राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख और सांसद हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान की भजनलाल सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सांसद बेनीवाल ने सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से जनता के हवाले से पूछा है कि पूर्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में महज एक तकनीकी त्रुटि के कारण माइक बंद होने पर तो एक महिला आईएएस (IAS) अधिकारी को तुरंत एपीओ (APO - पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा में) कर दिया गया, लेकिन पचपदरा स्थित राजस्थान रिफाइनरी में प्रधानमंत्री के उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले अप्रैल माह में जो भीषण आग लगी थी, उस पर जिले के प्रशासनिक मुखिया होने के नाते बालोतरा के जिला कलेक्टर की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई? उन्हें पद से क्यों नहीं हटाया गया?
सांसद हनुमान बेनीवाल ने सुशासन और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बालोतरा में सरकारी आवास उपलब्ध नहीं था, तो नियमानुसार कलेक्टर को किराए के मकान में रहना चाहिए था, मगर वह रिफाइनरी की ही टाउनशिप में निवास कर रहे हैं. हनुमान बेनीवाल ने पूछा कि क्या किसी औद्योगिक परियोजना की टाउनशिप में जिला कलेक्टर का रहना उचित है? इसके साथ ही उन्होंने बालोतरा कलेक्टर पर CETP प्लांट के सेस कर, रिफाइनरी क्षेत्र और आसपास की सरकारी भूमि से रास्तों के आवंटन तथा भू-उपयोग परिवर्तन (Land Use Change) में लगातार लग रहे अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर सरकार की खामोशी पर भी सवाल उठाए हैं. बेनीवाल ने सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को टैग करते हुए मांग की है कि PMO इस पूरे मामले में राजस्थान सरकार से रिपोर्ट तलब करे और यह स्पष्ट किया जाए कि क्या बालोतरा कलेक्टर राजस्थान सरकार से भी बड़े हो गए हैं जो इतनी गंभीर आगजनी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.











