महाराष्ट्र में आक्रामक हुई भाजपा-शिवसेना की ‘दवाब पॉलिटिक्स’

शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में छपे लेखों पर नाराजगी व्यक्त की भाजपा ने, दोनों दल निर्दलीय विधायकों पर फेंक रहे पासा लेकिन सरकार बनाने की चाबी केवल शरद पवार के पास

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पॉलिटॉक्स ब्यूरो. महाराष्ट्र में शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के सरकार गठन में कुर्सी को लेकर खींचतान जारी है. प्रदेश में सरकार बनाने का सबसे बड़ा दावेदार भाजपा-शिवसेना गठबंधन सत्ता की कुर्सी पर अपने अपने प्रतिनिधियों को बिठाने पर अड़ गया है. वैसे तो प्रदेश में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन एकल बहुमत से दूर से गयी. 60 सीटों पर कब्जा कर शिवसेना भी ठाकरे परिवार के चश्मोचिराग आदित्य ठाकरे को आधे समय के लिए मुख्यमंत्री बनाने पर अड़ी हुई है. वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बात से साफ इनकार कर दिया.

शिवसेना जहां सरकार में मुख्यमंत्री का पद चाहती है. वहीं भारतीय जनता पार्टी ने साफ किया है कि महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद देवेंद्र फडणवीस के पास ही रहेगा. इस मसले पर फडणवीस ने कहा कि हमारे पास सिर्फ प्लान एक है, प्लान बी और सी नहीं है.शिवसेना की मांगों पर मेरिट के आधार पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने ये भी कहा कि शिवसेना के मुखपत्र सामना में जो भी छप रहा है, पार्टी उससे नाराज है. लेख में भाजपा के खिलाफ बहुत कुछ लिखा जा रहा है. उन्हें कांग्रेस और एनसीपी के बारे में भी सख्ती से लिखना चाहिए. फडणवीस ने कहा कि सीएम पद को लेकर 50-50 फॉर्मूले को लेकर कोई वादा नहीं हुआ. मैं ही मुख्यमंत्री बनूंगा, इसमें कोई शक नहीं.

बड़ी खबर: BJP ने बदले अपने सुर, शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने का फिर किया दावा

इधर शिवसेना ने अपने तेवर पहले से तीखे करते हुए हरियाणा में दुष्यंत चौटाला का उदाहरण देते हुए कहा, ‘महाराष्ट्र में कोई दुष्यंत नहीं है जिसके पिता जेल में है. हमारे पास भी विकल्प है.’ गौरतलब है कि हरियाणा में जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने प्रदेश भाजपा को समर्थन देते हुए खट्टर सरकार बनाने में अहम रोल निभाया. शपथ ग्रहण वाले दिन पिछले 6 साल से जेल में बंद दुष्यंत चौटाला के पिता अजय सिंह चौटाला को मिली बेल को उनके भाजपा से हाथ मिलाने की शर्त के तौर पर देखा जा रहा है.

इस मसले में चौटाला परिवार का नाम घसीटने पर दुष्यंत चौटाला ने भी नाराजगी व्यक्त की. जेजेपी प्रमुख ने शिवसेना को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि मेरे पिता पिछले 6 साल से जेल में थे. तब शिवसेना को उनकी याद नहीं आयी. पार्टी के भाजपा को समर्थन देने को उनकी पेरोल से जोड़ना गलत है. पिता पर बयान अपमानजनक है.

बता दें, सरकार बनाने के लिए भाजपा को शिवसेना या फिर एनसीपी के सहयोग की आवश्यकता है. ऐसे में शिवसेना ने चुनाव परिणाम के मौके को भुनाते हुए आदित्य ठाकरे के मुख्यमंत्री पद में हिस्सेदारी की मांग तेज कर दी और किसी भी हालात में पीछे हटने को तैयार नहीं. भाजपा अकेले सरकार बना नहीं सकती और एनसीपी प्रमुख शरद पवार का नाम महाराष्ट्र कोपरेटिव बैंक घोटाले में घसीटने के बाद उनके पास जाने में हिचक रही है. ऐसे में शिवसेना कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का मौका ताड़ रही है. यही वजह है कि शिवसेना अपने मुख पत्र में शरद पवार और उनकी लीडरशिप की जमकर तारीफ कर रही है. साथ ही देवेंद्र फडणवीस और प्रदेश भाजपा को जमकर आड़े हाथ ले रही है.

वहीं शिवसेना के साथ सरकार बनाने में पेच फंसने पर भी बीजेपी बैकफुट पर आने को तैयार नहीं है. अब दोनों ही प्रमुख पार्टियां निर्दलीयों को भी अपने अपने पाले में लाने का जी तोड़ प्रयत्न कर रही हैं. ऐसा करके शिवसेना को बीजेपी ये संदेश देने की कोशिश में है कि वह इस चुनाव में किसी तरह से कमजोर नहीं हुई. बीजेपी के अनुसार, पार्टी को 15 निर्दलीयों का भी समर्थन मिला है और छोटे दलों के कुछ विधायक भी संपर्क में हैं. हाल में विनोद अग्रवाल और महेश बालदी सहित दोनों नव निर्वाचित विधायकों ने दो निर्दलीय विधायकों ने देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर अपना समर्थन जताया है. वहीं सोमवार को अहमदनगर जिले के नेवासा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक शंकर राव गड़ाख ने सोमवार को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर उन्हें समर्थन पत्र सौंपा. अब शिवसेना के पास 61 सीटों पर समर्थन है.

अब सारे तीन-पांच करने के बाद भी गौर करने वाली बात ये है कि 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में सत्ता पाने के लिए किसी भी संगठन को 145 विधायकों का समर्थन हासिल होना जरूरी है. भाजपा के पास 103 विधायक हैं. शिवसेना के पास 60, एनसीपी के पास 56 और कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं. निर्दलीय विधायकों की संख्या केवल 25 है. सभी विधायकों का समर्थन के बावजूद भाजपा बहुमत पाने में सक्षम नहीं है और न ही कांग्रेस-शिवसेना-निर्दलीय मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं. ऐसे में सत्ता की चाबी पूरी तरह से शरद पवार के पास आ गयी है. हालांकि पवार पहले ही ये स्पष्ट कर चुके हैं कि वे शिवसेना से गठबंधन की जगह विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे लेकिन शिवसेना के बदले सुर और कांग्रेस का समर्थन मिलकर अगर शरद पवार को एलाइंस में शामिल कर लेते हैं तो लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने का सपना देख रहे देवेंद्र फडणवीस को सिर्फ यही कहना पड़ेगा ‘अंगुर खट्टे हैं’.

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