सीएम गहलोत को सोनिया गांधी की नसीहत, तो पायलट ने मारा नहले पर दहला

Coordination Committee for Gehlot and Pilot

दिल्ली (Delhi) में हुई AICC की अहम बैठक में कांग्रेस (Congress) की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने देश भर के आला नेताओं के साथ करीब पौने 3 घंटे तक मंथन किया. इस बैठक में प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और पीसीसी चीफ सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने भी शिरकत की, वहीं प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे भी बैठक में मौजूद रहे. बैठक के बाद अविनाश पांडे ने मुख्यमंत्री गहलोत और पीसीसी चीफ सचिन पायलट के साथ बैठक की और प्रदेश के हालात पर मंथन किया. पार्टी सूत्रों की मानें तो सोनिया गांधी ने राजस्थान (Rajasthan) में कानून व्यवस्था (Law & Order) के हालात को लेकर गहरी नाराजगी … Read more

AICC की बैठक के बाद गहलोत और पायलट ने की सोनिया से मुलाकात, गहलोत के चेहरे पर मायूसी तो कॉन्फिडेंट दिखे पायलट

पायलट

कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में गुरुवार को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक आयोजित हुई. इस बैठक में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, प्रियंका गांधी, पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, केसी वेणुगोपाल और एके एंटनी सहित कांग्रेस के महासचिव, राज्यों के प्रभारी, कांग्रेस विधायक दल के नेता बैठक में मौजूद रहे. कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालाने के बाद सोनिया गांधी की अध्यक्षता में यह पहली बैठक थी. बैठक में भाग लेने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट बुधवार को ही दिल्ली पहुंच गए थे.

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एआईसीसी की बैठक के बाद मुख्यमंत्री गहलोत ने 10, जनपथ पहुंच कांग्रेस की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से करीब 35 मिनट की मुलाकात की. जानकारों की मानें तो सोनिया ने प्रदेश में बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर गहलोत से अपनी नाराजगी जाहिर की है. वहीं गहलोत ने नए पीसीसी चीफ, एक और डिप्टी सीएम, प्रदेश में राजनैतिक नियुक्तियां सहित कुछ जरूरी मुद्दों पर सोनिया से चर्चा करनी चाही लेकिन उन्हें किसी भी मुद्दे पर अभी स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं. सोनिया से मुलाकात के बाद सीएम गहलोत के चेहरे पर खुशी नजर नहीं आयी और वे सीधे जयपुर के लिए रवाना हो गए. गहलोत के 10, जनपथ से निकलने के बाद डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने सोनिया गांधी से मुलाकात की.

गौरतलब है कि बैठक में भाग लेने से पहले बुधवार को सीएम गहलोत ने सीएम गहलोत ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की और प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर लंबी मंत्रणा की. गहलोत ने प्रियंका से प्रदेश की राजनीतिक स्थिति और सरकार व संगठन के कामकाज को लेकर चर्चा की. बताया जा रहा है कि इस दौरान दोनों नेताओं के बीच एक व्यक्ति एक पद को लेकर भी चर्चा हुई. इसके बाद गहलोत के शुभ चिंतक माने जाने वाले पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल से भी प्रियंका ने मुलाकात की. इससे पहले गहलोत ने जन सूचना पोर्टल की लॉन्चिंग के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात मांगा था लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो पायी थी. हालांकि प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोपाल सिंह ईड़वा मंगलवार को पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष से मिलकर प्रदेश के राजनीतिक हालात का फीडबैक दे चुके हैं.

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गुरुवार को कांग्रेस मुख्यालय पर आयोजित एआईसीसी की बैठक के बाद पार्टी के प्रवक्ता आरपीएन सिंह नें पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि बैठक में पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देश की अर्थव्यवस्था पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि देश में युवाओं की नौकरी पाने के बजाय जा रही है. केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा कि सरकार राजनैतिक द्वेश के हिसाब के हिसाब से काम कर रहीं है जो बोलता है उसकी आवाज दबाई जा रही है. बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की अर्थव्यस्था पर कहा कि सबसे पहले सरकार को यह मानना जरूरी है कि अर्थव्यवस्था में गडबडी है. जब तक सरकार मानेंगी नहीं, तब तक अर्थव्यवस्था नहीं सुधरेगी.

बैठक में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने रियल एस्टेट सेक्टर का जिक्र करते हुए कहा कि बडे शहरों में लगभग 4.5 लाख मकान बनकर तैयार है पर कोई खरीदने वाला नहीं है क्योंकि नौकरियां नहीं है. एआईसीसी मुख्यालय पर आयोजित इस बैठक में कुल 32 नेताओं ने अपनी राय पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के समक्ष रखी. बैठक में सोनिया गांधी ने मौजूद क्रांग्रेसी नेताओं को निर्देश देते हुए कहा कि अब सोशल मीडिया पर नहीं बल्कि देश की जनता तक पहुंचने की जरूरत है.

कांग्रेस प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने बताया कि इस बैठक में पार्टी ने तीन मुख्य कार्यक्रम आगामी दिनों के लिए निर्धारित किये है इसके तहत 15 से 25 अक्टूबर तक पार्टी देशभर में बडा ऐजुकेशनल कार्यक्रम चलायेगी. इस कार्यक्रम में पार्टी सरकार की विफलताओं को देशवासियों के समक्ष रखेगी. साथ ही सभी राज्यों में 15 से 25 अक्टूबर तक प्रदेश कांग्रेस कमेंटी के पदाधिकारी कॉन्फ्रेंस करेंगे.

वहीं गांधी जयंती पर 2 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक सभी प्रदेशों में एक विशाल पदयात्रा का आयोजन किया जायेगा. इसके तहत 2 अक्टूबर को सभी राज्यों की राजधानी में प्रदेश के सभी बडे कांग्रेसी नेता पदयात्रा करेंगे. इसके बाद 9 अक्टूबर तक ब्लाॅक स्तर पर पदयात्रा का आयोजन होगा. इस दौरान कार्यकर्ता स्वतंत्रता सेनानियों तथा गांधी, पटेल, अंबेडकर जैसे नेताओं के सच्चे संदेशों को जन जन तक पहुंचाएंगे. सदस्यता अभियान पर बोलते हुए आरपीएन सिंह ने बताया कि पार्टी द्वारा आगामी दिनों में सदस्यता अभियान चलाया जायेगा. इस बार पार्टी की सदस्यता डिजिटल तरीके से भी दिलाई जाएगी.

गौरतलब है कि सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम व पीसीसी चीफ सचिन पायलट के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई अब शायद अंतिम दौर में पहुंच चुकी है. मुख्यमंत्री गहलोत जहां दिल्ली दरबार में प्रदेश में नया पीसीसी चीफ और एक डिप्टी सीएम और बनाने की अर्जी लगा चुके हैं तो वही गाहे-बगाहे पायलट खेमा भी सरकार की मुखालफत का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहा है. हाल ही में बुधवार को पायलट ने प्रदेश में बिगड़ी कानून व्यवस्था के बहाने गहलोत सरकार पर निशाना साधा. ऐसा माना जा रहा है कि सोनिया ने भी सीएम गहलोत से राजस्थान में बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की है.

वित्तमंत्री का बेतुका लॉजिक, ऑटो सेक्टर में मंदी के लिए ये बताया मुख्य कारण

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ( Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने मंगलवार शाम एक ऐसा बयान दिया जिसका कोई लॉजिक तो नहीं निकल रहा, हां फज्जति जरूर हो रही है. उन्होंने ये बयान ऑटो सेक्टर (Auto Sector) में पिछले कुछ सालों से चल रही मंदी को लेकर दिया. केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो सेक्टर (Auto Sector) में मंदी के लिए ओला और उबर सेवाओं को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ऑटो सेक्टर ऑटो-मोबाइल इंडस्ट्री BS6 स्टैंडर्ड और मिलेनियल्स के माइंड सेट से सबसे ज्यादा प्रभावित है. मिलेनियल्स आजकल गाड़ी खरीदने की जगह ओला-उबर को तवज्जो दे रहे हैं. वित्तमंत्री (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने कहा कि ऑटोमोबाइल सेक्टर की हालत के … Read more

चुनाव के जरिए होनी चाहिए कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्तिः शशि थरूर

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केरल (Kerala) के कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने कहा है कि चुनाव के जरिए नए कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) की नियुक्ति होनी चाहिए. लोकतंत्र में पार्टी को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है लोकतांत्रिक तरीकों का पालन किया जाए. पिछले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) सर्वसम्मति से चुने गए थे. उन्होंने लोकसभा चुनाव में पार्टी की पराजय के बाद इस्तीफा दे दिया है. फिलहाल सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी हुई हैं.

शशि थरूर (Shashi Tharoor)  अपनी नई किताब ‘द हिंदू’ के विमोचन समारोह के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे. कांग्रेस की मौजूदा स्थिति के बारे में उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सामने चुनाव ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है. कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए कई नेता कतार में हैं, लेकिन जब तक संगठन चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं होगी, कोई आगे नहीं आएगा. उनके सामने कुछ नेताओं ने अध्यक्ष पद संभालने की मंशा जाहिर की है. लेकिन वे फिलहाल इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कुछ कहने से बच रहे हैं, क्योंकि अगर उन्होंने अध्यक्ष बनने की इच्छा जाहिर की तो पार्टी के कई लोग उनका विरोध करने लगेंगे.

थरूर ने कहा, फिलहाल पार्टी के भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें चल रही हैं, जिससे कई तरह की गलतफहमियां पैदा हो रही हैं. इसके मद्देनजर वह सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर बोल रहे हैं. अगर कांग्रेस ने लोकतांत्रिक तरीके से संगठन में चुनाव नहीं करवाए तो यह पार्टी के लिए आत्मघाती होगा. अभी हालत यह है कि कौन किसका समर्थन कर रहा है, किसका विरोध कर रहा है, समझ में नहीं आता. धारा 370 को लेकर पार्टी में मतभेद हैं. कई लोग मानते हैं कि यह धारा अस्थायी तौर पर लागू थी. जवाहरलाल नेहरू ने भी इस व्यवस्था को अस्थायी बताया था.

बड़ी खबर: ‘कांग्रेस ने ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राह नहीं बदली तो पार्टी जीरो हो जाएगी’

थरूर ने कहा कि धारा 370 (Article 370) हटाने में कोई हर्ज नहीं, लेकिन इस फैसले को लागू करने का तरीका गलत और गैर लोकतांत्रिक था. इससे पहले राज्य के लोगों विश्वास में लिया जाना था. वहां के स्थानीय नेताओं को गिरफ्तार करके सरकार ने लोकतंत्र को ही ताले में बंद कर दिया है. पाबंदियां हटने के बाद जब लोगों का विरोध सामने आएगा, तब सरकार पर परिस्थितियों को काबू में करने की चुनौती रहेगी.

थरूर ने कहा कि 1972 के बाद से अब तक जम्मू-कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में नहीं पहुंचा था. धारा 370 हटने के बाद पहली बार ऐसा हुआ, जब इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक हुई. हालांकि यह बैठक बंद कमरे में हुई थी, लेकिन फिर भी इस तरह की बैठक रोकने के प्रयास किए जा सकते थे. पहले भी इस तरह की बैठक बुलाने के प्रयास होते रहे हैं, लेकिन भारत की कूटनीति के कारण इस तरह की बैठक कभी नहीं हुई. इस तरह की बैठक एक हद तक भारत की कूटनीतिक विफलता ही मानी जाएगी.

थरूर ने इस बात के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर की प्रशंसा की कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष मजबूती से रखा और विवाद को आगे बढ़ने से रोक दिया. लेकिन इसका ज्यादा मतलब नहीं है, क्योंकि जो नुकसान होना था, वह हो चुका है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का विवाद खत्म नहीं होने वाला है. जैसे ही कर्फ्यू और अन्य पाबंदियां हटेंगी, लोग फिर सड़कों पर उतरेंगे. हिंसा भी हो सकती है. इस परिस्थिति से निबटना सरकार के लिए मुश्किल होगा.

कांग्रेस ने ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राह नहीं बदली तो पार्टी जीरो हो जाएगी: थरूर

बीते कुछ दिनों से कांग्रेस के लिए ‘बीजेपी के सुब्रमण्यम स्वामी’ (Subramanian Swamy) बनते जा रहे शशि थरूर जमकर अपनी ही पार्टी पर निशाना साध रहे हैं. तिरुवनंतपुरम (केरल) से लोकसभा सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की तारीफ कर कांग्रेस (Congress) के नेताओं के निशाने पर आ चुके हैं. अब उन्होंने कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाया. थरूर ने कांग्रेस की ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ पर धावा बोलते हुए इसे पार्टी के लिए संकट बताया.

उन्होंने कहा , ‘कांग्रेस का कर्तव्य है कि वह धर्मनिपेक्षता की रक्षा करे. खासकर उन हिंदी भाषी क्षेत्रों में, जहां उसके पास बहुमत नहीं है. अगर कांग्रेस चुनाव में लाभ पाने के लिए ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राह अपनाती है तो यह पार्टी के लिए ठीक नहीं है. अगर पार्टी इसी रास्ते पर आगे बढ़ी तो जीरो हो जाएगी.’

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इतना कहकर कांग्रेस सांसद ने अपनी पार्टी और उसकी नीतियों पर सीधे-सीधे सवालिया निशान लगाते हुए ये भी बता दिया कि उनकी पार्टी सचमुच ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राह पर चल रही है. शशि यहीं नहीं थमे. आगे तंज मारते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं कांग्रेस में महज इसलिए नहीं आया क्योंकि यहां मुझे जिंदगीभर के लिए अच्छा करियर बनाना था. मैं यहां इसलिए आया क्योंकि मुझे यकीन था कि पार्टी देश के विकास की सोच आगे बढ़ाएगी. महज वोटों के लिए हम विचारों से समझौता नहीं कर सकते.’

कांग्रेस नेता शशि थरूर भारत सरकार की नीति का समर्थन करते हुए पाकिस्तान पर जमकर बरसे. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान को किसी मंच पर भारत के आंतरिक मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का अधिकार है? कांग्रेस विपक्ष में होने के नाते सरकार की आलोचना कर सकती है लेकिन देश से बाहर हम एक हैं और पाक को एक इंच भी जमीन नहीं देंगे. थरूर ने कहा कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) में उठाने की बात कही है लेकिन पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्तिस्तान और पीओके (PoK) का स्टेटस ही बदल दिया. आखिर उन्हें इसमें छेड़छाड़ करने का अधिकार किसने दिया.

इतनी हड़बड़ी में क्यों मोदी 2.0? 100 दिन से पहले लिए कई बड़े फैसले

इसी हफ्ते मोदी सरकार के वर्तमान कार्यकाल को 100 दिन पूरे होने वाले हैं. लेकिन इस छोटे से अंतराल में मोदी 2.0 ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल, धारा 370 और 35ए, तीन तलाक, मोटर वाहन संशोधन विधेयक मोटर व्हीकल एक्ट, ट्रांसजेंडर बिल, नेशनल मेडिकल कमिशन बिल और RTI संशोधन, UAPA जैसे भारी भरकम बिल पहले सत्र में, एक ही महीने में दोनों सदनों से वास करवाकर लागू भी कर दिये. आखिर इतनी हड़बड़ी में क्यों है मोदी 2.0 सरकार..?

नरेंद्र मोदी की पॉपुलर्टी युवाओं में तेजी से बढ़ने का नतीजा ये है कि पिछली बार की तुलना में इस बार मोदी सरकार भारी बहुमत से केंद्र में सत्ता पर काबिल हुई. लेकिन पिछली बार और इस बार के मोदी सरकार के कार्यों में एक सबसे बड़ी असमानता जो दिख रही है, वो है काम करने में जल्दबाजी. सरकार बनने के तीन महीनों में ही मोदी सरकार और मंत्रीमंडल ने कई क्रांतिकारी फैसले लेकर सभी को चौंका दिया. हालांकि ये सभी कार्य जनता के लिए काफी अच्छे हैं लेकिन राजनीतिज्ञ विशेषज्ञ इस बात से जरूर हैरान हैं कि आखिर क्या वजह है कि मोदी सरकार अपने सभी फॉर्मूलों को जल्दी से जल्दी लॉन्च करना चाह रही है, आखिर ये हड़बड़ी क्यों?

गौरतलब है कि सबसे मुश्किल समझा जाने वाला जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल को धारा 370 और 35ए को हटाते हुए वर्तमान मोदी सरकार ने दोनों सदनों में एक तरफा वोटों से लागू कराने में सफलता हासिल की. वहीं तीन तलाक, मोटर वाहन संशोधन विधेयक मोटर व्हीकल एक्ट, ट्रांसजेंडर बिल, नेशनल मेडिकल कमिशन बिल और आरटीआई संशोधन, UAPA जैसे भारी भरकम बिल पहले सत्र में, एक ही महीने में दोनों सदनों से पास करवाकर लागू भी कर दिये. लेकिन अभी भी वही सवाल अपने उत्तर का इंतजार कर रहा है कि आखिर बीजेपी सरकार को ये सभी फैसले करने की इतनी जल्दी क्यों? क्योंकि सरकार बहुमत के साथ सत्ता में आयी है इसलिए डूबने का तो खतरा है नहीं फिर क्यों…?

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वजह है भारत की लगातार गिरती अर्थव्यवस्था (Indian Economy), आर्थिक मंदी वर्तमान सरकार के सामने सबसे बड़ा चेलेंज है. पिछले एक साल में भारत की जीडीपी 8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी आ चुकी है. ये तो वो आकंड़े हैं जो कागजों में दिखते हुए हैं, जानकार बताते हैं कि एक्चुअल में GDP 3 फीसदी पर आ चुकी है (लेकिन इसका कोई प्रमाण नहीं है). जबकि वर्ष की पहली तिमाही में ग्रोथ 0.8 फीसदी घटी है. इसकी वजह है कि नोटंबदी के बाद हजारों की संख्या में कारोबार बंद हो गए और लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं.

बता दें, वर्तमान में बेरोजगारी (Unemployment) इतनी ज्यादा बढ़ गयी है, जितनी पिछले 70 साल में कभी नहीं बढ़ी. एक रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा समय में करीब डेढ़ करोड़ लोग बेरोजगार होकर घर बैठे हैं. ऑटो उद्योग में साढ़े तीन लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं. आने वाले तीन सालों में ये संख्या 10 लाख तक जा सकती है. लाखों की संख्या में चमचमाती गाड़ियां शोरूम में खड़ी हैं लेकिन खरीदार नहीं हैं. ऐसे में पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों के ताले लगने की नौबत आ गयी है. रिसेल कार बाजार की हालत भी कुछ खास अच्छी नहीं है.

देश की सबसे बड़ी बिस्किट कंपनी पार्ले ने 10 हजार कर्मचारियों की छटनी की है. मीडिया सेक्टर से कर्मचारियों की छटनी बदस्तूर जारी है. अन्य सेक्टर्स की स्थिति भी जुदा नहीं है. वहीं एक बड़ा तबका वो भी है जो हाई सैलेरी से नीचे गिरकर प्राइमरी वेतन पर काम करने के लिए मजबूर है.

दूसरी ओर, भवन निर्माण उद्योग (प्रोपर्टी सेक्टर) करीब-करीब दीवालिया होने की कगार पर है. लाखों की संख्या में फ्लैट अपने खरीदारों का इंतजार करते हुए जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं. इनमें हाउसिंग बोर्ड, सरकारी और प्राइवेट सभी श्रेणी के घर शामिल हैं. प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री योजना के चलते सब्सिडी मिलने के बावजूद बिक्री के आंकड़े तेजी से नीचे गिर रहे हैं. मार्केट में घरेलू वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं और महंगाई अपने चरम पर है.

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नोटबंदी (Demonetization) के बाद लचर-पचर हालत में लागू की गयी GST ने व्यापारियों के घुटने ही तोड़ दिए जिसका असर सीधे-सीधे मजदूरों पर पड़ा. इससे लोगों और कारोबारियों को फायदा तो कम हुआ, नुकसान दो-तीन गुना हो गया. बैंकों का अरबों-खरबों रुपया कर्जदारों की मिली भगत के चलते डूब गया.

अब सरकार इस आर्थिक मंदी की मार पर से ध्यान हटाने के लिए ये सभी काम जल्दी जल्दी कर रही है. वजह है कि जिस तरह का माहौल चल रहा है, सरकार इस स्थिति को लंबे वक्त तक संभाल नहीं पाएगी. इसलिए सरकार बीच बीच में कश्मीर का पूर्ण विलय और बालाकोट जैसी राजनीतिक घटनाओं का सहारा ले रही है ताकि अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए समय तो मिल सके, साथ ही जनता का ध्यान भी भटकता रहे. अगर ऐसा नहीं हुआ तो ज्यों ही बेरोजगारी और महंगाई और बढ़ी, सारे देश में हा-हाकार मचना शुरू हो जाएगा. उसके बाद जनता की आवाज विपक्ष की आवाज बन सदन में गूंजेगी और सरकार सत्ता में रहते हुए भी जनता का विश्वास खो देगी. अगर ऐसा हुआ तो ज्यादा समय नहीं बीतेगा और सफलता के घोड़े पर सवार बीजेपी की हालात मौजूदा कांग्रेस की तरह हो जाएगा और पांच खरब की अर्थ व्यवस्था का सपना देखने वाली सरकार को सारी ताकत खुद को बचाने में खर्च करनी पड़ेगी.

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तेजी से नीचे गिरती भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को संभालने और पटरी पर लाने के लिए ही सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से 1.7 लाख रुपये ले रही है ताकि ये गिरावट थम सके. इस फंड में से 70 हजार करोड़ बैंकों को दिए जाएंगे ताकि लोगों को आसानी से लोन दिया जा सके. वहीं वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ऐसी घोषणाएं भी लागू करने जा रही हैं जिनसे भारत में विदेशी विनियोग में आसानी हो. गन्ना किसानों को 6 हजार करोड़ रुपये की सहायता देने की कोशिश हो रही है. वहीं 75 नए मेडिकल कॉलेज खोलना तय हुआ है. भवन निर्माण और आयकर में भी रियायतों का पिटारा खोलने की तैयारी हो रही है.

देश के प्रमुख अर्थशास्त्री (Economist) सरकार को नई आर्थिक नीति बनाने की सलाह दे रहे हैं ताकि अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को मजबूत बनाने के लिए साहसिक कदम उठाए जा सकें. माना जा रहा है कि सितम्बर महीने के पूरे दो हफ्ते केवल अर्थव्यवस्था के नाम किए जाएंगे ताकि जनता की सुगबुगाहट को सुलगने से समय रहते रोका जा सके. अगर जल्दी ही ऐसा न हुआ तो भारत सबसे ज्यादा युवाओं का देश तो होगा लेकिन वो केवल बेरोजगारी (Unemployment) की फौज से ज्यादा कुछ नहीं होगी.

राहुल गांधी अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य कैसे बने हुए हैं?

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राहुल गांधी (Rahul Gandhi) कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) पद से इस्तीफा देने के बाद अपने आप कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य कैसे बन गए, इसको लेकर सवाल उठने लगे हैं. राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष बनी थीं. सोनिया की अध्यक्षता वाली कांग्रेस कार्यसमिति ने राहुल गांधी को सदस्य नियुक्त करने की औपचारिक घोषणा नहीं की है, फिर भी पार्टी की वेबसाइट पर कार्यकारिणी के 24 सदस्यों की सूची अपडेट करते हुए मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के बाद दूसरे नंबर पर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का नाम दर्ज कर दिया गया है. कांग्रेस के … Read more

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ सरकार को दी चेतावनी

मध्यप्रदेश कांग्रेस (Madhya Pradesh Congress) के कद्दावर नेता और ग्वालियर महाराज के नाम से मशहूर पूर्व लोकसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने अवैध खनन को लेकर कमलनाथ सरकार (Kamalnath Government) पर बोला हमला. सिंधिया ने सरकार को चेतावनी (Warned) देते हुए कहा कि अगर अवैध खनन का कारोबार नहीं रुका तो वह आगे आने को मजबूर होंगे. उन्होंने रेत के अवैध खनन पर अपनी ही सरकार को घेरा और इस कारोबार में लगे लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की. बड़ी खबर: मध्यप्रदेश में भाजपा के सहयोग से ज्योतिरादित्य सिंधिया बन सकते हैं मुख्यमंत्री! बता दें, पूर्व केन्दीय मंत्री और पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने दो दिवसीय बहुप्रतीक्षित ग्वालियर … Read more

उत्तर प्रदेश में नई टीम बनाने की तैयारी कर रहीं प्रियंका

अगले हफ्ते तक प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) उत्तर प्रदेश में कांग्रेस (Congress) की नई टीम बना लेंगी. प्रदेश में पांच विधानसभा सीटों पर उप चुनाव के लिए कांग्रेस के उम्मीदवार घोषित होने के साथ ही प्रियंका गांधी को पूरे उत्तर प्रदेश (UttarPradesh) का प्रभार सौंपने की तैयारी कांग्रेस की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव है. पिछले तीन महीने से प्रियंका प्रदेश में सक्रिय हैं. वह लगातार कार्यकर्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर रही हैं. पिछला लोकसभा चुनाव बुरी तरह हारने के बाद कांग्रेस के सामने उत्तर प्रदेश में अपना अस्तित्व बचाने की चुनौती है. अब तक कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभार है. मंगलवार … Read more