कोरोना के आगे बेबस केंद्र और राज्य सरकार, हर दिन बन रहा संक्रमितों का नया रिकॉर्ड

देश में 10 लाख तो प्रदेश में 19 हजार के करीब एक्टिव मरीज, बीते दिन 15 की हुई मौत तो देशभर में 1064 ने गंवाई कोरोना से अपनी जान

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Corona (2)
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Politalks.News/Rajasthan-Delhi. वैसे देशभर में कृषि बिलों पर बवाल मचा हुआ है लेकिन देखा जाए तो संकट किसानों के साथ देश के तमाम 136 करोड़ लोगों पर गहराता जा रहा है. वो है कोरोना संक्रमण का, जो दिन ब दिन भयावह होता जा रहा है. देशभर में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 56 लाख से भी अधिक हो गई है जिनमें से एक्टिव मरीजों की संख्या 9 लाख के करीब है. पिछले 6 महीनों में 90 हजार की मौत हो चुकी है. राजस्थान की बात करें तो यहां एक्टिव मरीजों की संख्या 19 हजार के करीब है और कुल मरीजों का आंकड़ा 1.18 लाख से अधिक है. 1367 मरीज कोरोना के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं. ये तो सरकारी आंकड़ा है, वास्तविकता इससे कहीं अधिक भयावह है.

बीते 24 घंटों की बात करें तो देश में 85,502 नए मरीजों की पुष्टि हुई है जबकि 1064 लोगों की एक दिन में मौत हुई है. एक दिन में अस्पताल से डिस्चार्ज होने वालों की संख्या 92 हजार के करीब है. जबकि देशभर में 45 लाख से अधिक लोग ठीक हो चुके हैं. रिकवरी रेट 81 फीसदी से अधिक बताई जा रही है. वहीं राजस्थान में हर दिन कोरोना रिकॉर्ड तोड़ रहा है. मंगलवार को एक दिन में कोरोना के 1912 नए मरीज सामने आए जो अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड है. इससे पहले सोमवार को आंकड़ा 1845 था जो उस दिन का सर्वाधिक रिकॉर्ड था. बीते डेढ़ महीनों में नए संक्रमितों का आंकड़ा कभी भी एक हजार से नीचे नहीं गया. मंगलवार को कोरोना से 15 लोगों की मौत हुई जो अब तक की दूसरी सबसे बड़ी जान गंवाने वालों की तादात है.

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प्रदेश की राजधानी जयपुर में 398 नए मरीज बीते दिन मिले हैं जो भी एक दिन में मिलने वाले संक्रमितों का सर्वाधिक रिकॉर्ड है. जोधपुर में 303 नए मरीज मिले हैं. देशभर में 24 घंटों में ठीक होने वालों की संख्या 1528 है जो नए मिलने वाले मरीजों की तुलना में कम है. राजस्थान में रिकवरी रेट 83 फीसद से भी अधिक बताई जा रही है जबकि एक लाख के करीब लोग अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं लेकिन एक्टिव मरीजों की संख्या धीरे धीरे बढ़ रही है. हालात इतने खराब हैं कि प्रदेश का कोई भी जिला कोरोना फ्री नहीं है. काबिले गौर ये भी है कि विश्व स्तर पर तारीफे बटौर चुका गहलोत सरकार का भीलवाड़ा मॉडल वाला भीलवाड़ा प्रदेश का पहला कोरोना फ्री स्टेट बना था. वहां भी इस समय 416 कोरोना मरीज है और 17 की मौत हो चुकी है.

हालात इस हद तक खराब हो चुके हैं कि अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए बैड तक उपलब्ध नहीं हैं. सरकार के दिशा निर्देशों के बावजूद सरकारी दरों पर कोविड-19 की जांच तक नहीं हो रही. प्राइवेट अस्पतालों का कोविड का खर्चा तो एक दिन का 20 से 25 हजार तक थमाया जा रहा है. देश की वित्तमंत्री कोविड-19 को एक्ट आॅफ गॉड बता चुकी है तो स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन सिंह लोगों के गैर जिम्मेदाराना बर्ताव से कोरोना बढ़ने की बात कह चुके हैं.

बात करें राजस्थान की तो यहां भी स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है. राजधानी की ही बात करें तो कोरोना के हब पॉइंट मालवीय नगर, मानसरोवर और आदर्श नगर जैसी जगहों पर जहां हर रोज 50 के करीब मरीज सामने आ रहे हैं. राज्य सरकार प्रतिदिन कोरोना को लेकर बैठक ले रही है और हर दिन नए नए फैसले लिए जा रहे हैं. नो मास्क नो एंट्री, धारा 144 के साथ 181 की सहायता जनता की सुरक्षा के लिए दी गई हैं लेकिन ​इसके बाद भी कोरोना लगातार अपने पैर पसारता जा रहा है.

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कहना गलत न होगा कि केंद्र और राज्य की सरकार अपने स्तर पर जितना हो सके, कर रही है लेकिन कोरोना है कि नियंत्रण में नहीं आ रहा. प्रतिदिन करीब एक लाख लोग अस्पताल से डिस्चार्ज हो रहे हैं लेकिन करीब इतने ही मरीज हर दिन सामने आ रहे हैं जिससे स्थितियां सुधर नहीं रही. हर 15 दिन में मरीजों की संख्या दोगुनी हो रही है. कहना गलत न होगा कि सरकार के किए जा रहे प्रत्यन्न भी कोरोना रोकने और रोकथाम में कारगर नहीं हो पाए रहे. कुछ लोगों के कोरोना संकट को हंसी में लेने और हेल्थ प्रोटोकॉल फोलो न करने का भुगतान भी अन्य लोगों की शामत बन रहा है.

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