थमा चुनाव प्रचार का शोर, दो राज्यों में विधानसभा चुनाव सहित 17 राज्यों में होने हैं उपचुनाव

Haryana

महाराष्ट्र और हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनाव के साथ 17 राज्यों में 64 सीटों पर उप चुनाव का चुनावी शोर आज शाम 5 बजे पूरी तरह थम गया. इसमें बिहार की एक लोकसभा सीट भी शामिल है. चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार मतदान से 48 घंटे पहले ही सार्वजनिक स्थानों पर चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी जाती है. ऐसे में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन भाजपा व कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों ने चुनावी प्रचार के दौरान पूरी ताकत झोंक दी. वोट 21 अक्टूबर को डाले जाएंगे. परिणाम 24 अक्टूबर को आएंगे. यह भी पढ़ें: नारायण राणे की वजह से महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना हुई आमने-सामने महाराष्ट्र (Maharashtra) में … Read more

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अंतिम चरण का प्रचार प्रसार चरम पर

Maharashtra

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र (Maharashtra) में विधानसभा चुनाव का माहौल चरम पर पहुंचा हुआ है. आसमान में विमानों की आवाजाही एकदम बढ़ गई है. कहीं चार्टर्ड विमान उड़ रहे हैं तो कहीं किराये के हेलीकॉप्टर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित अनेक बड़े नेता सारे जरूरी काम छोड़ कर पूरी ताकत से अपनी पार्टी को चुनाव जिताने में जुटे हुए हैं. चुनावी बंदूकें पूरी क्षमता से गरज रही हैं. महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा पूरी तरह आश्वस्त है कि उसका जीतना तय है, फिर भी उसके नेता पार्टी को जिताने में कोई भी कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा कार्यकर्ताओं में लगातार जोश फूंकने में लगे हुए हैं. PM मोदी … Read more

नरेंद्र और देवेंद्र एक साथ होते हैं तो दो नहीं, ग्यारह हो जाते हैं: मोदी

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election-2019) में प्रचार अपने चरम पर आ पहुंचा है. प्रदेश के पानवेल में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस की जमकर तारीफ की. मंच को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत के महान राष्ट्र बनाने में महाराष्ट्र का अहम योगदान रहा है. जब नरेंद्र और देवेंद्र एक साथ होते हैं, तो एक और एक दो नहीं, 11 हो जाता है. पिछले 5 साल में यहां नरेंद्र-देवेंद्र का फार्मूला सुपहरिट रहा. आने वाले समय में इसी फार्मूले से प्रदेश में और विकास होगा. नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने … Read more

महाराष्ट्र में कारगर होगी भाजपा के निशान पर सहयोगी पार्टियों को लड़ाने की रणनीति?

Partner Parties Maharashtra BJP

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सहयोगी पार्टियों (Partner Parties) के साथ तालमेल बनाने का एक नया फार्मूला बनाया है. इस फार्मूले के तहत सहयोगी पार्टियां भाजपा के निशान पर चुनाव मैदान में उतरेंगी. ऐसा ही कुछ भाजपा ने दिल्ली में खाली हुई राजौरी सीट पर सहयोगी अकाली दल के साथ किया. यहां अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा गठबंधन में तो थे लेकिन लड़े भाजपा के कमल के निशान पर और ​जीतने के बाद भाजपा विधायक बन गए. ऐसा ही कुछ भाजपा महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में करने जा रही है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) में बीजेपी 150 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. 124 सीटों पर शिवसेना और अन्य 14 सीटें अन्य तीन छोटी सहयोगी पार्टियों (Partner Parties) के लिए छोड़ी है. अब भाजपा (BJP) के नए फार्मूले के अनुसार ये सभी 14 उम्मीदवार अपनी पार्टी के नहीं बल्कि मोदी लहर का फायदा उठाने के लिए बीजेपी के निशान पर चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि ये सभी नेता अपनी पार्टियों के लिए हैं लेकिन इनमें से जो भी जीतकर विधानसभा पहुंचेगा, विधायक भाजपा का ही कहलाएगा.

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अब देखा जाए तो महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा 150 पर नहीं बल्कि 164 सीटों पर चुनाव लड़ रही है क्योंकि निशान तो ‘कमल’ ही है. इस फार्मूले से भाजपा को फायदा ये होगा कि अगर बीजेपी के 164 में से अधिकतर विधायक जीतकर सदन में पहुंचते हैं तो अकेले सरकार बनाने के पार्टी के प्रयासों को बल मिलेगा.

दूसरी ओर, सहयोगी पार्टी (Partner Parties) के वे नेता जो समर्पित तो अपनी पार्टी के लिए हैं लेकिन चुनाव भाजपा के लिए लड़ रहे हैं, जीतने के बाद उनकी पार्टी से अलग होना मुश्किल होगा. वो इसलिए कि समय पड़ने पर अगर कोई भी टकराव की स्थिति आती है तो उनके पास भाजपा में जाने या फिर विधानसभा से इस्तीफा देने के अलावा कोई अन्य विकल्प न होगा. अगर वे भाजपा में शामिल होते हैं तो ठीक. अगर इस्तीफा देते हैं तो उस सीट पर फिर से चुनाव होगा और फिर से चुनावी रण में उतरना कितना मुश्किल होगा, इसका उन्हें भली भांति अंदाजा होगा.

भाजपा का ये नया फार्मूला न केवल एकदलीय सरकार बनाने की दिशा में एक नया कदम है, बल्कि छोटे छोटे सहयोगी दलों को खत्म करने जैसा भी है. कर्नाटक में कुछ ऐसा देखने को मिला जहां 16 विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दिया और बीजेपी को वहां एक दलीय सरकार बनाने का मौका मिला. गोवा में भी ऐसा ही हुआ जहां कांग्रेस के 10 विधायक प्रदेश भाजपा (BJP) में शामिल हो गए और वहां भी एक दलीय सरकार बन गई. राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है. यहां गहलोत सरकार ने बसपा के 6 विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर एक दलीय सरकार बनाने में सफलता हासिल की. हालांकि ये जोड़ तोड़ वाली राजनीति कही जाएगी लेकिन बीजेपी का नया फार्मूला कहीं न कहीं इसी रणनीति से प्रेरित है.

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अगर मान लें कि महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा (BJP) की सहयोगी पार्टियों (Partner Parties) के सभी 14 प्रत्याशी जीतकर विधानसभा पहुंचते हैं तो भाजपा के चुनाव चिन्ह पर लड़ने की वजह से वे भाजपा के विधायक के तौर पर जाने जाएंगे. अगर वे सभी के सभी किसी मतभेद के चलते सदन की सदस्यता से इस्तीफा देते हैं तो ये स्थिति भाजपा के लिए बहुत फायदा देने वाली साबित होगी. ऐसे में बहुमत के लिए 14 नंबर कम रह जाएंगे यानि बहुमत 145 विधायकों पर मिलेगा. अगर भाजपा के पास इतने विधायक हैं तो वो अकेले अपने दम पर सरकार बनाने में कामयाब हो जाएगी. अगर कुछ विधायक कम रह भी जाएंगे तो भाजपा के चाणक्य अमित शाह इतना तो करने में सफल हो ही जाएंगे कि शिवसेना के कुछ नेताओं को अपनी ओर मिला सकें.

अगर महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा (BJP) का ये (Partner Parties) नया फार्मूला एकदम सटीक काम करेगा तो शिवसेना का इतने सालों का वर्चस्व लुप्तप्राय होने की कगार पर आ जाएगा. अगर सच में ऐसी फिल्म बनती है जैसी सोची है तो निश्चित तौर पर भाजपा का सभी 29 राज्यों में सरकार बनाने का सपना बीजेपी के लिए और करीब आ जाएगा.

महाराष्ट्र में इतनी उठा-पटक के बाद भी BJP के लिए जीत नहीं आसान

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election-2019) से पहले इस समय चुनाव प्रचार चरम पर है. भाजपा-शिवसेना की सरकार है. पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना से गंठबंधन तोड़ने के बाद भाजपा ने अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ा था और शिवसेना से ज्यादा सीटें जीतने के बाद चुनाव बाद हुए गठबंधन में उसे शिवसेना के सहयोग से महाराष्ट्र पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिला था. तब नागपुर के युवा नेता देवेन्द्र फड़नवीस मुख्यमंत्री बने थे. उसके बाद पांच साल गुजर चुके हैं और महाराष्ट्र की जनता के सामने देवेन्द्र फड़नवीस के कार्यों का आकलन करने का मौका है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) की स्थिति को देखें तो पहले उसकी राजधानी मुंबई देश की आर्थिक राजधानी हुआ करती थी, जिससे महाराष्ट्र आर्थिक विकास के मामले में शीर्ष स्थान पर बना हुआ था. देवेन्द्र फड़नवीस के कार्यकाल में महाराष्ट्र ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में शीर्ष स्थान से काफी पिछड़ गया है. महाराष्ट्र के लोगों को यह बात अखर रही है, जिसका विधानसभा चुनाव में भाजपा की संभावनाएं पर विपरीत असर पड़ता दिखाई दे रहा है. इसके मद्देनजर भाजपा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में लौटने के भरसक प्रयास कर रही है. जनभावनाओं को भांपते हुए राकांपा प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस भी चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रही है. इस सिलसिले में रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी अपनी-अपनी पार्टियों के कार्यकर्ताओं में जोश फूंकने के लिए महाराष्ट्र पहुंचे.

प्रधानमंत्री मोदी (PM Narendra Modi) ने जलगांव में चुनावी आमसभा को संबोधित किया. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के मुद्दे उठाते हुए विपक्ष को चुनौती दी. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और मुस्लिमों की तीन तलाक प्रथा के खिलाफ कानून बनाने के मुद्दे को उन्होंने अपनी सरकार का कीर्तिमान बताया और विपक्षी नेताओं को चुनौती दी कि अगर उनमें साहस है तो वे इन मुद्दों का विरोध करके दिखाए और इन मुद्दों को अपने चुनाव घोषणा पत्र में शामिल करे. उन्होंने महाराष्ट्र की जनता से देवेन्द्र फड़नवीस को फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए भाजपा को वोट देने की अपील की. यह मौजूदा विधानसभा चुनाव के सिलसिले में महाराष्ट्र में मोदी की पहली रैली थी. उन्होंने कहा कि विपक्ष इन मुद्दों पर राजनीति करने और मगरमच्छ के आंसू बहा रहा है. उन्होंने कांग्रेस और राकांपा का नाम लिए बगैर कहा कि इन मुद्दों विपक्ष के नेताओं के बयान देखें तो वे पड़ोसी देश की जबान बोलते हुए मालूम पड़ते हैं.

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राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने महाराष्ट्र में अपनी पहली आमसभा लातूर जिले में की. लातूर जिले के ओसा में उन्होंने कांग्रेस की रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी की पार्टी और उनकी सरकार, दोनों असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि चांद तो ठीक है, लेकिन असली मुद्दों का क्या हुआ? चीन के राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान मोदी की उनसे मुलाकात की खबरों पर तंज कसते हुए उन्होंने पूछा कि क्या उन्होंने चीन के राष्ट्रपति से डोकलाम के बारे में बात की? उन्होंने मीडिया पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मीडिया मुख्य मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार से रोजगार के बारे में बात करें तो वह चांद की बात करने लगती है. गौरतलब है कि 2017 में डोकलाम में भारतीय क्षेत्र में चीनी सैनिकों ने चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की थी और कई दिनों तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने डटी हुई थी.

भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कोल्हापुर जिले में भाजपा की रैली में ओजस्वी भाषण दिया. उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने जम्मू-कश्मीर को भारत की मुख्य धारा से जोड़ने में 56 इंच के सीने वाले व्यक्ति जैसा साहस कभी नहीं दिखाया. उन्होंने धारा 370 को निरस्त करने संबंधी सरकार के कदम पर सवाल उठाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राकांपा नेता शरद पवार की आलोचना की. उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक को लेकर भी मोदी सरकार की जमकर तारीफ की. इसके साथ ही तीन तलाक के मुद्दे पर भी सवाल उठाने वालों को निशाने पर लिया. शाह का पूरा भाषण धारा 370 और तीन तलाक के मुद्दों पर केंद्रित रहा. इसके साथ ही उन्होंने अगस्त में कोल्हापुर और सांगली में आई बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि केंद्र और राज्य, दोनों सरकारें दोनों जिलों की कायापलट कर देंगी, उन्हें और बेहतर तथा सुंदर बनाएगी.

राकांपा नेता शरद पवार (Sharad Pawar) ने चालीसगांव में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अपने तरीके से भाजपा को घेरने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के युवा सत्तारूढ़ दल को हराने के लिए तैयार हैं. उन्होंने पूछा कि अगर भाजपा को लगता है कि प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्ष के साथ कोई मुकाबला नहीं है तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस इतनी बड़ी संख्या में रैलियों का आयोजन क्यों करवा रहे हैं? उन्होंने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने पर केंद्री की मोदी सरकार को बधाई दी और सवाल किया कि क्या उनके पास अनुच्छेद 371 निरस्त करने का साहस है?

जामनेर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पवार ने सवाल किया कि अगर उन्हें लगता है कि महाराष्ट्र में लड़ाई नहीं है तो प्रधानमंत्री मोदी महाराष्ट्र में नौ रैलियां क्यों कर रहे हैं? केंद्रीय गृहमंत्री बीस और मुख्यमंत्री 50 रैलियां क्यों कर रहे हैं? उनकी नींद उड़ गई है क्योंकि महाराष्ट्र के युवा उन लोगों को हराने के लिए तैयार हैं. इसलिए वे महाराष्ट्र में घूम रहे हैं. अमित शाह के इस बयान पर कि उन्होंने (पवार ने) महाराष्ट्र के लिए क्या किया है, पवार ने कहा कि उन्होंने सभी क्षेत्रों में राज्य को नंबर वन बनाने का काम किया है. उन्होंने उद्योगों के विकास के लिए और उसके बाद रोजगार के लिए कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा, जब मैं मुख्यमंत्री था, तब महाराष्ट्र में 1978 में रोजगार गारंटी योजना लागू की गई थी. जब उन्होंने राज्य का नेतृत्व किया, तब स्थानीय निकाय में महिलाओं को आरक्षण दिया गया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन मामले में उनका नाम जोड़ा है, जबकि वह बैंक के सदस्य भी नहीं हैं.

इस तरह महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का माहौल गर्मा गया है. एक तरफ मोदी और शाह भाजपा को जिताने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं, देवेन्द्र फड़नवीस भी रात-दिन एक किए हुए हैं. इन नेताओं से अब तक शरद पवार अकेले लोहा ले रहे थे. अब राहुल गांधी ने भी महाराष्ट्र पहुंचकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने का प्रयास किया है. फड़नवीस का कहना है कि मुकाबले में विपक्ष कहीं नहीं है, भाजपा को महाराष्ट्र की जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है. इस पर शरद पवार का कहना है कि जब विपक्ष इतना ही कमजोर है तो प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को इतनी सारी रैलियां महाराष्ट्र में करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? उनका दावा है कि इस बार फड़नवीस सरकार जाने वाली है.

बड़ी खबर: ‘फड़नवीस इवेंट मैनेजमेंट के मास्टर, सिर्फ मोदी के नाम पर चला रहे सरकारः’

बहरहाल महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव घोषणा और नामांकन का सिलसिला शुरू होने से पहले चले दलबदल और उखाड़-पछाड़ का दौर थमने के बाद अब रोचक मोड़ पर पहुंच गया है. शरद पवार ने विपक्ष को फिर से मुकाबले में लाकर खड़ा कर दिया है. इसलिए महाराष्ट्र में चुनाव जीतकर फिर से सरकार बनाने का भाजपा का सपना आसानी से पूरा होने की संभावना नहीं रह गई है. विपक्ष अब पूरी ताकत से भाजपा का मुकाबला करने में जुट गया है. अब ये तो 24 अक्टूबर की सुबह ही पता चलेगा कि ऊंट किस करवट बैठता है.

फड़नवीस इवेंट मैनेजमेंट के मास्टर, सिर्फ मोदी के नाम पर चला रहे सरकारः सुप्रिया सुले

Supriya Sule

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का प्रचार इन दिनों चरम पर है औऱ राकांपा प्रमुख शरद पवार की बेटी, बारामती सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) प्रचार में व्यस्त हैं. वह ऐसे समय में पार्टी का प्रचार कर रही हैं, जब राकांपा के कई वरिष्ठ नेता शरद पवार को अकेला छोड़कर चले गए हैं. इस समय शरद पवार अकेले शक्तिशाली भाजपा को चुनौती दे रहे हैं. सुप्रिया सुले ने भाजपा नेतृत्व को इस बात के लिए धन्यवाद दिया है कि वह लगातार उनके परिवार को लगातार निशाना बना रहे हैं. शरद पवार इस समय महाराष्ट्र के सबसे कद्दावर नेता हैं और हमेशा से महाराष्ट्र की जनता के साथ हैं. सुप्रिया सुले (Supriya … Read more

दिग्विजय सिंह का बयान- इस्लाम की तरह हिंदुओं की कट्टरता भी खतरनाक, बीजेपी ने बताया देशद्रोह

PoliTalks news

कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) का विवादित बयानों से पुराना नाता चला आ रहा है. आए दिन वे किसी ना किसी सभा में विवादित बयान दे ही देते हैं. इस बार दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को ‘जी’ कहकर संबोधित किया. इसके साथ ही दिग्विजय ने भाजपा पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह से मुस्लिमों की कट्टरता खतरनाक है, उसी तरह हिंदुओं की भी कट्टरता खतरनाक है. बीजेपी ने कहा दिग्विजय सिंह का यह बयान देशद्रोह की श्रेणी में आता है, इनको पाकिस्तान में ही बस जाना चाहिए, बिना वीजा के रख लेगा पाकिस्तान.

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह बुधवार को इंदौर में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर लोगों को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि इमरान खान का अतिवादी (रेडिकल) इस्लाम जितना खतरनाक है, उतना ही खतरनाक उग्र हिंदुत्व भी है. इस दौरान उन्होंने इमरान को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जी कहकर संबोधित किया. हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को ‘जी’ कहना दिग्विजय के लिए कोई आश्चर्य करने वाली बात नहीं है. क्योंकि इससे पहले भी वे ओसामा बिन लादेन और हाफिज सईद को ‘जी’ कहकर संबोधित कर चुके हैं.

लोगों को सम्बोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि पं. नेहरू ने कहा था कि अल्पसंख्यकों की सांप्रदायिकता के मुकाबले बहुसंख्यकों की सांप्रदायिकता कहीं ज्यादा खतरनाक होती है. आज हम जो हालात पाकिस्तान में देख रहे हैं वो इसलिए है क्योंकि वहां बहुसंख्यक सांप्रदायिक हुए हैं. भारत में यदि बहुसंख्यक सांप्रदायिक हुए तो देश को बचाना मुश्किल होगा. भारत एक धार्मिक देश है, गांधीजी ने भारत की सनातनी परंपरा और संस्कृति को समझा था. सनातन धर्म में सत्य अहिंसा की बात होती है. आज अहिंसा ही संकट में है, भगवान महावीर, भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी की परंपरा के साथ हमारा धर्म भी संकट में है.

बड़ी खबर: मैं मध्य प्रदेश का सुपर सीएम नहीं हूं- दिग्विजय सिंह

वहीं अनुच्छेद-370 पर सरकार के रुख का उल्लेख करते हुए दिग्विजय ने कहा कि आज अगर गांधीजी जिंदा होते तो घोषणा कर देते कि मैं लाल किले से लाल चौक तक यात्रा करूंगा. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कहा था कि कश्मीर समस्या का हल जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत से हो सकता है. सिंह ने वाट्सएप को समाज का दुश्मन करार देते हुए कहा कि झूठ को प्रचारित किया जा रहा है. आज युवा इसी में उलझे हुए हैं, बहस न करना कांग्रेसियों की सबसे बड़ी कमी है.

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीति गरमा गई और बीजेपी नेता विश्वास सारंग ने (Vishwas Sarang BJP) कहा कि दिग्विजय सिंह का बयान बहुत आपत्तिजनक है. सारंग ने कहा, ‘दिग्विजय सिंह ने पाकिस्तान के प्रवक्ता की तरह बयान दिया है जिस भाषण को यूएन में इमरान खान ने जहां छोड़ा था उसी का एक्सटेंशन दिग्विजय सिंह का यह बयान है.’ सारंग ने आगे कहा, ‘दिग्विजय ने आतंकवाद और हिंदू को जोड़ने का प्रयास किया है और यह उनकी नई बात नहीं है. वह हर समय भगवा को लेकर, हिंदू को लेकर और हिंदुस्तान को लेकर विवादित बयान देते हैं. वह हर समय पाकिस्तानपरस्ती की बात करते हैं. मेरा मानना है उनका यह बयान देशद्रोह की श्रेणी में आता है.’

बीजेपी नेता विश्वास सारंग यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा, ‘हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री को तो आप गाली देते हो जिसे 130 करोड़ जनता ने चुना है और जो पाकिस्तान का प्रधानमंत्री हिंदुस्तान में लगातार हमारे सैनिकों को मारने की बात करता है, आतंकवाद को बढ़ावा देता है आप उसको ‘जी’ बोलते हो. संत समाज के कार्यक्रम में आप भगवा आतंकवाद की बात करते हो और जाकिर नायक के कार्यक्रम में जाकर उसको शांतिदूत बोलते हो. जिस चाल से दिग्विजय सिंह चल रहे हैं, मुझे ऐसा लगता है कि वह आने वाले दिनों में पाकिस्तान जाकर ही ना बस जाएं क्योंकि वहां उन्हें बिना वीजा के भी रख लिया जाएगा.’

महाराष्ट्र: बीजेपी और शिवसेना के बीच नहीं बनी सीटों पर सहमति

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 (Maharashtra Assembly election 2019) में बीजेपी (BJP) और शिवसेना (Shiv Sena) के बीच सीटों के बंटवारे का पेंच अभी भी फंसा हुआ है. सूत्रों की मानें तो सीटों के बंटवारे को लेकर शिवसेना और बीजेपी सहमत नहीं हए हैं और दोनों की अलग-अलग मांगें हैं. शिवसेना जहां कम से कम 126 सीटों की मांग कर रही है, वहीं बीजेपी 120 से अधिक सीटें नहीं देना चाह रही है. कहा तो यह भी जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर भी शिवसेना संतुष्ट नहीं है. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेक गुरुवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) ने महाराष्ट्र (Maharastra) के मुख्यमंत्री देवेंद्र … Read more