जन्मदिन पर मायावती ने मोदी सरकार को लिया आड़े हाथ, कहा- देश की स्थिति कांग्रेस काल से भी खराब, साक्षी महाराज ने किया कटाक्ष

केंद्र की गलत नीतियों की वजह से देश में गरीबी, अशिक्षा और तनाव का माहौल, CAA को बताया विभाजनकारी और असंवैधानिक, स्वामी प्रसाद मौर्य ने पैसे की राजनीति त्याग बाबा साहब के बताए मार्ग पर चलने की दी सलाह

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पॉलिटॉक्स ब्यूरो. बसपा सुप्रीमो मायावती का आज जन्मदिन है. आज वे अपना 64वां जन्म दिवस ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के रुप में मना रही हैं. इस मौके पर मायावती ने मॉल एवेन्यू स्थित पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए केंद्र की मोदी सरकार और कांग्रेस पर बराबर हमला किया. पार्टी प्रमुख ने कहा कि देश की जनता कांग्रेस की नीतियों से परेशान और त्रस्त होकर बीजेपी को सरकार में लाई थी, लेकिन आज कांग्रेस काल से भी ज्यादा देश की हालत खराब हो गई है. बीजेपी सरकार कांग्रेस से भी दो कदम आगे हैं. दोनों पार्टियां एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं. उनके बयान पर बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि मायावती बीजेपी की चिंता छोड़ अपनी पार्टी की चिंता करे.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की तरह ही मौजूदा केंद्र सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर रही है, इससे लोग परेशान हो रहे हैं. बीजेपी की इन्हीं सब खामियों को भुनाकर कांग्रेस एंड कंपनी सत्ता में आना चाहती है. दोनों पार्टियों को जनता से कोई सरोकार नहीं है. बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने कहा कि बीजेपी को कांग्रेस की आलोचना छोड़कर देश हित और गरीबी हटाने पर ध्यान देना चाहिए. इससे पहले प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने सबसे पहले कांशीराम को याद किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से जनकल्याणकारी दिवस के रूप में अपना जन्मदिन मनाने का आव्हान किया.

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मायावती ने आगे कहा कि मौजूदा मोदी सरकार की गलत नीतियों की वजह से देशभर में अशांति और कानून व्यवस्था बिगड़ गई है जो चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि मोदीराज में देश की अर्थव्यवस्था बीमार हालत में है. बीजेपी सरकार अगर कांग्रेस के रास्तों पर चलती रही तो धीरे-धीरे अन्य राज्यों की सत्ता भी उसके हाथ से चली जाएगी. मोदी राज में 130 करोड़ जनता के सामने रोजी-रोटी का संकट हो गया है और देशभर में भयंकर गरीबी और बेरोजगारी व्याप्त है.

बसपा प्रमुख ने कहा कि देशभर में उद्योग धंधे चौपट हो गए हैं. इस वजह से आम जनता का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है. केंद्र की गलत नीतियों की वजह से देश में गरीबी, अशिक्षा और तनाव का माहौल है. देश की अर्थव्यवस्था मंदी के चलते बहुत खराब स्थिति में पहुंच चुकी है. ज्यादातर मुद्दों को ताक पर रख दिया गया है. पूर्व में कांग्रेस की सरकार और मौजदा बीजेपी की सरकार उसी रास्ते पर चल रही है जिससे बसपा चिंतित है. उन्होंने कांग्रेस और बीजेपी दोनों एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं.

मायावती ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर विरोध जताते हुए कहा कि ये कानून विभाजनकारी और असंवैधानिक है.लोग इस कानून से बिल्कुल सहमत नहीं हैं. यह कानून किसी एक विशेष समुदाय के खिलाफ लग रहा है, जो असंवैधानिक है. इसलिए लोगों के भ्रम को दूर करने के लिए इस कानून को संसद में लाने के बजाय स्टैंडिंग कमेटी में भेजा जाए. आम सहमति से इस बिल को दोनों सदनों में लाना चाहिए था.

वहीं बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने मायावती के इस बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें बीजेपी की चिंता छोड़कर अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए. इससे पहले यूपी के कैबिनेट मंत्री और कभी मायावती के बेहद करीबी रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा प्रमुख पर पैसों की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए तंज कसा कि उन्हें पैसे की राजनीति छोड़कर बाबा साहब के बताए हुए मार्ग पर चलना चाहिए. वहीं योगी कैबिनेट में मंत्री सतीश महाना ने मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपी की राजनीति में मायावती का चैप्टर क्लोज हो चुका है. उन्होंने पत्रकारों से भी अपील की कि जिनका चैप्टर क्लोज हो चुका है, उनका नाम न लें. महाना ने ये बयान योगी सरकार में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद बसपा प्रमुख के योगी सरकार पर निशाना साधने के पलटवार में दिया.

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बहरहाल बता दें, 64 वर्षीय मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल, नई दिल्ली में एक हिंदू चमार (दलित) परिवार में हुआ था. उनके पिता, प्रभु दास, बादलपुर, गौतम बुद्ध नगर में एक डाकघर कर्मचारी थे. मायावती ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की. 1977 में कांशीराम के संपर्क में आने के बाद मायावती ने एक पूर्ण कालिक राजनीतिज्ञ बनने का निर्णय ले लिया. कांशीराम के संरक्षण के अन्तर्गत वे उस समय उनकी कोर टीम का हिस्सा रहीं, जब 1984 में बसपा की स्थापना हुई.

1989 में यूपी की बिजनौर लोकसभा सीट से निर्वाचित होकर उन्होंने अपने राजनीति करियर की शुरुआत की. 1994 में वे पार्टी की ओर से राज्यसभा पहुंची और 1995 में प्रथम भारतीय दलित महिला के रूप में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की. 18 सितंबर, 2003 को वह बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं. उन्होंने चार बार (3 जून, 1995 से 18 अक्टूबर, 1995), (21 मार्च, 1997 से 20 सितम्बर, 1997), (3 मई, 2002 से 26 अगस्त, 2003) और (13 मई, 2007 से 6 मार्च 2012) बतौर मुख्यमंत्री राज्य की बागड़ौर संभाली. वे 4 बार लोकसभा सांसद और तीन बार राज्यसभा सांसद भी रह चुकी हैं.

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