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सांसद बनाम पूर्व वित्त सचिव: GDP विवाद से मानहानि मुकदमे तक पहुंची निशिकांत दुबे और सुभाष गर्ग की तकरार

29 सितंबर 2026
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सांसद बनाम पूर्व वित्त सचिव: GDP विवाद से मानहानि मुकदमे तक पहुंची निशिकांत दुबे और सुभाष गर्ग की तकरार

2018 की कथित मुलाकात, आर्थिक नीतियों पर पुराना मतभेद और हालिया GDP आंकड़ों पर सवालों के बाद गहरा हुआ विवाद, दुबे ने ठोका 2 करोड़ का मुकदमा

भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद निशिकांत दुबे और पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बीच चल रहा सार्वजनिक विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है. 21 सितंबर 2026 को दुबे ने गर्ग के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर करने की जानकारी दी. विवाद का ताजा केंद्र गर्ग द्वारा एक पॉडकास्ट में 2018 में दोनों के बीच कथित मुलाकात को लेकर किए गए दावे हैं. दुबे ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि वह कभी गर्ग के कार्यालय नहीं गए.

GDP के आंकड़ों से फिर सामने आया पुराना विवाद

दोनों के बीच मौजूदा तकरार की पृष्ठभूमि हालिया GDP आंकड़ों पर गर्ग की टिप्पणियां हैं. गर्ग ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में दर्ज 7.8 प्रतिशत वास्तविक GDP वृद्धि की व्याख्या पर सवाल उठाए थे. इसके बाद दुबे ने 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा अपना पुराना पत्र फिर साझा किया, जिसमें उन्होंने तत्कालीन आर्थिक मामलों के सचिव गर्ग की आर्थिक नीति संबंधी सोच पर सवाल उठाए थे.

गर्ग ने GDP के आधार वर्ष और पुराने आंकड़ों की तुलना से जुड़े सवाल उठाए, जबकि दुबे ने उनके पुराने कार्यकाल और आर्थिक नीतियों को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं. इस तरह मौजूदा GDP बहस ने दोनों के बीच करीब आठ साल पुराने मतभेद को फिर सार्वजनिक कर दिया.

2018 की कथित मुलाकात पर दोनों के दावे अलग

विवाद का सबसे संवेदनशील हिस्सा 2018 की कथित मुलाकात है. गर्ग के अनुसार, दुबे उनसे कार्यालय में मिले थे और LIC से जुड़े किसी मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध किया था. गर्ग का कहना है कि उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था. उन्होंने बाद में इस घटनाक्रम को लेकर दुबे पर दबाव बनाने के आरोप भी लगाए.

दूसरी ओर, दुबे ने गर्ग के दावे को स्पष्ट रूप से नकारते हुए कहा कि उन्होंने 2009 में सांसद बनने के बाद किसी भारत सरकार के सचिव के कार्यालय का दौरा नहीं किया. उन्होंने कथित मुलाकात या ट्रांसफर-पोस्टिंग से संबंधित किसी पत्र के प्रमाण सामने रखने की चुनौती भी दी.

2018 का पत्र भी विवाद के केंद्र में

इस पूरे घटनाक्रम में 3 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री मोदी को लिखा दुबे का पत्र भी महत्वपूर्ण है. उस समय गर्ग आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव थे. पत्र में दुबे ने राजकोषीय समेकन, राजकोषीय घाटे और सरकारी निवेश से जुड़ी आर्थिक नीति पर अपनी चिंताएं रखी थीं और गर्ग के दृष्टिकोण की समीक्षा की मांग की थी. यह पत्र सितंबर 2026 में GDP विवाद के बीच दोबारा सार्वजनिक हुआ.

गर्ग ने बाद में अपने पक्ष से इस पत्र और 2018 की घटनाओं का अलग विवरण दिया. उन्होंने कहा कि उनका तबादला सहमति से हुआ था और बाद में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली. वहीं, दुबे ने उनके कार्यकाल और आर्थिक नीति को लेकर अपनी पुरानी आलोचनाएं दोहराईं.

अब अदालत में तय होगा विवाद का कानूनी पक्ष

दुबे ने गर्ग को भेजे कानूनी नोटिस में कथित बयानों को वापस लेने और माफी मांगने की मांग की थी. रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने आपराधिक मानहानि के साथ-साथ हर्जाने और अन्य कानूनी उपायों की बात भी रखी. फिलहाल दोनों पक्ष 2018 की घटनाओं और एक-दूसरे के बयानों को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं. ऐसे में इन आरोपों की सत्यता और कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण अदालत की प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा. GDP के आंकड़ों को लेकर शुरू हुआ सार्वजनिक विवाद अब व्यक्तिगत आरोपों और मानहानि की कानूनी लड़ाई तक पहुंच गया है.

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