UCC Bill: मध्य प्रदेश में 'शरिया कानून' और ट्रिपल तलाक को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. अब यह मुद्दा सियासी चर्चा का विषय बन गया है. एक सरकारी बयान में कहा गया कि यदि कोई व्यक्ति 'तलाक, तलाक, तलाक' कहकर पत्नी को छोड़ने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होगी और जेल भी जाना पड़ सकता है. यह बयान दिया गया है मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की तरफ से, जिन्होंने ऐलान कटनी में सांदीपनि विद्यालयों को लोकार्पण कार्यक्रम में लोकजन को संबोधित करते हुए कहा कि तीन तलाक का दौर खत्म हो चुका है. अगर कोई 'तलाक, तलाक, तलाक' कहेगा तो उसे जेल जाना पड़ेगा.
उन्होंने शरिया कानून पर सवाल उठाते हुए कहा, 'हिंदुओं और मुसलमानों के लिए अलग-अलग कानून क्यों हों? सबके लिए एक ही कानून होना चाहिए. अगर राम एक शादी करेगा तो रहीम दो या चार शादियां क्यों करेगा? मुस्लिम बहनें भी हमारी बहनें हैं और उनके अधिकारों की रक्षा जरूरी है.' उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में वही रह पाएगा जो एक ही शादी करेगा और विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) लाएंगे.
क्या है यूसीसी कानून?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) सभी धार्मिक समुदायों पर लागू होने के लिए एक देश एक नियम का आह्वान करता है. फिर चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, समुदाय से संबंधित क्यों न हो. यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का मतलब है शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के हिस्से में सभी धर्मों के लिए केवल एक ही कानून लागू होना. इस तरह के लॉ को पर्सनल लॉ भी कहा जाता है.
संविधान के अनुच्छेद 44 के भाग-4 में यूनिफॉर्म सिविल कोड की चर्चा है. राज्य के नीति-निदेशक तत्व से संबंधित इस अनुच्छेद में कहा गया है कि 'राज्य, देशभर में नागरिकों के लिए एक यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कराने का प्रयास करेगा.' हमारे संविधान में नीति निदेशक तत्व सरकारों के लिए एक गाइड की तरह है. इनमें वे सिद्धांत या उद्देश्य बताए गए हैं, जिन्हें हासिल करने के लिए सरकारों को काम करना होता है.
यूसीसी का विरोध क्यों?
यूनिफॉर्म सिविल कोड का सबसे ज्यादा विरोध अल्पसंख्यक खासकर मुस्लिम समुदाय के लोग कर रहे हैं. उनका कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 25 में सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है. इसलिए शादी-ब्याह और परंपराओं से जुड़े मामले में सभी पर समान कानून थोपना संविधान के खिलाफ है.
मुस्लिम नेताओं का यह भी कहना है कि शरिया कानून 1400 साल पुराना है. यह कानून कुरान और पैगम्बर मोहम्मद की शिक्षाओं पर आधारित है. लिहाजा, यह उनकी आस्था का विषय है. मुस्लिमों की चिंता ये है कि 1947 के बाद उन्हें मिली धार्मिक आजादी को धीरे-धीरे उनसे छीनने की कोशिश की जा रही है. हालांकि यह समुदाय विशेष से अधिकार छीनने की कोशिश नहीं, वरन सभी धर्मों को एक ही पायदान एवं एक ही समान करने की पहल है.
आगे क्या बन रही सियासी संभावना?
गौरतलब है कि मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत एक बार में 'तलाक, तलाक, तलाक' (तत्काल तीन तलाक) कहना अवैध और दंडनीय अपराध है. इस कानून के अनुसार ऐसा करने पर संबंधित व्यक्ति को अधिकतम तीन वर्ष तक की सजा और जुर्माना हो सकता है. यह कानून पूरे भारत में लागू है. हालांकि अभी देश के तीन राज्य उत्तराखंड, गुजरात और असम में ही UCC लागू है.
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले आम नागरिकों से सुझाव लिए गए हैं. इनमें मुस्लिम पुरुषों में केवल 38% ने यूसीसी का समर्थन किया, जबकि 15 हजार मुस्लिम महिलाओं में से 10.5 हजार यानी 71% ने यूसीसी के पक्ष में सुझाव दिया है. अब मध्यप्रदेश के सीएम माेहन यादव ने इसी मानसून सत्र में इसे लागू करने का ऐलान किया है. सत्ता पक्ष का कहना है कि वह केवल मौजूदा कानून का पालन करा रहा है.
अब सबकी नजरें मानसून सत्र पर हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि सरकार यूसीसी को किस स्वरूप में लागू करती है और इसका राजनीतिक व सामाजिक प्रभाव क्या होगा. इतना तय है कि मध्य प्रदेश में यूसीसी का मुद्दा आने वाले दिनों में केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का भी प्रमुख विषय बना रहेगा.











