‘मेरी हवा निकल गई, मुझे लगा आज तो मैं गया, मेरे पैर कांपने लगे, तभी…’- राहुल गांधी

लोकसभा में महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सीटों के परिसीमन से जुड़े तीन संशोधित बिलों पर आज भी हुई चर्चा, विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मुद्दे पर रखी अपनी बात, अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा- मुझे बोलना का मौका देने के लिए शुक्रिया, हम सभी इस कमरे में बैठे सभी लोग जानते हैं कि महिलाओं के मुद्दे क्या हैं, घर में मां और बहनें और पत्नियां हैं, मैं जब छोटा था हम डरते थे बाहर गार्डन में जाने से, एक दिन मेरी दादी मुझे हाथ पकड़कर रात मे बगीचे में लेकर आई, उन्होंने कहा अब तुम यहां से नहीं हिलोगे, फिर वो चली गई, मेरी हवा निकल गई, मुझे लगा आज तो मैं गया, वह चली गई मैं वहां दो तीन मिनट रहा, ऐसा लगा कि घंटो बीत गए, मेरे पैर कांपने लगे, तभी मेरी दादी मां आईं उन्होंने कहा तुम डर क्यों रहे हो, राहुल ने कहा- तब उन्होंने कहां तुम सिर्फ दिमाग और सोच से डर रहे हो, फिर उन्होंने कहा कि तुम्हें पता है अंधेरे से नहीं डरना चाहिए क्योंकि सच अंधेरे में रहता है, तुमको उसके अंदर जाने से डर लगता है क्योंकि तुम सच नहीं जानना चाहते, बाद में जब मैं बड़ा हुआ तो अहसास हुआ कि वो क्या कहना चाहती थी, वो था सत्यम शिवम सुदंरम, जब तुम अंधेरे में जाओगे जो तुम्हें सच पता चलेगा, बाद में जब मैं बगीचे में जाता था तो वो मुझे सत्य अहिंसा की बातें बताती थीं, हालांकि कभी कभी सच कड़वा होता है लेकिन उसकी चिंता मत करो, उसी तरह आज सदन में कहूंगा कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, यह उन्हें सशक्त नहीं बनाएगा, यह सिर्फ भारत के निर्वाचन क्षेत्र के नक्शे को बदलने के लिए है, यह शेमफुल कानून है, पूरा विपक्ष कह रहा है कि पुराना कानून लाओ हम समर्थन देंगे, लेकिन इस वाले को नहीं, राहुल गांधी ने आगे कहा- यह असली सच है जो में बता रहा हूं, भारत के इतिहास में सबसे कड़वा सच है, मैं इसके बारे में सब जानता हूं, यह ओबीसी, दलित वर्गों के लिए क्रूरता वाला बिल है, सभी जानते हैं कि ओबीसी, दलित और महिलाओं के साथ क्या होता है

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