पहले आम आदमी पार्टी, उसके बाद पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के बाद क्षेत्रीय दलों में बढ़ी बगावत की आंच अब उत्तर प्रदेश पहुंचने के दावे लगातार किए जा रहे हैं. यूपी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सपा के सांसदों में नाराजगी पनपने और जल्द टूट का दावा किया, तब से प्रदेश की राजनीति गर्मा रही है. इन मु्द्दों के पीछे के कारणों को लेकर भी चर्चा तेज हुई है. इसमें सबसे बड़ा कारण सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स को माना जा रहा है. दावा किया जा रहा है पीडीए दबाव के कारण पार्टी नेता अंदरूनी तौर पर नाराज हो रहे हैं. यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बढ़ी इस हलचल ने पार्टी को भी असहज किया है.
पीडीए है विवाद की जड़
भारतीय जनता पार्टी और सहयोगी दलों ने समाजवादी पार्टी के सांसदों के टूट का दावा किया है. इसने प्रदेश की राजनीति में बड़ी हलचल पैदा कर दी है. इस पूरी राजनीति के पीछे समाजवादी पार्टी की पीडीए पॉलिटिक्स को बड़ा कारण माना जा रहा है. दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा. लोकसभा चुनाव 2014 के बाद पहली बार पार्टी दबाव में दिखी. सपा की पीडीए पॉलिटिक्स को काटने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं. ऐसे में बिखराव के दावों के जरिए इस समाज को बड़ा संदेश देती दिख रही है.
मुरादाबाद
से समाजवादी पार्टी सांसद रुचि वीरा ने पार्टी में टूट जैसी बातों को तो बेबुनियाद
बताया लेकिन नाराजगी का संकेत भी दे दिया. उन्होंने कहा कि मुरादाबाद देहात में हुए
पीडीए सम्मेलन में हमें नहीं बुलाया गया. वहां मेरी फोटो नहीं लगाई गई.
इसी
तरह बलिया के सांसद सनातन पांडेय ने भी सपा में टूट के दावों को खारिज किया लेकिन लखनऊ
में 17 जून को सपा मुख्यालय में हुए प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में तरजीह न मिलने की बात
पर नाराजगी जाहिर की.
पीडीए पॉलिटिक्स ने किया असहज
भारतीय जनता पार्टी और सहयोगियों को भी सपा की पीडीए पॉलिटिक्स ने असहज किया है. पूर्वांचल में पीडीए पॉलिटिक्स का खासा असर दिखा. पूर्वांचल की 28 लोकसभा सीटों में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी. बीजेपी और अपना दल एस महज 9 सीटें ही जीत पाई. ओबीसी पॉलिटिक्स पर दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी निषाद पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का असर नहीं दिखा.
हालांकि,
अखिलेश यादव की पीडीए पॉलिटिक्स के आगे एनडीए की ओबीसी पॉलिटिक्स को साधने की कोशिश
नाकामयाब दिखी. ऐसे में भारतीय जनता पार्टी ने पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर
ओबीसी पॉलिटिक्स पर ध्यान केंद्रित किया है. कोशिश कुर्मी समाज को साधने की है.
दरअसल,
समाजवादी पार्टी के पूर्वांचल में जीती सीटों में सपा गठबंधन से 10 ओबीसी और पांच दलित
समाज के सांसद चुनकर आए. समाजवादी पार्टी के 10 ओबीसी सांसदों में तीन प्रतापगढ़, बस्ती
और अंबेडकरनगर के सांसद कुर्मी समाज से आते हैं. ऐसे में पंकज चौधरी के जरिए इस वर्ग
के बीच बीजेपी अपनी पकड़ बनाने की कोशिश करती दिख रही है. वहीं, बीजेपी और सहयोगी दल
समाजवादी पार्टी में बिखराव की बात कर एक बड़ा संदेश देने की कोशिश में है.
अब
देखना ये है कि पीडीए पॉलिटिक्स के साथ साथ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अपनी पार्टी के
सांसद एवं विधायकों की नाराजगी दूर कर भी पाते हैं या फिर नहीं.









