Ashok Gehlot on Pm Modi: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर बड़ा हमला किया है. अशोक गेहलोत ने पीएम मोदी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है. पूर्व सीएम गहलोत ने पीएम मोदी के 6 जून 2011 के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि देश के हर नागरिक को यह भाषण सुनना चाहिए, जिसमें नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अगर उनके हाथ बंधे नहीं होते तो वे केंद्र सरकार के खिलाफ लड़ाई छेड़ देते. गहलोत ने इसे अराजकता की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि 20 दिसंबर 2013 को भी मोदी ने कहा था कि जनता केंद्र सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए आक्रामक हो रही है. गेहलोत ने सवाल उठाया कि यूपीए सरकार के खिलाफ ऐसे भड़काऊ बयान देने वाले नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार आज विपक्ष और युवाओं के लोकतांत्रिक आंदोलनों पर अराजकता का आरोप किस आधार पर लगा रहे हैं?
SIR और ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर गहलोत ने भाजपा को घेरा
वही अशोक गहलोत ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि विपक्ष के सवालों और युवाओं की आवाज से भाजपा पूरी तरह बौखलाई हुई है. अपनी गलतियां स्वीकार कर देश के सामने स्थिति स्पष्ट करने के बजाय भाजपा नेता विपक्ष और युवाओं पर हमले करने में जुटे हैं. गहलोत ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन की मांग करना कोई साजिश नहीं, बल्कि देश की जनता का संवैधानिक अधिकार है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को अराजकता का नाम देकर असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है.
अन्ना हजारे से बाबा रामदेव तक, गहलोत ने याद दिलाए पुराने आंदोलन
अपने बयान में अशोक गहलोत ने वर्ष 2014 से पहले यूपीए सरकार के खिलाफ हुए आंदोलनों की याद दिलाते हुए भाजपा की राजनीति पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि उस समय अन्ना हजारे ने लोकपाल को लेकर आंदोलन किया, बाबा रामदेव ने कालेधन के मुद्दे पर सड़कों पर प्रदर्शन किया और 2जी तथा कोलगेट जैसे मामलों को लेकर दिल्ली में लाखों लोगों की भीड़ जुटाई गई. गहलोत ने तंज कसते हुए कहा कि आज न अन्ना हजारे के लोकपाल का पता है और न ही बाबा रामदेव कालेधन पर बोल रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि 2जी और कोलगेट जैसे आरोपों को अदालत ने खारिज कर दिया. गहलोत ने सवाल किया कि 2014 से पहले जब नरेंद्र मोदी और भाजपा नेता सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे थे, तब वह लोकतंत्र था, लेकिन आज विपक्ष वही मांग कर रहा है तो उसे अराजकता क्यों बताया जा रहा है?
सवालों का जवाब देने के बजाय आरोप लगा रही भाजपा- गहलोत
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आगे कहा कि आज देश का युवा अपने रोजगार, भविष्य और अधिकारों को लेकर सवाल पूछ रहा है, लेकिन उसकी आवाज को अराजकता बताकर उसकी चिंताओं का अपमान किया जा रहा है. उन्होंने भाजपा की विचारधारा पर निशाना साधते हुए कहा कि शायद भाजपा यह समझ ही नहीं पा रही कि असहमति का सम्मान करना ही लोकतंत्र का मूल आधार है. गहलोत ने आगे कहा कि विपक्ष जिन मुद्दों पर सवाल उठा रहा है, वही सवाल देश के करोड़ों नागरिकों के मन में भी हैं. जब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जनता का भरोसा डगमगा रहा हो, तब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह देश के सामने स्थिति स्पष्ट करे. लेकिन जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वालों पर ही आरोप मढ़ना भाजपा की घबराहट को दर्शाता है.











