महागठबंधन में रणनीति जारी, लेकिन समर्थन को लेकर कांग्रेस का रुख साफ नहीं, महागठबंधन में अंदरूनी मतभेद की चर्चा
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने सियासी हलचल तेज कर दी है. दिलचस्प बात यह है कि पांच सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसके चलते एक सीट पर मुकाबला तय माना जा रहा है. इस स्थिति में महागठबंधन अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बनाने में जुटा है. हालांकि गठबंधन की अहम सहयोगी कांग्रेस की चुप्पी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है.
दरअसल, महागठबंधन के प्रमुख दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को समर्थन देने के सवाल पर कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व अब तक खुलकर सामने नहीं आया है. प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बिहार प्रभारी तक ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर कोई स्पष्ट टिप्पणी करने से परहेज किया है.
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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की यह चुप्पी उसकी रणनीतिक विवशता का नतीजा हो सकती है. एक तरफ वह महागठबंधन की एकता बनाए रखना चाहती है, वहीं दूसरी ओर समर्थन को लेकर खुलकर सामने आने से भी बच रही है.
सूत्रों के मुताबिक पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद हैं. कांग्रेस का एक धड़ा राजद के साथ गठबंधन को लेकर असहज माना जाता है, जबकि दूसरा धड़ा इसे राजनीतिक जरूरत और मजबूरी दोनों मानता है.
इसी आंतरिक असहमति के चलते फिलहाल कांग्रेस ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर चलती नजर आ रही है. हालांकि कांग्रेस की यह चुप्पी महागठबंधन के भीतर असहजता भी पैदा कर रही है.
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव के मौजूदा समीकरण एक बार फिर यह साबित करते हैं कि गठबंधन की राजनीति में संख्या बल सबसे बड़ा कारक होता है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस अपना रुख स्पष्ट करती है या नहीं और इसका असर महागठबंधन की रणनीति पर क्या पड़ता है.










