Bihar Politics। Patna। बिहार की राजनीति में जारी सियासी घटनाक्रम इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय है. पहले BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान नितिन नबीन (Nitin Nabin) को मिली और फिर 10वीं बार बिहार के सीएम बने नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को राज्यसभा चुनाव में उतार कर ‘सत्ता हस्तांतरण’ की पटकथा लिख दी गई. अब पूरा देश टकटकी लगाये बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम को देख रहा है और सबके मन में एक ही सवाल है कि बिहार का अगला सीएम कौन होगा ?
केसी त्यागी ने दिया JDU को झटका
उधर, बिहार की राजनीति नीतीश कुमार के साथ लंबा सफर तय करने वाले वरिष्ठ नेता केसी त्यागी (K.C.Tyagi) ने JDU छोड़ने का ऐलान कर राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है. बिहार का अगला सीएम कौन होगा ? इस सवाल के साथ ही अब ये सवाल लोगों के जेहन में है कि केसी त्यागी का अगला कदम क्या होगा ? JDU से अलग हुए केसी त्यागी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते हैं. उन्होंने पार्टी की सदस्यता का नवीनीकरण नहीं करवाकर एग्जिट का सम्मानजनक रास्ता चुना.
राज्यसभा सदस्य के तौर पर नीतीश कुमार दिल्ली जा रहे हैं और आधी सदी तक नीतीश के साथ रही केसी त्यागी ने भी एक अलग राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया है. 22 मार्च को केसी त्यागी दिल्ली में समान विचारधारा के नेताओं के साथ एक अहम बैठक करेंगे और आगे की रणनीति का फैसला इसी बैठक में होगा. केसी त्यागी ने पार्टी से अलग होते हुए नीतीश कुमार के प्रति सम्मान व्यक्ति किया और कहा कि पार्टी से उनकी दूरी का मतलब उनके निजी रिश्तों में कोई दूरी आना नहीं है.
केसी त्यागी दिल्ली में करेंगे फैसला
दिल्ली में आयोजित बैठक में केसी त्यागी मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे. माना जा रहा है इस बैठक के बाद केसी त्यागी नई पार्टी या अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं. केसी त्यागी ने यह भी कहा कि वे चौधरी चरण सिंह, डॉ. राम मनोहर लोहिया और कर्पूरी ठाकुर जैसे समाजवादी नेताओं की विचारधाराओं से प्रेरणा लेते रहेंगे. उन्होंने किसानों, गरीबों और समाज के वंचित वर्गों के हितों के लिए काम करते रहने का संकल्प लिया.
केसी त्यागी दिल्ली की राजनीति में JDU का सबसे जाना-पहचाना चेहरा थे. राष्ट्रीय मीडिया के साथ उनके मजबूत तालमेल और साथ ही विपक्षी नेताओं के साथ उनके सौहार्दपूर्ण संबंधों ने नीतीश कुमार के लिए एक अहम ब्रिज का काम किया. ऐसे समय में जब नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका का विस्तार करना चाह रहे हैं, त्यागी जैसे अनुभवी रणनीतिकार का पार्टी छोड़ना एक बड़े नुकसान के तौर पर देखा जा रहा है.
कई नेताओं के बिगड़े समीकरण
दरअसल, नीतीश कुमार के बिहार छोड़ने से प्रदेश में कई बड़े नेताओं के समीकरण गड़बड़ा गये हैं. बिहार में हुए घटनाक्रम को लेकर लोग JDU में BJP के हस्तक्षेप से जोड़कर देख रहे हैं और पुराने नेताओं का आशंका है कि उन्हें दरकिनार कर दिया जाएगा. नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने के मुद्दे को लेकर विपक्ष ने भी खूब शोर मचाया, लेकिन खुद नीतीश कुमार ने बयान दिया कि वे खुद अपनी मर्जी से विधानसभा जा रहे हैं. वहीं, JDU और BJP के कई नेताओं ने भी मीडिया में बयान दिये कि कोई भी नीतीश कुमार के इच्छा के खिलाफ उनसे कोई फैसला नहीं करवा सकता.
3 सीटों पर 3 राष्ट्रीय पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष
दिलचस्प है कि बिहार से खाली हुई 5 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हुए. जिनमें से 3 सीटों पर 3 तीन पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यसभा पहुंचे हैं. बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं. इन तीनों के अलावा एनडीए के दो अन्य उम्मीदवार जो राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं वो बीजेपी के शिवेश राम और जेडीयू के रामनाथ ठाकुर.
बिहार में चल रहे घटनाक्रम को लेकर लोगों में खासी बेचैनी है. नीतीश कुमार के फैसले से उनके समर्थक भी हैरान है, नीतीश कुमार राज्यसभा जाने के फैसले पर कुछ लोगों ने तो यह तक कह दिया- ‘ ये तो डीजीपी से सिपाही बन जाने जैसा है’.










