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'दिल्ली में भाडे के टट्टुओं से करवाई पत्थरबाजी'- मदन राठौड़ का विवादित बयान!

22 जुलाई 2026
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'दिल्ली में भाडे के टट्टुओं से करवाई पत्थरबाजी'- मदन राठौड़ का विवादित बयान!

दिल्ली में पेपरलीक के नाम पर विपक्ष ने भाडे के टट्टुओं से करवाई पत्थरबाजी, अस्पताल में भर्ती घायलों में एक भी नहीं है छात्र— मदन राठौड़ 

देश में इन दिनों नीट पेपर लीक व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर विपक्ष का सदन से लेकर सडक तक प्रदर्शन जारी है. बीते दिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के आवास के नजदीक धरना प्रदर्शन किया. इस घटनाक्रम को लेकर आज के कई शहरों में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पार्टी के विरोध में प्रदर्शन किया. जयपुर में आज भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के नेतृत्व में भाजपा प्रदेश कार्यालय से कांग्रेस प्रदेश कार्यालय की ओर पैदल मार्च निकाला गया. इस दौरान अध्यक्ष राठौड ने गत मंगलवार दिल्ली में हुई छात्रों व पुलिस की झडप को लेकर पार्टी कार्यकताओं व पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में पेपरलीक के नाम पर विपक्ष ने भाडे के टट्टुओं से पत्थरबाजी करवाई, अस्पताल में भर्ती घायलों में एक भी छात्र नहीं है. 


भाजपा के विशाल विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि पेपर लीक के नाम पर विपक्ष द्वारा चलाया गया आंदोलन छात्रों का आंदोलन नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र था. अस्पतालों में भर्ती घायल लोगों की जानकारी लेने पर उनमें कोई भी छात्र नहीं मिला. कांग्रेस ने पत्थरबाजी करने के लिए कश्मीर, बिहार से भाड़े के टट्टुओं को बुलाया गया ताकि संसद की कार्यवाही बाधित की जा सके. इतना ही नहीं आंदोलन में पाकिस्तान जिंदाबाद, अफजल के समर्थन में नारे और देश विरोधी नारे लगाए गए. धार्मिक स्थलों के विरोध में बोला गया. ऐसे में हम सभी को इस पूरे घटनाक्रम का सच जनता के सामने लाना आवश्यक है.  


मदन राठौड़ ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी संवाद और चर्चा के माध्यम से समाधान में विश्वास रखती है, जबकि कांग्रेस और विपक्ष छात्रों के मुद्दों का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं.  भाजपा संविधान, लोकतंत्र और संसदीय परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है तथा अराजक राजनीति का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देती रहेगी. जबकि प्रधानमंत्री आवास के बाहर नेता प्रतिपक्ष द्वारा धरना देना भारतीय संसदीय परंपराओं के विपरीत है और लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है. आंदोलन के दौरान मीडिया की महिला कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार, अश्लीलता की गई, जिसकी भाजपा घोर निंदा करती है. लोकतांत्रिक विरोध के नाम पर इस प्रकार की अशोभनीय घटनाएं किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकतीं है.


अध्यक्ष मदन राठौड़ ने आगे कहा कि विपक्ष धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे है, उसके पीछे भी कारण है. जब से धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री बने उन्होंने शिक्षा पद्धति में सुधार लाने का काम किया है. हमारे महान व्यक्तित्व का सम्मान करने का काम किया. इस देश के महापुरुषों की जीवनी को पढ़ाने का काम किया. पहले हमारे देश में अकबर महान पढ़ाया जाता था, धर्मेन्द्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति और शिक्षा व्यवस्था में भारतीय संस्कृति, इतिहास, महापुरुषों तथा लोकनायकों को उचित स्थान देने का कार्य किया गया है. उन्होंने महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, तेजाजी महाराज,गुरु गोविंद सिंह, देवनारायण को पढ़ाने का काम किया है. ऐसे में उनको लगता है कि यह तो शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन कर देंगे. यहां सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पैदा हो जाएगा. ऐसे में इसे हटाना बहुत जरूरी है और यह सोचकर विदेशों में धन एकत्रित किया गया. सच सबके सामने आ जाएगा. जांच हो रही है कि कहां से कितना पैसा मिला, कहां से पत्थर बाजों को लाया गया, यह सब सामने आ जाएगा. विपक्ष इसी कारण शिक्षा मंत्री को निशाना बना रहा है और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहा है.


मदन राठौड़ ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी संवाद और चर्चा के माध्यम से समाधान में विश्वास रखती है, जबकि कांग्रेस और विपक्ष छात्रों के मुद्दों का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं.  उन्होंने कहा कि भाजपा संविधान, लोकतंत्र और संसदीय परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है तथा अराजक राजनीति का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देती रहेगी. संसद में चर्चा के लिए सरकार सदैव तैयार रही है, लेकिन विपक्ष ने संवाद के बजाय टकराव का रास्ता चुना. यह लोकतंत्र के प्रति उनकी असहिष्णु मानसिकता को दर्शाता है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सोचना चाहिए कि जब वह मुख्यमंत्री थे तब 17 बार पेपरलीक हुआ, दो बार यूनिवर्सिटी के पेपर लीक हो गए. कुल मिलाकर जब 19 पेपरलीक हुए तो क्यों नहीं अशोक गहलोत ने इस्तीफा दिया. क्यों नहीं उस समय के शिक्षा मंत्री डोटासरा ने त्यागपत्र दिया. अब किस मुंह से इस्तीफा मांग रहे हैं, उन्हें विचार करना चाहिए और एक बार अपनी गिरेबां में झांकर देखना चाहिए. 


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