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'56 इंच का सीना कांप रहा... लाठी से नहीं दबेगी छात्रों की आवाज' : संजय राउत का केंद्र पर तीखा हमला

21 जुलाई 2026
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'56 इंच का सीना कांप रहा... लाठी से नहीं दबेगी छात्रों की आवाज' : संजय राउत का केंद्र पर तीखा हमला

संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई पर गरमाई सियासत, विपक्ष ने सरकार को घेरा; पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला दिया


संसद के मानसून सत्र के पहले दिन छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) समर्थकों के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है. जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने हैं.

नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय करने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र, कार्यकर्ता और CJP समर्थक जंतर-मंतर पर एकत्र हुए. संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. इस दौरान धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बनी. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने और पथराव की कोशिश की, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई. वहीं प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज और बल प्रयोग के आरोप लगाए.

संजय राउत का सरकार पर हमला —

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने घटना को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन देश के युवाओं के बढ़ते असंतोष का प्रतीक है और सरकार को दमन के बजाय उनकी बात सुननी चाहिए.

राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, "56 इंच का सीना कांप रहा है." उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज को लाठी और पुलिस बल के जरिए दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इससे आंदोलन समाप्त नहीं होगा.

उन्होंने कहा कि संसद की ओर मार्च कर रहे विद्यार्थियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग, आंसू गैस, पानी की बौछार और लाठीचार्ज जैसे कदम उठाए गए, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं.

'सरकार युवाओं से डर रही है' —

राउत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार युवाओं के बढ़ते विरोध से भयभीत है. उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की मांगों पर समय रहते संवाद किया जाता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती. उनके अनुसार, लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को उसे सम्मान देना चाहिए.

सोनम वांगचुक के समर्थन में भी बयान —

राउत ने हाल ही में अनशन से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए दावा किया कि सरकार को लगा था कि वह सोनम वांगचुक जैसे आंदोलनों को आसानी से नियंत्रित कर लेगी, लेकिन अब यह विरोध व्यापक रूप ले चुका है.

इसी बीच, संसद मार्च और पुलिस कार्रवाई पर सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो का भी बयान सामने आया. उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई से आंदोलन कमजोर नहीं होगा, बल्कि छात्रों का मनोबल और मजबूत होगा. उन्होंने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा.

सरकार और पुलिस का पक्ष —

दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को पहले से निर्धारित शर्तों के तहत प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन संसद की ओर मार्च करने और सुरक्षा व्यवस्था भंग करने की कोशिश के कारण हस्तक्षेप करना पड़ा. पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा को कार्रवाई का आधार बताया है.

सरकार की ओर से भी यह कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है.

अब संसद में भी गूंजेगा मुद्दा

छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का मामला अब संसद के मानसून सत्र में भी प्रमुख मुद्दा बनता जा रहा है. विपक्ष सरकार से इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के आधार पर अपने कदम का बचाव करती दिख रही है.

अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या छात्रों की मांगों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस पहल भी सामने आती है.

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