कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत करने वाले शहजाद पूनावाला का राजनीतिक सफर एक बार फिर चर्चा में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ के बाद बीजेपी में शामिल हुए पूनावाला अब पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाने की वजह से सुर्खियों में हैं. बीजेपी छोड़ने के ऐलान के बाद देर रात उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा, 'मैं पीएम नरेंद्र मोदी जी से पूरी तरह से निराश हो चुका हूं. 12 साल हो गए और वह ठीक से डिक्टेटर नहीं बन सके.'
भारतीय राजनीति में शहजाद पूनावाला उन नेताओं में रहे हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में बड़ा वैचारिक और संगठनात्मक बदलाव देखा. राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में टीवी पर मजबूती के साथ बीजेपी और पीएम मोदी की नीतियों का बचाव करते करने वाले पूनावाला ने कांग्रेस से अपने करियर की शुरुआत की थी. पार्टी के अंदर संगठनात्मक चुनावों और नेतृत्व को लेकर खुलकर सवाल उठाने के चलते उनका कांग्रेस नेतृत्व से टकराव बढ़ा और उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली.
कांग्रेस छोड़ने के बाद शहजाद पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई नीतियों और सरकार के कामकाज की सार्वजनिक रूप से सराहना की. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही वह दौर था, जब उनकी बीजेपी से नजदीकियां बढ़ीं. खुद पीएम मोदी ने पूनावाला के साहस की सराहना की और इसके ठीक बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा.
हाल के दिनों में शहजाद पूनावाला को लेकर मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक हलकों में ऐसी अटकलें सामने आई हैं कि उन्होंने पार्टी के कुछ फैसलों और कार्यशैली को लेकर असहमति जताई है. इसी वजह से उनके बीजेपी में भविष्य को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.
शहजाद पूनावाला का राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण माना जाता है कि भारतीय राजनीति में वैचारिक मतभेद, संगठनात्मक असहमति और बदलते राजनीतिक समीकरण नेताओं की दिशा बदल सकते हैं. कांग्रेस से बीजेपी तक का उनका सफर पहले भी चर्चा का विषय रहा और अब उनके भविष्य को लेकर उठ रहे सवाल भी राजनीतिक गलियारों में बहस का केंद्र बने हुए हैं.
पुणे के पैदा हुए, पेशे से वकील हैं शहजाद
राजनीति में आने से पहले शहजाद पूनावाला वकील और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करते थे. उनके भाई तहसीन पूनावाला सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर जाने जाते हैं. पहले दोनों भाई साथ में कांग्रेस के लिए काम किया करते थे. लेकिन बाद में जब शहजाद ने कांग्रेस से अलग होने का फैसला किया, तो दोनों भाइयों के बीच में भी दरार आ गई.
कांग्रेस से की राजनीतिक पारी की शुरुआत
शहजाद पूनावाला ने अपनी राजनीति पारी की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की. 2008 में वह अपनी क्षमता के आधार पर लगातार आगे बढ़ते गए. कांग्रेस युवा मोर्चा में वह पुणे के उपाध्यक्ष के तौर पर काम किया. इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी के मीडिया सेल में काम किया और उसके बाद महाराष्ट्र कांग्रेस के महासचिव के रूप में काम किया.
2017 में कांग्रेस पार्टी से राहें हुईं जुदा
शहजाद पूनावाला और कांग्रेस पार्टी की राहें 2017 में जुदा हो गईं. शहजाद ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनावों पर सवाल उठाया और उनमें धांधली का आरोप लगाया. शहजाद कहा कि पूरा इकोसिस्टम राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने के लिए काम कर रहा है. उन्होंने इलेक्शन में पारदर्शिता की मांग करते हुए राहुल गांधी से पद से इस्तीफा देकर एक आम कार्यकर्ता की तरह चुनाव लड़ने की अपील की. इसके बाद पार्टी से तनाव के चलते उन्होंने
कांग्रेस छोड़ दी.
प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात चुनाव में की तारीफ
शहजाद पूनावाला लगातार कांग्रेस पार्टी पर निशाना साध रहे थे. उसी समय गुजरात में विधानसभा चुनाव हो रहा था. चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहजाद पूनावाला की तारीफ करते हुए उनकी हिम्मत की दाद दी. इसके बाद शहजाद पूनावाला का राजनैतिक ग्राफ पूरी तरह से बदल गया. वह पार्टी में शामिल हो गए और कुछ ही समय बाद उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया गया. इसके बाद वह पूरे दमखम के साथ टेलीविजन पर भारतीय जनता पार्टी और पीएम मोदी का बचाव करते नजर आए.
बीजेपी का मजबूत चेहरा बने शहजाद पूनावाला
कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद भी शहजाद पूनावाला जल्दी ही पार्टी के लिए एक मजबूत चेहरा बन गए. हिंदूवादी पार्टी में एक मुस्लिम प्रवक्ता का होना भी पार्टी के लिए अच्छा साबित हुआ. अपने कार्यकाल में पूनावाला ने यूसीसी, तीन तलाक और सीएए बिल जैसे तमाम संवेदनशील मुद्दों पर सरकार की सोच को जनता के सामने रखा.
अब बीजेपी से दिया इस्तीफा
भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले शहजाद पूनावाला ने बीजेपी से भी इस्तीफा दे दिया है. अपने इस फैसले के पीछे पूनावाला ने कुछ कारण बताए हैं. एक पुराने पॉडकॉस्ट के दौरान उन्होंने कहा कि वह 2024 के बाद ही सक्रिय राजनीति से इस्तीफा देना चाहते थे. लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 के बाद पीएम मोदी के चेहरे के भाव के बाद वह रुक गए. राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार अब पूनावाला राजनीति से पूरी तरह से संन्यास लेने के मूड में हैं.
बताते चले कि अपने दो दशक के लंबे करियर में पूनावाला कभी सक्रिय राजनीति में नहीं उतरे. उन्होंने कभी न तो लोकसभा और न विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन टीवी के पर्दे पर बेबाक अंदाज में नजर आए. अब उनका आगे का रास्ता क्या होगा, ये तो आने वाला समय ही बता पाएगा लेकिन बीजेपी ने अपना एक बेबाक सिपाही जरूर खो दिया है.









