पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद भी टकराव
थमता नजर नहीं आ रहा है. टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर सामने आ रही हिंसा
की घटनाओं के बीच अब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले पर कथित हमले ने राजनीतिक
माहौल को और गरमा दिया है.
हलीसहर में ममता बनर्जी एक टीएमसी कार्यकर्ता की संदिग्ध
मौत के बाद उसके परिवार से मुलाकात करने पहुंची थीं. इसी दौरान स्थानीय लोगों और प्रदर्शनकारियों
ने उनके काफिले को घेर लिया. देखते ही देखते प्रदर्शनकारियों की भीड़ उग्र हो गई और
ममता की गाड़ी की ओर पत्थर, पानी की बोतलें और जूते-चप्पल फेंके जाने लगे. स्थिति बिगड़ती
देख पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया और ममता बनर्जी को सुरक्षित स्थान से बाहर निकाला.
टीएमसी कार्यकर्ता की मौत के बाद भड़का गुस्सा
पूरा विवाद टीएमसी कार्यकर्ता बिरजू केओट की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़ा बताया जा रहा है. बिरजू की पत्नी और टीएमसी पार्षद जेनी शर्मा ने आरोप लगाया कि हलीसहर में पुलिस हिरासत के दौरान बिरजू की मौत हुई.
मामले को लेकर स्थानीय लोगों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ पहले से नाराजगी थी. ममता बनर्जी इसी मामले में पीड़ित परिवार से मिलने पहुंची थीं. उनके पहुंचते ही प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और भड़क गया और उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. इसी दौरान ममता बनर्जी के काफिले को भीड़ ने घेर लिया और उनकी गाड़ी पर कथित तौर पर हमला किया गया.
'खिड़की खुली होती तो जान जा सकती थी'
घटना के बाद ममता बनर्जी ने हमले को लेकर गंभीर सवाल उठाए.
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में उनकी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए.
ममता ने कहा कि अगर कार की खिड़की खुली होती तो उनके सिर पर गंभीर चोट लग सकती थी और
उनकी जान भी जा सकती थी. उन्होंने घटना को पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति
से जोड़ते हुए पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए.
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय बीजेपी को संरक्षण दे रही है. ममता के इस बयान के बाद घटना ने सीधे तौर पर राजनीतिक रंग ले लिया है.
बीजेपी ने हमले से किया किनारा
ममता बनर्जी के काफिले पर हमले को लेकर बीजेपी ने किसी भी
तरह की जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार किया है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य
ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की गाड़ी पर पत्थर, मिट्टी या
चप्पल फेंकने जैसी घटना का पार्टी समर्थन नहीं करती.
उन्होंने कहा कि बीजेपी का कोई कार्यकर्ता इस घटना में शामिल नहीं है और पूर्व महिला मुख्यमंत्री के साथ इस तरह का व्यवहार पश्चिम बंगाल की छवि के लिए भी ठीक नहीं है.बीजेपी ने पुलिस से घटना की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
फिर आमने-सामने टीएमसी और बीजेपी
पश्चिम बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच राजनीतिक संघर्ष
पहले भी कई बार हिंसक टकराव का रूप ले चुका है. विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक माहौल
में बदलाव के बावजूद दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है.
टीएमसी जहां राज्य में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा को लेकर बीजेपी पर सवाल उठा रही है, वहीं बीजेपी टीएमसी पर राजनीतिक सहानुभूति हासिल करने और हर घटना को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाती रही है.
ममता बनर्जी के काफिले पर हुआ कथित हमला ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में चुनावी राजनीति के बाद नए राजनीतिक समीकरण बनने की प्रक्रिया जारी है.
क्या बढ़ेगा बंगाल में राजनीतिक तनाव?
ममता बनर्जी के काफिले पर हमले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति
में एक बार फिर कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा के मुद्दे को केंद्र में ला दिया
है.
एक तरफ टीएमसी इसे सरकार और पुलिस प्रशासन की विफलता के तौर पर पेश कर सकती है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इस घटना से खुद को अलग रखकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस इस घटना की जांच कितनी तेजी से करती है और हमले के पीछे मौजूद लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है. फिलहाल इतना साफ है कि ममता बनर्जी के काफिले पर हुआ यह हमला सिर्फ एक स्थानीय घटना बनकर नहीं रहने वाला. इसके राजनीतिक असर की गूंज आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की सियासत में सुनाई दे सकती है.












