भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) का ब्याज दरों पर आया बड़ा फैसला, RBI ने महंगाई और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच बड़ा फैसला लेते हुए करीब चार साल बाद पहली बार रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे कर दिया 5.50% , RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में सभी छह सदस्यों ने दर बढ़ाने के पक्ष में दिया फैसला, RBI के इस कदम का सीधा असर कर्ज लेने वाले लोगों पर पड़ेगा, खासकर होम लोन, ऑटो लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की ब्याज दरें बढ़ने से EMI का बढ़ सकता है बोझ, RBI ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब महंगाई लगातार दबाव बना रही है और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई है तेजी, अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82% तक पहुंच गई, जो RBI के 4% लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने रही ऊपर, हालांकि, देश की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है और अप्रैल-जून तिमाही में GDP ग्रोथ दर्ज की गई 7.8%, वही गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी कहा- महंगाई का आउटलुक अब पहले जैसा अनुकूल नहीं है, रेपो रेट बढ़ने के बाद नए कर्ज महंगे हो सकते हैं और मौजूदा फ्लोटिंग रेट लोन की EMI या लोन की अवधि बढ़ सकती है, जबकि फिक्स्ड रेट वाले मौजूदा लोन पर आमतौर पर तत्काल सीधा असर नहीं पड़ता
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