राजस्थान: निकाय चुनाव का पहला नतीजा कांग्रेस के पक्ष में, बाड़मेर के वार्ड 12 से कांग्रेस प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित

Barmer Local Body Eletions

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में 16 नवम्बर को होने वाले 49 नगर निकायों के चुनाव (Local Body Elections) का पहला नतीजा कांग्रेस के पक्ष में आ गया है. बाड़मेर के वार्ड नं0 12 में भाजपा प्रत्याशी का नामांकन खारिज होने से यहां कांग्रेस प्रत्याशी महावीर जैन को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया है. वहीं मंगलवार को 49 निकायों के 2105 वार्डों के होने वाले पार्षदों के चुनाव के लिए 10 हजार 942 उम्मीदवारों के 13 हजार 283 दाखिल किए नामांकन पत्रों की छंटनी का काम बुधवार को पूरा हो गया. बता दें, 2105 वार्डों में से भाजपा ने 162 और कांग्रेस ने 60 वार्डों में अपने प्रत्याशी नहीं उतारें हैं. … Read more

वीडियो खबर: राजनीतिक नियुक्तियों पर क्या बोले पायलट

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने जयपुर के PCC कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के खिलाफ देशभर में हर जिले में कांग्रेस 5 से 15 नवंबर तक देश में छाई मंदी पर प्रदर्शन करेगी. इस दौरान राजनीतिक नियुक्तियों पर भी पायलट ने अपने विचार रखे.

राजस्थान: निकाय चुनाव में टिकट की मारामारी के बीच चले लात-घूंसे

वीडियो खबर: गहलोत ने लिया मोदी सरकार को आड़े हाथ

Gehlot

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने तिहाड जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से मुकालात की. मुलाकात के बाद गहलोत ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा कि चिदंबरम को षडयंत्र के तहत जेल में बंद किया गया है. 25 साल पहले जब में टेक्सटाइल मंत्री था तब से देख रहा हूँ, चिदम्बरम (chidambaram) ने 45 साल तक विभिन्न पदो पर रहते हुए देश की सेवा की. 45 साल देश की सेवा करने के बाद उन्हें यह इनाम मिला कि बिना कोई मुकदमे, बिना किसी आरोप के उन्हें जेल में बंद कर दिया गया.

दीवाली की शिष्टाचार मुलाकात के बाद से अचानक तेज हुई गहलोत-पूनिया के बीच जुबानी जंग

(Gehlot-Poonia)

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया (Gehlot-Poonia) के बीच दिन-प-दिन जुबानी जंग तेज होतीं जा रही है. ताजे मामले के अनुसार सोमवार को पहले मुख्यमंत्री गहलोत ने भीलवाड़ा के करेड़ा में कहा कि पूनिया कुर्सी बचाने के लिए दिल्ली के इशारे पर उनके खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं. गहलोत के इस बयान पर बड़ा पलटवार करते हुए सतीश पूनिया ने कहा कि गहलोत अपने बेटे की वजह से हताश, निराश और परेशान हैं और कुर्सी बचाने के लिए उनको रोजाना दिल्ली के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. यह भी पढ़ें:- सतीश पूनिया को सीएम गहलोत ने कहा नया-नया मुल्ला हैं इसीलिए वे जोर-जोर … Read more

सोशल मीडिया की वजह से भाजपा आज अग्रिम पंक्ति में खड़ी है : सतीश पूनियां

Satish Poonia on Social Media

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में होने वाले नगर निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर रविवार को भाजपा की प्रदेश स्तरीय कार्यशाला आयोजित हुई. वहीं पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने फेसबुक लाइव पर कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. निकाय चुनाव में भाजपा प्रचार की रणनीति के तहत सोशल मीडिया (Social Media) का पूरा उपयोग करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए हर निकाय मे बूथस्तर तक वाॅट्सएप ग्रुप बना कर केंद्र सरकार के कामकाज, राजस्थन की पिछली सरकार की उपलब्धियां और निकायों के लिए पार्टी का विजन लोगों तक पहुंचाया जाएगा. ग्रुप से उस वार्ड के सक्रिय भाजपा कार्यकर्ताओं को जोड़ा जाएगा. इसके साथ ही प्रदेश की कांग्रेस सरकार की नाकामियों को … Read more

गहलोत के दिल्ली दौरे के बाद पायलट के सुर पड़े नरम, बसपा से आए विधायकों के प्रति बदला नजरिया

Sachin Pilot and Ashok Gehlot

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. बसपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए छः विधायकों को लेकर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) का नजरिया अब बदल गया है. इन सभी विधायकों पर किसी समय बेबाकी से बयान दे रहे पायलट के सुर अब नरम पड़ते दिख रहे हैं. रविवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में निकाय चुनाव को लेकर हुई बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने इन सभी विधायकों की तरफदारी करते हुए कहा कि, “बसपा छोड़ कांग्रेस में आये सभी छः विधायक अब हमारी पार्टी का हिस्सा हैं, उनका विलय हो चुका है. वे संगठन में आए हैं तो उन्हें जिम्मेदारी भी दी जाएगी.”

आपको बता दें इससे पहले इन छः विधायकों के बसपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होने पर सचिन पायलट ने मीडिया से कहा था कि, “वे बगैर किसी शर्त, बगैर किसी प्रलोभन और लोभ-लालच के कांग्रेस में शामिल हुए हैं तो उनका स्वागत है. राजनीतिक नियुक्तियों में पार्टी के सच्चे और मेहनती कार्यकर्ताओं को ही आगे लाया जाएगा“. पायलट ने अपनी इस बात को मीडिया के सामने एक नहीं बल्कि कई बार दोहराया था. इस तरह पायलट (Sachin Pilot) ने स्पष्ट सन्देश दिया था कि कांग्रेस सरकार में पार्टी बदलने वाले बसपा विधायकों (BSP MLAs) को राजनीतिक नियुक्तियों से कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

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वहीं रविवार शाम निकाय चुनावों को लेकर पीसीसी में हुई बैठक से पहले राजधानी के एक होटल में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच लम्बी मंत्रणा हुई जहां बसपा से कांग्रेस में विलय हुए छः में से पांच विधायक राजेन्द्र गुढा (विधायक, उदयपुरवाटी), जोगेंद्र सिंह अवाना (विधायक, नदबई), वाजिब अली (विधायक, नगर), लाखन सिंह मीणा (विधायक, करोली), और विधायक दीपचंद खेरिया भी मौजूद रहे. इस दौरान प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) के साथ बैठकर इन सभी विधायकों से लंबी मंत्रणा की. इस बैठक में सत्ता और संगठन में बेहतर तालमेल, अर्थव्यवस्था पर केंद्र सरकार को घेरने, राजनीतिक नियुक्तियों, आगामी निकाय चुनाव सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई. यहीं यह निर्णय भी हुआ कि उक्त सभी विधायकों को संगठन स्तर पर पूरा सम्मान दिया जाएगा.

इसके बाद रविवार शाम पीसीसी में हुई बैठक के बाद पायलट ने मीडिया को बताया कि सभी छह बसपा विधायकों ने लिखित में माननीय विधानसभा अध्यक्ष महोदय सीपी जोशी को आग्रह किया था कि वे सभी कांग्रेस में विलय करना चाहते हैं, जिस पर जोशी ने सोच समझकर अपना निर्णय विधायकों के पक्ष में सुनाया जो की अंतिम होता है. इस निर्णय के बाद उनका सीधे ही कांग्रेस पार्टी में विलय हो गया है. जहां तक कांग्रेस की बात है, सभी विधायक एक नए संगठन में आए हैं. पायलट ने कहा कि जहां-जहां कांग्रेस पार्टी उन सभी विधायकों को जिम्मेदारी सौंपेगी, उसे वे ग्रहण करेंगे. उन्होंने कहा कि इसमें औपचारिकता की कोई बात नहीं है लेकिन उनके कांग्रेस में विलय होने से निकाय चुनावों में निश्चत तौर पर पार्टी को लाभ मिलेगा.

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इससे पहले जब बसपा विधायकों का कांग्रेस में विलय हुआ था, तब पायलट ने उन सभी के कांग्रेस की सदस्यता न लेने की बात पर नाराजगी भी जाहिर की थी. यहां तक कि बसपा विधायकों के कांग्रेस में इस तरह विलय की जानकारी न तो संगठन के आला अधिकारियों को थी और न ही राजस्थान कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट को. इसके बाद पायलट और मुख्यमंत्री गहलोत के बीच की खींचतान भी खुलकर सामने आई थी. इस दौरान पायलट ने साफ तौर पर कहा था कि खून-पसीना बहाकर राजस्थान में कांग्रेस की सरकार लाने वाले कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान मिलना चाहिए. राजनीतिक नियुक्तियों में पार्टी के सच्चे और मेहनती कार्यकर्ताओं को ही आगे लाया जाएगा. इसके अलावा रविवार से पहले तक पायलट की नाराजगी इस बात को लेकर भी थी कि अभी तक इन सभी 6 विधायकों ने न तो कांग्रेस की सदस्यता ही ग्रहण की है और न ही पीसीसी चीफ (Sachin Pilot) से मुलाकात.

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रविवार को पीसीसी में हुई बैठक के बाद अविनाश पांडे ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश के बाद ही इन 6 विधायकों का कांग्रेस में विलय हुआ है और अब ये सभी कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं. पांडे ने भी ये भी साफ किया कि सत्ता और संगठन में इन विधायकों को पूरा सम्मान मिलेगा और प्रदेश के निकाय चुनाव में भी इनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रहेगी. इस तरह अविनाश पांडे्य और सचिन पायलट (Sachin Pilot) के रविवार को सामने आए ताजा बयानों के बाद अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि इस महीने में होने जा रहे मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में इन सभी छः विधायकों को सम्मानजनक पद मिलना तय है. जिसके तहत इनमें से 2-3 को मंत्री पद और 3-4 को राजनीतिक नियुक्ति के तहत मलाईदार पद मिलना पक्का है.

आरएलपी ने की निकाय चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा, बेनीवाल ने भविष्य के लिए जिंदा रखी उम्मीदें

RLP on Local Body Elections

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में होने वाले निकाय चुनाव (Local Body Elections) में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है. नागौर सांसद और RLP के राष्ट्रीय संयोजक हनुमान बेनीवाल ने इस सम्बंध में ट्वीट करते हुए जानकारी दी है. हनुमान बेनीवाल ने कहा है कि यदि कोई प्रत्याशी अच्छा होगा, तो पार्टी कार्यकर्ताओं से रायशुमारी के बाद उसको समर्थन देने पर विचार किया जाएगा. 1-वर्तमान में हो रहे निकाय चुनाव @RLPINDIAorg नही लड़ेगी मगर व्यक्तिशः कोई प्रत्याशी अच्छा होगा तो पार्टी कार्यकर्ताओं से रायशुमारी के बाद उसको समर्थन देने पर विचार करेगी !#Election2019 @pantlp @prempratap04 @babulalsharma19 @amitvajpayee — HANUMAN BENIWAL (@hanumanbeniwal) November 3, 2019 इसके बाद … Read more

वीडियो खबर: वसुंधरा राजे ने दिया प्रदेश में जल्द दुबारा चुनाव होने का चौकानें वाला राजनीतिक सन्देश

दिवाली बाद जयपुर लौंटी पूर्व मुख्यमंत्री वुसन्धरा राजे ने शनिवार को अपने निवास पर आमजन, नेता, कार्यकर्ता सबसे मिलकर दिवाली की शुभकामनाएं दीं. दिवाली की रामा श्यामा के बीच पत्रकारों से बातचीत में निकाय चुनाव से सम्बंधित एक सवाल के जवाब में वसुंधरा राजे ने कहा, “अभी तो अपन देखेंगे, मुझे तो कहा गया हैं कि प्रदेश में बहुत जल्द चुनाव होने वाले हैं”. तो क्या सच में प्रदेश में ऐसे को समीकरण बन रहे हैं कि इतनी जल्दी सत्ता परिवर्तन हो सकता हो, राजे द्वारा दिए गए इस चौकानें वाले सन्देश के बाद प्रदेश की राजनीति एकदम से गरमा गई है.  इससे पहले पूर्व सीएम राजे ने स्टेट हाइवे पर निजी वाहनों के लिए टोल फ्री करने के अपने निर्णय को गरीब जनता के हित में लिया हुआ फैसला बताया…
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राजस्थान में सत्ता और संगठन के बीच तालमेल बिठाने के लिए कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाने के निर्देश

Coordination Committee for Gehlot and Pilot

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच की अदावत किसी से छुपी नहीं है. विधानसभा चुनाव के पहले और बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर दोनों के बीच चली खींचतान आज तक किसी न किसी मुद्दे पर सार्वजनिक हो ही जाती है. दोनों के बीच की इस खिंचतान को लेकर कांग्रेस आलाकमान भी बहुत चिंतित है. सूत्रों की मानें तो नाराज कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच तालमेल बिठाने के लिए एक कोऑर्डिनेशन कमेटी (Coordination Committee) गठित करने का फैसला लिया है. नवम्बर के दूसरे सप्ताह तक एक 21 सदस्यीय इस कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन कर दिया जाएगा. जिसके बाद सत्ता और संगठन से जुड़े सारे फैसले यह कमेटी ही करेगी.

प्रदेश सरकार के दस माह के कार्यकाल के दौरान कई मौकों और कई मुद्दों पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के बीच का विवाद सार्वजनिक रूप से देखा गया है. ऐसे में सत्ता और संगठन के आमने-सामने होने, सरकार के मंत्रियों में समन्वय नहीं होने और पार्टी के विधायकों द्वारा अपनी ही सरकार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाजी करने को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है और इसीलिए आलाकमान ने विवादों से निपटने के लिए इस कोआर्डिनेशन कमेटी (Coordination Committee) बनाने का फैसला लिया है.

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पार्टी सूत्रों की मानें तो 15 नवम्बर से पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अनुमति से प्रदेश में इस कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन कर दिया जाएगा. जिसके बाद सत्ता और संगठन से जुड़े सारे फैसले यह कमेटी ही करेगी. जिनमें मंत्रिमंडल विस्तार, प्रदेश में होने वाली राजनीतिक नियुक्तियां, प्रदेश कांग्रेस कमेटी में पदाधिकारियों की नियुक्ति और सरकार से जुड़े सभी महत्वपूर्ण फैसले अब से यह कोऑर्डिनेशन कमेटी (Coordination Committee) ही करेगी. इस कमेटी की माह में एक बार बैठक होगी. पार्टी आलाकमान ने मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि वे जिलों के दौरे पर जाते समय स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ संवाद अवश्य करें और जहां तक सम्भव हो जनसुनवाई भी जिला कांग्रेस कमेटियों के कार्यालयों में ही करें.

आलाकमान के निर्देश पर गठित होने वाली इस कोऑर्डिनेशन कमेटी में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, प्रदेश प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे, सचिव विवेक बंसल, तरूण कुमार, काजी निजामुद्दीन, पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह, कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य रघुवीर मीणा और चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा सहित 21 वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया जाएगा.

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अब चूंकि सत्ता और संगठन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण फैसले इस कोऑर्डिनेशन कमेटी के माध्यम से ही लिए जाने हैं, ऐसे में अब पहला विवाद इस कमेटी में शामिल होने वाले नेताओं को लेकर ही होने की पूरी संभावना है. गहलोत और पायलट अब अपने-अपने विश्वस्तों को इसमें शामिल कराने के प्रयास में जुट गए हैं. मुख्यमंत्री गहलोत चाहते हैँ कि कृषिमंत्री लालचंद कटारिया, मुख्य सचेतक महेश जोशी, स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल को इस कमेटी में शामिल किया जाए. वहीं, सचिन पायलट अपने विश्वस्त सरकार में सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल, खाघ मंत्री रमेश मीणा और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास को कोऑर्डिनेशन कमेटी (Coordination Committee) का सदस्य बनवाना चाहते हैं. इस तरह कमेटी में जिसके चाहने वाले ज्यादा संख्या में होंगे उसकी बात में वजन ज्यादा रहेगा.

गौरतलब है कि हाल ही में प्रदेश में होने वाले स्थानीय निकाय चूनावों में लिए गए हाईब्रिड फार्मूले के निर्णय को लेकर गहलोत और पायलट के बीच की अदावत एक बार फिर से खुलकर सामने आ गई थी. इस फॉर्मूले के तहत बिना पार्षद का चुनाव लड़े ही कोई भी बाहरी व्यक्ति महापौर व सभापति बन सकता था, जिसका सचिन पायलट समर्थक मंत्रियों व विधायकों ने खुलकर सार्वजनिक रूप से विरोध किया था. यह विवाद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी तक पहुंचा था और आलाकमान ने पायलट की बात को तवज्जो देते हुए निर्देश दिए थे जिसके बाद गहलोत सरकार को अपना निर्णय बदलना पड़ा था.

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ऐसे में सत्ता और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए गठित की जाने वाली यह कोऑर्डिनेशन कमेटी (Coordination Committee) कितनी कारगर साबित होगी ये तो आने वाले समय में पता चलेगा लेकिन इस कमेटी में शामिल किए जाने वाले नेताओं को लेकर होने वाले सम्भावित विवाद से बचने के लिए आलाकमान के आगे क्या निर्देश होंगे यह देखना काफी दिलचस्प होगा.