बिहार चुनाव में आज से बजेगा कांग्रेस का चुनावी बिगुल, 21 दिन में होंगी 100 वर्चुअल रैलियां

Rahul Gandhi In Bihar Election

Politalks.News/Bihar. बिहार की सियासत में पिछले तीन दशकों से सत्ता का वनवास झेल रही कांग्रेस इस बार पूरे जोश में है और प्रदेश की राजनीति में दम तोड़ती तस्वीर को पुनर्जीवित करने की पुरजोर कोशिश कर रही है. बिहार से सटे झारखंड में 22 में से 17 सीटने जीतने के बाद ऐसा दमखम स्वभाविक भी है. अगर बिहार में कांग्रेस को पिछले चुनावों की तुलना में सफलता मिलती है तो दिल्ली चुनाव की हार को भूल फिर से पार्टी खड़ी हो सकती है, ऐसा राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है. इसी दिशा में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) एक सितम्बर यानि आज बिहार के चुनावी अभियान का बिगुल फूंकने जा रहे हैं. … Read more

चुनाव स्पेशल: गजब की है बिहार की सियासत, 20 साल में 6 बार सीएम बने नीतीश कुमार, तीन बार मुख्यमंत्री बदले

Bihar Election 2020

Politalks.news/Bihar. बिहार में अब विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो चली है. कोरोना के चलते रैलियां तो नहीं हो रहीं, लेकिन वर्चुअल रैलियों का दौर जारी है. फिलहाल चुनाव आयोग ने अभी बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान तो नहीं किया है, लेकिन राजद ने डिजिटल कैंपेनिंग के जरिए अपना चुनाव प्रचार शुरु कर दिया है. जदयू 6 सितम्बर से अपनी डिजिटल रैली की शुरुआत करने वाली है तो भाजपा 13 सितंबर से चुनाव प्रचार शुरू करने जा रही है. वहीं दल-बदल और जोड़-तोड़ का गेम तो पहले से शुरु हो गया है. वैसे देखा जाए तो बिहार की सियासत काफी अजब गजब रही है.

बीते 20 सालों में यहां एक बार राष्ट्रपति शासन लगने के बावजूद 6 बार चुनाव हुए हैं और इस दौरान नीतीश कुमार 6 बार मुख्यमंत्री बने हैं. तीन बार मुख्यमंत्री भी बदले गए हैं. इन 20 सालों में कुल आठ बार सीएम का शपथ ग्रहण हुआ जिसमें नीतीश कुमार 6 बार, राबड़ी देवी और जीतनराम मांझी एक-एक बार मुख्यमंत्री बने.

अगर हम बिहार विधानसभा के पिछले 20 साल के दौरान हुए चुनावों पर गौर करें तो कई चीजें सामने आती हैं. एक बात सबसे खास है बिहार में, यहां जब जब वोटिंग परसेंटेज बढ़ा है, वर्तमान सरकार को ही फायदा हुआ है. लेकिन ये भी सच है कि यादव कुनबे के राज जाने के बाद कभी भी वोटिंग परसेंटेज 60 फीसदी तक भी नहीं हुआ. सबसे ज्यादा वोटिंग पिछले चुनावों में हुई लेकिन यहां भी जदयू ने राजद के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. उस समय 56 फीसदी वोटिंग हुई थी. उससे पहले का वोटिंग परसेंटेज केवल 52 फीसदी था.

एक समय था जब बिहार में कांग्रेस का एकक्षत्र राज हुआ करता था. आजादी के बाद 1989 तक कांग्रेस के 14 मुख्यमंत्रियों ने बिहार में राज किया लेकिन उसके बाद कांग्रेस बिहार में कभी वापसी नहीं कर पाई और न ही कभी चुनौती दे पाई. 1990 के चुनाव में कांग्रेस को 71 सीटें जरुर मिली लेकिन 1995 में 29 सीटों पर सिमट गई. उसके बाद कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिरता गया. 2015 के चुनाव में नीतीश के साथ आने से जरूर कांग्रेस को फायदा हुआ, लेकिन पिछले 30 सालों कांग्रेस कभी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं आ सकी.

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शुरुआत करें साल 2000 से जब बिहार से झारखंड का बंटवारा नहीं हुआ था. उस समय कुल 324 सीटें हुआ करती थीं. चारा घोटाले में नाम आने के बाद लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी उनकी बागडोर संभाल रही थीं. इस चुनाव में कुल 62.6 फीसदी वोट पड़े लेकिन बहुमत किसी को नहीं मिला. इसमें राजद को 28.3 फीसदी, भाजपा को 14.6 फीसदी और समता पार्टी (अब जदयू) को 8.7 फीसदी वोट मिले थे. समता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन को बहुमत न होने के बावजूद तत्कालीन राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी जिसको लेकर राजद ने जमकर विरोध किया. इस विरोध के चलते नीतीश की सरकार केवल सात दिन ही चली और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से एक बार फिर से राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री बनीं.

इसके बाद आया फरवरी 2005 का बिहार विधानसभा चुनाव जो सच में बिहार की राजनीति का टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ. इस चुनाव के बाद बिहार में राजद का ग्राफ गिरता चला गया. इस चुनाव में कुल 46.5 फीसदी वोटिंग हुई जो पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 16 फीसदी कम रही. वजह रही कि झारखंड बिहार से अलग हो गया था. 210 सीटों पर हुए इस चुनाव में राजद को सबसे ज्यादा 75 सीट और जदयू को 55 सीट मिली. यहां लोजपा ने शानदार प्रदर्शन किया और 29 सीटें जीतने में कामयाब हुई. उस समय सत्ता की चाबी लोजपा के पाले में थी. अगर लोजपा राजद को सपोर्ट करती तो कांग्रेस के समर्थन से उनकी सरकार बन सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और आखिरकार राष्ट्रपति शासन लागू हो गया.

अक्टूबर में फिर से चुनाव हुए और इस बार भाजपा-जदयू गठबंधन को बहुमत मिला. इसके साथ ही बिहार में 15 साल से शासन कर रहे लालू राज का अंत हुआ. नीतीश कुमार दूसरी बार सीएम बने. इस चुनाव में कुल 45.85 फीसदी वोट पड़े थे. इसमें सबसे ज्यादा राजद को 23.45 फीसदी वोट मिले लेकिन जीत मिली महज़ 54 सीटों पर. जदयू को 20.46 फीसदी वोटों के साथ 88 सीटों पर जीत मिली.

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साल 2010 यानि नीतीश कुमार के पांच साल के कार्यकाल के बाद यह पहला चुनाव था. जिस तरह से उन्होंने पांच साल के दौरान रोड मैप दिया था, उससे साफ था कि इस बार चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर नहीं होने वाला है. नीतीश कुमार लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत से सीएम बन गए. भाजपा-जदयू गठबंधन ने 206 सीटें हासिल की थीं यानी 84 फीसदी सीटें इस गठबंधन के खाते में गई थीं. इस दौरान 52.71 फीसद वोटिंग हुई यानि यानी पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 7 फीसदी ज्यादा. यहां राजद तीसरे नंबर की पार्टी बनकर रह गई और उसे केवल 22 सीटें मिली. बीजेपी 91 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी. कांग्रेस ने सभी सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन इतिहास का सबसे बुरा प्रदर्शन करते हुए केवल चार सीटों पर जीत दर्ज कर पाई.

इसके बाद आया साल 2015 का चुनाव. 2015 का विधानसभा चुनाव कई मायनों में थोड़ा अलग और दिलचस्प था. इस चुनाव में वर्षों के यार जुदा हो गए थे और पुराने धुर विरोधी एक हो गए थे. 20 साल बाद लालू और नीतीश एक साथ मिलकर महागठबंधन (जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी) के रूप में चुनाव लड़ रहे थे, जबकि दूसरी ओर भाजपा, लोजपा और रालोसपा मिलकर उनका मुकाबला कर रही थी.

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को भरपूर समर्थन मिला था. भाजपा गठबंधन ने 40 में से 31 सीटें जीती थीं और मोदी लहर भी अपने उफान पर थी. माना जा रहा था कि मुकाबला जोरदार होगा, लेकिन परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे. अकेले राजद को जितनी सीटें मिली थीं उतनी सीटें तो भाजपा अपने सहयोगियों को मिलाकर भी नहीं हासिल कर पाई. राजद एक बार फिर बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. राजद को 80, जदयू को 71, कांग्रेस को 27 तो मोदी लहर के बावजूद बीजेपी को 53 सीटें मिली. नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बने और तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम. हालांकि, लालू और नीतीश का गठबंधन ज्यादा दिन नहीं रह सका. जुलाई, 2017 में नीतीश ने इस्तीफा दे दिया और बाद में भाजपा के समर्थन से फिर से मुख्यमंत्री बन गए.

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इन 20 सालों में हुए बिहार के विधानसभा चुनावों को देखें तो एक चीज साफ होती है कि बिहार में जब-जब वोटिंग बढ़ी है, तब-तब मौजूदा सरकार को ही फायदा हुआ है और उसी सरकार की वापसी हुई है. 1995 के चुनाव में 61.8 फीसदी तो 2000 में 62.6 फीसदी वोट पड़े. दोनों समय राजद गठबंधन की सरकार बनी. जैसे ही वोटिंग परसेंट नीचे गया, सरकार पलट गई और नीतीश कुमार सरकार सत्ता में आ गई. 2005 से 2015 तक हर वोटिंग परसेंट बढ़ा और सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर गई. हालांकि इस बार के चुनाव में कोरोना संक्रमण के चलते वोटिंग घटने की आशंका है. अगर ऐसा होता है तो किंवदंती ही सही लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री और जदयू प्रमुख नीतीश कुमार को इस बात का डर सबसे अधिक लग रहा है.

बिहार में बिछ चुकी विधानसभा चुनाव की बिसात, नीतीश कुमार 6 सितम्बर को फूंकेंगे चुनावी बिगुल

Nitish Kumar Bihar Cm

Politalks.news/Bihar. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आगामी 6 सितम्बर को प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंकेंगे. वे निश्चित तिथि को वर्चुअल रैली के जरिए लोगों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ये चुनावी वर्चुअल रैली ‘जनता दल यूनाइटेड लाइव’ नाम के एक ऐप के जरिए होगी. आगामी बिहार विधानसभा चुनावों को देखते हुए जेडीयू प्रमुख और सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ये पहली चुनावी रैली होगी. माना जा रहा है कि इस ऐप के जरिए नीतीश कुमार बिहार में एक लाख लोगों के साथ सीधा जुड़ेंगे. बिहार विधानसभा चुनाव में वर्चुअल रैली करने के लिए जनता दल यूनाइटेड ने अपना यह ऐप बनाया है. पार्टी … Read more

जदयू में आते ही शुरु हुए चंद्रिका राय के हमले, तेज प्रताप पर जड़ दिए अपनी ही पार्टी के उम्मीदवारों को हरवाने के आरोप

Bihar (3)

Politalks.news/Bihar. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मुखिया लालू प्रसाद यादव के समधी चंद्रिका राय ने राजद का साथ छोड़ते ही तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव पर जोरदार हमला बोला है. चंद्रिका राय गुरुवार को ही जदयू में शामिल हुए हैं. चंद्रिका राय ने कहा कि बिहार में सरकार बनाने का दावा करने वाले लालू के दोनों लाल पहले यह तो बताएं कि वे कहां से चुनाव लड़ेंगे? हमने सुना है कि दोनों अपने लिए सेफ सीट की तलाश कर रहे हैं, लेकिन जो हालात है, उसमें उन दोनों के लिए कोई भी सीट सुरक्षित नहीं है. चंद्रिका राय (Chandrika Roy) गुरुवार को राजद के विधायक फराज फातमी और विधायक जयवर्धन यादव … Read more

नीतीश कुमार और चिराग के बीच गहरी हुई खाई, एक ने बताया ‘बच्चा’ तो दूसरे ने कहा पीएम मोदी का ‘कृपापात्र’ सीएम

Nitish Kumar Vs Chirag Paswan 2

Politalks.news/Bihar. पॉलिटॉक्स न्यूज. पिछले कुछ महीनों से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) प्रमुख चिराग पासवान (Chirag Paswan) के बीच नाराजगी चल रही है. दोनों एक दूसरे पर सार्वजनिक तौर पर आरोप प्रत्यारोप जड़ चुके हैं. अब एक ताजा घटनाक्रम दोनों के बीच की तल्खी को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के एक नेता ने चिराग पासवान को ‘बच्चा’ कहकर संबोधित किया. जदयू के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार में मंत्री विजेंद्र यादव ने ये बयान चिराग के विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर दिया. इस बयान पर लोजपा भड़क उठी और पार्टी के एक नेता … Read more

श्याम रजक की 10 साल बाद फिर से हुई राजद में घर वापसी, मांझी बोले- ‘सत्ता भोग ली और निकल गए’

Bihar News

Politalks.news/Bihar. जदयू सरकार में मंत्री रहे श्याम रजक आज लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गए. तेजस्वी यादव ने श्याम रजक को पार्टी की सदस्यता दिलाई. रजक की 10 साल बाद फिर में राजद में वापसी हुई है. श्याम रजक किसी समय में लालू प्रसाद यादव के काफी करीबी समझे जाते थे. इसी प्रकार राजद के निष्कासित विधायक प्रेमा चौधरी, महेश्वर यादव के साथ अशोक कुशवाहा ने जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली और नीतीश की पार्टी में शामिल हो गए. पार्टी में शामिल होने के बाद सभी नेताओं ने पिछली पार्टियों पर गंभीर आरोप लगाए. इधर, महागठबंधन के सदस्य रहे जितिनराम मांझी ने श्याम रजक … Read more

राजद ने तीन विधायकों को पार्टी से निकाला, नीतीश की भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Lalu Vs Nitish Bihar

PoliTalks.news/Bihar. बिहार में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सियासी सरगर्मियां बढ़ती जा रही हैं. साथ ही उठा पटक का खेल शुरु हो चुका है. इसी कडी में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अपने तीन विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया है. अब ये विधायक राजद के टिकट पर आगामी बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में तीन विधायकों को 6 साल के लिए निष्कासित करने का फैसला किया है. इन विधायकों में प्रेमा चौधरी, महेश्वर यादव और फराज फातमी शामिल है. जानकारी के मुताबिक ये तीनों विधायक बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में जाने … Read more

बिहार में सुशांत केस बनेगा चुनावी मुद्दा? यादव-फडणवीस की जोड़ी क्या कर पाएगी कमाल?

Devendra Fadanvis-BhupendraYadav-Sushant Singh Rajput

PoliTalks.news/Bihar. लगता है बीजेपी सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड मामले और सीबीआई जांच में क्रेडिट लेने को बिहार विधानसभा चुनाव में जमकर खपाने वाली है. बिहार चुनाव में सुशांत का मामला पहले से ही हॉट चैप्टर है और करीब करीब सभी राजनीतिक दल इसे खुदका चुनावी मुद्दा बना रहे हैं. ऐसे में बीजेपी भी इस मुद्दे पर दांव खेल रही है. इसी के चलते महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को बिहार चुनाव का प्रभारी बनाया गया है. देवेंद्र फडणवीस बिहार प्रभारी भूपेन्द्र यादव के साथ बिहार चुनाव की रणनीति बनाएंगे. महाराष्ट्र के बाहर देवेन्द्र फडणवीस को पहली बार बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. अब पहला सवाल तो ये निकल कर … Read more

उद्घाटन करने से एक घंटा पहले पानी में बह गया 509 करोड़ का पुल, विपक्ष हुआ हमलवार

Bihar 2

PoliTalks.news/Bihar. बिहार में लगता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिनमान बिलकुल भी ठीक नहीं चल रहे. एक ओर विधानसभा चुनाव करीब आ रहा है, वहीं दूसरी ओर उनकी हर चीज बिगड़ रही है. अब बिहार में सिस्टम पर चोट करने वाली एक और घटना सामने आई है. पिछले महीने 15 जुलाई को उद्घाटन के केवल एक महीने बाद ही गोपालगंज में सत्तरघाट ब्रिज की अप्रोच रोड टूटने से 264 करोड़ रुपये पानी में बह गए. इस बार उद्धाटन हुआ भी नहीं और छपरा में एक पुल की अप्रोच रोड ढह गई. इस पुल का उद्धाटन करने सीएम नीतीश कुमार यहां पहुंचने वाले थे लेकिन उद्धाटन से घंटाभर पहले अप्रोच … Read more

अगले महीने तक बिहार विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे का खुलासा करेगी कांग्रेस

Rahul Gandhi In Bihar

पॉलिटॉक्स न्यूज. बिहार में 243 सीटों पर होने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति पर कांग्रेस ने काम करना शुरु कर दिया है. बिहार में विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में नवंबर या दिसम्बर में होंगे. कांग्रेस को महागठबंधन के झंडे के नीचे राजद के साथ मिलकर चुनाव लड़ना है. अपनी चुनावी रणनीति से प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं को समझाते हुए राहुल गांधी ने एक वर्चुअल संवाद में कहा कि बिहार देश को दिशा दिखा रहा है. बिहार ही देश की आगे की राजनीति तय करेगा. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार कांग्रेसियों को महागठबंधन की अहमियत समझाते हुए कहा कि सहयोगी दलों को धक्का नहीं देना है. एलायंस को … Read more