अयोध्या फैसले से नाराज ओवैसी ने RSS और BJP को बताया धोखेबाजी की कला में निपूर्ण, कहा – मुझे मेरी मस्जिद वापस चाहिए

एक अंग्रेजी मैग्जीन को दिए इंटरव्यू में दी अपनी प्रतिक्रिया, कहा - नहीं किया कभी अमित शाह वाली भाषा का इस्तेमाल

1
Asaduddin Owaisi
Asaduddin Owaisi

पॉलिटॉक्स ब्यूरो. समुदाय विशेष के लिए विवादित बयान देने के लिए पहचाने जाने वाले असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने एक और विवादित बयान देते हुए बाबरी मस्जिद को वापिस मांगा है. अयोध्या में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद AIMIM सांसद ओवैसी ने कहा कि उन्हें मस्जिद वापिस चाहिए. सोशल मीडिया पर आउटलुक मैग्जीन में दिए गए इंटरव्यू का लिंक शेयर करते हुए ओवैसी ने लिखा, ‘I want my masjid back’ (मुझे मेरी मस्जिद वापिस चाहिए). इंटरव्यू की हेडलाइन में ओवैसी का बयान लिखा हुआ है, ‘मैं हर उस चीज का विरोध करूंगा जो भारत के संविधान और भारत की विभिन्नता के विरुद्ध होगी.’

दरअसल, आउटलुक मैग्जीन (outlook.com) की रिपोर्टर प्रिथा नायर ने अयोध्या मामले पर असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) का इंटरव्यू लिया और उसे मैग्जीन में प्रकाशित किया.

जानिए उस इंटरव्यू के कुछ अंश

प्रश्न: आपने कहा कि अयोध्या फैसले में कानून पर विश्वास जीता …
ओवैसी (Owaisi) : SC का कहना है कि यह कई लोगों का विश्वास है कि राम का जन्म बाबरी मस्जिद के गुंबद के नीचे हुआ था, जिसे 1992 में ध्वस्त कर दिया गया था इसलिए मुझे लगता है कि यह कानून पर विश्वास की जीत है। दूसरी बात, क्या मस्जिद को ध्वस्त नहीं किया गया था? तीसरा, हमारी लड़ाई जमीन के एक टुकड़े के लिए नहीं थी बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि मेरे कानूनी अधिकारों का एहसास हो. मस्जिद बनाने के लिए किसी मंदिर को नहीं गिराया गया अब मुझे अपनी मस्जिद वापस चाहिए. मेरा सवाल यह है कि अगर बाबरी मस्जिद वैध थी, तो आपराधिक मामला क्यों है और अगर यह अवैध है, तो आडवाणी के खिलाफ मामला क्यों है?

बड़ी खबर: भाजपा-कांग्रेस का प्रदर्शन दिवस, भाजपा ने राहुल गांधी के खिलाफ दिया धरना तो कांग्रेस ने फूंका अमित शाह का पुतला

प्रश्न: अयोध्या के फैसले पर आपकी प्रतिक्रिया ने विवाद को जन्म दिया है और इस संबंध में आपके खिलाफ एक मामला दायर किया गया.
ओवैसी: समस्या यह है कि जब आप फैसले से असहमत होते हैं तो आपको सांप्रदायिक, विभाजनकारी और राष्ट्रविरोधी घोषित किया जाता है. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि यह मेरे डीएनए में भारत के संविधान और बहुलवाद के विपरीत प्रमुख विचारों का विरोध करने के लिए है. फैसले का अधिकांश मुस्लिम संगठनों ने स्वागत किया। हालांकि समुदाय के एक वर्ग को लगता है कि उन्हें थोड़े से विकल्प के साथ छोड़ दिया गया था फैसले को स्वीकार करने के लिए. मैं उन लोगों के लिए नहीं बोल सकता जो चुप हैं. मैं मोदी द्वारा नियंत्रित एक ऑर्केस्ट्रा पार्टी से संबंधित नहीं हूं. जो भी गीत मुझे दिया जाता है उसे गाने के लिए मैं यहां नहीं हूं। मेरे लिए संविधान सर्वोच्च है और मुझे किसी भी SC फैसले से सम्मानपूर्वक असहमत होने का अधिकार देता है. मैं संविधान के खिलाफ किसी भी चीज का विरोध करूंगा.

प्रश्न: फैसले के राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थ क्या हैं?
ओवैसी: भाजपा निश्चित रूप से हमें हिंदू राष्ट्र के रास्ते पर ले जाएगी. यह अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों, देश के दूसरे दर्जे के नागरिकों को बनाने की पूरी कोशिश कर रही है. अनुच्छेद 370 को असंवैधानिक तरीके से निरस्त किया. नागरिकता संशोधन विधेयक भारतीय मुसलमानों को नीचा दिखाने के कदम के अलावा और कुछ नहीं है. क्या बाबरी मस्जिद की रक्षा करना सरकार का संवैधानिक कर्तव्य नहीं है? यह विडंबना है कि जिन लोगों ने मस्जिद को ध्वस्त किया, वे वहां एक मंदिर बनाने जा रहे हैं. लोगों को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए, यह चुप्पी अच्छी नहीं है.

प्रश्न: संघ ने कहा कि उसने वाराणसी और मथुरा में मंदिर आंदोलन के लिए जोर नहीं दिया …
ओवैसी: आरएसएस और भाजपा ने धोखे की कला में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. मैं उनका वचन कैसे ले सकता हूं? वीएचपी की स्थापना 1960 के दशक में की गई थी, तब राम मंदिर का कोई उल्लेख नहीं था. उन्होंने 70 के दशक के अंत में इसके बारे में बात करना शुरू किया. काशी मस्जिद के बारे में आरएसएस का तर्क है कि मस्जिद के नीचे एक सुरंग है जो उनकी है. संघ परिवार का यह भी दावा है कि वे लखनऊ में टाइल वाली मस्जिद के बाहर की जमीन चाहते हैं. अगर आरएसएस कहता है कि काशी और मथुरा में मंदिर आंदोलन उनके एजेंडे में नहीं हैं तो उन्हें अदालतों में चल रहे मामलों को वापस लेना चाहिए. मैंने कभी भी अमित शाह वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं किया.

बता दें, 9 नवंबर को अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असंतुष्टि जाहिर की. असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि वे फैसले से संतुष्ट नहीं हैं. ओवैसी ने साथ ही मुस्लिम पक्ष को उस 5 एकड़ जमीन को लेने से भी इनकार कर दिया था जिसके बारे में कोर्ट ने कहा था कि मस्जिद बनाने के लिए अलग जगह पर 5 एकड़ जमीन दी जाएगी. ओवैसी ने कहा था कि मस्जिद के लिए हम खैरात की जमीन नहीं ले सकते. बता दें, अयोध्या जमीन विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन पर राम मंदिर बनाने और मस्जिद के लिए अन्यत्र 5 एकत्र जमीन देने का फैसला सुनाया.

1 टिप्पणी

Leave a Reply