आचार संहिता पर चुनाव आयोग सख्त, मोदी बायोपिक के बाद अब ‘वेब सीरीज’ बैन

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लोकसभा चुनाव में आदर्श आचार संहिता की कड़ाई से पालना को लेकर निर्वाचन आयोग सख्त मूड में दिख रहा है. आयोग ने हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी की बायोपिक फिल्म की रिलीज फिलहाल के लिए टाल दी थी. अब पीएम मोदी के जीवन पर आधारित वेब सीरीज को भी बैन कर दिया है. निर्वाचन आयोग ने इस संबध में इरोज नाऊ फर्म को आदेश जारी कर कहा है कि वे अपने सभी मीडियम से पीएम मोदी पर बनी वेब सीरीज ‘मोदी: जर्नी ऑफ ए कॉमन मैन’ के सभी एपिसोड्स की स्ट्रीमिंग बंद करे. यह वेब सीरिज पीएम मोदी के जीवन पर आधारित है. इससे पहले निर्वाचन आयोग ने विवेक … Read more

अशोक गहलोत को ‘वैभव’ मोह में 20 साल बाद याद आईं जोधपुर की गलियां

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‘यह जंग नहीं आसां, बस इतना समझ लीजिए. आग का दरिया है और डूब कर जाना है.’ जी हां, कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है इस बार के जोधपुर लोकसभा चुनाव में. यहां सीएम अशोक गहलोत ने अपने पुत्र वैभव गहलोत को राजनीति के मैदान में तो उतार दिया है, लेकिन अब इस बाजी को जीतना उनके लिए अभिमन्यु के चक्रव्यूह से बाहर निकलने जैसा लग रहा है. पिछले दो चुनावों से वैभव गहलोत के राजनीतिक लॉन्चिंग की तैयारी चल रही थी मगर समय और परिस्थितियों का ध्यान रखते हुए अशोक गहलोत ने इस बार वैभव गहलोत को चुनावी घमासान में उतारा है.

पिछले 20 दिनों से वैभव गहलोत का चुनावी प्रचार परवान चढ़ रहा है, लेकिन मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ ही सभी चुनावी दांव-पेंच लगाए जा रहे हैं. राजनीति के जादूगर माने जाने वाले अशोक गहलोत वैभव गहलोत की जीत को लेकर कितने चिंतित है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अशोक गहलोत पिछले 20 दिनों में तीन बार जोधपुर आ चुके हैं. शनिवार को एक ही दिन में अशोक गहलोत ने 5 विधानसभा क्षेत्र का तूफानी दौरा किया.

गहलोत के लिए वैभव की जीत के क्या मायने हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब 20 साल बाद मुख्यमंत्री को एक बार फिर जोधपुर के भीतरी शहर की गलियां याद आईं और उन्होंने सड़क पर कदमताल करने के बाद दो दशक बाद नवचोकिया में चुनावी सभा को संबोधित किया. 1998 में जब गहलोत ने लोकसभा का चुनाव लड़ा था उस समय उन्होंने यहां अंतिम बार चुनावी सभा की थी. 20 साल बाद जब उनके पुत्र वैभव मैदान में हैं तो एक बार फिर उन्हें यह आकर वोट मांगने पड़े हैं.

1998 के बाद पांच लोकसभा, पांच विधानसभा और 5 नगर निगम के चुनाव हो चुके हैं, लेकिन इनमें से किसी भी चुनाव मेंं अशोक गहलोत ने शहर के भीतर आकर चुनाव प्रचार नहीं किया. नवचोकिया में गहलोत ने सभी को यह विश्वास दिलाने का प्रयास किया कि आज भी आप सभी मेरे दिल के करीब हैं और आपके आशीर्वाद से ही इस मुकाम पर पहुंचे हैं. गहलोत ने लोगों से आत्मीयता के रिश्ते को जोड़ते हुए कहा कि अपने 40 साल के राजनीतिक जीवन में उन्होंने नावचोकीया में कई चुनावी सभाएं कीं मगर आज की यह सभा सबसे बड़ी सभा है.

गहलोत ने जोधपुर के लोगों को विश्वास दिलाया कि उनकी हर समस्या का समाधान होगा. साथ ही मुख्यमंत्री निवास में जोधपुर से आने वाले लोगों के लिए अलग से व्यवस्था की गई है. जयपुर में उनके आदर-सत्कार का पूरा ध्यान रखा जाएगा. भाषण के अंत में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सभी लोगों से वादा किया कि चुनाव खत्म होने के बाद वह एक बार फिर इसी चौक में आकर सभी से मुलाकात करेंगे.

दो दशक बाद नवचोकिया में आयोजित हुई इस जनसभा को लेकर अलग अलग मायने निकाले जा रहे हैं. राजनीति के जानकार कयास लगा रहे हैं कि गहलोत कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते. उन्हें वैभव की जीत के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं है. मतदान होने में अभी एक सप्ताह से अधिक का समय बचा हुआ है. ऐसी संभावना है कि इस दौरान गहलोत दो से तीन बार वापस जोधपुर आकर प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी इस सीट के लिए अपना पूरा दमखम लगाएंगे.

आपको बता दें कि जोधपुर में सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव का मुकाबला मोदी सरकार के मंत्री और जोधपुर के मौजूदा सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत से है. शेखावत को मोदी-शाह का करीबी तो माना जाता ही है, बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व उनमें राजस्थान में पार्टी की राजनीति की कमान संभालने की संभावना भी देखती है. पार्टी उनकी जीत के लिए कितनी फिक्रमंद है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जोधपुर में सभा करने आ रहे हैं और अमित शाह रोड शो.

‘डिग्री’ के फेर यूपी की अमेठी सीट, राहुल गांधी-स्मृति ईरानी के नामांकन पर आपत्ति

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यूपी की सबसे हॉट और हाई-प्रोफाइल मानी जाने वाली अमेठी संसदीय सीट पर सियासी गर्मागर्मी के चलते चुनाव बेहद दिलचस्प होता जा रहा है. यहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नामांकन में उनके नाम, शैक्षणिक योग्यता व नागरिकता को लेकर आपत्ति जताई गई थी. जिसके बाद अब उनके नामांकन की स्क्रूटनी 22 अप्रैल को होगी. वहीं बीजेपी प्रत्याशी स्मृति ईरानी के नामांकन को लेकर भी सवाल खड़े किये गए हैं. अमेठी से निर्दलीय प्रत्याशी रोहित कुमार ने अपने अधिवक्ता राहुल चंदानी के माध्यम से स्मृति के नामांकन को लेकर निर्वाचन अधिकारी को आपत्ति दर्ज करवाई है. स्क्रूटनी के दौरान राहुल पर आपत्ति हुआ यूं कि, यूपी की अमेठी लोकसभा क्षेत्र … Read more

ग्राउंड रिपोर्ट: मोदी के भरोसे राहुल, मंडेलिया के सामने हिंदू वोट साधने की चुनौती

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बीकानेर संभाग की चूरू संसदीय सीट पर कांग्रेस पिछले दो दशक से जीत को तरस रही है. इसकी वजह है कि अब तक रामसिंह और राहुल कस्वां की बाप-बेटे की जोड़ी कांग्रेस के लिए भारी साबित हुई है. इसके चलते थार मरुस्थल का गेटवे कहे जाने वाले चूरू में कांग्रेस पिछले चार चुनावों से लगातार हार का मुंह देख रही है. यही वजह रही होगी कि वर्तमान चुनावी परिणाम से पहली ही शायद कांग्रेस ने यहां हार का एहसास कर लिया है. ऐसा इसलिए क्योंकि अगर कांग्रेस जीतने की चाह रखती तो मोदी-हिंदुत्व-राष्ट्रवाद के शोर के बीच एक मुस्लिम प्रत्याशी को उतारने का रिस्क कभी न लेती. ऐसा इसलिए भी हो सकता है कि अपने परम्परागत मुस्लिम वोट बैंक को रिझाने के लिए कांग्रेस ने ऐसा किया हो.

कांग्रेस ने 2009 में लोकसभा चुनाव हार चुके रफीक मंडेलिया को चूरू से टिकट दिया है. मंडेलिया परिवार का यह पांचवा चुनाव है. दूसरी तरफ, बीजेपी की ओर से बाप-बेटे की जोड़ी अब तक पांच बार संसदीय सफर तय कर चुकी है. यहां पर भाजपा को धुर्वीकरण सियासत के हथखंडे अपनाने की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि विपक्ष ने यह फैक्टर खुद ही अपने हाथों से थाली में परोस दिया है. जाट, मुस्लिम और राजपूत बाहुल्य वाली चूरू सीट पर कांग्रेस के लिए अंतिम बार 1998 में नरेंद्र बुडानिया ने दिल्ली तक का सफर तय किया था. उसके बाद कांग्रेस के कद्दावर नेता बलराम जाखड़ भी पार्टी को कभी विजयश्री नहीं दिला सके.

बीते चार चुनावों में कांग्रेस ने मुस्लिम और जाट उम्मीदवार के सभी दिव्यास्त्र चलाकर देख लिए लेकिन दो दशकों का अपना जीत का सूखा भरने में नाकामयाब रहे. हालांकि सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल और विधायक भवंरलाल शर्मा ने इस बार ब्राह्मण प्रत्याशी को मौका दिए जाने का हवाला दिया था लेकिन आलाकमान के सामने उनकी एक न चली. इधर, रफीक मंडेलिया के लिए पार्टी की गुटबाजी सबसे बड़ी समस्या है. कांग्रेस के अन्य नेताओं को पता है कि अगर इस बार मंडेलिया जीत गए तो भविष्य में इस सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार को ही पार्टी मौका देगी. लिहाजा कांग्रेस नेता दिखावे के तौर पर तो मंडेलिया का प्रचार कर रहे हैं लेकिन अंदर ही अंदर अपनी अलग रोटियां सेंक रहे हैं.

उधर बीजेपी में राहुल कस्वां और राजेंद्र राठौड़ की अदावत से सब वाफिक है. राठौड़ की नाराजगी के बाद भी पिछली बार कस्वां यहां से जीत दर्ज कर चुके हैं. ऐसे में बीजेपी को इस सीट पर तनाव तो बिल्कुल भी नहीं है. पिछले रिकॉर्ड पर एक नजर डालें तो 1977 में बनी चूरू सीट पर अब तक 12 चुनाव हो चुके हैं जिसमें 11 बार जाट और एक बार गैर जाट वर्ग का नेता सांसद बना. कद्दावर किसान नेता दौलतराम सारण इस सीट से पहले सांसद बनें. कांग्रेस ने पहले चुनाव में भी मुस्लिम उम्मीदवार के तौर पर मोहम्मद उस्मान आरिफ को उतारा था. 1980 में सारण फिर एमपी चुने गए. उसके बाद सारण 1984 में कांग्रेस के मोहर सिंह राठौड़ से हार गए. यह पहला मौका था जब कोई गैर जाट चुनाव इस सीट से चुनाव जीत पाया. मोहर सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में यहां से कांग्रेस के नरेंद्र बुडानिया ने जीत दर्ज की थी.

लोकसभा सीट पर करीब 20 लाख मतदाता है जिनमें 10.49 लाख पुरुष और 9.52 लाख महिला मतदाता है। पिछले चुनावों में राहुल कस्वां ने बसपा के अभिनेष महर्षि को 2 लाख 94 हजार वोटों से हराया था। वर्तमान लोकसभा चुनावों में देखा जाए तो कांग्रेस को मुस्लिम, राजपूत और दलित वोट बैंक से जीत की उम्मीद है, वहीं बीजेपी जाट वोट बैंक के जरिए लगातार पांचवी बार जीत की लहर में बहने की उम्मीद कर रही है.

पश्चिम बंगाल में गरजे मोदी, कहा- जनता को मूर्ख बना रहीं ममता दीदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में चुनावी रैली के दौरान टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा. संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के पहले दो चरणों के बाद ‘स्पीड ब्रेकर दीदी’ की नींद उड़ गई है. दिनाजपुर की इस रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने ममता बनर्जी पर पश्चिम बंगाल के लोगों को मां माटी मानुष के नाम पर मूर्ख बनाने का आरोप लगाया. बनर्जी द्वारा बालाकोट एयर स्ट्राइक के सबूत मांगने पर भी पीएम मोदी ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यहां की मुख्यमंत्री को सेना पर भरोसा नहीं है. ये मुख्यमंत्री देश के जांबाज जवानों … Read more

यूपी: महागठबंधन की संयुक्त जनसभा रामपुर-फिरोजाबाद में, शिवपाल यादव होंगे निशाने पर

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उत्तरप्रदेश में बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव फिरोजाबाद और रामपुर में आज साझा रैली करेंगे. फिरोजाबाद में मायावती और अखिलेश बसपा-सपा गठबंधन प्रत्याशी अक्षय यादव के लिए वोट मागेंगे. अक्षय मुलायम के भाई रामगोपाल के पुत्र हैं जिनका मुकाबला उनके चाचा शिवपाल यादव से होगा. फिरोजाबाद जनसभा में सपा-बसपा के निशाने पर मुख्य तौर पर शिवपाल यादव ही होंगे. अखिलेश से अदावत के बाद शिवपाल ने चुनाव से पूर्व प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन किया है. शिवपाल ने प्रदेश की अन्य सीटों पर भी अपने प्रत्याशी खड़े किए है. बीजेपी ने यहां से चन्द्रसेन चादौन को अपना प्रत्याशी बनाया है. यह भी पढ़ें: 24 साल बाद चुनावी … Read more

साध्वी प्रज्ञा के बचाव में उतरे मोदी-योगी, कहा- विरोधी नेताओं से कभी सवाल नहीं किए

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मुंबई हमले में शहीद और अशोक चक्र से सम्मानित हेमंत करकरे पर विवादास्पद बयान देने वाली साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का चहुंओर विरोध हो रहा है. यहां तक की बीजेपी ने खुद अधिकारिक तौर पर यह कहा है कि इस बयान से पार्टी का कोई लेना देना नहीं है. यह उनका निजी बयान हैं. खुद साध्वी प्रज्ञा ने भी अपना बयान वापिस लेने की बात कही थी. ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बचाव में आगे आए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साक्षात्कार में कहा कि ज्ञा सिंह की उम्मीदवारी को लेकर इतना हल्ला क्यों है, जबकि गंभीर आरोपों का … Read more

क्या हुआ जब बैलगाड़ी में प्रचार करने पहुंची दीया कुमारी

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लोकसभा चुनाव शुरू हो चुके हैं और इस चुनावी भंवर में राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने के लिए अजीबोगरीब तरीके इस्तेमाल करने में भी पीछे नहीं रहते. ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला राजसमंद के को​ठारिया में जहां जयपुर राजघराने की राजकुमारी दीया कुमारी बैलगाड़ी में बैठकर जनसंपर्क कर रही थीं. करोड़ों की संपत्ति की मालकिन दीया कुमारी का इस तरह प्रचार करना अपने आप में एक रोचक एक्सपेरिमेंट था. हालांकि उन्होंने अपने हलफनामे में कोई वाहन न होने का जिक्र किया है. ऐसे में अगर वह बैलगाड़ी में बैठ प्रचार कर रही हैं तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए. गौरतलब है कि दीया कुमारी बीजेपी के टिकट पर राजसमंद से चुनावी मैदान में हैं. उनके सामने कांग्रेस के देवकीनंदन गुर्जर हैं.