बॉलीवुड में राज कपूर तो राजनीति में लालू प्रसाद यादव का कुर्ता फाड़ होली मनाने का अलग था अंदाज

लालू प्रसाद यादव का होली खेलने का अंदाज 'ठेठ गांव' जैसा ही था. बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहते हुए भी वे 'जमकर' होली खेलते थे, कुर्ता फाड़ होली में यह नहीं देखा जाता था कि किसका कद कितना बड़ा है. जो जिसके पकड़ में आए उसका कुर्ता फाड़ने में लग जाता था, ऐसे ही राज कपूर की होली पार्टी का सबको पूरे साल बेसब्री से इंतजार रहता था

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Politalks.News/Happy Holi. सबसे पहले पॉलिटॉक्स न्यूज़ डिजिटल वेबपोर्टल के सभी पाठकों को होली के पावन पर्व की बहुत बहुत शुभकामनाएं. आज हम बात करेंगे अभिनेताओं और नेताओं द्वारा मनाई जाने वाली होली की. इस बार फिल्म इंडस्ट्रीज में कोरोना महामारी की वजह से होली की मस्ती भले ही दिखाई नहीं पड़ रही हो, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब पूरे बॉलीवुड पर इस त्योहार का कई दिनों तक सुरूर छाया रहता था. ऐसे ही राजनीतिक क्षेत्र में लालू प्रसाद यादव का होली मनाने का अंदाज एकदम अलग हुआ करता था. लालू प्रसाद की कुर्ता फाड़ होली खूब सुर्खियों में रहती थी. हम पहले फिल्म इंडस्ट्रीज में मनाई जाने वाली होली की बात करते हैं.

होली जब आती है तब ‘आरके स्टूडियो‘ की मस्ती याद आती है. महान फिल्म अभिनेता, निर्माता और निर्देशक राज कपूर ने फिल्म इंडस्ट्रीज में होली मनाने का ‘नया ट्रेंड‘ शुरू किया था जो कई वर्षों तक चलता रहा. आइए अब आपको बताते हैं राज कपूर की होली कैसे हुआ करती थी. मुंबई के चेंबूर में राज कपूर रहते थे वहीं उनका आरके स्टूडियो भी था. इसी स्टूडियो में उन्होंने कई अपनी फिल्मों को भी शूट किया था. इस स्टूडियो में राज कपूर होली की पार्टी हर साल दिया करते थे. राज कपूर की होली पार्टी का सबको पूरे साल बेसब्री से इंतजार रहता था. चूंकि राज कपूर इंडस्ट्री के बड़े नाम थे, ऐसे में बॉलीवुड से जुड़ा हर शख्स उनकी पार्टी में शामिल होना चाहता था.

आरके स्टूडियो में उन दिनों दिलीप कुमार, मनोज कुमार, शशि कपूर, शम्मी कपूर, सुनील दत्त राजेंद्र कुमार, अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, जितेंद्र, धर्मेंद्र, प्रेम चोपड़ा, प्रेमनाथ, राजेंद्रनाथ, हेमा मालिनी जैसे कई सितारों का जमघट लगता था. पार्टी में कहीं नाच-गाना चल रहा होता, तो कहीं रंगों की धूम मची होती थी. खाने-पीने के भी भरपूर इंतजाम होते थे. मेहमानों को तरह-तरह के व्यंजन परोसे जाते थे. राज कपूर होली पर सभी से बहुत ही घुल मिलकर और मस्ती के मूड में रहते थे. वर्ष 1988 में राज कपूर के निधन के बाद आर के स्टूडियो में होली पार्टी का सिलसिला खत्म हो गया. लेकिन आज भी बॉलीवुड से जुड़े लोग राज कपूर की होली पार्टी को याद करते हैं.

इसके अलावा अमिताभ बच्चन भी हर साल होली का आयोजन करते रहे हैं. उनके यहां भी बॉलीवुड के तमाम सितारे पहुंचे थे. लेकिन इस साल कोरोना वायरस की वजह से उनके घर जलसा में कोई होली पार्टी नहीं होगी. ऐसे ही गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर और शबाना आजमी भी लंबे समय से होली पार्टी करते आ रहे हैं. वहीं मशहूर अभिनेता शाहरुख खान की होली पार्टी में बड़े-बड़े सितारे पहुंचते हैं.

लालू प्रसाद यादव की कुर्ता फाड़ होली देशभर में खूब सुर्खियों में रहती थी

अब बात करते हैं राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव की. जब-जब यह रंगो का त्योहार आता है तब लालू की भी याद आती है. इसके लिए हम आपको 90 के दशक में लिए चलते हैं. लालू प्रसाद यादव उन दिनों बड़े नेता बन चुके थे. लेकिन होली खेलने का अंदाज ‘ठेठ गांव‘ जैसा ही था. बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहते हुए भी वे ‘जमकर‘ होली खेलते थे. पटना में उनके निवास स्थान पर हर साल सभी पार्टी और विपक्ष के नेता होली खेलने आते थे. उनके घर पर खेली जाने वाली ‘कुर्ता फाड़‘ होली सबके आकर्षण का केंद्र होती थी. होली के दिन सुबह से ही नेताओं, मंत्रियों और विधायकों का मेला लगा रहता था. लालू के घर होली खेलने सुबह से ही आने लगते थे. सुबह 9 बजे होली शुरू हो जाती थी जो पूरे दिन जारी रहती थी. लालू होली खेलने में सबसे आगे रहते थे, वह एक-एक को पकड़कर रंग लगाए बिना नहीं मानते थे. राबड़ी देवी भी लालू यादव और अन्य नेताओं के साथ होली खेलतीं थीं.

दोपहर तक एक-दूसरे को रंगने के बाद कुर्ता फाड़ होली शुरू होती थी. कुर्ता फाड़ होली में यह नहीं देखा जाता था कि किसका कद कितना बड़ा है. जो जिसके पकड़ में आए उसका कुर्ता फाड़ने में लग जाता था. कई विधायक और मंत्री मिलकर लालू का कुर्ता फाड़ देते थे. लालू भी दूसरों का कुर्ता फाड़ने में पीछे नहीं रहते थे. कुछ देर कुर्ता फाड़ होली खेलने के बाद फिर से एक-दूसरे के शरीर पर रंग डाला जाता था. लालू प्रसाद यादव होली के दिन खुद ढोल-मजीरा बजाते फाग गाते थे. लालू के निवास पर सभी आम और खास लोगों का जमावड़ा रहता. लालू प्रसाद यादव के होली मनाने का अंदाज 2010 तक ऐसे ही चलता रहा. उसके बाद सत्ता से बेदखल और बढ़ती आयु में बीमारी के शिकार के साथ-साथ चारा घोटाले में सजायाफ्ता होने के बाद लालू की होली बंद होती चली गई. लेकिन आज बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश के नेताओं को होली पर लालू की मस्ती जरूर याद आती है.

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