‘हमें किसी की इजाजत की जरूरत नहीं..’ भारत की ट्रंप को दो टूक

ईरान पर यूएस-इजरायल पर हमले के बाद अमेरिका की टेम्पररी छूट पर भारत का जवाब, ‘जहां से सस्ता मिलेगा, वहीं से खरीदेंगे..किसी की परमिशन नहीं चाहिए’

ईरान पर यूएस-इजरायल पर हमले के बाद दुनियाभर में तेज की आपूर्ति पर संकट बना हुआ है. इस बीच अमेरिका ने भारत को एक महीने तक रूस से तेल खरीदने की बात कही, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई. इस मामले पर अब भारत सरकार ने प्रतिक्रिया दी है. केंद्र की मोदी सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को दो टूक में जवाब देते हुए कहा कि भारत को जहां से भी सस्ता तेल मिलेगा, वहीं से खरीदेगा. सरकार ने देशवासियों को विश्वास दिलाया कि रुकावटों के बावजूद भारत की एनर्जी सप्लाई सुरक्षित बनी हुई है.

केंद्र सरकार ने एक अधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, ‘भारत ने रूसी तेल खरीदने के लिए कभी किसी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं रहा है. भारत फरवरी 2026 में भी रूस से तेल इंपोर्ट कर रहा है और रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्लायर है. रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन साल तक भारत यूएस और ईयू के एतराज के बावजूद रूस से तेल खरीदता रहा है.’

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केंद्र के अनुसार, होर्मुज रूट पर तनाव बढ़ने के बाद भी भारत की एनर्जी सप्लाई सुरक्षित और स्थिर बनी हुई है. भारत ने अपने कच्चे तेल के सोर्स को 27 से 40 देशों तक अलग-अलग कर दिया है, जिससे कई दूसरे सप्लाई रूट पक्के हो गए हैं. देश के हित में भारत उन जगहों से तेल खरीदता है जहां सबसे अच्छे और सस्ते रेट मिलते हैं.

भारत ने यह भी पुष्टि की कि के बाद वह रूस से तेल इंपोर्ट करना जारी रखेगा. यह छूट मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से दी गई थी. केंद्र ने कहा है कि नई दिल्ली को ऐसी खरीदारी के लिए किसी भी देश से परमिशन की जरूरत नहीं है. केंद्र के अनुसार, भारत के पास रिजर्व और सप्लाई चेन में 250 मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट हैं. यह सात या आठ हफ्ते की खपत के बराबर बफर देता है. भारत की कुल रिफाइनिंग कैपेसिटी 258 मिलियन मीट्रिक टन सालाना है, जो मौजूदा घरेलू डिमांड से ज्यादा है.

गौरतलब है कि ईरान के खिलाफ यूएस-इजरायल की मिलिट्री कार्रवाई और खाड़ी में तेहरान के जवाबी हमलों ने दुनिया भर में एनर्जी फ्लो और शिपिंग रूट में रुकावट डाली है, जिससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं. ऐसे वक्त में अमेरिका ने भारत को टेम्पररी रूस से तेल खरीदने की छूट दी है, जिससे जवाब में केंद्र सरकार ने अमेरिका को मुंह तोड़ जवाब दिया है. अब देखना होगा कि युद्ध के दौरान बढ़ी तेल की दरों का असर भारत पर कितना पड़ता है.