है.

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अरुण जेटली की प्रगति की रफ्तार सांस के साथ ही थमी

अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया. भारतीय राजनीति से एक शानदार व्यक्तित्व चला गया. अरुण जेटली अत्यंत बुद्धिमान वकील थे और इस समय राजनीति की जो कायापलट हुई दिखाई देती है, उसमें अरुण जेटली की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका थी. कांग्रेस केंद्रित राजनीति को भाजपा केंद्रित करने में नरेन्द्र मोदी, अमित शाह के साथ ही अरुण जेटली के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को दिल्ली में हुआ. वह वकील महाराज किशन जेटली और रतन प्रभा जेटली के पुत्र थे. दिल्ली के सेंट जेवियर्स स्कूल में 1957 से 1969 तक उन्होंने स्कूल की शिक्षा पूरी की और 1973 में श्रीराम कॉलेज ऑफ … Read more

‘अरुणजी के जाने से जो रिक्तता हुई है, वह कभी पूर्ण नहीं हो पाएगी’

देश के पूर्व वित्तमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) का शनिवार को 67 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे. दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. इस खबर के बाद राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गयी. भाजपा (BJP) ही नहीं कांग्रेस (Congress) सहित अन्य राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने अरुण जेटली के निधन पर शोक व्यक्त किया. उनका अंतिम संस्कार रविवार को दिल्ली के निगम बोध घाट पर किया जाएगा. इससे पहले दिल्ली के बीजेपी कार्यालय में उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शनों के लिए रखा जाएगा. देश के तमाम छोटे-बड़े नेताओं ने … Read more

राहुल गांधी समेत अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को लौटाया बैरंग

श्रीनगर पहुंचे कांग्रेस (Congress) के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और लगभग 8 अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं को श्रीनगर एयरपोर्ट से ही बैरंग लौटा दिया गया. राहुल गांधी के साथ विपक्षी दलों के नेताओं का ये डेलिगेशन शनिवार को कश्मीर का दौरा करने और अनुच्छेद 370 के प्रमुख प्रावधानों को हटाए जाने के बाद वहां की स्थिति का जायजा लेनेे श्रीनगर पहुंचे था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी कई विपक्षी नेताओं के साथ शनिवार को जैसे ही श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचे, प्रशासन ने सभी को श्रीनगर हवाई अड्डेे (Srinagar Airport) पर ही रोक लिया. 8 दलों के लगभग 11 नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को श्रीनगर एयरपोर्ट से बाहर निकलने और किसी … Read more

अर्थव्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने खोला मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा

भारतीय अर्थव्यवस्था की गिरती हालत पर अब बीजेपी-कांग्रेस आमने सामने हो गयी हैं. इंडियन इकॉनोमी के ताजा और सोचनीय हालातों पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. तीनों ने सोशल मीडिया पर अपने तीखे कमेंट से मोदी 2.0 सरकार पर तेज प्रहार किए. मोदी सरकार की इस भारी असफलता को पूर्व वित्तमंत्री और यूपीए सरकार में गृहमंत्री रहे पी.चिदंबरम से भी जोड़ा जा रहा है. कांग्रेस के आला नेताओं का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था की लगातार गिरती हालातों को छिपाने और जनता का ध्यान भटकाने के लिए ही चिदंबरम पर ये कार्यवाही हुई है.

हालांकि शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारण ने जनता को देश की अर्थव्यवस्था पर भरोसा दिलाने की कोशिश करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था के ताजा हालात पर सरकार के कदमों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दुनियाभर के देशों की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल बेहतर हालात में है. देश की आर्थिक वृद्धि दर भी कई देशों की तुलना में ऊंची है. लेकिन चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर की वजह से अर्थव्यवस्था पर उसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है लेकिन सरकार इसे संभालने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने ये भी कहा कि जीएसटी रिफंड के सभी लम्बित पड़े मामलों को अगले एक महीने में निपटा दिया जाएगा. इसके बावजूद कांग्रेस नेताओं के बेतहाशा प्रहारों में कमी नहीं आ रही.

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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अपने ट्वीटर हैंडल पर कई प्रमुख मीडिया संस्थाओं की रिपोर्ट का हवाला देकर मोदी सरकार से दिए गए सभी सवालों का जवाब मांगा है. ट्वीट पर उन्होंने पोस्ट किया, ‘भाजपा सरकार को अब देश को साफ-साफ बताना चाहिए कि अर्थव्यवस्था की दुर्दशा ऐसी क्यों हो रही है? व्यापार टूट रहा है, उद्योग डगमगा रहे हैं, रुपया कमजोर होता जा रहा है, नौकरियां खत्म हो रही हैं. इससे हो रहे नुकसान की भरपाई कौन करेगा?’

इससे पहले भी प्रियंका ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा, ‘अभी तक औद्योगिक संस्थाएं विज्ञापन देती थीं कि हम आगे बढ़ रहे हैं. लेकिन अब भाजपा सरकार के शासन में कईयों को विज्ञापन देकर कहना पड़ रहा है कि हम डूब रहे हैं, हमें बचाओ.’


इसके अलावा पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी को लेकर भी प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया है.


वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘सरकार के स्वयं के आर्थिक सलाहकारों ने आखिरकार स्वीकार किया कि हमने लंबे समय तक क्या सावधानी बरती है – भारत की अर्थव्यवस्था एक गहरी गड़बड़ी में है. अब, हमारे समाधान को स्वीकार करें और जरूरतमंदों के हाथों में पैसा वापस करके अर्थव्यवस्था को फिर से संगठित करें.’ दरअसल उन्होंने इशारों-इशारों में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार के उस बयान की ओर संकेत किया जिसमें राजीव कुमार ने कहा था, ‘देश की अर्थव्यवस्था 70 सालों में सबसे खराब दौर में है. इसके लिए नोटबंदी और जीएसटी जिम्मेदार है. गंभीर आर्थिक संकट को देखते हुए और कदम उठाने की जरूरत है.’


कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी अपने ट्वीट के जरिए केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने अपना ट्वीट वित्तमंत्री को समर्पित करते हुए कहा, ‘वित्त मंत्री जी, अर्थव्यवस्था की जो भयानक दुर्दशा भाजपा ने की है, उस पर सरकारी पॉवर पाईंट की 32 स्लॉईडों से पर्दा नहीं डल सकता. देश मंदी से झूझ रहा है. मोदी सरकार पहले बजट में आधा अधूरा रोलबैक कर रही है. GDP औंधे मुंह लुढ़क रहा है और NPA दिन-रात ऊफान पर है पर पर ठोस हल कहां है?’


सुरजेवाला इससे पहले भी पीएम मोदी पर इंडियन इकॉनोमी को लेकर कटाक्ष कर चुके हैं. अपने ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘अगर मोदीजी ने अर्थव्यवस्था को अपनी पसंद, विदेशी परेड और जंगल फोटो शूट पर प्राथमिकता दी होती तो यह दिन नहीं आता.’ दरअसल उन्होंने इस ट्वीट के जरिए प्रधानमंत्री के मेन इक वाइल्ड कार्यक्रम में भाग लेने को लेकर चुटकी ली.


एक अन्य ट्वीट में सुरजेवाला ने कहा कि चौपट अर्थव्यवस्था से एक दिन में निवेशकों के 2,00,000 करोड़ डूब जाते हैं. उद्यमी रोज आंसू बहाते हैं लेकिन बर्बादी के मंज़र पर भाजपाई चुप्पी साध जाते हैं. यही हैं अच्छे दिन पार्ट 2.0?’

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर तंज कसा. उन्होंने मीडिया को बताया, ‘एफएम द्वारा कल घोषित किए गए उपाय केवल एक चेहरा बचाने की कवायद है. ये कदम अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अपर्याप्त हैं. विभिन्न क्षेत्रों के सामने आने वाली समस्याओं पर गौर करने की जरूरत है. उन्हें मंदी, धीमी वृद्धि, कम बिक्री और इतने पर लाने के लिए अलग से उपायों की घोषणा करें.’

नहीं रहे अरुण जेटली, जानिए उनके बारे में कुछ खास बातें

पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) का शनिवार को निधन हो गया. वे 67 साल के थे. जेटली लंबे समय से बीमार थे और 9 अगस्त से दिल्ली के एम्स (AIIMS) हॉस्पिटल में भर्ती थे. दोपहर 12.07 मिनिट पर उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन के बाद राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गयी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित तमाम राजनेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्ति करते हुए राजनीति के लिए इसे अपूर्ण क्षति बताया. रविवार सुबह 10 बजे उनका पार्थिव शरीर बीजेपी दफ्तर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा. दोपहर 2:30 बजे … Read more